NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश : एक बार फिर हारी भाजपा
मध्य प्रदेश विधानसभा सत्र के दरम्यान भाजपा हर मोर्चे पर कमजोर साबित हुई। ऐसे में महज तीन महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव उसके लिए ज्यादा मुश्किल भरे होंगे।
राजु कुमार
11 Jan 2019
मध्य प्रदेश विधानसभा
Image Courtesy: Indian Express

मध्य प्रदेश में 15वीं विधानसभा के पहले सत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जबर्दस्त हार मिली है। उम्मीद यह जताई जा रही थी कि भाजपा एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी और सदन में कांग्रेस को कमजोर साबित कर देगी। लेकिन भाजपा अपनी ही बनाई रणनीति में उलझ गई और कांग्रेस को कमजोर साबित करने के बजाय उसे मजबूत बना दिया। मध्य प्रदेश में पिछले तीन दशक से विधानसभा अध्यक्ष सत्ता पक्ष से और उपाध्यक्ष विपक्ष से बनते आए हैं, लेकिन इस बार यह परंपरा टूट गई और विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों ही पद पर कांग्रेस के सदस्य काबिज हो गए।

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए हुए चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। विधानसभा में इस प्रदर्शन के बाद प्रदेश भाजपा में गुटबाजी भी बढ़ेगी और जो भाजपा पिछले 15 साल से मजबूत और अपराजेय दिख रही थी, उसे आगामी लोकसभा में खराब प्रदर्शन का भय सताने लगा है।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली हार को भाजपा पचा नहीं पा रही है। अलग-अलग तरीके से वह इस हार को नकार रही है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बार-बार यह कह रहे हैं कि उन्हें कांग्रेस से ज्यादा वोट मिले हैं, लेकिन वे नंबर में पिछड़ गए। इसके बाद भाजपा ने यह कहना शुरू कर दिया कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की अल्पमत की सरकार है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान से अलग मध्य प्रदेश में भाजपा अंतिम समय तक मुकाबले में थी और कांग्रेस से उसे महज 5 सीटें ही कम मिली है। ऐसे में भाजपा की लगातार कोशिश रही है कि बहुमत से दो सीट पीछे रह गई कांग्रेस को किसी तरह से पटखनी दी जाए। चूंकि मंत्रिमंडल के गठन में कांग्रेस के कई विधायकों के साथ-साथ बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों ने नाखुशी जाहिर की थी। इससे भाजपा नेतृत्व उत्साहित हो गया और उसे लगा कि असंतुष्टों को अपनी ओर मिलाकर कांग्रेस को विधानसभा में मात दी जा सकती है। 

कांग्रेस परंपरा को निभाते हुए विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को देना चाहती थी और उसने इसके लिए किसी का नाम भी प्रस्तावित नहीं किया था। लेकिन सत्ता की उम्मीद पाले भाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। निःसंदेह भाजपा के इस कदम से कांग्रेस में बेचैनी बढ़ गई और उसे अपने असंतुष्ट विधायकों पर नजर रखनी पड़ी। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने बताया कि भाजपा हॉर्स ट्रेडिंग करना चाह रही थी और उसने कई विधायकों को 50 से 100 करोड़ रुपये और मंत्री पद का ऑफर दिया था। कांग्रेस विधायक ने भी कहा कि उन्हें ऑफर मिला था। यद्यपि इसे भाजपा ने नकार दिया, लेकिन कांग्रेसी विधायकों ने यह आरोप खुलकर लगाए। विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन में प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने जब एनपी प्रजापति को लेकर निर्वाचन शुरू किया, तो विपक्ष हंगामा करने लगा। विपक्ष के बहिर्गमन के बीच अध्यक्ष का चुनाव हुआ और एनपी प्रजापति के पक्ष में 120 वोट मिले। विपक्ष ने विधानसभा से राजभवन तक का पैदल मार्च किया। उसने राज्यपाल के अभिभाषण का भी बहिष्कार किया।

प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने बताया कि उन्होंने मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी नियम की धारा 7 (4) के तहत अध्यक्ष की निर्वाचान प्रक्रिया पूरी की। विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए भाजपा द्वारा उम्मीदवार खड़ा किए जाने के बाद कांग्रेस ने उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को देने के बजाय इस पर भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि विपक्ष ने परंपरा तोड़ी है, इसलिए हमने उपाध्यक्ष के लिए उम्मीदवार के रूप में हिना कांवरे को खडा किया। अंततः उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

विधानसभा में इस तरह हार जाने के बाद भाजपा मनोवैज्ञानिक रूप से भी कांग्रेस पर हावी नहीं रह पाएगी। यद्यपि कई भाजपा नेता चाहते थे कि संख्या में कम होने के कारण अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार नहीं उतारना चाहिए, लेकिन कुछ नेताओं के अति उत्साह ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया। हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों के बीच भाजपा मजबूत विपक्ष दिखने के बजाय और कमजोर साबित हुई और प्रदेश में उसकी छवि पर नाकारात्मक असर पड़ा है। ऐसे में महज तीन महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव उसके लिए ज्यादा मुश्किल भरे होंगे।


बाकी खबरें

  • fertilizer
    तारिक अनवर
    उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार
    04 Feb 2022
    राज्य के कई जिलों के किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा संचालित केंद्रों पर डीएपी और उर्वरकों की "बनावटी" की कमी की वजह से इन्हें कालाबाजार से उच्च दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5 लाख के पार
    04 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,49,394 नए मामले सामने आए और 1,072 मरीज़ों की मौत हुई है। देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 55 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • SKM
    रौनक छाबड़ा
    यूपी चुनाव से पहले एसकेएम की मतदाताओं से अपील: 'चुनाव में बीजेपी को सबक़ सिखायें'
    04 Feb 2022
    एसकेएम ने गुरुवार को अपने 'मिशन यूपी' अभियान को फिर से शुरू करने का ऐलान करते हुए कहा कि 57 किसान संगठनों ने मतदाताओं से आगामी यूपी चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देने का आग्रह किया है।
  • unemployment
    अजय कुमार
    क्या बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ने से बेरोज़गारी दूर हो जाएगी?
    03 Feb 2022
    बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ जाने से क्या बेरोज़गारी का अंत हो जाएगा या ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बात कह रही है?
  • farmers SKM
    रवि कौशल
    कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा
    03 Feb 2022
    मोर्चा ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार भी किसानों की आय को दुगुना किये जाने का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि कई वर्षों के बाद भी वे इस परिणाम को हासिल कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License