NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश : एक मंत्री को तीन विधायकों पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी!
कर्नाटक के राजनीतिक संकट से सबक़ लेते हुए कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में अपने विधायकों की निगरानी बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कथित तौर पर प्रत्येक मंत्री को तीन विधायकों और उनके सहयोगियों पर निगरानी रखने की ज़िम्मेदारी दी है।
काशिफ़ काकवी
12 Jul 2019
Translated by महेश कुमार
मुख्यमंत्री कमलनाथ

कर्नाटक के राजनीतिक संकट के मद्देनज़र, मध्य प्रदेश में कांग्रेस अपने विधायकों पर कड़ी नज़र रख रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता पार्टी के विधायकों के साथ बैठकें कर रहे हैं, इन बैठकों के ज़रिये उन्हें जनता का विश्वास बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

मानसून सत्र की शुरुआत से पहले रविवार को, मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों के साथ कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक की, जिसमें उन्होने एकजुट रहने का आग्रह किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, सीएलपी की बैठक में, सीएम कमलनाथ ने प्रत्येक मंत्री को तीन विधायकों की ज़िम्मेदारी दी, ताकि वे पार्टी के तीन विधायकों और उनके सहयोगियों पर निगरानी रख सकें।

बाद में, संसद के ऊपरी सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के दिग्गज नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद- जो विधायकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए भोपाल आए थे, उन्होंने निर्वाचित विधायकों को मतदाताओं के विश्वास को धोखा न देने की सलाह दी क्योंकि उन्हें जनता ने पार्टी के चुनाव निशान पर एक प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है।

कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति का उल्लेख करते हुए, आज़ाद ने कांग्रेस विधायकों से कहा, “मैंने संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में यह कहा था। मणिपुर में आपने (भाजपा) हमारी सरकार को उलट दिया। आप हमारे विधायकों को गुजरात, आंध्र प्रदेश, बंगाल में और निश्चित रूप से कर्नाटक में अपने खेमे में ले जा रहे हैं। लोकतंत्र के बारे में भरोसा कहां है? बिना भरोसे के कोई लोकतंत्र बच नहीं सकता है। एक विधायक को उस पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुना जाता है और यदि वह पक्ष बदलता है, तो यह विश्वासघात है। "

इससे पहले, उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विधायकों को संबोधित करते हुए, आज़ाद ने विधायकों से कहा कि वे अपने आपको इस तरह से संचालित करें ताकि मतदाताओं का विश्वास और सम्मान दोनों ही बरक़रार रहे। 230 सीट वाली विधानसभा में, मध्य प्रदेश में इस बार पहली दफ़ा जीतने वाले विधायकों की संख्या 90 है।

कर्नाटक में, कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) (जेडीएस) के साथ गठबंधन की सरकार, बहुत ही बुरे दौर से गुज़र रही है क्योंकि उसके 13 विधायकों ने स्पीकर को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। यह यहीं समाप्त नहीं होता है, इसके अगले दिन, सभी कैबिनेट मंत्रियों ने भी अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया और कुछ स्वतंत्र विधायकों ने भी ऐसा ही किया, और विद्रोही समूह में शामिल हो गए। वर्तमान में, यह कहना उचित होगा कि कर्नाटक राजनीतिक उथल-पुथल के साए में है।

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के लिए गहराते राजनीतिक संकट का उल्लेख करते हुए, विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने सोमवार को कहा कि कमलनाथ सरकार 'पहले दिन से ही ख़तरे के क्षेत्र में थी।' “कांग्रेस विधायकों पर कड़ी नज़र रख रही है क्योंकि वे उन पर भरोसा नहीं करते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो फिर सीएम नाथ ने मंत्रियों को विधायकों पर कड़ी नज़र रखने का आदेश क्यों दिया। बीजेपी ने अपने 15 साल के शासन के दौरान अपने मंत्रियों को ऐसा कोई काम नहीं दिया था।”

भार्गव ने कहा, "इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि कितना लालच देने और उन्हें लुभाने की पेशकश की जाती है, यह ज़्यादा लंबे समय तक चलने वाला नहीं है और मध्य प्रदेश कर्नाटक के बाद क़तार में है।"

भार्गव के दावे का खंडन करते हुए, राज्य कांग्रेस के प्रवक्ता और सीएम के मीडिया संयोजक, नरेंद्र सलूजा ने कहा, “भाजपा शायद कर्नाटक में विधायकों की ख़रीद फ़रोख्त में कामयाब हो जाए। लेकिन वे मध्य प्रदेश में सफ़ल नहीं होंगे। भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है और वह बार-बार झूठे दावे कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हम किसी भी समय विश्वास मत हासिल कर सकते हैं।"

वर्तमान में, मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास 115 विधायक हैं जिनमें एक निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल हैं, जो राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री पद पाने के बाद पार्टी में शामिल हुए थे। इसका मतलब है, भव्य पुरानी पार्टी सदन में पूर्ण बहुमत से केवल एक ही कम है।

झाबुआ के भाजपा विधायक के इस्तीफ़े के बाद, जिन्होंने हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव में झाबुआ संसदीय सीट का चुनाव जीता है, 230 सीट वाली विधानसभा अब 229 की हो गई है। यह 115 विधायकों के साथ, कांग्रेस राज्य में बहुमत में है जब तक कि झाबुआ उपचुनाव नहीं होता है।

अगर कांग्रेस झाबुआ उप-चुनाव सीट जीत जाती है तो वह बहुमत में आ जाएगी

झाबुआ उपचुनाव कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, न केवल लोकसभा चुनाव में मिली अत्यधिक निराशाजनक हार के प्रभाव को दूर करने के लिए, बल्कि एक अससंतुलित राज्य विधानसभा में इसकी संख्या में वृद्धि करने के लिए भी ज़रूरी है।

चुनाव आयोग (ईसी) ने अभी झाबुआ उपचुनाव की घोषणा नहीं की है, लेकिन झाबुआ में दो वरिष्ठ कांग्रेस नेता - कांतिलाल भूरिया और ज़ेवियर मेधा के बीच टिकट पाने के लिए लड़ाई शुरू हो गई है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों के परिणामों से पता चलता है कि कांग्रेस आदिवासी बहुल झाबुआ सीट को जीत सकती है, अगर भूरिया और मेधा शिविर एक साथ आ जाते हैं या कम से कम आपस में तोड़फोड़ नहीं करते हैं।

भूरिया और ज़ेवियर मेधा दोनों ने टिकट लेने के लिए अपने सभी दावों को दांव पर लगा दिया है और अब, पार्टी नेतृत्व को उनमें से एक को नाम वापस लेने के लिए राज़ी करना है, क्योंकि अगर दोनों टिकट मांगना जारी रखते हैं और टिकट से इनकार करने पर पार्टी में तोड़फोड़ करते हैं, तो कांग्रेस की जीत की संभावना उसकी पारंपरिक सीट पर कम हो जाएगी- जैसा कि 2013 और 2018 में हुआ था।

MP
Congress
BJP
karnataka
Political Turmoil
Bhabua By-election
Medha Xavier
Kantilal Bhuria
Kamal Nath

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Oxfam report
    अब्दुल रहमान
    सरकारों द्वारा होने वाली आर्थिक हिंसा की तरह है बढ़ती असमानता- ऑक्सफ़ैम रिपोर्ट
    20 Jan 2022
    रिपोर्ट अपने दावे में कहती है कि ग़लत सरकारी नीतियों के चलते असमानता में भारी वृद्धि हुई है। शुरुआती 10 अमीर पुरुषों ने, मार्च 2020 में महामारी की शुरुआत के बाद से नवंबर 2021 तक अपनी संपत्ति दोगुनी कर…
  • election commission
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव आयोग की विश्वसनीयता ख़त्म होती जा रही है
    19 Jan 2022
    चुनाव आयोग की जो विश्वसनीयता और जो एक मज़बूती उनके नियमों में होनी चाहिए, वह इस सरकार यानी मोदी सरकार में कमज़ोर नज़र आ रही है।
  • round up
    न्यूज़क्लिक टीम
    2021 में बढ़ी आर्थिक असमानता, लगातार बढ़ते कोरोना मामले और अन्य ख़बरें
    19 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे Oxfam की हालिया रिपोर्ट, कोरोना के बढ़ते मामले और अन्य ख़बरों पर।
  • rbi
    अजय कुमार
    RBI कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे: अर्थव्यवस्था से टूटता उपभोक्ताओं का भरोसा
    19 Jan 2022
    आरबीआई ने जब कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे में लोगों से यह पूछा कि भारत की अर्थव्यवस्था का हाल पहले से बेहतर है या पहले से खराब? तो खराब बताने वालों की संख्या, बेहतर बताने वालों से 57% अधिक निकली। 
  • akhilesh
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश गरमाया! अखिलेश भी लड़ेंगे चुनाव!
    19 Jan 2022
    बोल की लब आज़ाद हैं तेरे के इस अंक में अभिसार शर्मा अखिलेश यादव के चुनाव लड़ने के फैसले पर बात कर रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License