NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश : सरकार कोई बनाए लेकिन इतना तय है कि बीजेपी हार गई है
अंतिम परिणाम का इंतजार किए बिना कहा जा सकता है कि यहां भाजपा की भारी हार हुई है और उसे मध्यप्रदेश के मतदाताओं ने पसंद नहीं किया।
राजु कुमार
11 Dec 2018
SHIVRAJ singh
Image Courtesy: Hindustan Times

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिली। लेकिन अंतिम परिणाम का इंतजार किए बिना कहा जा सकता है कि यहां भाजपा की भारी हार हुई है और उसे मध्यप्रदेश के मतदाताओं ने पसंद नहीं किया। पिछले 15 सालों से सत्ता पर काबिज भाजपा को कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दी, लेकिन विंध्य में आशातीत सफलता नहीं मिलने से कांग्रेस संघर्ष करती हुई नजर आई।

2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को 4 और निर्दलीय को 3 सीटें हासिल हुई थी। तीन बार से सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए इस बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने ‘‘अबकी बार, दो सौ पार’’ का नारा दिया था। इस नारे ने राज्य के भाजपा नेताओं को दबाव में ला दिया, क्योंकि तीन बार से सत्ता पर काबिज पार्टी के लिए 230 सीटों में से 200 सीटें लाना बड़बोलापन से ज्यादा कुछ नहीं लगा। फिर भी यदि इस नजरिये देखा जाए, तो भाजपा को अपेक्षा से लगभग 90 सीटें कम मिली है। यदि वास्तविक आंकड़ों को देखा जाए, तो पिछली बार की तुलना में भाजपा को 55 से ज्यादा सीटों का नुकसान झेलना पड़ा है। मतों का प्रतिशत देखा जाए, तो पिछली बार कांग्रेस को लगभग 36 फीसदी और भाजपा को लगभग 45 फीसदी वोट मिले थे। इस बार कांग्रेस को 6 फीसदी से ज्यादा वोट में बढ़ोतरी हुई है और भाजपा को लगभग 3 फीसदी वोटों का नुकसान हुआ है। बसपा के वोट प्रतिशत में लगभग 2 फीसदी कमी आई है। इस आधार पर देखा जाए, तो नए मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष मतदान किया होगा।

निमाड़ में इस बार लगभग 80 फीसदी वोट पड़े थे। इस क्षेत्र में पहले कांग्रेस का कब्जा था। लेकिन मंदसौर में किसानों के प्रदर्शन पर हुए गोली चलाने की घटना के बाद यहां के किसानों में आक्रोश था। इस बार यहां कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ा है। इसका अर्थ है कि किसानों ने कांग्रेस के पक्ष में बंपर वोटिंग की है। मालवा क्षेत्र भाजपा का गढ़ रहा है। सबकी इस पर नजर थी और सत्ता की चाबी वाला क्षेत्र इसे ही माना जा रहा था। इस क्षेत्र को भाजपा नहीं बचा पाई। यदि इस क्षेत्र को भाजपा बचा लेती, तो उसे स्पष्ट बहुमत से रोकना आसान नहीं होता। कांग्रेस ने इस क्षेत्र में जबर्दस्त बढ़त बनाई और 25 से ज्यादा सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। इस क्षेत्र के जनजातीय इलाके में कांग्रेस के दिग्गज नेता कांतिलाल भूरिया का प्रभाव रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले चंबल क्षेत्र में कांग्रेस ने एक तरह से भाजपा का सफाया कर दिया है। यहां भाजपा को दर्जन भर से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ है। महाकौशल यानी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का क्षेत्र। इस क्षेत्र से भी कांग्रेस को बड़ा लाभ मिला है। पिछली बार की तुलना में कांग्रेस को एक दर्जन से अधिक सीटों का फायदा महाकौशल में हुआ है।

कांग्रेस को विंध्य क्षेत्र से बड़ी उम्मीद थी। यद्यपि पिछली बार की तुलना में कांग्रेस को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन भाजपा को यहां ज्यादा फायदा हुआ और इसी कारण वह प्रदेश स्तर पर कांग्रेस को टक्कर देने की स्थिति में आ गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह से कांग्रेस को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन वे अपनी सीट के लिए भी संघर्ष करते नजर आए। बुंदेलखंड से भाजपा के कई दिग्गज नेता आते हैं, लेकिन इस क्षेत्र में भाजपा पिछड़ गई। बुंदेलखंड में भी कांग्रेस को पहले की तुलना में आधा दर्जन सीटों का लाभ मिला है।

मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी ने 208 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन दो-तीन सीटों पर ही वह प्रतिद्वंद्वी को टक्कर दे पाई। यद्यपि पूरे प्रदेश में उसे लगभग ढाई लाख वोट हासिल हुए। बसपा और सपा को इस बार ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन उन्हें उम्मीद के अनुरूप सफलता नहीं मिली।

इन चुनाव परिणामों के बाद नेताओं के सुर बदल गए हैं। एक ओर भाजपा जहां चुनाव से पूर्व इसे आगामी लोकसभा चुनाव से जोड़कर देख रही थी, तो अब वह कहने लगी है कि ये चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ा गया। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित भाजपा के लगभग सभी राष्ट्रीय नेता केन्द्र की योजनाओं का ही जिक्र अपने भाषणों में कर रहे थे। यद्यपि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसका बहुत ही गहरा असर आगामी लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा और भाजपा की राह आसान नहीं होगी।

madhya pradesh elections
Assembly elections 2018
Shivraj Singh Chauhan
BJP
Narendra modi
kamalnath
Digvijay Singh

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • srilanka
    न्यूज़क्लिक टीम
    श्रीलंका: निर्णायक मोड़ पर पहुंचा बर्बादी और तानाशाही से निजात पाने का संघर्ष
    10 May 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने श्रीलंका में तानाशाह राजपक्षे सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन पर बात की श्रीलंका के मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. शिवाप्रगासम और न्यूज़क्लिक के प्रधान…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया
    10 May 2022
    गाँव के बाहरी हिस्से में रहने वाले इसी मुस्लिम परिवार के घर हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा में आगज़नी हुई थी। परिवार का कहना है कि हिन्दू पक्ष के लोग घर से सामने से निकलते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाते…
  • असद रिज़वी
    लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी
    10 May 2022
    एक निजी वेब पोर्टल पर काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में एबीवीपी ने मंगलवार को प्रोफ़ेसर रविकांत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और…
  • अजय कुमार
    मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर
    10 May 2022
    साल 2013 में डॉलर के मुक़ाबले रूपये गिरकर 68 रूपये प्रति डॉलर हो गया था। भाजपा की तरफ से बयान आया कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया तभी मज़बूत होगा जब देश में मज़बूत नेता आएगा।
  • अनीस ज़रगर
    श्रीनगर के बाहरी इलाक़ों में शराब की दुकान खुलने का व्यापक विरोध
    10 May 2022
    राजनीतिक पार्टियों ने इस क़दम को “पर्यटन की आड़ में" और "नुकसान पहुँचाने वाला" क़दम बताया है। इसे बंद करने की मांग की जा रही है क्योंकि दुकान ऐसे इलाक़े में जहाँ पर्यटन की कोई जगह नहीं है बल्कि एक स्कूल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License