NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मध्य प्रदेशः भावांतर भुगतान योजना के बावजूद किसानों को भारी नुकसान
विभिन्न मंडियों में पिछले वर्षों की क़ीमतों की तुलना में फसल की दरों में 60 से 70 प्रतिशत की कमी आई है।
काशिफ काकवी
25 Oct 2018
MP farmers

मध्यप्रदेश सरकार ने लगातार पांचवीं बार केंद्र सरकार से कृषि कर्मण पुरस्कार जीता है लेकिन प्रदेश के मालवा क्षेत्र के किसान कथित किसान विरोधी नीतियों के कारण सरकार से बेहद नाराज़ हैं।

प्रदेश के मालवा क्षेत्र जिनमें मंदसौर, नीमच, रतलाम, झाबुआ, आगर, उज्जैन और आसपास के जिले शामिल हैंI यहां के किसान लहसुन, सोयाबीन, दूध, प्याज, राजमा, उरद, मक्का और अफीम की गिरती क़ीमत से परेशान हैं।

इस क्षेत्र के विभिन्न मंडियों (बाजारों) में पिछले वर्षों की क़ीमतों की तुलना में अनाज की दरों में 60 से 70 प्रतिशत की कमी आई है। इस साल प्याज और लहसुन की क़ीमतों में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।

लहसुन 200 से 3,225 रुपए, प्याज 265 से 9 41 रुपए और राजमा 2,000 रुपए से 3,500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा जा रहा है, जबकि अफीम 1,500 से 3,000 रुपए प्रति किलो बिक रहा है।

MP onion farmers' loss 1.jpg

मध्य प्रदेश के मंडी बोर्ड के अनुसार राज्य में 520 मंडियां हैं जिनमें से 246 मुख्य थोक मंडी हैं और 274 उप-मंडी हैं। इनमें से 35 प्रतिशत मंडियां मालवा क्षेत्र में हैं क्योंकि मालवा क्षेत्र की 80 से 85 प्रतिशत आबादी पूरी तरह से कृषि पर निर्भर है।

प्रमुख फसलों की गिरती क़ीमतों ने चुनावी राज्य मध्य प्रदेश के किसानों को परेशान कर दिया है। वे इस गंभीर परिस्थिति के लिए राज्य और केंद्र सरकारों के किसान विरोधी नीतियों को ज़िम्मेदार बता रहे हैं।

उन्होंने पहले दावा किया था कि वे पिछले दो-तीन वर्षों की तुलना में बेहतर क़ीमत प्राप्त कर रहे थे। मालवा क्षेत्र के किसानों में निराशा लगातार बढ़ रही है और वे आगामी विधानसभा चुनावों में मौजूदा बीजेपी सरकार को हटाने की योजना बना रहे हैं जो 28 नवंबर को होने वाला है।

लहसुन की खेती करने वाले किसान शिवनारायण वेद कहते हैं, "सौ किलो लाहसुन बेचो और 1 लीटर पेट्रोल खरीदो, बात बराबर है।"

शिवनारायण वेद 58 वर्षीय किसान हैं जो मंदसौर ज़िले के सीतामो तहसील में रहते हैं।

ज़़ीरापुर के एक अन्य किसान राम गोपाल (68) जो लहसुन बेचने के लिए मंदसौर कृषि उपज मंडी में मौजूद थें उन्होंने कहा, "मैंने इसे इसी मंडी में 6,000 से 7,000 रुपए प्रति क्विंटल बेचा था, लेकिन अब इसकी क़ीमत गिरकर 200 से 3,000 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है।"

गोपाल कहते हैं किसान एक एकड़ लहसुन की फसल उगाने के लिए 25,000 से 30,000 रुपए खर्च करते हैं और प्रत्येक एकड़ भूमि में औसतन 8 से 10 क्विंटल फसल होती है। उन्होंने कहा, "प्रत्येक एकड़ पर हम 8,000 से 10,000 रुपए का नुकसान सह रहे हैं। हम कैसे ज़िंदा रहेंगे?"

MP onion farmers' loss 2.jpg

राज्य सरकार की भावांतर भुगतान योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "कई किसानों को इस योजना के बारे में जानकारी नहीं हैं। हालांकि, सरकार मासिक आधार पर फसल की औसत क़ीमत तय करती है, मंडी में क़ीमत का हर दिन उतार-चढ़ाव होता रहता है। इस तरह भावांतर योजना ऊंट के मुंह में ज़ीरा की तरह है।"

मवेशी पालन करने वाले दूध किसान भी इसी तरह के संकट से गुज़र रहे हैं। वे उज्जैन मिल्क कॉपरेटिव कमेटी को 21 और 23 रुपए की दर सेशुद्ध दूध बेचते हैं जो इसे मुख्य बाज़ार में दोगुनी कीमत पर बेचता है।

कृषि से अपने परिवार की परवरिश करने में नाकाम रहे एक अन्य दूध किसान राम निवास ने कुछ ज़्यादा पैसे कमाने के लिए हरियाणा से कुछ भैंस और गायों को ऊंची क़ीमत पर ख़रीदा था। लेकिन दूध कारोबार में निरंतर नुकसान के कारण उन्होंने दो भैंस बेच दिया है और बाकी को बेचने की योजना बना रहे हैं।

बालागुडा गांव के रहने वाले राम निवास कहते हैं, "खेती के लिए अपर्याप्त भूमि के कारण आमदनी के लिए मैंने कुछ भैंस और गाय ख़रीदा था,लेकिन मुझे खाली हाथ रहना पड़ा है, क्योंकि हमें 21 से 22 रुपए प्रति लीटर की क़ीमत मिल रहे हैं। उसी दूध को बाज़ार में 36 से 52 रुपए पर बेचा जा रहा है।"

MP onion farmers' loss 3.jpg

उन्होंने कहा, "कम से कम दूध किसानों को 30 रुपए प्रति लीटर क़ीमत मिलना चाहिए, तब हम ज़िंदा रह सकते हैं।"

यहां तक कि अफीम किसान भी घाटे का सामना कर रहे हैं। अफीम किसान गोपाल पाटीदार कहते हैं, "बड़ा जोखिम उठाने के बावजूद यह अधिक लाभदायक नहीं है। हमने अफीम की खेती में काफी परेशानी उठाई है लेकिन बदले में हमें 15,000 रुपए से 20,000 रुपए प्रति किलो की क़ीमत मिलते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "काले बाजार में अफीम की क़ीमत 8 से 10 रुपए प्रति किलो है। यह हमारे लिए हास्यास्पद है।"

नीमच कृषि उपज मंडी समिति के सचिव संजय श्रीवास्तव ने कहा, "मंडी खुले बाज़ार हैं, और हमारा इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। फसलों की गुणवत्ता देखने के बाद व्यवसायी क़ीमत लगाते हैं। फसलों की दर फसलों की गुणवत्ता, मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है।"

बीजेपी की अगुवाई वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए किसान नेता केदार सिरोही कहते हैं, "राज्य सरकार ने मंदसौर किसानों के विरोध-प्रदर्शन से कोई सबक नहीं लिया है। उनकी फसलों के लिए वास्तविक मूल्य देने के बजाय किसानों को उनकी फसलों को कम क़ीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। भावांतर योजना भी किसानों के लिए उपयोगी नहीं है।"

उन्होंने आरोप लगाया, "कृषि केवल मुख्यमंत्री चौहान के बेटे और कृषि मंत्री के लिए लाभदायक है। सीएम चौहान के बेटे कार्तिकेय ने कृषि से पिछले दो वर्षों में 90 लाख रुपए का लाभ अर्जित किया और कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन ने भी आम को बेचकर क़रीब क़रीब इतना ही राशि अर्जित की है।

MP onion farmers' loss 4.jpg

Madhya Pradesh
madhya pradesh elections
Shivraj Singh Chouhan
MP govt
Bhavantar Bhugtan Scheme
agricultural crises
farmers crises
BJP
MSP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • election
    मुकुल सरल
    जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा
    11 Mar 2022
    यूपी को लेकर अभी बहुत समीक्षा होगी कि जाट कहां गया, मुसलमान कहां गया, दलित कहां गया। महिलाओं का वोट किसे मिला आदि...आदि। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या ग्राउंड ज़ीरो से आ रहीं रिपोर्ट्स, लोगों की…
  • uttarakhand
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल
    11 Mar 2022
    "बेरोजगारी यहां बड़ा मुद्दा था। पर्वतीय क्षेत्रों का विकास भी बड़ा मुद्दा था। भू-कानून, पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली बड़ा मुद्दा था। पलायन बड़ा मुद्दा था। लेकिन नतीजे तो यही कहते हैं कि सभी…
  • पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    जगन्नाथ कुमार यादव
    पटना: विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त सीटों को भरने के लिए 'रोज़गार अधिकार महासम्मेलन'
    11 Mar 2022
    इस महासम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा बिहार तकनीकी सेवा आयोग समेत 20 से ज़्यादा विभाग के अभ्यर्थी शामिल थे।
  • ukraine
    एपी/भाषा
    यूक्रेन-रूस अपडेट: चीन ने की यूक्रेन को मदद की पेशकश, रूस पर प्रतिबंधों को भी बताया गलत
    11 Mar 2022
    चीन के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अनुकूल सभी प्रयासों का समर्थन करता है और इसमें वह सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
  • विजय प्रसाद
    एक महान मार्क्सवादी विचारक का जीवन: एजाज़ अहमद (1941-2022)
    11 Mar 2022
    एजाज़ अहमद (1941-2022) की जब 9 मार्च को मौत हुई तो वे अपनी किताबों, अपने बच्चों और दोस्तों की गर्मजोशी से घिरे हुए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License