NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मध्यप्रदेश और राजस्थान: किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा
किसानों की आमदनी बढ़ाने को लेकर किये जा रहे सभी हवाई प्रचारों के बावजूद वे धान के आलावा खरीफ की तमाम फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर हैंI
सुबोध वर्मा
16 Nov 2018
Translated by महेश कुमार
MSP in MP and rajasthan

मध्यप्रदेश (एमपी) और राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अपने चरम पर है, दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली मौजूदा सरकारों के खिलाफ किसानों में भारी गुस्सा देखा जा सकता है। हालिया ख़बरों की मानें तो इसका मुख्य कारण है कि किसानों को खरीफ फसलों की बिक्री के लिए मंडियों में जो कीमत दी जा रही है वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम है।

धान को छोड़कर अधिकतर फसल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बड़े उत्साह के साथ घोषित एमएसपी से नीचे की कीमतों पर बिक रही हैं। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत विपणन और निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई) द्वारा संचालित एग्मार्कमार्क पोर्टल द्वारा रिपोर्ट किए गए नवीनतम आँकड़ों पर नज़र डालें।

एमपी में, जहाँ सोयाबीन एक प्रमुख फसल है, इसकी कीमतों में लगातार गिरावट आई हैं क्योंकि बम्पर फसल होने के बाद जब फसल बाज़ार में आई और अक्टूबर में 3,399 रूपए प्रति क्विंटल की एमएसपी की तुलना में सिर्फ 2,987 रुपये प्रति क्विंटल बिक्री दर्ज की गई थी। किसानों को इससे 12 प्रतिशत का घाटा हुआ है।

MSP in MP and Rajasthan1.jpg

एमपी में एक और प्रमुख फसल अरहर (तूर) दाल की होती है, इस दाल की भारत भर में भारी मात्रा में खपत होती है। मोदी सरकार ने इसकी एमएसपी 5,675 रुपये प्रति क्विंटल तय की थी। यह राज्य में 2,938 रुपये प्रति क्विंटल की औसत की कीमत पर बिकी है –यानि किसानों को एमएसपी के मुकाबले 48 प्रतिशत का घाटा हुआ है।

MSP in MP and Rajasthan2.jpg

उरद एक अन्य प्रमुख दाल है जो एमपी में प्रति क्विंटल 3,422 रुपये बिकी और अक्टूबर में पड़ोसी राज्य राजस्थान में 2,905 रुपये प्रति क्विंटल बिकी थी, जबकि एमएसपी 5,600 रुपये प्रति क्विंटल थी। किसानों को यहाँ एमएसपी में 39 प्रतिशत और राजस्थान में 48 प्रतिशत का घाटा हुआ है।

MSP in MP and Rajasthan3.jpg

यहाँ तक कि मोटा अनाज, जिसे बारिश से सराबोर भूमि पर सबसे गरीब किसानों द्वारा बोया जाता है, का भी अच्छा दाम नहीं लग रहा। बाजरा (मोती बाजरा) के लिए एमएसपी 1,950 रुपये प्रति क्विंटल तय की गयी थी, लेकिन सितंबर में यह सिर्फ 1,216 रुपये प्रति क्विंटल पर बिकी, जो बाद में अक्टूबर में बढ़कर 1,538 रुपये हो गयी थी, लेकिन यह भी एमएसपी से 21 प्रतिशत कम है। राजस्थान में, अक्टूबर में यह 1,337 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ने से पहले सितंबर में इसे 1,337 रुपये के दाम पर बेचा गया था, जो एमएसपी से लगभग 26 प्रतिशत नीचे था।

MSP in MP and Rajasthan4.jpg

यही स्थिति ज्वार का भी हुआ, यह एक बहुत पौष्टिक अनाज है। यह राजस्थान में 1,829 रुपये प्रति क्विंटल और एमपी में 1,558 रुपये पर बिका जो 2,430 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के मुकाबले काफी कम था। इस हिसाब से किसानों का नुक्सान एमपी में 36 प्रतिशत और राजस्थान में 25 प्रतिशत का रहा।

MSP in MP and Rajasthan5.jpg

किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि घोषित एमएसपी अभी भी पूर्ण उत्पादन की लागत + 50 प्रतिशत मुनाफे के वादे को पूरा नहीं करती है, जैसा कि मोदी ने 2014 के चुनाव अभियान में वायदा किया था। यदि आप इसकी उस मानक से तुलना करेंगे तो किसानों का नुकसान दोगुना दर्ज़ किया जाएगा।

इनमें से अधिकतर नुकसान राज्यों में अपेक्षित खरीद की मशीनरी की अनुपस्थिति की वजह से हुए हैं। जैसा कि न्यूजक्लिक द्वारा पहले बताया जा चुका है, कि कुल उत्पादित गेहूं का केवल 45 प्रतिशत हिस्सा ही एमपी सरकार द्वारा खरीदा गया था, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार पिछले साल उत्पादित धान का सिर्फ 46 प्रतिशत ही खरीद सकी थी। यदि इन दो प्रमुख फसलों की इतनी खेदजनक स्थिति है, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि छोटी फसलों के साथ क्या हो रहा है।

यह लोगों से बीजेपी के अलगाव की कहानी है जो एक कठिन चुनावी लड़ाई का सामना करने के बावजूद, और एक आम चुनाव से कुछ महीने दूर, वह परेशान किसानों को कोई सांत्वना/सहायता देने में असमर्थ रही है जो पिछ्ले चार वर्षों से सड़कों पर बेहतर कीमतों के लिए लड़ रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में शायद किसान उन्हें इस आपराधिक उपेक्षा के लिए सबक सिखाएंगे।

MSP
farmers
minimum support price
Madhya Pradesh
Rajasthan
Madhya Pradesh elections 2018
Rajasthan elections 2018
Assembly elections 2018
Modi government
BJP
anti-farmer BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया


बाकी खबरें

  • bjp -sp
    असद रिज़वी
    उत्तर प्रदेश: मौसम ठंडा, राजनीति गर्म, भाजपा-सपा ने पूर्वांचल पर लगाया ज़ोर
    10 Nov 2021
    403 सीटों वाली प्रदेश की विधानसभा में क़रीब 164 सीटें पूर्वांचल के 28 ज़िलों में हैं। माना जाता है जिसका पूर्वांचल पर क़ब्ज़ा होता है, वही प्रदेश पर राज करता है।
  • lal
    लाल बहादुर सिंह
    ‘डबल इंजन’ सरकार का हाल: पब्लिक अफेयर्स इंडेक्स में इस साल भी यूपी सबसे नीचे
    10 Nov 2021
    यह कोई चुनाव पूर्व माहौल बनाने के लिए होने वाला प्रायोजित सर्वे नहीं है, अपितु ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में काम कर रहे थिंक-टैंक की रिपोर्ट है, जो शासन की गुणवत्ता के आधार…
  • minimum wage
    रौनक छाबड़ा
    ट्रेड यूनियनों के मुताबिक दिल्ली सरकार की न्यूनतम वेतन वृद्धि ‘पर्याप्त नहीं’
    10 Nov 2021
    ट्रेड यूनियनों की ओर से मांग की जा रही है कि न्यूनतम वेतन को बढ़ा कर 26,000 रूपये करने के साथ-साथ असंगठित श्रमशक्ति को 7,500 रूपये का मासिक नकद समर्थन दिया जाए। इन्हीं मांगों पर दबाव बनाने के लिए उनकी…
  • climate
    अजय कुमार
    क्लाइमेट फाइनेंस: कहीं खोखला ना रह जाए जलवायु सम्मेलन का सारा तामझाम!
    10 Nov 2021
    जलवायु सम्मेलन में क्लाइमेट फाइनेंस का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है। अगर क्लाइमेट फाइनेंस पर सहमति नहीं बनी तो क्लाइमेट जस्टिस नहीं हो पाएगा। नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन से जुड़े सारे वादे खोखले रह जाएंगे। 
  • corna
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,466 नए मामले, 460 मरीज़ों की मौत
    10 Nov 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 43 लाख 88 हज़ार 579 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License