NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मध्यप्रदेश चुनाव : बदलाव की बयार, लेकिन थोड़ा और इंतज़ार
एग्ज़िट पोल के परिणामों में कांग्रेस या भाजपा, इसे लेकर कोई स्पष्ट राय बनाना आसान नहीं है। लेकिन ग्राउंड से जुड़े पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि इस बार भाजपा से कांग्रेस बहुत आगे है।
राजु कुमार
08 Dec 2018
mp polls

किसी चुनाव में मतदान के बाद मतगणना तक का इंतजार थोड़ा मुश्किल होता है। इस बीच अटकलों और अनुमानों के दौर में लोगों को एग्ज़िट पोल का भी इंतजार रहता है। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों का एग्जिट पोल सामने आ गया है। लेकिन दर्जनों एग्ज़िट पोल के बीच लोग भ्रमित हो गए कि किसे सही मानें। खासतौर से, मध्यप्रदेश को लेकर सर्वे एजेंसियों ने ज्यादा भ्रम फैला दिया है। अब परिणाम का नहीं, बल्कि किस एजेंसी का सर्वे सही होगा, इसको लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

इस बीच एक बार फिर मध्यप्रदेश की जमीनी हकीकत को टटोलने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभवों एवं अनुमानों पर बात की गई। हर क्षेत्र के लोगों ने यह स्पष्ट किया कि इस बार भाजपा पर कांग्रेस भारी पड़ रही है। अधिकांश जिलों में भाजपा स्थानीय कारणों से अपनी सीटें गवां रही है। 

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार लज्जाशंकर हरदेनिया कहते हैं, ‘‘प्रदेश में कांग्रेस का अपरहैंड है। 15 साल के बाद लोग बदलाव के मूड में हैं। किसान परेशान है, सरकारी कर्मचारी परेशान है, रेत माफिया बेखौफ हैं, सांप्रदायिक शक्तियां बेखौफ हैं, ब्यूरोक्रेसी दबाव में है। पुलिस वाले सबसे ज्यादा गुस्से में है। छोटे व्यापारी परेशान हैं। इन सभी का कहना है कि इन्हें जाना चाहिए। भाजपा का पोल मैनेजमेंट बेहतरीन है और सिर्फ यह उसके पक्ष में है। मेरी रिपार्ट के अनुसार लोगों में नाराजगी है और भाजपा के लिए मुश्किल है इस बार।’’ 

ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार आशेन्द्र सिंह भदौरिया कहते हैं, ‘‘हमने तीन महीने से वॉच किया है। चंबल क्षेत्र में कांग्रेस ने इस बार भाजपा को पछाड़ दिया है। भाजपा की कार्यशैली और वरिष्ठ भाजपा नेताओं की उपेक्षा भाजपा के लिए भारी पड़ गई है। मंत्री सीट बचा लेंगे, यह भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। भिंड जिले में भाजपा के शायद ही एक सीट मिल पाए। मुरैना, शिवपुरी और श्योपुर में भी भाजपा पिछड़ गई है।’’ गुना के वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकांत शाक्य का कहना है, ‘‘इलाके में ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। इस बार तो भाजपा से लोगों की नाराजगी भी है। सपाक्स और एट्रोसिटी एक्ट जैसे मुद्दे भी भाजपा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। गुना सीट भी भाजपा की हाथ से निकल जाएगी।’’ 

छिंदवाड़ा के वरिष्ठ पत्रकार मंतोष सिंह बताते हैं, ‘‘छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी में मैं व्यक्तिगत तौर पर गया था। इन जिलों में भाजपा अपनी कई सीटें गंवा रही है। यद्यपि छिंदवाड़ा मॉडल की चर्चा प्रदेश स्तर पर हो रही है, लेकिन यह सिर्फ छिंदवाड़ा हाइवे पर ही दिखता है। आज भी गांव सड़क और पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। दर्जन भर गांवों में इसे लेकर लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया था। लोग कह रहे थे कि बिजली, पानी और सड़क के मुद्दे पर आई सरकार 15 साल में पानी और सड़क नहीं दे पाई, तो परिवर्तन जरूरी है। एक सीट समाजवादी पार्टी और एक निर्दलीय को भी इस क्षेत्र से जीत मिलेगी। बड़े मुद्दे के बजाय स्थानीय मुद्दे और वर्तमान विधायक या प्रत्याशी की छवि पर लोग गए हैं और इस पर कांग्रेस भारी दिख रही है।’’ 

झाबुआ में कार्यरत वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अपने अनुभव को साझा करते हुए बताते हैं, ‘‘बागी उम्मीदवारों के कारण कांग्रेस को थोड़ा नुकसान हो सकता है। लेकिन इस बार कांग्रेस में पहले की तुलना में बहुत ज्यादा तैयारी दिखाई दी। भाजपा के बड़े नेताओं के भाषणों ने प्रभाव नहीं छोड़ा। बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सभाओं की चर्चा ज्यादा रही है। स्थानीय विधायकों के प्रति भी लोगों में नाराजगी रही है। मंदसौर की घटना के बाद भाजपा किसानों का विश्वास नहीं जीत पाई। मालवा-निमाड़ में भाजपा हमेशा आगे रही है, लेकिन इस बार बराबरी का मुकाबला है।"

बघेलखंड और बुंदेलखंड में कार्यरत वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता संतोष सिंह इलाके के हर जिलों की नब्ज से वाकिफ हैं। वे हर जिलों के अलग-अलग आंकड़े देते हुए कहते हैं, ‘‘सतना, सीधी, उमरिया, दमोह, छतरपुर, सागर, पन्ना, कटनी, रीवा किसी भी जिले में भाजपा लीड नहीं कर रही है। हर जिलें में कांग्रेस 3 से 4 सीटें ला रही है और भाजपा 1 से 3 सीट। सपा के लिए इस बार फिर मुश्किल रहेगी इन क्षेत्रों में। भाजपा कई परंपरागत सीटें भी गवां रही है।’’

सतना के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रमेश द्विवेदी बताते हैं, ‘‘परिवर्तन की लहर जमीन पर साफ दिखाई दी। लोग कह रहे थे कि 15 साल बाद अब बदलाव की जरूरत है, कुशासन बहुत है, रिश्वतखोरी कम नहीं हुई है। पिछले तीन चुनावों में इस बार पहली बार कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता सड़क पर नजर आए। उनका एक्टिव होना भी कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा। यद्यपि बसपा और कई निर्दलीय भाजपा को फायदा पहुंचा सकते थे, लेकिन लोगों साफ कह रहे थे कि बदलाव जरूरी है। बदलाव की लहर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय सिंह के सपोर्टर्स कहने लगे कि इधर से जितनी ज्यादा सीटें कांग्रेस लाएगी, उतनी ही अजय सिंह के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं बढ़ेगी। इससे भी कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना है।’’ 

सीहोर में कार्यरत सामाजिक कार्यकर्ता राकेश सिंह का कहना है, ‘‘बुदनी विधानसभा क्षेत्र के गांवों में भी लोगों की जुबां पर था - वक्त है बदलाव का। यह संभावना है कि इस बार मुख्यमंत्री भी बहुत कम मतों से जीत हासिल करेंगे। आसपास के क्षेत्र में भाजपा से कांग्रेस आगे है।’’ 

एग्जिट पोल के परिणामों में कांग्रेस या भाजपा, इसे लेकर कोई स्पष्ट राय बनाना आसान नहीं है। लेकिन ग्राउंड से जुड़े पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि इस बार भाजपा से कांग्रेस बहुत आगे है। लेकिन फिर भी अभी नहीं कह सकते कि किसकी बनेगी सरकार। हमें थोड़ा और करना पड़ेगा इंतज़ार।

Madhya Pradesh elections 2018
Assembly elections 2018
exit polls
Shivraj Singh Chauhan
kamalnath
BJP
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • ali javed
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नहीं रहे अली जावेद: तरक़्क़ीपसंद-जम्हूरियतपसंद तहरीक के लिए बड़ा सदमा
    01 Sep 2021
    प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और उर्दू के प्रसिद्ध लेखक अली जावेद के आकस्मिक निधन से साहित्यिक-सांस्कृतिक जगत में शोक व्याप्त हो गया है।
  • cast census
    राज वाल्मीकि
    जाति-जनगणना : क्यों और कौन कर रहा है विरोध?
    01 Sep 2021
    यदि जातिगत जनगणना होती है तो सत्ता के समीकरण बदलेंगे। यथास्थिति बदलेगी। समाज में एक बड़ी हलचल होगी। यही कारण है कि भाजपा इस विषय में बहुत बचकर चल रही है। वह न विरोध कर पा रही है न खुलकर समर्थन।
  •    India Corona Update
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में फिर 41,965 नए मामले, 460 मरीज़ों की मौत
    01 Sep 2021
    देश में संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 28 लाख 10 हज़ार 845 हो गयी है। जिनमें से अब तक 4 लाख 39 हज़ार 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • Jallianwala bagh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जलियांवाला बाग़ परिसर पुनर्निर्माण पर विपक्ष, इतिहासकार उठा रहे सवाल, कहा शहीदों का अपमान
    01 Sep 2021
    ‘‘जलियांवाला बाग़ के शहीदों का ऐसा अपमान वही कर सकता है जो शहादत का मतलब नहीं जानता। मैं एक शहीद का बेटा हूं। शहीदों का अपमान किसी कीमत पर सहन नहीं करूंगा। हम इस अभद्र क्रूरता के ख़िलाफ़ हैं।’’
  • DU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डीयू: एनईपी लागू करने के ख़िलाफ़ शिक्षक, छात्रों का विरोध
    01 Sep 2021
    ‘रिजेक्ट एनईपी’ हैशटैग का इस्तेमाल कर शिक्षक और छात्र संगठनों ने ट्विटर पर शिक्षा नीति के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की। इससे पहले 24 अगस्त को डूटा आह्वान पर डीयू के शिक्षक और छात्रों ने उपकुलपति के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License