NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
मध्यप्रदेश में फिर सामने आया टेरर फंडिंग का मामला
एटीएस का कहना है कि सुनील सिंह, बलराम सिंह, शुभम मिश्रा एवं उनके साथी पाकिस्तान के उन्हीं हैंडलर से पुनः संपर्क में आकर काम कर रहे थे, जो कि भारत के विरूद्ध पूर्व में काम कर रहे थे। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब इस मामले से जुड़े आरोपी 2017 में भी पकड़े गए थे, तो उन पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
राजु कुमार
25 Aug 2019
सांकेतिक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : पत्रिका

मध्यप्रदेश में एक बार फिर टेरर फंडिंग से जुड़ा मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियां सकते में हैं। लगभग ढाई साल पहले ही टेरर फंडिंग और पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए मध्यप्रदेश के 4 शहरों से 15 लोगों को गिरफ्तार किया था। उसमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के आईटी सेल के तत्कालीन भोपाल जिला संयोजक ध्रुव सक्सेना भी शामिल था। पुलिस के अनुसार, उस मामले में गिरफ्तार कुछ लोग जमानत पर बाहर थे, जिसमें सतना के बलराम सिंह भी था और वह जमानत पर बाहर आकर फिर से टेरर फंडिंग का काम करने लगा था। इस बार बलराम सिंह सहित तीन लोगों को मध्यप्रदेश एटीएस एवं सतना जिला पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से सवाल किया है कि आखिर क्या कारण रहे हैं कि 8 फरवरी 2017 को पहली बार इस मामले का खुलासा होने और उस कांड में कुछ लोगों के पकड़े जाने के बाद भी उन पर उस समय कड़ी कार्रवाई नहीं की गई?

इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब मध्यप्रदेश एटीएस ने पाकिस्तान के नंबरों से आने वाले कॉल का विश्लेषण किया। एटीएस ने जब पाकिस्तानी नंबरों का विश्लेषण किया, तो उसने पाया कि इन पाकिस्तान के नंबरों में वे नंबर भी हैं जो भारतीय दंड संहिता की धारा 122, 123, 420, 467, 468, 471, 120-बी, एवं 201, भारतीय बेतार तार यांत्रिकी अधिनियम की धारा 3, 6 और भारतीय तार अधिनियम की धारा 4, 20 एवं 25 के तहत पूर्व में पंजीबद्ध अपराध क्रमांक 02/2017 थाना एटीएस/एसटीएफ की विवेचना में सामने आए थे। इन नंबरों से मिलें निर्देशों पर युद्ध की स्थिति में सामरिक दृष्टि से क्षति पहुंचाने और इसमें मदद करने वाली जानकारी एकत्रित की जा रही थी। जानकारी देने वालों को धनराशि बलराम और अन्य आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही थी।

वर्तमान में इन नंबरों के विश्लेषण से एटीएस को पता चला कि फिर से इन नंबरों के माध्यम से संपर्क कर बड़ी धनराशि का लेन-देन किया जा रहा है। इसके बाद मध्यप्रदेश एटीएस एवं सतना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों सुनील सिंह, बलराम सिंह एवं शुभम मिश्रा के खिलाफ एटीएस द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 123 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर आगे की जांच की जा रही है। एटीएस का कहना है कि सुनील सिंह, बलराम सिंह, शुभम मिश्रा एवं उनके साथी पाकिस्तान के उन्हीं हैंडलर से पुनः संपर्क में आकर काम कर रहे थे, जो कि भारत के विरूद्ध पूर्व में काम कर रहे थे। पहले की तरह ही पाकिस्तानी एजेंट इनमे माध्यम से सामरिक दृष्टि से भारत को क्षति पहुंचाने वाली जानकारी एकत्रित कर रहे थे। संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी आरोपियों के तार जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि इस मामले की गहराई से जांच हो और रैकेट का पर्दाफाश हो। प्रदेश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इस कांड से जुड़े किसी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाए, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो या कितना भी बड़ा शख्स हो। उन्होंने कहा कि जब ये लोग 2017 में पकड़े गए थे, तो बाहर आकर कैसे फिर से देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने लगे। इसकी जांच की जाए और जिसकी भी लापरवाही सामने आए, उस पर कार्यवाही हो। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करके टेरर फंडिंग के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से स्पष्टीकरण मांगा है कि उन्होंने टेरर फंडिंग से जुड़े आरोपियों को जमानत कैसे होने दी? और यदि उन्हें जमानत मिली तो तत्कालीन सरकार ने इसके खिलाफ अपील क्यों नहीं की? उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और एनएसए अजित डोभाल पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या पाकिस्तान के लिए खुफियागिरी करने वालों को बचाने वाला देशद्रोही है या नहीं?

उल्लेखनीय है कि 2017 में मध्यप्रदेश एटीएस द्वारा की गई कार्रवाई में पकड़ा गया पूरा गिरोह पाकिस्तान के हैंडलरों के निर्देशों पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उनमें धनराशि प्राप्त कर रहा था और उसे ठिकाने लगा रहा था। इस काम में अवैध रूप से निजी टेलिफोन एक्सचेंज भी स्थापित किए गए थे। साथ ही पाकिस्तान हैंडलरों से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए बातचीत होती थी। पाकिस्तान के हैंडलरों द्वारा 100 से अधिक कंटेक्ट नंबरों से संपर्क किया जा रहा था।

Madhya Pradesh
KAMALNATH GOVT
Shivraj Singh Chauhan
ATS
Terror funding
Pakistan

Related Stories

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

ख़बरों के आगे पीछे: हिंदुत्व की प्रयोगशाला से लेकर देशभक्ति सिलेबस तक

बच्चों के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में एमपी पहले और यूपी दूसरे स्थान परः एनसीआरबी

इंदौर में "नाम पूछकर" चूड़ी वाले को पीटा, भारी बवाल के बाद मामला दर्ज 

भाजपा शासित एमपी सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए व्यापम आरोपियों के निजी अस्पतालों को अनुबंधित किया


बाकी खबरें

  • workers
    रौनक छाबड़ा
    दिल्ली: ट्रेड यूनियन के साइकिल अभियान ने कामगारों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा शुरू करवाई
    18 Oct 2021
    ट्रेड यूनियनों की मुख्य मांग में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 26000 न्यूनतम भत्ता और चार लेबर कोड की वापसी शामिल हैं।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: कहीं पे निगाहें, कहीं पर निशाना
    18 Oct 2021
    जैसे-जैसे देश में चुनाव आते हैं, अचानक कश्मीर आ जाता है, बांग्लादेश आ जाता है, पाकिस्तान तो बिना न्यौते के ही जाता है। फिर कैमरे के फ़ोकस में बाक़ी देश को हटाकर इन जगहों को सेट कर दिया जाता है ताकि…
  • mayawati
    लाल बहादुर सिंह
    सियासत: उत्तर प्रदेश चुनाव में दलित एजेंडा कहां है?
    18 Oct 2021
    तथ्य यह है कि  डबल इंजन  सरकार की चौतरफ़ा तबाही का जो तबका सबसे बदतरीन शिकार हुआ है,  सबसे बड़ी मार जिस तबके पर पड़ी है, वे दलित ही हैं।
  • covid
    ऋचा चिंतन
    टीबी के ख़िलाफ़ भारत की जंग: बदतर हालात, चुप्पी साधे सरकार, दवाओं के स्टॉक खाली
    18 Oct 2021
    टीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत का खराब प्रदर्शन जारी है, लेकिन डेलमानिड के स्टॉकआउट होने और परीक्षण किट्स की कमी के रूप में अतिरिक्त चुनौतियां सामने आ रही हैं। इन कमियों के बारे में…
  • mukesh
    राज वाल्मीकि
    मुकेश मानस; असमय स्मृति शेष : क्यों तुम चले गए!
    18 Oct 2021
    मुकेश जी आपका यूं अचानक चले जाना आपके सभी चाहने वालों के लिए, दलित साहित्य और दलित प्रगतिशील आंदोलन के लिए, हमसब के लिए गहरा सदमा है। हमें इस तरह का दुखद सरप्राइज देते हुए जाना नहीं था आपको!
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License