NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
“मेरे प्रिय फर्स्ट टाइम वोटर्स…”
मन की असली बात : फर्स्ट टाइम वोटर्स के साथ... "कैच दैम यंग"। यह मैंने संघ में रह कर सीखा। मेरा संघ भी बच्चों को शाखा में बचपन में ही बुलाना शुरू कर देता है और उन्हें अपना जैसा बना कर ही दम लेता है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
05 May 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Rediff.com

(डिसक्लेमर : इस संबोधन/आलेख का माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ से कोई संबंध नहीं हैं। अगर आपको ऐसा लगे तो इसे महज़ संयोग मात्र समझें : लेखक)

आज मैं मन की असली बात पहली बार वोट देने वालों नौजवानों के साथ करना चाहता हूं। पहली बार के वोटर मेरे लिए सबसे इंपोर्टेंट हैं क्योंकि उनको अगर एक बार अच्छी तरह पटा लिया जाये तो बारम्बार वोट मिलते रहेंगे। नये वोटर्स को पटाना आसान भी है जबकि पुराने वोटरों को पटाना मुश्किल है। वैसे तो जिंदगी और मौत ऊपर वाले के हाथ में हैं, फिर भी पुराने वोटर्स, उनकी उम्र अधिक होती है, पता नहीं कब टपक जायें। नये वोटर्स ज्यादा टाइम तक टिकेंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। इसलिए इस बार मन की असली बात फर्स्ट टाइम वोटर्स के साथ।

tirchi najar after change new_13.png

मेरे प्रिय फर्स्ट टाइम वोटर्स, आप लोगों की उम्र आमतौर पर अट्ठारह (18) से तेइस (23) वर्ष के बीच होगी। पिछले चुनावों के समय आप तेरह साल से अटठारह साल के बीच की उम्र के रहे होगे। इस दौरान आप में से अधिकतर स्कूल जाया करते रहे हैं। आप लोगों को मैंने बार बार आपके स्कूल में संबोधित किया। मन की बात तो की ही, ऐसे प्रोग्राम भी किये, टीचर्स डे पर, बाल दिवस पर, स्वच्छ भारत दिवस पर, और भी कई बार जिनमें मैंने आपको  कई बार संबोधित किया। मैंने ऐसा प्रबंध किया कि सभी स्कूलों में मैं एक साथ टेलीविजन पर, प्रोजेक्टर स्क्रीन पर देखा और सुना जा सकूं। मैंने आदेश दिया कि ऐसे कार्यक्रमों में कोई भी छात्र, कोई भी शिक्षक अनुपस्थित न रहे। सब लोग वैसे भले ही कक्षा में आयें न आयें पर उस दिन अवश्य आयें जब मैं आप लोगों को संबोधित कर रहा हूँ। इस तरह से मैं पिछले पांच साल से लगातार आप लोगों को अपना बनाने की कोशिश में लगा हूं।

प्यारे बच्चों, अभी हाल तक तो आप बच्चे ही थे न। जब मैं पिछले पांच साल तक आपको मन की बात में, आपको लेकर बनाये गये विशेष कार्यक्रमों में, आपकी परीक्षा से पहले आपका धीरज बंधाने के बहाने, या फिर किसी भी और बहाने से, संबोधित करता था तो मन में विशेष ध्यान रहता था कि "कैच दैम यंग"। यानी आप सब को व्यस्क होने से पहले ही पकड़ लिया जाये। आप अपनी कोई सोच बनायें, इससे पहले ही आपको अपनी सोच में ढाल लिया जाये। यह मैंने संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में रह कर सीखा। मेरा संघ भी बच्चों को शाखा में बचपन में ही बुलाना शुरू कर देता है और उन्हें अपना जैसा बना कर ही दम लेता है।

मेरे प्रिय फर्स्ट टाइम वोटर्स, मैं आपको बताना चाहता हूं कि आपका यह पहला वोट देश के काम आना चाहिए। मेरे काम आना चाहिए न कि किसी भी विरोधी के। यह पहला वोट बरबाद करने के लिए नहीं है। यह वोट आपको जिन्दगी भर याद रहेगा। आप स्वयं बताओ, आपका यह वोट पाकिस्तान में स्थित बालाकोट की सर्जिकल स्ट्राइक के वीरों को समर्पित किया जाना चाहिए या नहीं। मेरे फर्स्ट टाइम वोटरों, आपका यह पहला वोट पुलवामा के शहीदों को समर्पित किया जाना चाहिए या नहीं। पर आप मुझसे यह न पूछें कि पुलवामा किसकी गलती से हुआ। आप मुझसे यह भी न पूछें कि पुलवामा में जो चूक हुई, उसके लिए कौन जिम्मेवार है। न ही यह सोचने/जानने का प्रयास करें कि क्या अगर सावधानी बरती जाती तो पुलवामा रोका जा सकता था। बस यह जान/समझ लें कि पुलवामा के लिए वोट किसे दिया जाये, मोदी को। सर्जीकल स्ट्राइक के लिए वोट किसे दिया जाये, मोदी को। कोई भी और हकदार नहीं है आपके पहले वोट का।

डीयर फर्स्ट टाइम वोटर्स, कई बार मैं सोचता हूँ कि यह पुलवामा का अटैक तो मेरे ही सौभाग्य से हुआ। न यह अटैक होता और न ही मैं चुनावों से पहले लोगों में यह राष्ट्र भक्ति जगा पाता। न पुलवामा का अटैक होता और न मैं बालाकोट पर सर्जिकल स्ट्राइक कर पाता। अब इस सर्जिकल स्ट्राइक में कितने आतंकवादी मरे, मरे भी या नहीं मरे, इससे हमें क्या मतलब। मुझे मुद्दा तो मिल गया। सारा का सारा चुनाव इसी मुद्दे पर लड़वा दिया। न विकास की बात, न रोजगार की बात। न कालेधन की बात और न ही भ्रष्टाचार की बात। धन्यवाद आतंकवादियों धन्यवाद! धन्यवाद पाकिस्तान धन्यवाद। तुम नहीं होते तो मेरे लिए मुश्किल ही मुश्किल थी। पुलवामा कर आपने यह चुनाव मेरी झोली में डाल दिया। मैं तो खुद चिंता में था कि इस चुनाव में क्या मुद्दा उठाउंगा। थेंक यू वंस अगेन।

मेरे प्रिय फर्स्ट टाइम वोटर्स, आप यह न सोचें कि इस समय आम चुनाव हैं और आचार संहिता लागू है। और आचार संहिता के अनुसार चुनावी रैली में, वोट मांगते हुए सेना का जिक्र कर वोट मांगना आचार संहिता का उल्लंघन है। पहले सभी दल इस बात को मानते रहे हैं। पर यह मोदी है, यह बहुत सारी बातें नहीं मानता है। मोदी आचार संहिता को अचार संहिता समझता है। उसे थेपले के साथ खा जाता है और उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता है। चुनाव आयोग कुछ कदम उठाता उससे पहले ही मैंने उन्हें समझा दिया कि सर्जीकल स्ट्राइक आरएसएस के स्वयंसेवकों ने की थी और पुलवामा में भाजपा के कार्यकर्ता शहीद हुए थे। और मेरी बात चुनाव आयोग समझ भी गया। मेरे खिलाफ कुछ नहीं किया। बस आप लोग भी समझ लो, पुलवामा के शहीदों के लिए, बालाकोट की सर्जिकल स्ट्राइक के लिए, वोट मुझे ही देना है।

अंत में दोहा :

हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा आय। 

सरकारी खर्च पर (मन की) बात कर, मैंने वोटर लिये पटाय।।

 

(लेखक पेश से चिकित्सक हैं।)

इसे भी पढ़ें :मन की असली बात : युवाओं के साथ

मन की असली बात : चौकीदार भाइयों के साथ

मन की असली बात : फ़ौजी भाइयों के साथ

"मन की असली बात"

“प्यारे बहनों-भाइयों, नोटबंदी पार्ट-2 के लिए तैयार रहें”

 

Satire
Political satire
tirchi nazar
2019 आम चुनाव
General elections2019
2019 Lok Sabha elections
Narendra modi
first time voters

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • up
    सोनिया यादव
    यूपी चुनाव 2022: कई जगह जमकर लड़ीं महिला उम्मीदवार, कई सीटों पर विजयी
    10 Mar 2022
    बीते विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिला उम्मीदवारों की संख्या में 4 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है और वो फिलहाल मैदान में 30 से अधिक सीटों पर आगे चल रही हैं।
  • biren singh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में भाजपा सरकार बनाने की प्रबल दावेदार केवल बहुमत का इंतज़ार
    10 Mar 2022
    मणिपुर की बात करें तो मणिपुर में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं। बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत है। खबर लिखने तक मणिपुर में भी भाजपा 60 में से 15 सीट जीत चुकी है और 13 सीट पर आगे चल रही है।
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: महंगाई-बेरोज़गारी पर हावी रहा लाभार्थी कार्ड
    10 Mar 2022
    यूपी की ज़मीन पर इस बार किसान आंदोलन से लेकर लखीमपुर कांड और हाथरस कांड की गूंज थी। कोविड की पहली लहर और दूसरी लहर की मार थी, छुट्टा पशु की परेशानी थी, महंगाई, बेरोज़गारी जैसे बड़े मुद्दे थे। विपक्ष…
  • अनिल अंशुमन
    झारखंड : मुआवज़े की मांग कर रहे किसानों पर एनटीपीसी ने किया लाठीचार्ज
    10 Mar 2022
    अपने खेतों के बदले उचित मुआवज़े की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों पर हुए लाठीचार्ज से किसान आक्रोशित हो गए और जवाब में अधिकारियों पर पथराव किया।
  • bela and soni
    सौरव कुमार
    सोनी सोरी और बेला भाटिया: संघर्ष-ग्रस्त बस्तर में आदिवासियों-महिलाओं के लिए मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली योद्धा
    10 Mar 2022
    भारत की सामूहिक उदासीनता ने आदिवासियों के अधिकारों को कुचलने वालों के प्रतिरोध में कुछ साहसी लोगों को खड़ा करने का काम किया है, और उनमें सबसे उल्लेखनीय दो महिलाएं हैं- सोनी सोरी और बेला भाटिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License