NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
मज़दूर-किसान
समाज
भारत
महाराष्ट्र : बद से बदतर होते जा रहे हैं सूखे के हालात
माराठवाड़ा के औरंगाबाद, उस्मानाबाद, जालना, नांदेड, परभणी, बीड, लातूर, व उत्तर महाराष्ट्र के धुले, नांदुरबार जलगांव अहमदनगर जिलों और पश्चिमी महाराष्ट्र में स्थिति बहुत गंभीर है।
अजय कुमार
04 Jun 2019
Maharashtra

गर्मी बढ़ती जा रही है और देश के बड़े हिस्से में सूखे के हालात हैं। लेकिन महाराष्ट्र लंबे समय से सूखे से बुरी तरह प्रभावित है। फरवरी 2019  में महाराष्ट्र सरकार के अनुसार महाराष्ट्र के 358 में से 151 तालुका सूखे की चपेट में थे। अगर गांवों के लिहाज से देखें तो इतने तालुका में तकरीबन 28524 गाँव आते हैं। यानी महाराष्ट्र के तकरीबन 28524 गाँवों में पानी की भीषण समस्या है।

माराठवाड़ा के औरंगाबाद, उस्मानाबाद, जालना, नांदेड, परभणी, बीड, लातूर, व उत्तर महाराष्ट्र के धुले, नांदुरबार जलगांव अहमदनगर जिलों और पश्चिमी महाराष्ट्र में स्थिति बहुत गंभीर है। राज्य के कई अन्य इलाकों में भी कम बारिश के कारण फसलें और पेयजल के भंडार सूखे की चपेट में हैं। जलाशयों का जल स्तर काफी नीचे पहुँच चुका है। कई कुएं सूख चुके हैं। और जिन कुओं में पानी है,वहां भीड़ लगी रहती है।

1500 से अधिक आबादी वाले गाँव में 15 -15 दिनों तक पानी नसीब नहीं हो रहा है। लोग पानी जमा कर रखते हैं। कपड़े और बर्तन धोने के लिए पानी जमा कर रखना होता है। कभी-कभी तो 15 दिनों तक बिना नहाये रहना पड़ता है। यहां के लोगों का कहना है काम की बजाय पानी के खोज में दर-दर भटकना पड़ रहा है। इससे सबसे ज़्यादा प्रभवित मराठवाड़ा हुआ है। मराठवाड़े के इलाके में पिछले साल तकरीबन 30 फीसदी का जलस्तर कम होकर अब 5 फीसदी तक पहुँच चुका है।  

सूखे से जुड़े मसले पर बात करते हुए स्थानीय पत्रकार अमेय तिरोदकर कहते हैं कि इस साल सूखे की स्थिति महाराष्ट्र में विकराल बन चुकी है। महाराष्ट्र का तकरीबन आधे से अधिक इलाका सूखे के चपेट में हैं। महाराष्ट्र में औसतन 60 से 80 सेंटीमीटर की बरसात होती है। बरसात की यह मात्रा  घटकर अब 18 सेंटीमीटर तक पहुँच चुकी है।

आसान भाषा में इसे ऐसे समझिये कि जितनी बरसात बिहार और उत्तर प्रदेश में होती है, उससे आधी बरसात महाराष्ट्र में औसतन होती है। और इस साल की हालत तो इतनी बुरी है कि औसत के पांचवें हिस्से से भी कम बरसात हो रही है। साल दर साल महाराष्ट्र में बारिश कम होती जा रही है। साल 2013 में बारिश 20 फीसदी कम हुई, साल 2014 में 30 फीसदी, साल 2015 में 40 फीसदी और साल 2016 में तकरीबन 50 फीसदी कम बारिश हुई। यानी बारिश लगातार कम होती जा रही है।

अमेय तिरोदकर आगे कहते हैं कि केवल बारिश की कमी की वजह से ही नहीं लेकिन भूमिगत जलस्तर में बहुत अधिक कमी आने की वजह से भी महाराष्ट्र की यह हालत हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह महाराष्ट्र में उन फसलों की अधिक खेती होना है, जिसमें पानी का इस्तेमाल सबसे अधिक होता है। जैसे गन्ने और कपास की खेती। इसका मतलब यह भी नहीं है कि गन्ने की खेती ही नहीं हो लेकिन गन्ने की उन किस्मों की खेती हो, जिसकी पैदवार के लिए कम पानी का इस्तेमाल होता है। ऐसी गन्ने की खेती दुनिया के कई इलाके में की जा रही है और पंजाब के एक इलाके में भी ऐसे गन्ने की खेती हो रही है। साथ में अमय यह भी कहते हैं कि मानसून की भौगोलिक दशाओं की वजह से महाराष्ट्र हमेशा से कम पानी वाला इलाका रहा है। इसलिए यहां की जमीनें ज्वार और बाजरा जैसी खेती के लिए उपयुक्त रही। लेकिन ज्वार की वजह से यहाँ पर शराब उद्योग का जमकर फैलाव हुआ। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया। ज्वार की पैदावार कम होने लगी और इसकी जगह गन्ने ने ले ली। हालाँकि गन्ने की खल की वजह से भी शराब बनती है और गन्ने से मिलने वाले इथोनल से पावर जेनेरेशन भी होता है। लेकिन यह इतना अधिक नहीं है कि इस इलाके में परेशानी की वजह बने। 

इन सारी परेशानियों से निजात पाने के लिए फड़नवीस सरकार ने जलयुक्त शिविर अभियान योजना शुरू की। इस योजना के तहत जनसहभागिता के आधार पर जल उपलब्ध करवाने से जुड़े तमाम उपायों को शुरू करना था। जैसे कि जलाशयों का निर्माण, नाला बनाना, कुएं खोदना, जमीनी जलधाराओं को खोजना। यह सारे काम बड़े जोर शोर से शुरू हुए लेकिन बाद में जाकर इससे जनसहभागिता को बाहर कर दिया गया और केवल कॉन्ट्रेक्ट के तहत यह काम किया जाना लगा। इस पर अमेय कहते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर जलयुक्त शिविर अभियान शुरू करने की वजह से सारे काम गड़बड़ हो गए है। कॉन्ट्रैक्ट पर काम कारण वाले लोगों को स्थानीय भूगोल की जानकारी नहीं होती है और जनसहभागिता से यह लोग दूर भागते हैं। इसलिए इन लोगों ने केवल जमीन खोदने का काम किया है,  जमीन से पानी निकालने का नहीं।

जलयुक्त शिविर अभियान योजना ठप हो चुकी है। इसकी जगह वाटर टैंकरों पानी पहुँचाने का काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र के तकरीबन चालीस फीसदी इलाके में वाटर टैंकर से पानी पहुँचाया जा रहा है। इसलिए वाटर टैंकर से जुडी अर्थव्यवस्था का यहां पर जमकर विकास हुआ है। चार लोगों के एक परिवार को वाटर टैंकर से पीने का पानी लेने के लिए प्रति महीना तकरीबन 3000 रुपये का खर्चा उठाना पड़ता है। बिचौलिए की वजह से इस खर्चे में बढ़ोतरी होती रहती है। यह खर्चा मुंबई में रहने वाले किसी निवासी द्वारा महीने भर की बिजली उपयोग पर किये गए भुगतान के बराबर  पहुँच जाता है। कई जगहों पर जमीन खोदकर पानी निकालने के नाम पर मिनरल वाटर का धंधा शुरू हो चुका है। इस धंधे से जुड़े लोग जमीन से पानी निकालने के लिए जमीन में बहुत गहरी खुदाई करते हैं। और ऐसे पानी को औरंगाबाद जैसे इलाकों में दो गुने कीमत पर बेचते हैं।  

सूखे से जुड़े क्षेत्रों के स्थानीय निवासीयों का कहना हैं कि पिछले दो चुनावों से सरकार जल संग्रहण से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू करने और मुफ्त में वाटर ट्रैन की व्यवस्था कराने की वादा कर रही है। लेकिन हर बार निराशा हाथ लगती है। सरकार के बस का नहीं है कि वह यहां पर कुछ भी बदलाव कर पाए, कुछ भी बदलाव होगा तो स्थानीय जनता की सामूहिक भागीदारी से ही होगा। इस तरह से महाराष्ट्र के सूखे से जुड़े इलाको के लोगों की दशा बद से बदतर होती जा रही है।

इसे भी पढ़ें : महाराष्ट्र एक बार फिर भीषण सूखे की चपेट में

इसे भी पढ़ें : #महाराष्ट्र_सूखाः हज़ारों किसान ऋण माफ़ी योजना से मदद का कर रहे हैं इंतज़ार

इसे भी पढ़ें : #महाराष्ट्र_सूखा : किसान अपने मवेशियों को न बेच पा रहे हैं, न बचा पा रहे हैं!

इसे भी पढ़ें : #महाराष्ट्र_सूखाः सरकार की प्रमुख लघु सिंचाई योजना लोगों को सुविधा देने में विफल

drought
drought in India
Maharashtra drought
Drought hit Marathwada
nanded
India
farmers crises

Related Stories

आईटीबीपी के जवान ने गोलीबारी की, छह जवानों की मौत

सीसीडी के संस्थापक सिद्धार्थ का शव मिला, पुलिसकर्मियों ने आत्महत्या का संदेह जताया

बिहार ही नहीं पूरे देश में बीमार है स्वास्थ्य सेवा!

झारखंड विधान सभा चुनाव 2019 : भूख से मरनेवालों की बढ़ती कतार !

गुवाहाटी में मॉल के बाहर ग्रेनेड विस्फोट में 12 लोग घायल


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जेएनयू में फिर हिंसा: एबीवीपी पर नॉनवेज के नाम पर छात्रों और मेस कर्मचारियों पर हमले का आरोप
    11 Apr 2022
    जेएनयू छात्र संघ ने एक बयान में कहा, “घृणा और विभाजनकारी एजेंडे की अपनी राजनीति का पूर्ण प्रदर्शन करते हुए एबीवीपी के गुंडों ने कावेरी छात्रावास में हिंसक माहौल बनाया है। वे मेस कमेटी को रात के खाने…
  • लाल बहादुर सिंह
    JNU में खाने की नहीं सांस्कृतिक विविधता बचाने और जीने की आज़ादी की लड़ाई
    11 Apr 2022
    जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र खाने के लिए नहीं, सांस्कृतिक विविधता के अनुरूप नागरिकों की जीने की आज़ादी और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।
  • अभिवाद
    सीताराम येचुरी फिर से चुने गए माकपा के महासचिव
    11 Apr 2022
    23वीं पार्टी कांग्रेस ने केरल से केंद्रीय समिति सदस्य एम सी जोसेफिन की मृत्यु पर भी गहरा शोक व्यक्त किया है, जिनकी कांग्रेस में भाग लेने के दौरान हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई।
  • एम. के. भद्रकुमार
    यमन में ईरान समर्थित हूती विजेता
    11 Apr 2022
    माना जाता है कि हूती आज से सात साल पहले के मुक़ाबले तेहरान के कहीं ज़्यादा क़रीब है। ऐसे में इस बात की ज़रूरत है कि अमेरिका ईरान से बातचीत करे।
  • भाषा
    हिंदुत्व एजेंडे से उत्पन्न चुनौती का मुकाबला करने को तैयार है वाम: येचुरी
    11 Apr 2022
    सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए येचुरी ने सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट करने और माकपा की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने केंद्र में भाजपा व उसकी सरकार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License