NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
महाराष्ट्र एक बार फिर भीषण सूखे की चपेट में
महाराष्ट्र एक बार फिर सूखे से जूझ रहा है। यहीं की जलाशयों में सिर्फ 19.35% पानी ही बचा है जिससे लाखों लोग पानी की तलाश में इधर उधर जाने को मजबूर हैं
अमेय तिरोदकर
07 May 2019
drought

महाराष्ट्र एक बार फिर सूखे से जूझ रहा है। ये तस्वीर उत्तरी महाराष्ट्र में नासिक ज़िले के सुरगना तहसील की है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। एक अन्य वीडियो में महिलाओं को पानी के लिए रस्सी के सहारे कुएं में जाते देखा जा सकता है। पूरे महाराष्ट्र से आईं ऐसी तस्वीरें प्रदेश को काफी सदमे में डाल रही है। पूरा प्रदेश सूखे की भारी चपेट में है, जहां प्रदेश के जलाशयों में महज 19.35% जल बचा है जिससे लाखों लोग पानी की तलाश में घरों से बाहर निकलने को मजबूर हैं।


राज्य सरकार की सूचना के अनुसार लोगों को पानी की ज़रूरत पूरी करने के लिए 23 जिलों की 182 तहसीलों में फिलहाल 4,774 पानी के टैंकर आपूर्ति कर रहे हैं। लगभग 9 लाख मवेशी 1,276 चारा शिविरों में हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भारत के चुनाव आयोग से आदर्श आचार संहिता से कुछ राहत देने का अनुरोध किया था क्योंकि सरकार को सूखा राहत के लिए कार्य शुरू करना है जिसे चुनाव आयोग ने मंजूरी दे दी है। सबसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्र मराठवाड़ा है और उसके बाद उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ हैं।

फिलहाल पानी की कमी अभी राज्य तंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह तक राज्य के जलाशयों में केवल 19.35% पानी बचा है। पिछले साल इस समय तक क़रीब 30.84% पानी  था। औरंगाबाद क्षेत्र की स्थिति राज्य में काफी ख़राब है। यहां पिछले साल जहां 28.2% जल था वहीं इस साल महज़ 5.14% ही जल  है। वहीं दूसरे स्थान पर नागपुर है जहां 10.17% जल है। यहां पिछले साल 15.91% था। वहीं नासिक क्षेत्र में पिछले साल के 32.76% के मुक़ाबले 17.78% जल बचा है।

मराठवाड़ा के शहर जैसे लातूर, औसा, धारुर, बीड और जालाना को सप्ताह में केवल एक बार ही पानी मिल पाता है। यहां तक कि औरंगाबाद शहर के लोगों को भी तीन दिनों में केवल एक बार ही पानी उपलब्ध हो रहा है। मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र में पानी की आपूर्ति की योजना पूरी तरह से विफल हो गई है और लोग हर तरफ परेशान हैं।

इस बीच सूखे के दौरान लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में विफल होने के चलते राज्य सरकार की भी भारी आलोचना हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता अश्विनी कुलकर्णी कहते हैं, “मनरेगा का काम अभी भी पूरा नहीं हो रहा है। सूक्ष्म सिंचाई जैसे कार्यों में निवेश से ग्रामीण से शहरी क्षेत्र की तरफ पलायन को रोकने में मदद मिलती जो वर्तमान समय में महाराष्ट्र में हर जगह देखा जा रहा है। साथ ही इससे जल संरक्षण में मदद मिलता। लेकिन मनरेगा के जारी रहने के बावजूद इसे हर जगह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।”


राहत कार्यों में विफलता को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर हमला किया है। नेशनल कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, “सरकार के लोग अपनी ज़िम्मेदारी भूल गए हैं। जब हमारी पार्टी के प्रमुख शरद पवार मतदान के दिन सूखा प्रभावित लोगों से मिलने गए तब राज्य सरकार को अपनी ज़िम्मेदारी याद आई। हम किसानों को तत्काल वित्तीय सहायता और मज़दूरों के लिए तत्काल राहत देने की उम्मीद करते हैं।" कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख अशोक चव्हाण ने कहा कि बीजेपी-शिवसेना नेताओं की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा, “वे सिर्फ वोट चाहते हैं। वे भूल गए हैं कि लोगों की मदद करने और सूखे से प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से पूरे राज्य की मशीनरी लगाना उनका कर्तव्य है। इसके बजाय वे इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने में व्यस्त थें।”

हालांकि मुख्यमंत्री फडणवीस ने सभी ज़रूरी मदद पहुंचाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “हमने सूखे की वजह से अपनी फसल गंवा चुके 68 लाख किसानों को 4,412 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर दिया है। कुल 82 लाख किसान हैं और शेष किसानों को जल्द ही उनकी राशि मिल जाएगी। इसके अलावा अगले कुछ दिनों में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 3,200 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे।"

महाराष्ट्र में मतदान चौथे चरण के साथ 29 अप्रैल को समाप्त हो गया। हालांकि राज्य में पिछले छह महीने से सूखे की स्थिति बनी हुई है लेकिन पिछले तीन महीनों से राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर मीडिया से इस भीषण सूखे की ख़बर ग़ायब हो गई थी। लेकिन चुनावों के साथ सूखे की इस ख़बर को सुर्खियों में फिर लाना ज़रूरी है।

drought in India
draought area in mharastra
devendra fadanvees
drought in mharastra
drought in vidarbha
ground water depletion

Related Stories

बिहारः गर्मी बढ़ने के साथ गहराने लगा जल संकट, ग्राउंड वाटर लेवल में तेज़ी से गिरावट

ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत

कॉप26 : भारत कर रहा है पर्यावरणीय संकटों का सामना  

जलदिवस का राजनैतिक औचित्य

जल संकट : आपका आरओ कितना पानी बर्बाद करता है?

किसान एकबार फिर मुख्य विपक्ष की भूमिका में, 3 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

पानी के बिना विकास की सारी बातें बेमानी हैं!

42 फीसदी भारत सूखे की चपेट में, 6 फीसदी इलाके में हालात ख़तरनाक़

महाराष्ट्र : बद से बदतर होते जा रहे हैं सूखे के हालात


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License