NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
#महाराष्ट्र_सूखा: बोरवेल गहरे होने के बावजूद सूख रहे हैं।
मराठवाड़ा में पानी की कमी अब महाराष्ट्र में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है।
अमय तिरोदकर
07 Mar 2019
Translated by महेश कुमार
उस्मानाबाद के चिंचपुर ढगे गांव का 700 फीट गहरा कुआं

[महाराष्ट्र 1972 के बाद सबसे गंभीर सूखे की चपेट का सामना कर रहा है। राज्य सरकार ने 350 में से 180 तहसीलों में सूखे की घोषणा की है। संपूर्ण मराठवाड़ा (जो दक्षिणी और पूर्वी महाराष्ट्र में फैला हुआ है) क्षेत्र अब बहुत बुरी स्थिति में है। यह न्यूज़क्लिक द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट की श्रृंखला का तीसरा भाग  है।]

भूम: साक्षी बाबू चव्हाण पांचवी कक्षा में पढ़ रही है। यह लड़की बोरवेल के नल के खुलने का इंतजार करती रहती है, ताकि वह चार बाल्टी पानी घर ले जा सके। वह उस्मानाबाद में भूम तहसील के पखरुद गांव में रहती है। यह महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र की सबसे दयनीय तहसीलों में से एक है।

साक्षी कहती है, “हमारा स्कूल शाम 5 बजे बंद हो जाता है। फिर मैं यहाँ पानी लेने के लिए आती हूँ। आमतौर पर हम सभी शाम 7 बजे तक पानी का इंतज़ार करते हैं। हमें लाइन में लगने की ज़रूरत है ताकि हम बाल्टी भरने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर सकें। '' 
 “मैं रात में 10 बजे के बाद पढ़ाई करती हूं। लेकिन मैं लंबे समय तक पढ़ाई नहीं कर सकती। क्योंकि मुझे रोज़  सुबह जल्दी उठने की जरूरत है। 
साक्षी बिजली से चलने वाले बोरवेल के पास खड़ी रहती है। “बिजली शाम को लगभग 7 बजे आती है। तो, हमें उसके बाद ही पानी मिलता है। हालाँकि, इसमें भी पर्याप्त पानी की गारंटी नहीं है।” साक्षी की पड़ोसी समबाई मगर भोसले भी कहती हैं। वो भी कतार में खड़ी हैं। 

मराठवाड़ा में भूजल में गिरावट अब महाराष्ट्र में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। हालिया समाचार रिपोर्टों से पता चलता है कि इस क्षेत्र में 69 में से 24 तहसीलों में जल स्तर 9 मीटर तक नीचे चला गया है। भूम उन तहसीलों में से एक है जहाँ पिछले पांच वर्षों में जल स्तर लगभग 4.09 मीटर तक नीचे चला गया है। इससे बोरवेल के माध्यम से ज़मीन के भीतर गहराई तक भूजल की खोज की जा रही है। 

भूम तहसील के चिंचपुर ढगे गाँव के 29 वर्षीय किसान धनंजय बोजाने के खेत में दो बोरवेल हैं। “एक 600 फ़ीट गहरी है। लेकिन उसमें भी पानी नहीं है। दूसरी 587 फ़ीट गहरी है। यह अब तक ठीक काम कर रही है।” वह कहते हैं। इन बोरवेलों की गहराई से पता चलता है कि मराठवाड़ा में स्थिति कितनी चिंताजनक है। गांव के सरपंच विशाल ढगे कहते हैं, "हमारे गाँव में कुछ बोरवेल हैं जहाँ 700 फ़ीट खुदाई में भी पानी निकालने में मदद नहीं मिल पाई है।"

दिलचस्प बात यह है कि 700 फ़ीट गहराई का मतलब है मुंबई की कोई 46 मंज़िला इमारत, यह मानते हुए कि एक मंज़िल की ऊंचाई 15 फ़ीट है।

आठ ज़िलों में से सात भूजल में कमी के गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। उस्मानाबाद ज़िले के वाशी की बात की जाए तो पिछले पांच वर्षों में पानी के स्तर में 8.3 मीटर की कमी की वजह से ख़ासी गिरावट हुई है। बीड में पिछले पांच वर्षों में यह कमी लगभग पांच मीटर की है; लातूर में 3.5 मीटर; परभणी में 4.5; जालना में 4.3 मीटर, हिंगोली में चार मीटर और औरंगाबाद में 4.2 मीटर है।
जैसे-जैसे लोग पानी की तलाश में अपने खेतों में गहरे कुओं की खुदाई कर रहे हैं, वैसे-वैसे इस क्षेत्र में बोरवेल के कारोबार में तेज़ी देखी जा रही है। धनंजय बोजने कहते हैं, “मैंने एक बोरवेल के लिए 60,000 रुपये ख़र्च किए हैं। यदि आपको अच्छा पानी मिलता है, तो आपको बोरवेल के प्लास्टिक पाइप के लिए 40,000-50,000 रुपये की आवश्यकता होती है।” यह इस बात से भी स्पष्ट हो जाता है जब आप मराठवाड़ा के इस क्षेत्र में यात्रा करते हैं, तो आपको आसपास की दीवारों पर चमकने वाले सबसे ज़्यादा विज्ञापन बोरवेल और पानी के पंपों के मिलेंगे।
इस कमी को लेकर जल संरक्षण विशेषज्ञ काफ़ी चिंतित हैं। सिंचाई विशेषज्ञ प्रदीप पुरंदरे ने बताया, “हमें नियमों और जल तालिका के रखरखाव के सख्त कार्यान्वयन की आवश्यकता है। 2009 से भूजल रखरखाव के लिए एक कानून बना है। लेकिन अभी तक इसके लिए नियम नहीं बनाए गए हैं। इसलिए, यह हर जगह हो रहा है।”
वे कहते हैं, "लोगों का मानना है कि उनके खेतों में भूजल उनकी निजी संपत्ति है। लेकिन ऐसा नहीं है। कुएं का पानी बोरवेल से अलग है। इसलिए, हमें लोगों को इसके बारे में जागरुक करने की ज़रूरत है।

इसे भी पढ़ें: मराठवाड़ा में 1972 के बाद सबसे बड़ा सूखा, किसान और मवेशी दोनों संकट में 

                #महाराष्ट्र_सूखा : उस्मानाबाद में खाली पड़े बाज़ार 

ground water depletion
marathwada
Drought hit Marathwada
Maharashtra drought
bhoom
Osmanabad
BJP
Devendra Fadnavis Government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • corona
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के मामलों में क़रीब 25 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई
    04 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,205 नए मामले सामने आए हैं। जबकि कल 3 मई को कुल 2,568 मामले सामने आए थे।
  • mp
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर
    04 May 2022
    माकपा और कांग्रेस ने इस घटना पर शोक और रोष जाहिर किया है। माकपा ने कहा है कि बजरंग दल के इस आतंक और हत्यारी मुहिम के खिलाफ आदिवासी समुदाय एकजुट होकर विरोध कर रहा है, मगर इसके बाद भी पुलिस मुख्य…
  • hasdev arnay
    सत्यम श्रीवास्तव
    कोर्पोरेट्स द्वारा अपहृत लोकतन्त्र में उम्मीद की किरण बनीं हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं
    04 May 2022
    हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं, लोहिया के शब्दों में ‘निराशा के अंतिम कर्तव्य’ निभा रही हैं। इन्हें ज़रूरत है देशव्यापी समर्थन की और उन तमाम नागरिकों के साथ की जिनका भरोसा अभी भी संविधान और उसमें लिखी…
  • CPI(M) expresses concern over Jodhpur incident, demands strict action from Gehlot government
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग
    04 May 2022
    माकपा के राज्य सचिव अमराराम ने इसे भाजपा-आरएसएस द्वारा साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अनायास नहीं होती बल्कि इनके पीछे धार्मिक कट्टरपंथी क्षुद्र शरारती तत्वों की…
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल
    04 May 2022
    भारत का विवेक उतना ही स्पष्ट है जितना कि रूस की निंदा करने के प्रति जर्मनी का उत्साह।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License