NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
#महाराष्ट्र_सूखा : सूखे से निजात के लिए किसानों को मामूली सरकारी मदद
सरकार द्वारा दी जा रही मामूली राशि पर टिप्पणी करते हुए एक किसान कहते हैं, “क्या आपको लगता है कि हमें मदद मिली है? नहीं! ऐसा सिर्फ चुनाव को लेकर हुआ है।”
अमय तिरोदकर
12 Mar 2019
#MahaDrought
असोला गांव के किसान ग्राम पंचायत की दीवार पर लगी सरकारी सहायता की सूची में अपना नाम तलाशते हुए।

[वर्ष 1972 के बाद से महाराष्ट्र ने कई बार सूखे की मार झेली लेकिन इस बार ये राज्य सबसे ज़्यादा प्रभावित है। राज्य सरकार ने 350 में से 180 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। पूरा मराठवाड़ा (दक्षिणी और पूर्वी महाराष्ट्र का क्षेत्र) क्षेत्र अब बेहद ख़तरनाक स्थिति में है। न्यूज़क्लिक द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट की श्रृंखला का यह पांचवा भाग है।]

maharashtra2.jpg
जब न्यूज़क्लिक इस क्षेत्र में पहुंचा तो देखा कि बीड ज़िले में धरुर तहसील के असोला गांव के किसान ग्राम पंचायत दफ्तर की दीवार पर लगे नोटिस बोर्ड पर अपना नाम खोज रहे थे। उन्हें हाल में ही पता चला था कि सरकार ने सहायता के लिए इस सूची की घोषणा की है। हर कोई इस लंबी सूची में अपना नाम खोज रहा था। कुछ किसान खुश होकर लौट रहे थें कुछ किसान निराश होकर।

इस सूची में पैंतीस साल के महादेव मुंडे का नाम शामिल है। महादेव कहते हैं, "मुझे इस बार हुए अकाल के लिए 5,372 रुपये की सहायता मिली है और भारी बारिश के कारण साल 2016 में हुए फसलों के नुकसान के लिए 4,554 रुपये की सहायता मिली है।" अब तक की कुल सहायता राशि मात्र 9,926 रुपये है। यह पूछे जाने पर कि क्या आप इस राशि से संतुष्ट हैं तो महादेव कहते हैं, “अगर मैं कहूं कि मैं खुश नहीं हूं तो मुझे क्या मिलेगा? क्या यह सरकार मुझे और राशि देगी? इसलिए चुप रहना बेहतर है और जो कुछ भी मिलता है उसे हासिल करें।” यह महाराष्ट्र में किसानों के लिए लागू किए गए योजनाओं की ज़मीनी सच्चाई है जिसका बड़े पैमाने पर प्रचार प्रसार किया गया लेकिन सही तरीके से लागू नहीं किया गया।

महादेव के पड़ोसी रामाशंकर सुरवसे राज्य सरकार द्वारा दी गई सहायता की वास्तविकता बताते हैं। वे कहते हैं, “मेरे पास 3 एकड़ ज़मीन है। मैं प्रति वर्ष कपास की फसल से लगभग 1 लाख रुपये कमाई कर लेता था। लेकिन इस साल महज 40,000 रुपये ही हासिल हुए हैं। इतना तो मैं खेत में ही निवेश करता हूं। बीज से लेकर रोपाई और रोपाई से लेकर खाद पानी तक कुल 40,000 रुपये लगते है। तो इसमें मेरा फायदा क्या है? मतलब कुछ भी नहीं। ऐसी स्थिति में मुझे सहायता के रूप में 6,800 रुपये मिले। क्या यह पर्याप्त होगा? यह मात्र 2100 रुपये प्रति एकड़ है।”

महाराष्ट्र सरकार ने 350 में से 180 तहसीलों में सूखे की घोषणा की है। यह भी घोषणा की गई है कि किसानों का ध्यान रखा जाएगा और किसानों को सहायता राशि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। लेकिन दी गई सहायता राशि इतनी कम है कि कोई किसान इसके सहारे एक महीने भी नहीं रह पाएंगे।

maharashtra3.jpg

किसानों की सूची जिन्हें सरकारी सहायता मिली है।

अखिल भारतीय किसान सभा के डॉ. अजीत नवाले कहते हैं, “हम पहले ही मांग कर चुके हैं कि किसानों को सूखे की सहायता के रूप में 40,000 रुपये मिलने चाहिए। सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाओं की सूची दी है। इसने हमें आश्वासन भी दिया है कि वह प्रति एकड़ सहायता राशि बढ़ाने के बारे में सोचेगी। 2,000 रुपये से लेकर 2,500 रुपये तक इतनी कम राशि है कि यह मदद नहीं है बल्कि यह एक भौंडा मज़ाक की तरह दिखाई देता है।”

लेकिन असोला गांव महाराष्ट्र के उन गांवों में से एक है जो भाग्यशाली था। कई अन्य गांव भी हैं जहां किसानों को न्यूनतम सहायता भी नहीं मिली है। उस्मानाबाद के भूम तहसील में लीत ग्राम के दत्ताभाऊ आसलकर कहते हैं, “अब तक हमारे गांव के किसी भी किसान को सूखे की सहायता के लिए एक रुपया भी नहीं मिला है। हमने केवल टेलीविजन चैनलों पर खबरों में देखा है कि सरकार किसानों को पैसा दे रही है।”

सहायता तथा पुनर्वास मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने फोन पर न्यूज़़क्लिक को बताया कि कई गांवों में राशि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा, “यह सच हो सकता है कि कुछ गांव छूट गए हों। लेकिन मैं सभी किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि राज्य सरकार सूखे का सामना कर रहे सभी लोगों को पर्याप्त मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है। सूखे से संबंधित सहायता और अन्य कार्यों के लिए कुल राशि 8,000 करोड़ रुपये है जो महाराष्ट्र में अब तक की सबसे अधिक राशि है।”

लातूर ज़िले के निलंगा तहसील के बोतकुल गांव के 28 वर्षीय किसान सचिन मोरे अपने गांव में एक केले के खेत में न्यूज़क्लिक को ले गए। इस खेत की पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है। उन्होंने कहा, “इस खेत को देखिए, इसके मालिक इससे कम से कम 3 लाख रुपये कमाते होंगे। लेकिन भीषण सूखे के कारण इनके खेत में कुछ भी नहीं बचा है। मेरी पपीते के खेती की भी यही कहानी है। क्या आपको लगता है कि 2,000-3,000 रुपये की यह छोटी राशि हमारी किसी भी तरह से मदद कर सकती है?"

असोला गांव में पैंसठ वर्ष के पांडुरंग सरोदे ग्राम पंचायत की दीवार पर लगी सरकारी सहायता की सूची को लेकर चुटकी ली। वे कहते हैं. “तुम्हाला वताते ही मदत आली? नहीं। हाय तार इलेक्शन आली! (क्या आपको लगता है कि हमें मदद मिली है? नहीं! ऐसा सिर्फ चुनाव को लेकर हुआ है!)।"

इसे भी पढ़ें: 

सूखाग्रस्त महाराष्ट्रः मराठवाड़ा से स्थायी पलायन की वजह बनी कृषि की विफ़लता

#महाराष्ट्र_सूखा : उस्मानाबाद में खाली पड़े बाज़ार

#महाराष्ट्र_सूखा: बोरवेल गहरे होने के बावजूद सूख रहे हैं।

मराठवाड़ा में 1972 के बाद सबसे बड़ा सूखा, किसान और मवेशी दोनों संकट में

Maharashtra drought
Latur
Osmanabad
Beed
Government Aid for Drought hit Farmers in Maharashtra
Maharashtra Government Aid
General elections2019

Related Stories

महाराष्ट्र में गन्ने की बम्पर फसल, बावजूद किसान ने कुप्रबंधन के चलते खुदकुशी की

मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी

ग्रामीण भारत में कोरोना-17: उपज की क़ीमत जहां कम है वहीं किराना की क़ीमत आसमान छू रही है

ग्रामीण भारत में कोरोना-12 : कटाई ना कर पाने की वजह से लातूर के किसानों की फसलें सड़ रही हैं

आम चुनावों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के बारे में विचार की जरूरत

42 फीसदी भारत सूखे की चपेट में, 6 फीसदी इलाके में हालात ख़तरनाक़

नए भारत का जटिल जनादेश

महाराष्ट्र : बद से बदतर होते जा रहे हैं सूखे के हालात

अतिरिक्त वोट : यूपी-बिहार की 120 में से 119 सीटों के आंकड़ों में अंतर!

दुराचार कर सोशल मीडिया पर वायरल किया वीडियो : मुकदमा दर्ज


बाकी खबरें

  • Rafale and Augusta
    न्यूज़क्लिक टीम
    रफ़ाल और अगुस्ताः अभी और कितने 'कंकाल' बाहर आएंगे Mr. PM
    09 Nov 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने इटली की अगुस्ता VVIP हेलिकॉप्टर सौदे में ब्लैकलिस्टेड कंपनी फिनमिक्का को क्लीन चिट देने और रफ़ाल सौदे में रिश्वत के नये खुलासे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…
  • Tripura Violence
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    त्रिपुरा हिंसा : एडिटर्स गिल्ड, आइडब्ल्यूपीसी ने की यूएपीए वापस लेने की मांग, सीपीआइएमएल का प्रदर्शन
    09 Nov 2021
    त्रिपुरा हिंसा के बाद वकीलों और पत्रकारों पर प्रदेश की पुलिस द्वारा दर्ज किए गए यूएपीए को वापस लेने की मांग एडिटर्स गिल्ड, आइडब्ल्यूपीसी व सीपीआइएमएल ने की है।
  • Pegasus
    एस एन साहू 
    पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला गांधी, राम मोहन राय के नज़रिये की अभिव्यक्ति है
    09 Nov 2021
    कई जाने-माने भारतीयों के फ़ोन की निगरानी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले ने महात्मा गांधी की उस बात का मज़बूती से समर्थन किया है कि अदालतों को सरकार के अधीन नहीं होना चाहिए, बल्कि इंसाफ़ देना चाहिए।
  • Arun Kumar
    न्यूज़क्लिक टीम
    "नकदी हटा देने से काला धन गायब नहीं हुआ": प्रोफेसर अरुण कुमार
    09 Nov 2021
    भारत सरकार के अर्थव्यवस्था से जुड़े आँकड़ों में पाँच साल पहले लागू नोटबंदी के भयानक असर दिखाई नहीं देतेI न्यूज़क्लिक से एक खास बातचीत में प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि इस अचानक लिए फैसले ने देश की…
  • Param Bir Singh
    भाषा
    परमबीर सिंह वसूली प्रकरण: दो पुलिस अधिकारी सात दिनों के लिए सीआईडी हिरासत में भेजे गये
    09 Nov 2021
    सीआईडी ने सोमवार को पुलिस निरीक्षक नंदकुमार गोपाले और निरीक्षक आशा कोरके को गिरफ्तार किया था। ये दोनों पहले मुंबई की अपराध शाखा में तैनात थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License