NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
म्हारो राजस्थान में स्वास्थ्य सेवा निचले पायदान पर
जन स्वास्थ्य अभियान के डॉक्टर नरेंद्र ने कहा कि यह साफ दिखाता है कि राजस्थान सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए गंभीर नहीं है।
ऋतांश आज़ाद
12 Nov 2018
health care
image courtesy: Hindustan times

राजस्थान में दिसंबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और यही वजह है कि जनता अब सरकार के विभिन्न कामों का आंकलन कर रही है। इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं कि स्थिति पर। राजस्थान स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे पिछड़े राज्यों के गिना जाता है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में 21 बड़े राज्यों में राजस्थान 20वें स्थान पर है। यह तथ्य निसंदेह राज्य की स्वस्थ्य सेवाओं की खस्ता हालत को बताता है।

साल की शुरूआत में आई इस रिपोर्ट में नीति आयोग ने स्वस्थ्य राज्यों की एक सूची बनाई थी। इसके मुताबिक राजस्थान स्वास्थ्य के क्षेत्र में सिर्फ उत्तर प्रदेश से बेहतर है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पाँच साल में राजस्थान का लिंग अनुपात बहुत ही खराब रहा है। राज्य में पाँच साल तक के बच्चों में 1000 लड़कों पर सिर्फ 887 लड़कियाँ हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 1000 लड़कों पर 919 लड़कियों का है। इसी तरह राजस्थान में नवजात मृत्यु दर पैदा हुए 1000 बच्चों पर 28 है, जबकि राष्ट्रीय दर 24 है । 

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए जन स्वास्थ्य अभियान के डॉक्टर नरेंद्र ने कहा कि यह साफ दिखाता है कि राजस्थान सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए गंभीर नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार निजीकरण कर रही है, जिससे सेवाएँ महंगी होने के कारण आम जनता से दूर होती जा रहीं हैं।

2016 में राजस्थान सरकार ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत 41 पब्लिक हेल्थ सेंटर निजी हाथों में दे दिये। इस काम के अंतर्गत तय हुआ कि सरकार 5 साल के लिए निजी संस्थाओं को पब्लिक हेल्थ सेंटर चलाने के लिए 22 से 35 लाख रुपये देगी। इस पार्टनरशिप में हुआ यह कि सरकार ने निजी संस्थाओं को इमारत, दवाइयाँ और उपकरण दिये और निजी संगठनों ने स्टाफ प्रदान किया। 2017 में और 57 पब्लिक हेल्थ सेंटर भी पीपीपी के अंतर्गत अंतर्गत लाये गए।

पब्लिक हेल्थ सेंटर का काम टीकाकरण, चेकअप करना, मलेरिया और डेंगू की जाँच करना, सरकारी स्कीमों को लागू करना और बीमारियों से बचाव करने के तरीके बताना है। लेकिन निजी हाथों में दिये जाने के बाद इन सेंटरों में कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि यह बचाव के तरीके नहीं बताते हैं, इनके सरकारी संस्थानों से ज़्यादा महंगे होने कि खबर भी है। यही वजह है कि 2016 में जन स्वास्थ्य अभियान  हाईकोर्ट में इसके खिलाफ गया था। उनका कहना था कि यह पैसा कमाने का ज़रिया बन जाएगा और इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कड़ी भी टूट जाएगी । 

देखा गया कि यह संस्थान बड़ी बीमारियों के लिए मरीज़ो को सरकारी के बजाय निजी अस्पतालों में भेजते हैं। साथ ही इन हेल्थ केयर सेंटरों की स्वास्थ्य अफसरों के प्रति कोई स्पष्ट जवाब देही भी नहीं है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में 2010 से 2017 के बीच सिर्फ एक सरकारी ज़िला अस्पताल बनाया गया है। जहाँ पहले 70 सरकारी  प्राथमिक स्वस्थ्य केन्द्रों में डॉक्टर नहीं थे वहाँ अब 167 में नहीं हैं। पहले जहाँ 218 सर्जन चाहिए थे वहीं अब 452 सर्जनों की ज़रूरत है।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए डॉक्टर नरेंद्र ने कहा कि बड़े सरकारी अस्पताल नहीं बनाए जा रहे और निजी अस्पतालों को तरजीह दी जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में लायी गयी भामाशाह योजना में भी घपला चल रहा है। इस स्कीम के अंतर्गत गरीब परिवारों को छोटी बीमारियों के लिए 30,000 का और बड़ी बीमारियों के लिए 3 लाख का बीमा मिलता है। लेकिन डॉ. नरेंद्र के मुताबिक अस्पताल बीमा के अंतर्गत इलाज करने के बजाय मरीज़ों को अंधेरे में रखकर उनसे पैसा वसूल करते हैं।

कांग्रेस सरकार के अंतर्गत निशुल्क दवाओं और जांच करने की स्कीम चालू की गयी थी। लेकिन डॉ. नरेंद्र के अनुसार यह अब ठीक ढंग से लागू नहीं की जा रही है। होता यह है कि निशुल्क दवाओं के बजाय डॉक्टर अब दूसरी दवाएं लिख देते हैं और अब इसकी ठीक ढंग से निगरानी नहीं की जा रही है।

यह सभी राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहद शर्मनाक स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। विधानसभा चुनावों में स्वास्थ्य सेवाओं की इतनी खराब स्थिति बीजेपी सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।

 

rajasthan government
health care facilities
public health insurance
neeti ayog
health index
privatisation of health

Related Stories

अजमेर : ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह के मायने और उन्हें बदनाम करने की साज़िश

बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

मध्यप्रदेश: सागर से रोज हजारों मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को है मजबूर! 

शर्मनाक : दिव्यांग मरीज़ को एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर पहुंचाया गया अस्पताल, फिर उसी ठेले पर शव घर लाए परिजन

यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी

राजस्थान ने किया शहरी रोज़गार गारंटी योजना का ऐलान- क्या केंद्र सुन रहा है?

राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?

यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग

राजस्थान: REET अभ्यर्थियों को जयपुर में किया गया गिरफ़्तार, बड़े पैमाने पर हुए विरोध के बाद छोड़ा

EXCLUSIVE: सोनभद्र के सिंदूर मकरा में क़हर ढा रहा बुखार, मलेरिया से अब तक 40 आदिवासियों की मौत


बाकी खबरें

  • MP: अवैध बेदखली और लूट के खिलाफ आदिवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव, कहा- सरकार हमसे सीख ले कानून
    सबरंग इंडिया
    मध्य प्रदेश: अवैध बेदखली और लूट के ख़िलाफ़ आदिवासियों का कलेक्ट्रेट घेराव, कहा सरकार हमसे सीखे क़ानून
    22 Jul 2021
    खंडवा में जागृत आदिवासी दलित संगठन के लाल झंडे के नेतृत्व में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के तीन हजार से ज्यादा लोगों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव व धरना प्रदर्शन किया।
  • Pegasus जासूसी कांड का सबसे बड़ा सवाल: क्या सरकार ने स्पाइवेयर नहीं खरीदा?
    न्यूज़क्लिक टीम
    Pegasus जासूसी कांड का सबसे बड़ा सवाल: क्या सरकार ने स्पाइवेयर नहीं खरीदा?
    22 Jul 2021
    सरकार कहती है कि संसद सत्र को पटरी से उतारने के लिए विपक्ष और कुछ अन्य शक्तियों ने योजना के तहत 'पेगासस फोन-जासूसी का हौव्वा खड़ा किया. क्या सरकार का यह आरोप सही है?
  • khori village
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    खोरी गांव में चल रही तोड़-फोड़ की कार्रवाई के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस
    21 Jul 2021
    "खोरी को पूरी दुनिया से काट कर एक गुमनाम मौत देने की पूरी साजिश है हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम की इसलिए आज इस बात ले सख़्त ज़रूरत है कि खोरी की खबर को मीडिया और व्यापक जन आबादी तक ले जाया जाए।'
  • जनांदोलन की रेडिकल दिशा, सधी रणनीति और बुलंद हौसले के साथ किसान-आंदोलन इस देश का भविष्य है
    लाल बहादुर सिंह
    जनांदोलन की रेडिकल दिशा, सधी रणनीति और बुलंद हौसले के साथ किसान-आंदोलन इस देश का भविष्य है
    21 Jul 2021
    ज़ाहिर है यह किसान आंदोलन के evolution में अगला चरण है, अवधारणा के स्तर पर एक जीवंत जनांदोलन द्वारा सांसदों के लिए "पीपुल्स ह्विप" के विचार का गहरा प्रतीकात्मक महत्व है।
  • COVID
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 42,015 नए मामले, 3,998 मरीज़ों की मौत
    21 Jul 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 42,015 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 4 लाख 7 हज़ार 170 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License