NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
महिला पुलिसकर्मियों के हक में सड़कों पर उतरी भाकपा-माले
“पटना पुलिस लाइंस की घटना ने यह उजागर कर दिया कि पुलिस विभाग में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस के बड़े अधिकारी उनका यौन शोषण कर रहे हैं। यह सब कुछ सत्ता की नाक के ठीक नीचे हो रहा है।”
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Nov 2018
CPI ML

बिहार में महिला पुलिसकर्मियों के यौन शोषण व बर्खास्तगी के खिलाफ भाकपा (माले) ने शुक्रवार को राज्यभर में विरोध किया। 
पटना में महिला पुलिसकर्मी सविता पाठक की डेंगू से मौत के बाद पुलिसकर्मियों के उपजे आक्रोश को सरकार द्वारा गंभीरता से लेने व दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की बजाय 77 महिला पुलिस सहित कुल 175 पुलिसवालों की बर्खास्तगी को तत्काल रद्द करने और महिला पुलिसकर्मियों द्वारा उच्च पदाधिकारियों पर लगाए गए यौन शोषण के गंभीर आरोपों को देखते हुए उन अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) ने राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रतिवाद मार्च-सभा का आयोजन किया।
पटना में कारगिल चौक पर यह सभा आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के विधायक दल के नेता महबूब आलम, ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, केंद्रीय कमेटी के सदस्य अभ्युदय, राज्य कमेटी के सदस्य नवीन कुमार, अनिता सिन्हा, जितेन्द्र कुमार, राजेन्द्र पटेल, विभा गुप्ता, मुर्तजा अली आदि नेताओं ने भाग लिया।

कारगिल चौक पर प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए विधायक महबूब आलम ने कहा कि आज भाजपा-जदयू राज में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। कस्तूरबा विद्यालय हो, बालिका शेल्टर हाउस इन सभी संस्थानों में हमने देखा कि सत्ता के संरक्षण में किस प्रकार लड़कियों का घृणित यौन उत्पीड़न हो रहा है। अब पटना पुलिस लाइंस की घटना ने यह उजागर कर दिया कि पुलिस विभाग में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस के बड़े अधिकारी उनका यौन शोषण कर रहे हैं। यह सब कुछ सत्ता की नाक के ठीक नीचे हो रहा है। पुलिस लाइंस में महिला पुलिस कर्मियों का आक्रोश अचानक नहीं फूट पड़ा बल्कि लंबे समय से वह भीतर ही भीतर सुलग रहा था। इतनी बड़ी घटना के घट जाने के बाद भी भाजपा-जदयू की सरकार तनिक भी सीख नहीं लेना चाहती, उलटे उसने तुगलकी फरमान जारी करते हुए 175 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। हम इसके खिलाफ आज सड़कों पर हैं। आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों से हमारी पार्टी पूरी एकजुटता प्रकट करती है।

45891277_285770912046472_6387193217619591168_n.jpg
अखिल भारतीय प्रगतिशील एसोसिएशन (ऐपवा) की बिहार राज्य सचिव शशि यादव ने कहा कि पुलिस लाइंस में महिला पुलिसकर्मियों का यौन उत्पीड़न महिलाओं के शोषण की चरम अभिव्यक्ति है। पुलिस विभाग घोर महिला विरोधी है और वहां कार्यरत महिला पुलिसकर्मियों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। न तो उन्हें उचित वेतन मिलता है और न ही अन्य जरूरी सहायता। इसके बजाय बड़े अधिकारी इन महिला पुलिसकर्मियों का तरह-तरह से यौन उत्पीड़न कर रहे हैं। इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। शनिवार, 10 नवबंर को ऐपवा महिला पुलिसकर्मियों के आंदोलन के समर्थन में कैंडल मार्च का आयोजन कर रही है।
सरोज चौबे ने कहा कि पुलिसकर्मियों की जिस त्वरित गति से बर्खास्तगी हुई है, उससे ऐसा लगता है कि देश में लोकतांत्रिक नहीं बल्कि कोई मध्ययुगीन सरकार चल रही है। सरकार ने लोकतांत्रिक व संवैधानिक मर्यादाओं की तनिक भी चिंता नहीं की है। साथ ही दलित व वंचित वर्ग से आने वाले पुलिसकर्मियों को खासकर निशाना बनाया गया है। इससे भाजपा-जदयू सरकार का घोर सांप्रदायिक, तानाशाही व जातिवादी चरित्र खुलकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि भाजपा-जदयू सरकार द्वारा पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी व उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें बेहद अन्यायपूर्ण व तानाशाह कदम है।
अन्य नेताओं ने कहा कि आज के प्रतिवाद के जरिए हम मांग करने आए हैं कि आंदोलनकारी तमाम पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी अविलंब रद्द की जाए। आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों पर से तमाम मुकदमें वापस लिए जाएं। अत्याचारी पुलिस अधिकारी पर सविता पाठक की हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। सविता पाठक के हत्यारे पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया जाए। पुलिस लाइन में महिला पुलिस के यौन उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए व दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और मृतक सविता पाठक के परिजन को सरकारी नौकरी और 20 लाख मुआवजा दिया जाए।
पटना के अलावा आरा, सिवान, अरवल, जहानाबाद, दरभंगा, भागलपुर, पटना ग्रामीण के विभिन्न प्रखंड केंद्रों, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, नवादा, गया, नालंदा आदि स्थानों पर भी प्रतिवाद मार्च निकाले गए। 
दरभंगा में जिला सचिव वैद्यनाथ यादव, वरिष्ठ नेता आर के सहनी, प्रो. कल्याण भारती, अवधेश सिंह, जंगी यादव आदि के नेतृत्व में मार्च निकला और पोलो मैदान में जिला कमेटी के सदस्य देवेन्द्र कुमार के नेतृत्व में सभा का आयोजन हुआ। आरा में स्टेशन गोलंबर पर प्रतिवाद सभा आयोजित की गई। अरवल में भाकपा माले कार्यालय से चल कर ब्लॉक गेट पर नीतीश कुमार का पुतला जलाया गया। 

CPI(ML)
Bihar
bihar police
Protest
SAVITA PATHAK
PATNA BIHAR

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • general strike
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?
    27 Mar 2022
    भारत के औद्योगिक श्रमिक, कर्मचारी, किसान और खेतिहर मज़दूर ‘लोग बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ 28-29 मार्च 2022 को दो दिवसीय आम हड़ताल करेंगे। इसका मतलब यह है कि न सिर्फ देश के विशाल विनिर्माण क्षेत्र…
  • Bhagat Singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    शहीद भगत सिंह के इतिहास पर एस. इरफ़ान हबीब
    27 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस एपिसोड में नीलांजन ने बात की है इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब से भगत सिंह के इतिहास पर।
  • Raghav Chadha
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..
    27 Mar 2022
    हर हफ़्ते की प्रमुख ख़बरों को लेकर एकबार फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • jaunpur violence against dalits
    विजय विनीत
    उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप
    27 Mar 2022
    आरोप है कि बदलापुर थाने में औरतों और बच्चियों को पीटने से पहले सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पहले उनके कपड़े उतरवाए गए और फिर बेरहमी से पीटा गया। औरतों और लड़कियों ने पुलिस पर यह भी आरोप लगाया कि वे…
  • सोनिया यादव
    अपने ही देश में नस्लभेद अपनों को पराया बना देता है!
    27 Mar 2022
    भारत का संविधान सभी को धर्म, जाति, भाषा, वेशभूषा से परे बिना किसी भेदभाव के एक समान होने की बात करता है, लेकिन नस्लीय भेद इस अनेकता में एकता की भावना को कलंकित करता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License