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भारत
राजनीति
महिला पुलिसकर्मियों के हक में सड़कों पर उतरी भाकपा-माले
“पटना पुलिस लाइंस की घटना ने यह उजागर कर दिया कि पुलिस विभाग में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस के बड़े अधिकारी उनका यौन शोषण कर रहे हैं। यह सब कुछ सत्ता की नाक के ठीक नीचे हो रहा है।”
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Nov 2018
CPI ML

बिहार में महिला पुलिसकर्मियों के यौन शोषण व बर्खास्तगी के खिलाफ भाकपा (माले) ने शुक्रवार को राज्यभर में विरोध किया। 
पटना में महिला पुलिसकर्मी सविता पाठक की डेंगू से मौत के बाद पुलिसकर्मियों के उपजे आक्रोश को सरकार द्वारा गंभीरता से लेने व दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की बजाय 77 महिला पुलिस सहित कुल 175 पुलिसवालों की बर्खास्तगी को तत्काल रद्द करने और महिला पुलिसकर्मियों द्वारा उच्च पदाधिकारियों पर लगाए गए यौन शोषण के गंभीर आरोपों को देखते हुए उन अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) ने राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रतिवाद मार्च-सभा का आयोजन किया।
पटना में कारगिल चौक पर यह सभा आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के विधायक दल के नेता महबूब आलम, ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, राज्य अध्यक्ष सरोज चौबे, केंद्रीय कमेटी के सदस्य अभ्युदय, राज्य कमेटी के सदस्य नवीन कुमार, अनिता सिन्हा, जितेन्द्र कुमार, राजेन्द्र पटेल, विभा गुप्ता, मुर्तजा अली आदि नेताओं ने भाग लिया।

कारगिल चौक पर प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए विधायक महबूब आलम ने कहा कि आज भाजपा-जदयू राज में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। कस्तूरबा विद्यालय हो, बालिका शेल्टर हाउस इन सभी संस्थानों में हमने देखा कि सत्ता के संरक्षण में किस प्रकार लड़कियों का घृणित यौन उत्पीड़न हो रहा है। अब पटना पुलिस लाइंस की घटना ने यह उजागर कर दिया कि पुलिस विभाग में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस के बड़े अधिकारी उनका यौन शोषण कर रहे हैं। यह सब कुछ सत्ता की नाक के ठीक नीचे हो रहा है। पुलिस लाइंस में महिला पुलिस कर्मियों का आक्रोश अचानक नहीं फूट पड़ा बल्कि लंबे समय से वह भीतर ही भीतर सुलग रहा था। इतनी बड़ी घटना के घट जाने के बाद भी भाजपा-जदयू की सरकार तनिक भी सीख नहीं लेना चाहती, उलटे उसने तुगलकी फरमान जारी करते हुए 175 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। हम इसके खिलाफ आज सड़कों पर हैं। आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों से हमारी पार्टी पूरी एकजुटता प्रकट करती है।

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अखिल भारतीय प्रगतिशील एसोसिएशन (ऐपवा) की बिहार राज्य सचिव शशि यादव ने कहा कि पुलिस लाइंस में महिला पुलिसकर्मियों का यौन उत्पीड़न महिलाओं के शोषण की चरम अभिव्यक्ति है। पुलिस विभाग घोर महिला विरोधी है और वहां कार्यरत महिला पुलिसकर्मियों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। न तो उन्हें उचित वेतन मिलता है और न ही अन्य जरूरी सहायता। इसके बजाय बड़े अधिकारी इन महिला पुलिसकर्मियों का तरह-तरह से यौन उत्पीड़न कर रहे हैं। इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। शनिवार, 10 नवबंर को ऐपवा महिला पुलिसकर्मियों के आंदोलन के समर्थन में कैंडल मार्च का आयोजन कर रही है।
सरोज चौबे ने कहा कि पुलिसकर्मियों की जिस त्वरित गति से बर्खास्तगी हुई है, उससे ऐसा लगता है कि देश में लोकतांत्रिक नहीं बल्कि कोई मध्ययुगीन सरकार चल रही है। सरकार ने लोकतांत्रिक व संवैधानिक मर्यादाओं की तनिक भी चिंता नहीं की है। साथ ही दलित व वंचित वर्ग से आने वाले पुलिसकर्मियों को खासकर निशाना बनाया गया है। इससे भाजपा-जदयू सरकार का घोर सांप्रदायिक, तानाशाही व जातिवादी चरित्र खुलकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि भाजपा-जदयू सरकार द्वारा पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी व उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें बेहद अन्यायपूर्ण व तानाशाह कदम है।
अन्य नेताओं ने कहा कि आज के प्रतिवाद के जरिए हम मांग करने आए हैं कि आंदोलनकारी तमाम पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी अविलंब रद्द की जाए। आंदोलनकारी पुलिसकर्मियों पर से तमाम मुकदमें वापस लिए जाएं। अत्याचारी पुलिस अधिकारी पर सविता पाठक की हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। सविता पाठक के हत्यारे पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया जाए। पुलिस लाइन में महिला पुलिस के यौन उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए व दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और मृतक सविता पाठक के परिजन को सरकारी नौकरी और 20 लाख मुआवजा दिया जाए।
पटना के अलावा आरा, सिवान, अरवल, जहानाबाद, दरभंगा, भागलपुर, पटना ग्रामीण के विभिन्न प्रखंड केंद्रों, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, नवादा, गया, नालंदा आदि स्थानों पर भी प्रतिवाद मार्च निकाले गए। 
दरभंगा में जिला सचिव वैद्यनाथ यादव, वरिष्ठ नेता आर के सहनी, प्रो. कल्याण भारती, अवधेश सिंह, जंगी यादव आदि के नेतृत्व में मार्च निकला और पोलो मैदान में जिला कमेटी के सदस्य देवेन्द्र कुमार के नेतृत्व में सभा का आयोजन हुआ। आरा में स्टेशन गोलंबर पर प्रतिवाद सभा आयोजित की गई। अरवल में भाकपा माले कार्यालय से चल कर ब्लॉक गेट पर नीतीश कुमार का पुतला जलाया गया। 

CPI(ML)
Bihar
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Protest
SAVITA PATHAK
PATNA BIHAR

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