NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव : औरंगाबाद औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल
एक स्थानीय भाषाई दैनिक अख़बार ने हाल ही में औरंगाबाद औद्योगिक क्षेत्र और आसपास से 50,000 मज़दूरों, जिनमें से ज़्यादातर ठेका मज़दूर थे, को काम से निकाले जाने की ख़बर छापी है।
अमय तिरोदकर
11 Oct 2019
Translated by महेश कुमार
Maharashtra Assembly Polls
फोटो साभार: न्यूज़ 18 

माधव जेवुघाले अब 59 वर्ष के हैं और पिछले 40 वर्षों से औरंगाबाद की ग्रीव्स कॉटन कंपनी की चिखलथाना इकाई में काम कर रहे हैं। अब उनके रिटायरमेंट में सिर्फ़ एक साल बचा है। लेकिन वे कंपनी में चल रहे हालात के साथ साथ अगली पीढ़ी के मज़दूरों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

जेवुघाले कहते हैं “औद्योगिक मजदूर की अवधारणा को ही योजनाबद्ध तरीके से खत्म किया जा रहा है। इसके पीछे दो वजहें हैं। एक तो इसके पीछे वजह अर्थव्यवस्था का वर्तमान स्वरूप है तो दूसरा मिल मालिकों की नीयत में आया बदलाव है। हमारे वास्तविक मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं, जबकि उनकी कोशिश है कि पहले कम उत्पादन कर मज़दूरों की संख्या में कमी लाई जाए। इसके ज़रिये, वे स्थायी मज़दूरों को समाप्त करना चाहते हैं।”

माधव ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) से जुड़े रहे हैं। उन्हें लगता है कि मराठवाड़ा के पूरे औद्योगिक क्षेत्र में दिन-प्रतिदिन काम कम हो रहा है। उनके अनुसार, यह सब स्वचालित व्यवस्था को लाने के कारण है और यह स्थिति वर्तमान में और साथ ही भविष्य में काम के अवसरों के संदर्भ में श्रमिक बल को मार रही है।

उन्होंने आगे बताया कि “हम अपनी कंपनी में अब केवल 78 स्थायी कर्मचारी बचे हैं। जबकि 1980 में यह संख्या 1,000 थी। कंपनियों को भर्ती के अन्य विकल्प मिल रहे हैं, जैसे ठेके पर मज़दूरों की भर्ती करना आदि। यह अंततः स्थायी श्रमिकों की ताक़त को कम कर देता है।"

औद्योगिक श्रमिकों के सामने एक सबसे गंभीर और महत्वपूर्ण चुनौती यह है कि कंपनियां कई संयंत्रों की स्थापना करके हर जगह काम की क्षमता को कम कर देती हैं। उदाहरण के लिए, ग्रीव्स कॉटन की महाराष्ट्र में तीन इकाइयाँ हैं। यह डीज़ल इंजन बनाती हैं। इस कंपनी को प्रति माह 30,000 इंजनों की आवश्यकता है और इस मात्रा को चिकलथाना प्लांट से ही पूरा किया जा सकता है यानी इस इकाई में ही उपरोक्त संख्या का उत्पादन करने की क्षमता है। जबकि इस संयंत्र में केवल 5,000 इंजन ही निर्मित किए जाते हैं।

जेवुगले समझाते हैं कि आख़िर "इसके मायने क्या हैं?" वे बताते हैं, "यह कंपनी की तरफ़ से एक साफ़ इशारा है, और जो कह रहा है कि उनके पास अपने उत्पाद के उत्पादन के लिए विकल्प मौजूद हैं। यह स्थिति अंतत: वेतन वृद्धि सहित श्रमिकों की विभिन्न मांगों को प्रभावित करती है। यदि हम हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हैं, तो कंपनी अन्य संयंत्रों के माध्यम से उत्पादन को पूरा कर लेती है। कड़वा सच यह है कि हम विकल्पहीन बन गए हैं और इसलिए कंपनी जो कहती है हमें उसे स्वीकार करना पड़ता है।"

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार युवा छात्रों के लिए राष्ट्रीय रोज़गार वृद्धि मिशन (NEEM) योजना लेकर आई, जिससे उन्हें प्रयोगात्मक रूप से  कंपनी में काम का अनुभव हासिल हो सके। लेकिन कम्पनियां इन्हें स्थाई कर्मचारियों की तुलना में बेहद कम तनख़्वाह, क़रीब 30% वेतन पर भर्ती कर लेती हैं, और वे काम करते हैं। औरंगाबाद के बाहर स्थित एक मोरगानाईट आभूषण बनाने वाली कम्पनी में काम करने वाले मज़दूर अशोक गवली के अनुसार “यह एक तरह से शोषण करना हुआ। कम्पनियाँ इन्हें मामूली वेतन देकर उनसे काफ़ी अधिक काम ले रही हैं। न तो इनके पास ग्रेच्युटी की सुविधा है और न कोई बोनस। कुछ भी नहीं।”

वर्तमान में जारी आर्थिक मंदी औद्योगिक मज़दूरों के लिए एक और चिंता का सबब है। हर जगह उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई है। औद्योगिक इलाक़ों में ‘ब्लॉक क्लोज़र’ (नोटिस जारी कर कम्पनी द्वारा कई घंटे या दिनों के लिए बंदी) अब एक नियम सा बन गया है। कई कम्पनियां अपने यहाँ श्रमिकों को हफ़्ते में सिर्फ़ 4 दिन ही काम पर आने के लिए कह रही हैं। नासिक और पुणे कि कुछ औद्योगिक इलाक़ों में तो एक महीने में 12 दिन ग़ैर कार्य दिवस के रूप में अवकाश दिया जा रहा है। छंटनी से अभी तक ठेका मज़दूर प्रभावित हुए हैं, लेकिन स्थिति में जल्दी सुधार नहीं हुआ तो स्थाई श्रमिकों को डर है कि उनका हाल भी ऐसा ही होने जा रहा है। 

गवली के मुताबिक़ “कोई भी कंपनी अपनी इकाइयों को काम की कम क्षमता के साथ नहीं चला सकती है। लेकिन मांग में आई गिरावट ने श्रमिकों को बुरी तरह प्रभावित किया है।"

औरंगाबाद के संदीप पाटिल, जो एक छोटे बिल्डर हैं, वे मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र के आसपास भवन का निर्माण करते रहे हैं। उनके मुख्य ग्राहक शहर में औद्योगिक क्षेत्र के वेतनभोगी वर्ग से हैं। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए पाटिल ने कहा, “आजकल, जो भी घर की बुकिंग या घर ख़रीदने के लिए आता है, वह ईएमआई के भुगतान आदि में रियायतें मांगता है, लेकिन यह मेरा काम नहीं है। यह सब रियायतें बैंकों को देने की ज़रूरत है। लेकिन यह स्थिति वेतनभोगी वर्ग के मन में उस डर को दिखाती है जो छंटनी से आशंकित और भयभीत हैं।"

एक स्थानीय भाषाई दैनिक अख़बार ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में बताया है कि औरंगाबाद के औद्योगिक क्षेत्र और उसके आसपास के इलाक़े में 50,000 नौकरियों में कटौती हुई है, जिसके शिकार मुख्य रूप से ठेका मज़दूर हुए हैं। यह राज्य में स्थिति की गंभीरता की ओर इशारा करता है।

Economic slowdown
Maharashtra Assembly Polls
aurangabad
Aurangabad Industrial Zone
Greaves Cotton
Morganite Production

Related Stories

शर्मनाक: वोट नहीं देने पर दलितों के साथ बर्बरता!

कैसे भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में अब तक हुई प्रगति को मटियामेट कर दिया

मजबूत सरकार से हाहाकारः मजबूर सरकार की दरकार

7 साल: कैसे कम हुआ “शूरवीर” का पराक्रम

मोदी सरकार 2.O के दो साल: विकास तथा राष्ट्रवाद का झंडा और नफ़रत का एजेंडा!

कोरोना की वजह से डर के माहौल में जी रहा ग्रामीण बिहार!

गुजरात: सूरत की डायमंड  इंडस्ट्री आत्महत्या और मौत के कगार पर 

लॉकडाउन से कामगारों के भविष्य तबाह, ज़िंदा रहने के लिए ख़र्च कर रहे हैं अपनी जमापूंजी 

वित्तीय क्षेत्र संकट जीवित टाइम बम बना हुआ है!

एक्सर्साइज़ ड्यूटी का बढ़ना जनता पर क्रूर हमला : सीटू


बाकी खबरें

  • sedition
    भाषा
    सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश
    11 May 2022
    पीठ ने कहा कि राजद्रोह के आरोप से संबंधित सभी लंबित मामले, अपील और कार्यवाही को स्थगित रखा जाना चाहिए। अदालतों द्वारा आरोपियों को दी गई राहत जारी रहेगी। उसने आगे कहा कि प्रावधान की वैधता को चुनौती…
  • बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    एम.ओबैद
    बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    11 May 2022
    "ख़ासकर बिहार में बड़ी संख्या में वैसे बच्चे जाते हैं जिनके घरों में खाना उपलब्ध नहीं होता है। उनके लिए कम से कम एक वक्त के खाने का स्कूल ही आसरा है। लेकिन उन्हें ये भी न मिलना बिहार सरकार की विफलता…
  • मार्को फ़र्नांडीज़
    लैटिन अमेरिका को क्यों एक नई विश्व व्यवस्था की ज़रूरत है?
    11 May 2022
    दुनिया यूक्रेन में युद्ध का अंत देखना चाहती है। हालाँकि, नाटो देश यूक्रेन को हथियारों की खेप बढ़ाकर युद्ध को लम्बा खींचना चाहते हैं और इस घोषणा के साथ कि वे "रूस को कमजोर" बनाना चाहते हैं। यूक्रेन
  • assad
    एम. के. भद्रकुमार
    असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की
    11 May 2022
    राष्ट्रपति बशर अल-असद का यह तेहरान दौरा इस बात का संकेत है कि ईरान, सीरिया की भविष्य की रणनीति का मुख्य आधार बना हुआ है।
  • रवि शंकर दुबे
    इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी
    11 May 2022
    इप्टा की ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में गीतों, नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License