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मज़दूर-किसान
भारत
मई दिवस का तोहफा : डीयू के 100 से ज़्यादा सफाई कर्मचारी काम से बाहर
दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस साल सुलभ इंटरनेशनल के साथ अपना करार तोडकर ‘नेक्स जेन’ नाम की एक नई कंपनी के साथ करार किया है। परिणामस्वरूप, आज यानी पहली मई से 100 से अधिक संविदा सफाई कर्मचारियों को हटा दिया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 May 2019
du contract safaikaramcharis

प्रधानमंत्री मोदी ने एक ओर स्वच्छ भारत के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, वहीं दूसरी और  चुनावों के देखते हुए  कुंभ मेले में सफाई कर्मचारियों के पैर धोने जैसे प्रतीकात्मक और नाटकीय काम भी किए परन्तु वास्तविकता में सफाई कर्मचारियों के जीवन की स्थितियां नहीं बदली हैं। वे आज भी बढ़ते वर्ग और जातिगत शोषण, अनिश्चितता और अपमान की जिंदगी जीने को मज़बूर है। दिल्ली विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों  की वर्तमान स्थिति इसी का एक आदर्श उदाहरण है। पहले सुलभ इंटरनेशनल ने उनका दोहन किया अब एक नयी संस्था ने आकर उन्हें नौकरी से ही निकाल दिया है।

दरअसल 2005 के बाद से, सुलभ इंटरनेशनल को डीयू प्रशासन द्वारा सफाई का ठेका दिया गया था। सुलभ इंटरनेशनल 'स्वैच्छिक' संगठन (NGO) होने के बहाने बनाकर अनुबंधित सफाई कर्मचारियों को उचित वेतन, अवकाश और पीएफ और ईएसएफ की सुविधा देने से लगातार इनकार करता रहा। इस साल, डीयू  ने  सुलभ इंटरनेशनल के साथ अपना करार तोडकर, Nex Gen Manpower Services Pvt Ltd. (NGMS)नामक एक नई कंपनी के साथ करार किया है। परिणामस्वरूप, आज यानी पहली मई  से 100 से अधिक संविदा सफाई कर्मचारियों को हटा दिया गया। जिन कर्मचारियों को हटाया गया है उनको इसका नोटिस भी नहीं दिया गया है। 59385139_2179009215518784_8261029720208965632_n.jpg

डीयू के सफाई कर्मचारियों का कहना है कि पिछले 10-15 सालों से डीयू में काम करते हुए इस विश्वविद्यालय को साफ रखने का काम कर रहे हैं। 2005 से सुलभ इण्टरनेशनल के तहत उन्हें ठेके में काम कराया जा रहा था। इस दौरान उन्हें पीएफ, ईएसआई की सुविधा भी नहीं दी जाती थी। 10-15 सालों से लगातार काम करने के बाद अचानक एक सप्ताह पहले कर्मचारियों को बताया गया कि सुलभ का ठेका खत्म होने के कारण 1 मई से उन्हें काम से हटा दिया जाएगा 

 

कर्मचारियों ने बताया कि नयी कंपनी ‘नेक्स जेन’ जिसको नया ठेका मिला है, हममें से किसी भी पुराने कर्मचारी को काम पर रखने को तैयार नहीं है। वो बाहर से नए लड़कों को लाकर काम कराना चाहती है। 1 मई से हमें काम पर आने से मना कर दिया गया है। 

भारत सरकार ने 1971 में ठेका मज़दूरी उन्मूलन व विनियमन कानून में कहा था कि सभी नियमित किस्म के कामों से ठेका प्रथा को समाप्त कर दिया जायेगा। लेकिन 1971 के बाद से ठेका मज़दूरों की संख्या में दोगुनी-तिगुनी की बढ़ोतरी हुई है। लगभग सभी सरकारों ने इस सवाल पर मज़दूरों को धोखा दिया है। अब तो कोई भी सरकार  ठेका प्रथा के उन्मूलन की बात भी नहीं करती है। बल्कि अब तो आलम यह है निजी नियोक्ता को तो छोड़ दीजिए अब तो लगता है कि सरकार ही ठेके पर चल रही है। 

आज किसी भी सरकारी संस्था को देख लीजिए अब जितने भी नई नियुक्तियां हो रही हैं अधिकतर ठेके पर या आउटसोर्स पर की जा रही हैं। यहाँ तक की उन पदों पर भी ठेके से काम कराया जा रहा है जिनका स्वरूप स्थायी काम का है। भारत के श्रम कानूनों के मुताबिक ये गैर क़ानूनी है परन्तु ये सब हो रहा है। 

यह सिर्फ डीयू में नहीं हो रहा है देश के तमाम संस्थानों की यही हालत है कुछ दिन पहले अभी उत्तराखण्ड गढ़वाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने 150 सुरक्षा कर्मियों और 30 सफाई कर्मचारियों को हटाने का आदेश जारी किया। इनमें से अधिकतर लोग पिछले 17-18 वर्षों से नौकरी कर रहे थे। 

इसे भी पढ़े ;-गढ़वाल विवि का 180 सुरक्षा कर्मियों और सफाई कर्मियों को हटाने का आदेश, छात्रों ने किया विरोध

कर्मचारी दीपक का कहना है कि  पिछले 10-15 सालों से डीयू में एक परिवार की तरह काम करने के दौरान हमारा इस विश्वविद्यालय से लगाव है। हम यहां के छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों को अपना परिवार मानते हैं। परंतु एक झटके में हमारे भविष्य को अंधकारमय करते हुए हमें विश्वविद्यालय से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में हम आप से अपील करते हैं कि हमारी नौकरी बचाने की लड़ाई में आप हमारा सहयोग और समर्थन करें।  

अपनी मांगों को लेकर छात्रों और कर्मचारियों ने कल, 30 अप्रैल को रजिस्टर ऑफिस में ज्ञापन सौंपा था परन्तु कोई हल न निकलने के बाद आज अपने संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने 1 मई मजदूर दिवस पर आर्ट फैकल्टी गेट पर धरना दिया। 

कर्मचारियों की मांग

1. डीयू के सभी निकाले गए सफाई कर्मचारियों को वापस लो।

2. स्थायी काम के लिए स्थायी नौकरी दो।

3. हमारा चोरी किया गया पीएफ, ईएसआई का हमें भुगतान करो।

 

 

Delhi University
CONTRACT SAFAIKARAMCHARIS
workers protest
Contract Workers

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