NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मिड डे मील कर्मियों का दिल्ली में संसद मार्च, न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा मांगा
अपने कर्मचारी होने का हक़ और 18 हज़ार न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर सोमवार को दिल्ली के संसद मार्ग पर मिड-डे मील कर्मियों ने प्रदर्शन कर सभा की।
मुकुंद झा
19 Nov 2018
मिड डे मील कर्मियों की सभा

“हम रसोइया कर्मचारी स्कूल खुलने से पहले आते  है और स्कूल बंद होने के बाद जाते हैं। हमारा काम सिर्फ स्कूल के बच्चों के लिए मध्याह्न (दोपहर) का भोजन बनाने का है परन्तु हम स्कूल में  झाड़ू लगाने के साथ ही शौचालय भी साफ करते हैं। कई बार हमारे साथ स्कूल के अध्यापक गलत व्यवहार करते हैं। और हमें इस सबके बदले मिलता क्या है, केवल एक हज़ार रुपये मासिक मानदेय, वो भी कई माह के अंतराल पर।”

ये कहानी बिहार के मोतिहारी से आई मिड-डे मील यानी मध्याह्न भोजन कर्मचारी रामकांती देवी की है। उन्होंने अपनी ये व्यथा न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बताई। ऐसी ही सैकड़ों कहनियां लेकर हजारों की संख्या में पूरे देश से मिड-डे मील कर्मी आज, सोमवार, 19  नवंबर को दिल्ली के संसद मार्ग पर जमा हुए और सभा कर प्रदर्शन किया। ये कर्मचारी अपने कर्मचारी होने का बुनियादी हक़ मांग रहे हैं। और साथ ही अपने साथ होने वाले शोषण को बंद करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर इनका एक प्रतिनिधिमंडल आज केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिला और अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

46502230_314626425805200_1279899309315194880_n.jpg

आज के प्रदर्शन में मज़दूर संगठन सीटू, एचएमएस, इंटक, एटक और ऐक्टू समेत अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने शिरकत की और केंद्र की मोदी सरकार को ज़ोरदार चेतावनी दी कि अगर कर्मचारियों की मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो हम इससे भी बड़ा आन्दोलन करेंगे।

यूनियनों ने कहा कि देश में जब से मोदी सरकार आई है, वह न केवल कॉरपोरेट घरानों, बड़े पूंजीपतियों के हित में न सिर्फ मजदूरों-कर्मचारियों के धन का इस्तेमाल कर रही है बल्कि वह लगातार जनकल्‍याण योजनाओं के बजट में कटौती कर रही है।

मिड-डे मील कर्मचारियों की कई मांगें थीं। इनमें मुख्य मांगें कुछ इस तरह थीं-

1. सरकारी कर्मचारी का दर्जा दो

2. 18 हज़ार रुपये प्रतिमाह का न्यूनतम वेतन दो

3. सामाजिक सुरक्षा दो

महाराष्ट्र की मिड-डे मील कर्मी रोहणी भोंसले जो चार दिनों की यात्रा करके दिल्ली पहुंची, उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्हें केवल हज़ार रुपये के मानदेय के साथ काम कराया जाता है। उन्हें किसी भी प्रकार का अन्य लाभ नहीं दिया जाता है। मातृत्व अवकाश और अन्य विशेष अवकाश तक नहीं दिया जाता है।

आपको यहाँ जानना चाहिए कि मिड-डे मील का काम करने वाली अधिकतर महिलाएं होती हैं। बिहार जैसे क्षेत्र में तो मिड-डे मील कर्मचारी ज्यादातर विधवा, गरीब पिछड़े तबके की महिलाएं होती हैं। कई के लिए तो जीने का यही सहारा होता है। वे इतने कम पैसे में गुजारा कैसे कर पाएंगी ये सोचने वाली बात है।

झारखंड की मिड-डे मील कर्मी सोनिया देवी ने बताया कि किस तरह से वे अपने हक़ के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब झारखंड की भाजपा सरकार ने महिला कर्मियों के साथ ऐसा व्यवाहर किया जो आप किसी सभ्य समाज में सोच भी नहीं सकते हैं। उन्होंने हमारी महिला साथियों के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि उनसे जेल के शौचालय तक साफ कराए। कई कर्मियों के वस्त्र निकालकर भी पीटा गया। ये सब वो सरकार कर रही है, जो बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का नारा देती है,  दूसरी तरफ महिलाओं को नग्न कर पीटती है।

इस रैली को संबोधित करते हुए मिड-डे मील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीटू) के महासचिव जयभगवान ने कहा की वो आज सरकार से अपने हक मांगने के लिए दिल्ली आए हैं। वे कहते हैं कि मिड-डे मील के बाद से ग्रामीण व आदिवासियों के बच्चों का स्कूली में दाखिला बढ़ा है। साथ ही उनमें कुपोषण में भी कमी आई है, परन्तु ये सरकार इस पूरी योजना को तबाह करने में लगी हुई है। इसमें पिछले वर्षों में दो लाख से  ज्यादा की रोजगार की कमी आई है। सरकार इसके निजीकरण करने का प्रयास कर  रही है जिसका हम पूरे देश में प्रतिरोध कर रहे हैं और इनको हम इसमें कामयाब नहीं होने देंगे।

ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन की गीता मंडल ने कहा कि केंद्र सरकार मात्र हज़ार-बारह सौ में काम करवाकर देशभर के रसोइया कर्मियों का दिन रात शोषण कर रही है। उन्हें 18,000 न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए। इस काम को करने वाली अधिकतर महिलाएं हैं, सरकार को उनकी सुरक्षा तथा सम्मानजनक रोजगार की गारंटी करनी चाहिए।

ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी ने कहा कि केंद्र सरकार आम जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी इस स्कीम का लगातार निजीकरण करने पर तुली है। इस सेक्टर में बजट बढ़ाने के बजाय और कटौती की जा रही है। सभी प्रकार के स्कीम वर्कर्स को न्यूनतम वेतन मिलना चाहिए तथा उनके सम्मानजनक रोजगार की गारंटी होनी चाहिए।

सांसद डी. राजा तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष एन.साई.बालाजी ने भी सभा को संबोधित करते हुए रसोइया कर्मियों के आंदोलन के साथ अपना समर्थन और सहानुभूति व्यक्त की।

सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मोदी सरकार अपने मज़दूर विरोधी और सांप्रदायिक नीतियों से देश को बुरे हालात में धकेल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाली 8 और 9 जनवरी को देशभर के मज़दूर संघर्ष को और तेज़ करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ दो दिन की हड़ताल करेंगे।

mid day meal workers
CITU
AICCTU
hms
INTUC
AITUC
workers protest
Anganwadi Workers
scheme workers

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर


बाकी खबरें

  • china
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    चीन ने अमेरिका से ही सीखा अमेरिकी पूंजीवाद को मात देना
    22 Nov 2021
    चीन में औसत वास्तविक मजदूरी भी हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जो देश की अपनी आर्थिक प्रणाली की एक और सफलता का संकेतक है। इसके विपरीत, अमेरिकी वास्तविक मजदूरी हाल ही में स्थिर हुई है। संयुक्त…
  • kisan andolan
    असद रिज़वी
    लखनऊ में किसान महापंचायत: किसानों को पीएम की बातों पर भरोसा नहीं, एमएसपी की गारंटी की मांग
    22 Nov 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुई “किसान महापंचयत” में जमा किसानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा पर विश्वास की कमी दिखी। किसानों का कहना…
  • farmers movement
    सुबोध वर्मा
    यूपी: कृषि कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंक देने से यह मामला शांत नहीं होगा 
    22 Nov 2021
    ऐसी एक नहीं, बल्कि ढेर सारी वजहें हैं जिसके चलते लोग, खासकर किसान, योगी-मोदी की ‘डबल इंजन’ वाली सरकार से ख़फ़ा हैं।
  • Abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज़ी न्यूज़ के संपादक को UAE ने अपने देश में आने से रोका
    22 Nov 2021
    बोल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा, देश के मेनस्ट्रीम मीडिया और सरकार का अमूमन बचाव करने वाले जी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी' की चर्चा कर रहे हैंI ज़ी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी'…
  • modi
    अनिल जैन
    प्रधानमंत्री ने अपनी किस 'तपस्या’ में कमी रह जाने की बात कही?
    22 Nov 2021
    प्रधानमंत्री कहते हैं कि यह समय किसी को भी दोष देने का नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि यह समय नहीं है दोष देने का तो फिर सरकार के दोषों पर कब चर्चा होनी चाहिए और क्यों नहीं होनी चाहिए?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License