NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कमाई बढ़ाने के लिए रेल में सबकुछ महंगा करने की सिफारिश!
कैग ने रेलवे से सिफारिश की है कि बुजुर्गों को सफर में रियायत नहीं दी जाए। कैंसर मरीजों, विकलांगों सहित अन्य यात्रियों को छूट न दी जाए। सूत्रों की मानें तो यात्री पास समेत मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया 5 से 10 फीसदी तक बढ़ने की संभवाना है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Dec 2019
railways
प्रतीकात्मक तस्वीर

रेलवे से जुड़ी एक ऐसी खबर आयी है जिसे अगर निजीकरण के पक्षधर पढ़ेंगे तो झट से कहेंगे कि रेलवे बदहाल हो चुकी है, उसे निजी हाथों में सौंप देना चाहिए। संसद के पटल पर रेलवे से जुड़ी कैग की रिपोर्ट पेश की गयी। यह रिपोर्ट कहती है कि रेलवे को चलाने का खर्चा यानी परिचालन व्यय ( operating expenditure ) पिछले दस सालों में सबसे अधिक हो चुका है। तकनीकी शब्दावली में कहें तो भारतीय रेल का परिचालन अनुपात (ओआर) वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 प्रतिशत दर्ज किया गया जो पिछले 10 वर्षो में सबसे खराब है। इसका मतलब है कि रेलवे ने 100 रुपये कमाने के लिये 98.44 रूपये खर्च किए।

रिपोर्ट के तहत भारतीय रेल का परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 में 98.44 प्रतिशत रहने का मुख्य कारण पिछले वर्ष 7.63 प्रतिशत संचालन व्यय की तुलना में उच्च वृद्धि दर का 10.29 प्रतिशत होना है। कैग की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि रेलवे को बढ़ते हुए खर्चे से निपटने के लिए रेलवे को अपनी कमाई को बढ़ाने के उपाय करने चाहिए। इसमें सिफारिश की गई है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान रेलवे द्वारा पूंजीगत व्यय में कटौती हुई है। यानी ऐसे खर्चों की कमी की गयी है जिन्हें एक बार करने पर कई वर्षों तक करने की जरुरत नहीं रहती है। जैसे रेल की पटरी, रेल का डिब्बा और रेल का इंजन आदि।

साल 2017 से साल 2018 की रेलवे की नेट रेवेन्यू यानी कमाई में तकरीबन 66 फीसदी की कमी आयी है। साल 2017 में जो कमाई तकरीबन 4913 करोड़ रूपये थी, वह साल 2018 में घटकर तकरीबन 1615 करोड़ हो गयी।

रेलवे की कमाई को बढ़ाने के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को रेलवे से सिफारिश की है कि बुजुर्गों को सफर में रियायत नहीं दी जाए। कैंसर मरीजों, विकलांगों सहित अन्य यात्रियों को यह छूट नहीं देने की बात कही गई है। रेल अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा विशेष यात्रा पास के दुरुपयोग पर रोक नहीं लगा पाने पर भी रेलवे बोर्ड से नाराजगी जाहिर की है।

रेलवे पर दशकों से काम कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार दास कहते हैं कि सूत्रों की मानें तो मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया 5 से 10 फीसदी तक बढ़ने की संभवाना है। रेलवे इस बात पर भी विचार कर रही है कि रोजाना सफर करने वालों लोगों का किराया बढ़ाया जाए और महीने भर सफर करने वाले लोगों के पास का किराया भी बढ़ाया जाए। अभी हाल में ही रेलवे ने कैटरिंग चार्ज को बढ़ाया है।

इस समय अर्थव्यवस्था की हालत बहुत बुरी है। इसलिए रेलवे में भी मांग की कमी है। इसे रेलवे की माल डिब्बों की मांग से समझा जा सकता है। 10500 माल डिब्बों का टारगेट सेट किया था लेकिन बीच में जाकर यह 5000 हुआ और हाल-फिलाहल केवल 1860 माल डिब्बे इस्तेमाल में लाये जा रहे हैं।

अरुण कुमार दास कहते हैं कि ऐसी खबरें आने के बाद बाजार की तरफ देखा जाता है। जिस तरह से अर्थव्यवस्था में बाजार छाया हुआ है उससे बहुत सारे लोग सीधे इस निष्कर्ष पर पहुंचते है कि रेलवे को उबारने के लिए उसे निजी हाथों में सौंप देना चाहिए। किराया बढ़ाने वाली बात कहकर ठीक इसी तरह का इशारा कैग भी कर रहा है। यानी सरकार की सिफारिशें भी लाभ कमाने की मकसद वाली ही हैं। सरकार को यह तय करना पड़ेगा कि रेलवे का असल मकसद क्या है ?

एक जगह से दूसरी जगह तक भारत की आम जनता पहुँच पाए या इससे लाभ कमाया जाए। अगर लाभ कमाने का मकसद है तो रेलवे कभी से फायदा तब तक नहीं होगा जब तक साठ रुपये की टिकट की कीमत बढ़ाकर हजार रूपये नहीं की जाती। लेकिन क्या रेलवे इसलिए है कि इससे लाभ कमाया जाए। यह रेलवे का मकसद नहीं है। पूरा हिंदुस्तान इसमें सफर करता है। यह देश की सबसे बड़ी पब्लिक सेक्टर कंपनी है। यह लाभ कमाने के लिए नहीं बनी है। फायदा -नुकसान की बेकार की बातें छोड़कर इस तरफ ध्यान देना चाहिए कि 300 सीटों वाली जनरल बोगी में भेड़-बकरी की तरफ सफर कर रहे लोगों को सहूलियत देने के लिए और क्या किया जा सकता है? 

indian railways
privatization
CAG
economic crises
BJP
modi sarkar

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध
    02 Feb 2022
    पिछले दिनों झारखंड सरकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों की नियुक्तियों के लिए भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा को धनबाद और बोकारो जिला की स्थानीय भाषा का दर्जा…
  • ukraine
    पीपल्स डिस्पैच
    युद्धोन्माद फैलाना बंद करो कि यूक्रेन बारूद के ढेर पर बैठा है
    02 Feb 2022
    मॉर्निंग स्टार के संपादक बेन चाकों लिखते हैं सैन्य अस्थिरता बेहद जोखिम भरी होती है। डोंबास में नव-नाजियों, भाड़े के लड़ाकों और बंदूक का मनोरंजन पसंद करने वाले युद्ध पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ है।…
  • left candidates
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल
    02 Feb 2022
    “…वामदलों ने ये चुनौती ली है कि लूट-खसोट और उन्माद की राजनीति के खिलाफ एक ध्रुव बनना चाहिए। ये ध्रुव भले ही छोटा ही क्यों न हो, लेकिन इस राजनीतिक शून्यता को खत्म करना चाहिए। इस लिहाज से वामदलों का…
  • health budget
    विकास भदौरिया
    महामारी से नहीं ली सीख, दावों के विपरीत स्वास्थ्य बजट में कटौती नज़र आ रही है
    02 Feb 2022
    कल से पूरे देश में लोकसभा में पेश हुए 2022-2023 बजट की चर्चा हो रही है। एक ओर बेरोज़गारी और गरीबी से त्रस्त देश की आम जनता की सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं हैं, तो
  • 5 election state
    रवि शंकर दुबे
    बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन
    02 Feb 2022
    पूरा देश भारत सरकार के आम बजट पर ध्यान लगाए बैठा था, खास कर चुनावी राज्यों के लोग। लेकिन सरकार का ये बजट कल्पना मात्र से ज्यादा नहीं दिखता।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License