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मन की असली बात : चौकीदार भाइयों के साथ
डिसक्लेमर : इस संबोधन/आलेख (तिरछी नज़र) का माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ से कोई संबंध नहीं हैं। अगर आपको ऐसा लगे तो इसे महज़ संयोग मात्र समझें : लेखक
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
31 Mar 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Lokmatnews.in

मेरे प्यारे चौकीदार भाइयों, पिछले चुनाव से पहले मैं चाय वाला था। इन चुनावों से पहले मैं चौकीदार हूँ। मुझे पता है, इस बार "चाय वाला" नहीं चलेगा इसलिए मैं इस बार  चौकीदार बन गया हूँ। पिछले पांच साल में मेरी वजह से चाय वाले बदनाम हो रहे हैं, उन्हें लोग झूठा समझने लगे हैं, इसलिए चाय वाले के नाम पर तो मुझे वोट मिलने से रहे। इसलिये इस बार चौकीदार बन रहा हूँ। चाय वालों की तरफ से हुई नाराजगी की भरपाई, चौकीदार भाइयों, आपके वोटों से ही हो पायेगी। यह बात अलग है कि मेरे चौकीदार बनने से लोग आपको भी चोर न समझने लगें। जहाँ तक मेरी बात है, अगले चुनाव में मुझे कोई और रूप ढूंढना पडे़गा। ढूंढ लूंगा।

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चौकीदार मित्रों, मैं इन चुनावों में चौकीदार इस लिए बना क्योंकि आपके और मेरे काम में बहुत समानता है। जिस प्रकार आपके ऊपर अपने एरिये की रक्षा करने की जिम्मेदारी होती है उसी प्रकार मेरे ऊपर भी अपने एरिये की रक्षा की जिम्मेदारी है। जैसे कि आपके एरिये में जो अमीर हैं, आप उनकी संम्पत्ति की रक्षा करते हैं, वैसे ही मेरा काम भी देश में अमीरों की सम्पत्ति की रक्षा करना है। आपको मैं विस्तार से समझाता हूँ। मान लो आप अपने एरिये के वाहनों की रक्षा के लिए तैनात हैं। तो जिसके घर में पांच कारें हैं, आप उसकी पांच कारों की रक्षा करेंगे। जिसके यहां एक कार है, उसकी एक कार की रक्षा करेंगे। जिसके यहां बाइक है, उसकी बाइक की रक्षा करेंगे। पर चौकीदार भाइयों, जिसके यहां साइकिल भी नहीं है उसकी किस चीज की रक्षा करोगे। इसी तरह से, चौकीदार भाइयों, मैं भी अडानी, अंबानी की संम्पत्ति की रक्षा करता हूँ। पर चौकीदार भाइयों, जो बहुत ही गरीब है, जिसके पास कुछ भी नहीं है, आखिर उस बेचारे के लिए मैं कर ही  क्या कर सकता हूँ। इस तरह मैं भी आपकी तरह से ही लाचार हूँ, चौकीदार भाइयों।

भाइयों, आप चौकीदारों की तरह से मेरी भी बहुत सी मजबूरियां हैं। आप तो इन मजबूरियों को समझ सकते हैं। अब मान लो, एक चोर है और आपको पता भी है कि वह चोर है। और आप की उससे थोड़ी बहुत दुआ सलाम भी है। ये दुआ सलाम, जान पहचान हो ही जाती है चौकीदार भाइयों। आपका उससे आमना सामना होता रहता है। पर अब आप चाहते हैं कि आपके चौकीदार रहते हुए आपके इलाके में चोरी न हो, तो इसके लिए आप क्या करेंगे। उस चोर को अपने इलाके से भगा देंगे न। आपका इलाका तो सेफ हो गया न। आपके कार्य में कोई कोताही हुई, नहीं न। चौकीदार भाइयों, आपके कार्य में कोताही हुई या नहीं। आप ईमानदार भी हुए या नहीं। मैंने भी तो ऐसा ही किया न। (विजय) माल्या, ललित मोदी, नीरव मोदी, मेहुल भाई जैसों को अपने इलाके से भगा दिया। अब मेरा इलाका (देश) सुरक्षित। अब जो भी चोरी चकारी करनी है इंग्लैण्ड में करें, अमेरिका में करें, और चाहे तो एंटीगुआ में करें पर मेरे इलाके (देश) में तो चोरी नहीं कर सकते हैं न। चौकीदार भाइयों, आप चोर को अपने इलाके से भगाते हैं तो आपका इलाका सुरक्षित। मैंने चोरों को देश से भगाया तो देश सुरक्षित। और मैं ही हूँ देशभक्त।

चौकीदार भाइयों, आप अपनी कमाई से, भले ही वो ऊपर से हो या नीचे से, अपने घर गांव में मकान बनवाते हैं। मैंने भी उसी तरह से दिल्ली में एक भवन का निर्माण किया है। अब आपको तो पता ही है कि मेरा कोई परिवार तो है नहीं। पत्नी को, भाइयों को तो मैंने छोड़ ही रखा है। मां हैं, पर उनकी भी मैं खास चिंता नहीं करता हूँ। मेरा परिवार तो बस मेरी पार्टी ही है। इसीलिए अपनी कमाई से, आप चौकीदार भाइयों की तरह से ही, मैंने दिल्ली में भाजपा का दफ्तर बनवाया है। आप लोग अपना छोटा सा घर बनवाते हो हजारों में या ज्यादा से ज्यादा लाख दो लाख में। पर मैंने फाइव स्टार दफ्तर बनाया है। आप गली मोहल्ले के चौकीदार हो, मैं देश का चौकीदार हूँ। और इतना फर्क तो बनता ही है न।

चौकीदार भाइयों, अब कोई आप लोगों को चोर कहने लगा है तो आपको बुरा तो बहुत लग ही रहा होगा। हुआ क्या कि, जैसे ही मैं चौकीदार बना, आप चौकीदार भाइयों को कोई चोर कहने लगा और लगातार कहे जा रहा है। चुप ही नहीं हो रहा है। मेरा मन किया कि मैं उस पर, जो आपको और मुझे, सबको चोर कह रहा है, मानहानि का मुकदमा दायर कर दूं। पर मेरा एक साथी है, वैसे तो वह साहूकार है पर अब मेरे पीछे पीछे उसने भी चौकीदार लिखना शुरू कर दिया है। तो उसने मानहानि का केस दर्ज कराने के लिए मना कर दिया। यहां उसकी बात माननी ही थी, वह मानहानि के केस का एक्सपर्ट है। जिसके खिलाफ भी मर्जी हो, मानहानि का केस दर्ज कर देता है। तो उसने समझाया, केस दर्ज कराया गया तो बेकार में ही रफ़ाल डील की सारी फाइलें कोर्ट में रखनी पड़ेंगी। और ऐसा हो जाता तो मुझ चौकीदार को सारी बदनामी झेलनी पड़ती और चोर साबित होता, वो अलग। बचने के लिए मैं अकेले ही आखिर कितनी फाइलें चोरी करता या करवाता। पर चौकीदार भाइयों, मुझे आप लोगों की यह बदनामी बहुत ही बुरी लग रही है। मैं तो इसका बदला लूंगा ही, आप भी इसका बदला अवश्य लेना। इस चुनाव में मुझे ही वोट देना।

अंत में : चौकीदार ईमानदार हो, कर्तव्यपरायण हो तो आप सुखी हो सकते हैं। चौकीदार लापरवाह हो, कार्य ढंग से न करता हो तो आप दु:खी हो सकते हैं। पर चौकीदार चोर हो तो आप का भगवान ही मालिक है!

इसे भी पढ़ें : मन की असली बात : फ़ौजी भाइयों के साथ

"मन की असली बात"

(लेखक पेश से चिकित्सक हैं।)

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