NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
मन की असली बात : युवाओं के साथ
"मैं भी कभी युवा था। अगर उम्र नहीं बढ़ती तो मैं आज भी युवा ही रहता। वैसे तो मैं हमेशा ही युवा रहना चाहता था पर मुख्यमंत्री बनना था, प्रधानमंत्री बनना था, इसलिए उम्र बढ़ानी पड़ी।"
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
07 Apr 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : Satyaday

(डिसक्लेमर : इस संबोधन/आलेख का माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ से कोई संबंध नहीं हैं। अगर आपको ऐसा लगे तो इसे महज़ संयोग मात्र समझें : लेखक)

मेरे प्यारे युवा साथियों। इस बार मैं "मन की असली बात" युवाओं के साथ करना चाहता हूं। हमारे देश में बहुत सारे युवा हैं। और उनके मत भी बहुत अधिक हैं। इस लिए उनसे मन की बात करना बहुत ही जरूरी है। बताया जाता है कि हम युवाओं की संख्या में विश्व में सबसे अग्रणी देश हैं। मैं भी कभी युवा था। अगर उम्र नहीं बढ़ती तो मैं आज भी युवा ही रहता। वैसे तो मैं हमेशा ही युवा रहना चाहता था पर मुख्यमंत्री बनना था, प्रधानमंत्री बनना था, इसलिए उम्र बढ़ानी पड़ी।

tirchi najar after change new_8.png

युवा मित्रों, आपके वोट सबसे ज्यादा हैं और हम राजनेता मनुष्य से अधिक वोट पर ध्यान देते हैं, इसलिए युवा मतदाताओं पर मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ। पिछले पांच वर्षों में मैंने युवाओं के लिए बहुत सारी स्कीमें निकाली हैं। जैसे खड़े हो जा (Stand up) इंडिया, मार डाल (SKill) इंडिया, शुरू हो जा (Start up) इंडिया। अगर आप लोगों ने एक बार और मौका दिया तो और भी स्कीम शुरू करूंगा जैसे दौड़ जा (Run) इंडिया, बैठ जा (sit down) इंडिया, लेट जा (Lie down) इंडिया। यह भी सच है कि पांच वर्ष पहले मैंने युवाओं के लिए हर वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था। पर युवाओं को किस चीज की अधिक आवश्यकता है, यह मुझे प्रधानमंत्री बनने के बाद समझ आया।

प्यारे युवा लोगों, प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे समझ में आया कि युवाओं को पढ़ाई और रोजगार से अधिक आवश्यकता है धर्म की और धर्म की राजनीति की। मेरा उदाहरण सामने ही है। मैं स्वयं धर्म और राजनीति के मेल से ही इतना ऊपर पहुंच गया हूं। मैं तो स्वयं भी अधिक पढ़ा लिखा नहीं था और न ही मैंने कोई बड़ा रोजगार किया। पर फिर भी मैं, आप जानते ही हैं कहां से कहां तक पहुंच चुका हूं। अतः मुझे यही ठीक लगा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में मौके धीरे धीरे घटाये जायें और नये मौके पैदा किये जायें। हमने शिक्षा का बजट साल दर साल कम किया। आखिर आप युवा लोग पढ़ें ही क्यों। भाइयों और बहनों, पढ़ लिख कर क्या कर लोगे भई। तलने तो पकोड़े ही हैं। बस थोड़ा बहुत काम चलाऊ पढ़ लिख लें। थोड़ा जमा घटा, थोड़ा गुणा भाग। दस्तखत कर लें, कुछ कल्याण पत्रिका और राम चरित मानस के दोहे चौपाई पढ़ लें। जो युवा अधिक पढना चाहें तो  बस इतना भर पढ़ लें कि गीता पढ़ समझ सकें। दुनियादारी आ जाये बस। इससे ज्यादा पढ़ाई लिखाई अब मैंने किसी भी काम की रहने नहीं दी है। और जहां तक रोजगार की बात है, उसके लिए मेरी सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से हाथ झाड़ लिए हैं। रोजगार के लिए, भाइयों और बहनों, आप चाय बनाना सीख लें, पकौड़े तलना सीख लें, पंक्चर लगाना सीख लें। आपके अपने रोजगार की समस्या भी समाप्त होगी, दो और लोगों को भी नौकरी दोगे।

तो युवा भाईयों और बहनों, मैं तो स्वयं सातवीं कक्षा तक ही पढ़ा था। वह तो मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे लगा कि कुछ अधिक पढ़ा लिखा दिखना चाहिए। इसलिए बी.ए, एम.ए कर लिया, "एंटायर पोलिटिकल साइंस" में। वह भी प्रधानमंत्री बनने के बाद, बैक डेट में। आप सोचिये, जिस देश में बैक डेट में बैंक ड्राफ्ट तक नहीं बन सकता उसी देश में मैं बैक डेट में बी.ए, एम.ए की डिग्री और मार्कशीट बनवा सकता हूँ। तो मेरे नौजवान भाइयों और बहनों, मुझे आप युवाओं को भी अपने जितना ही समर्थ बनाना है। आप भी जो भी कुछ चाहें कर सकें। चाहें तो बैक डेट में भी।

तो मेरे युवा साथियों, इस ऊंचाई तक पहुंचने के लिए आप सब भी धर्म के काज में लगिये। राजनीति में मन लगाइए। धर्म और राजनीति का घालमेल पकाइये। आपको अंदाजा भी नहीं है कि आप कहाँ तक पहुंच सकते हैं। इसीलिए मैंने कोशिश की है, और बहुत कुछ हद तक सफल भी हुआ हूं कि आज के युवा पारंपरिक तरीके के रोजगारों की बजाय धर्म के काम में लगें। राम मंदिर के निर्माण की सोचें। हिन्दू मुसलमान करें। गौरक्षा करें। लव जिहाद रोकें। जो फील्ड में काम न कर पायें, व्हाट्सएप पर करें। 

युवा मित्रों, आप सब समझदार हैं। मुझे देश को बहुत ऊपर पहुंचाना है। जगत गुरु बनाना है। जगत गुरु बनाना है, न शिक्षा के क्षेत्र में, न विज्ञान के क्षेत्र में। और न ही चिकित्सा के क्षेत्र में। इन क्षेत्रों में तो हम सदियों पहले ही जगत गुरु बन चुके हैं। जगत गुरु बनाना है धर्म के क्षेत्र में। तो हे युवा मित्रों, आप सब भगवा धारण कर धर्म के क्षेत्र में कूद पड़ें। पढ़ाई और रोजगार की चिंता खत्म। सम्मान भी मिलेगा सो अलग। साधु जी महाराज, संत महाराज, योगी जी और जोगी जी जैसे संबोधनों से पहचाने जाओगे। राजनीति में भी महत्वपूर्ण माने जाओगे।

नेता जी कहिन : तो युवा भाइयों और बहनों, पढ़ाई और रोजगार को भूलकर धर्म के काम में लग जाओ। इसमें नाम और दाम दोनों मिलेगा। देश को जगत गुरु भी तो बनाना है न। पर हां, इस बार भी प्रधानमंत्री मुझे ही बनाना है। वोट मुझे ही देना है।

इसे भी पढ़ें : मन की असली बात : चौकीदार भाइयों के साथ

मन की असली बात : फ़ौजी भाइयों के साथ

"मन की असली बात"

(लेखक पेश से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
man ki baat
Indian Youth
Narendra modi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • Shiromani Akali Dal
    जगरूप एस. सेखों
    शिरोमणि अकाली दल: क्या यह कभी गौरवशाली रहे अतीत पर पर्दा डालने का वक़्त है?
    20 Jan 2022
    पार्टी को इस बरे में आत्ममंथन करने की जरूरत है, क्योंकि अकाली दल पर बादल परिवार की ‘तानाशाही’ जकड़ के चलते आगामी पंजाब चुनावों में उसे एक बार फिर से शर्मिंदगी का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
  • Roberta Metsola
    मरीना स्ट्रॉस
    कौन हैं यूरोपीय संसद की नई अध्यक्ष रॉबर्टा मेट्सोला? उनके बारे में क्या सोचते हैं यूरोपीय नेता? 
    20 Jan 2022
    रोबर्टा मेट्सोला यूरोपीय संसद के अध्यक्ष पद के लिए चुनी जाने वाली तीसरी महिला हैं।
  • rajni
    अनिल अंशुमन
    'सोहराय' उत्सव के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता का जिक्र करने पर आदिवासी महिला प्रोफ़ेसर बनीं निशाना 
    20 Jan 2022
    सोगोय करते-करते लड़कियों के इतने करीब आ जाते हैं कि लड़कियों के लिए नाचना बहुत मुश्किल हो जाता है. सुनने को तो ये भी आता है कि अंधेरा हो जाने के बाद सीनियर लड़के कॉलेज में नई आई लड़कियों को झाड़ियों…
  • animal
    संदीपन तालुकदार
    मेसोपोटामिया के कुंगा एक ह्यूमन-इंजिनीयर्ड प्रजाति थे : अध्ययन
    20 Jan 2022
    प्राचीन डीएनए के एक नवीनतम विश्लेषण से पता चला है कि कुंगस मनुष्यों द्वारा किए गए क्रॉस-ब्रीडिंग के परिणामस्वरूप हुआ था। मादा गधे और नर सीरियाई जंगली गधे के बीच एक क्रॉस, कुंगा मानव-इंजीनियर…
  • Republic Day parade
    राज कुमार
    पड़ताल: गणतंत्र दिवस परेड से केरल, प. बंगाल और तमिलनाडु की झाकियां क्यों हुईं बाहर
    20 Jan 2022
    26 जनवरी को दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की झांकियां शामिल नहीं होंगी। सवाल उठता है कि आख़िर इन झांकियों में ऐसा क्या था जो इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। केरल की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License