NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मणिपुरः 'मीतेई पुईया' के जलने के बाद समाज में भेदभाव गहराया
मणिपुर में हिंदुत्व के प्रसार के बाद, खासकर सोशल मीडिया में जातिवाद तथा अश्पृश्यता की चर्चा तेज़ हो गई है।
मधु चंद्र
14 Dec 2018
मणिपुर

18 वीं शताब्दी की शुरुआत में मणिपुर आए हिंदू मिशनरी शांतिदास गोसाई ने मीतेई को हिंदू धर्म परिवर्तित कर उनके पवित्र ग्रंथ पुईया को जला दिया। मीतेई पुईया के जल जाने से मणिपुर की संस्कृति, भाषा, धर्म और सामाजिक सद्भाव पर हमला हुआ। मणिपुर में हिंदू धर्म के आगमन के बाद समाज में 'पवित्र' और 'अपवित्र' की अवधारणा ने उत्तर-पूर्वी राज्य में लोगों के जीवन को बहुत ज़्यादा प्रभावित किया है।

मीतेई समाज में जाति के अस्तित्व को राज्य के लोगों ने हमेशा अस्वीकार किया है क्योंकि मणिपुर के लोगों को भारत के तथाकथित 'अस्पृश्यता' के साथ वर्गीकरण करना पसंद नहीं है। लेकिन मणिपुर में पैदाइश से लेकर मौत तक ज़िंदगी के हर पड़ाव में जातिवाद के लक्षण और प्रथा दिखाई देते हैं।

हाल में मणिपुरी में "अमांग और अशेंग" शब्द जिसका मतलब "शुद्ध तथा अशुद्ध" होता है वह सोशल मीडिया में बहस का विषय बन गया। मणिपुर के लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाले शब्द 'जातिवाद' और 'अस्पृश्यता' भी "अमांग और अशेंग" हैं।

पैदाइशी 'शुद्ध तथा अशुद्ध' ख़ून की अवधारणा वैदिक ग्रंथों में जातिवाद के वर्णन के लगभग करीब है।

लेकिन भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर विश्वविद्यालय में हिंदुत्व स्थापित करने के प्रयास के बाद 'शुद्ध तथा अशुद्ध' (अमांग-अशेंग) का इस्तेमाल मणिपुर के लोगों के बीच सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य विषय बन गया। इसे कंगला के पवित्र परिसर में रासलीला मंडप के निर्माण की अफवाहों से और ज्यादा फैलाया गया। इसने उन लोगों को परेशान कर दिया जो सनामहिज्म (मीतेई समाज का स्वदेशी धर्म) के लिए कंगला को संरक्षित करना चाहते थें।

क्या मणिपुर में हिंदू धर्म के आगमन से पहले अमांग-अशेंग मौजूद था?

पिछले 20 वर्षों से मैं मणिपुर में लोगों के जीवन पर जातिवाद और इसके प्रभाव को संबोधित करता रहा हूं। हर बार मैं जाति को एक समस्या के रूप में व्याख्या करता हूं तो मुझ पर जातिवाद को मणिपुर में लाने का आरोप लगाया जाता है। हालांकि मेरी कोशिश मणिपुरी समाज के एक वर्ग के बीच जाति की प्रथा को समझने में लोगों को मदद करना रही है।

ब्राह्मण अन्य समुदायों द्वारा बनाया खाना नहीं खाते हैं, ब्राह्मणों और मीटेई समाज और अन्य समुदायों के बीच विवाह नहीं होता है, गैर ब्राह्मणों के लिए मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध जैसी समस्याएं मणिपुर के वास्तविक मुद्दे हैं। फिर भी इन्हें जाति के मुद्दों के रूप में नहीं देखा जाता है।

मणिपुर में हिंदू धर्म आने से पहले राज्य में मीटेई के साथ-साथ अन्य समुदायों में पवित्र स्थानों, पवित्र दिनों और पवित्र घटनाओं की अवधारणा थी। मीटेई की आस्था की पवित्रता अस्पृश्यता या जाति व्यवस्था से बिल्कुल अलग है। हालांकि हिंदू धर्म को अपनाने के बाद जातिवाद या अस्पृश्यता की प्रथा के साथ उनकी आस्था घुलमिल हो गई।

अमांग-अशेंग जातिवाद और अस्पृश्यता की भ्रमित तथा मिश्रित अवधारणा के लिए उपयुक्त शब्द है।

किसी 'अछूत' द्वारा छू दिए जाने पर ब्राह्मण की अवधारणा दूषित हो रही है, तथाकथित अछूतों द्वारा बनाए गए भोजन को ब्राह्मणों द्वारा न खाने की प्रथा मणिपुर में कभी भी नहीं रही है। लेकिन अब यह राज्य में जीवन का हिस्सा बन गया है।

पहाड़ियों पर रहने वाले लोगों और घाटी के लोगों के बीच विवाह को मणिपुर के इतिहास में देखा जा सकता है। घाटी तथा पहाड़ियों के राजा की दोनों क्षेत्रों की पत्नियां होती थीं। 'अस्पृश्यता' की कोई अवधारणा नहीं थी, जैसे कि मीतेई आदिवासी महिलाओं से शादी करके अपवित्र हो रहे थें। अब हिंदी में शुद्धिकरण और मणिपुरी में शेंगडोपका ऐसे शब्द हैं जो किसी आदिवासी महिला से शादी करने के बाद आयोजित 'शुद्धि' समारोह के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। यह प्रथा हिंदू धर्म अपनाने से पहले मीतेई समाज में कभी अस्तित्व में नहीं थी।

मणिपुर में 'अस्पृश्यता' अब ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है। किसी आदिवासी महिला से शादी करने वाले मीतेई को दो प्रकारों में से किसी एक में शुद्धि समारोह से गुज़रना पड़ता है। इनमें से एक आदिवासी महिला को पानी के साथ मिला हुआ गाय का गोबर या गौमूत्र पीना होता है, जो कि  पुरानी प्रथा है। शुद्धि का दूसरा स्वरूप ब्राह्मणों के चरणों को धोने के बाद इकट्ठा किए गए "पवित्र पानी" को पीने के लिए आदिवासी महिलाओं से कहना है। इसे पवित्र चरण यानी कि ब्राह्मणों के पवित्र पैर के नाम से जाना जाता है।

जब तक शुद्धिकरण समारोह नहीं हो जाता है तब तक मीतेई पुरुष तथा आदिवासी महिला अशुद्ध रहती हैं और पुरुष के माता-पिता, महिला को रसोई में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देते हैं। यदि मनुष्य के माता-पिता की मौत हो जाती है तो शादी करने वाले पुरुष और आदिवासी महिला दोनों को धार्मिक संस्कार करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

हिन्दू धर्म के आगमन से पहले ये सामाजिक पाबंदी मणिपुर के समाज में कभी अस्तित्व में नहीं थी। अमांग-अशेंग मीटेई समाज के बीच और भी जड़ पकड़ ली है और यह ब्राह्मणों तथा मीतेई समाज के बीच सिर्फ विवाह तक ही सीमित नहीं है। यह सामान्य मीतेई और अनुसूचित जाति समुदायों के साथ-साथ पहाड़ी पर रहने वाले लोगों तक भी फैल गया है।

(लेखक मधु चंद्र हैदराबाद स्थित एससी / एसटी संगठनों के अखिल भारतीय संघ के राष्ट्रीय सचिव हैं। ये विचार उनके निजी हैं।)

 

Caste
untouchability
Meitei Puya
Meiteis
hinduism
manipur
Hindutva
Pure-Impure
Amang-Asheng

Related Stories

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली

पूर्वोत्तर के 40% से अधिक छात्रों को महामारी के दौरान पढ़ाई के लिए गैजेट उपलब्ध नहीं रहा

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है

मनोज मुंतशिर ने फिर उगला मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर, ट्विटर पर पोस्ट किया 'भाषण'

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

बीमार लालू फिर निशाने पर क्यों, दो दलित प्रोफेसरों पर हिन्दुत्व का कोप

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’


बाकी खबरें

  • kandyadan
    रवि शंकर दुबे
    ''मैं दान की चीज़ नहीं आपकी बेटी हूं'’ कहकर IAS ने नकारी कन्यादान की रस्म
    18 Dec 2021
    समाज में समानता और सुधार के लिए एक IAS तपस्या ने अपनी शादी में कन्यादान की रस्म नहीं निभाकर एक सोशल मैसेज देने की कोशिश की है।
  • SP and PSP alliance
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव 2022 : सपा और प्रसपा गठबंधन के मायने
    18 Dec 2021
    आज के हालत में अखिलेश और शिवपाल दोनों के पास साथ आने के सिवा कोई विकल्प नहीं था। जिसके के लिए दो रस्ते थे, या तो शिवपाल की पार्टी का सपा में विलय हो जाये या दोनों का चुनाव पूर्व गठबंधन हो, ताकि कम से…
  • KR-Ramesh
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: रेप जैसे गंभीर मामले को लेकर भद्दे मज़ाक के लिए क्या छह मिनट का माफ़ीनामा काफ़ी है?
    18 Dec 2021
    महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाले ये नेता आए दिन अपनी अपनी फूहड़ बातों से महिलाओं की अस्मिता, मान-सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं और दुख इस बात का है कि सब चुप-चाप तमाशा देख रहे हैं, हंस रहे हैं।
  • gig workers
    बी. सिवरामन
    गिग वर्कर्स के क़ानूनी सशक्तिकरण का वक़्त आ गया है
    18 Dec 2021
    गिग वर्कर ओला (OLA) या उबर (Uber) जैसी एग्रीगेटर फर्मों के लिए काम करने वाले टैक्सी ड्राइवर हैं। ज़ोमैटो (Zomato) या स्विगी (Swiggy) जैसी फूड होम डिलीवरी चेन के डिलीवरी वर्कर हैं।
  • army
    भाषा
    बुमला : हिमाचल के ऊंचे इलाकों में भारत-चीन आमने-सामने
    18 Dec 2021
    भारत और चीन के बीच बर्फ से ढकी सीमा, दो विशाल एशियाई पड़ोसियों के बीच बेहद कम प्रचलित सीमाओं में से एक, बुमला दर्रा सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License