NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मनरेगा में समय पर मज़दूरी देने का सरकार का दावा ग़लतः एक अध्ययन
सितंबर महीने में ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) ने दावा किया था कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में "मनरेगा मज़दूरों को मज़दूरी का लगभग 85% वेतन समय पर दिया गया" लेकिन पहले दो तिमाहियों में समय पर देय भुगतान का मात्र 32% ही जारी किया गया था ।

न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Dec 2017
MGNREGA

एक अध्ययन में कहा गया है कि सरकार मनरेगा में मज़दूरों की मज़दूरी के समय पर भुगतान के बारे में ग़लत दावा कर रही है। 1 दिसंबर को अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं ने कहा कि मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम(एमजीएनआरईजीए) के तहत मजदूरों को 3,243 करोड़ रुपए मजदूरी देने का दावा करती है।

सितंबर महीने में ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) ने दावा किया था कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में "मज़दूरों को मज़दूरी का लगभग 85% वेतन समय पर दिया गया"।

लेकिन दस राज्यों में 3,603 ग्राम पंचायतों में किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में पाया गया है कि वित्त वर्ष 2017-18 के पहले दो तिमाहियों में समय पर (काम के सप्ताह के पूरा होने के 15 दिनों के भीतर) देय भुगतान का मात्र 32% ही जारी किया गया था ।

1 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जारी एक वक्तव्य में नरेगा संघर्ष मोर्चा (एनआरईजीए पर सार्वजनिक कार्य में लगे कामगारों, कार्यकर्ताओं, यूनियनों और संगठनों का मंच) ने कहा कि "इस प्रतिरूप में कुल लेनदेन के शेष 68% की भुगतान में देरी पूरी तरह अस्पष्ट या मुआवज़े की भुगतान में देरी के लिए सिर्फ राज्य सरकार की ज़िम्मेदारियों को शुमार किया जाता है।

ये अध्ययन अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के राजेंद्र नारायणन ने स्वतंत्र शोधकर्ताओं सकिना धोराजीवाला और राजेश गोलानी के साथ मिलकर किया।

वास्तव में इन्हीं शोधकर्ताओं ने पहले 10 राज्यों में 3,446 पंचायतों में मनरेगा के भुगतान का विश्लेषण करते हुए 2016-17 के वित्तीय वर्ष के लिए इसी तरह का अध्ययन किया था।

वित्त मंत्रालय (एमओएफ) ने इन निष्कर्षों को स्वीकार किया था जिसे इस अगस्त के 21 तारीख़ वाली एक आंतरिक रिपोर्ट को मीडिया में रिपोर्ट किया गया।

ठीक इस वर्ष किए गए एक अध्ययन की तरह इस अध्ययन से पता चलता है कि भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार दोषपूर्ण तरीक़ों के चलते मज़दूरी के भुगतान की देरी की पूरी तरह असामान्य गणना करती रही है।

एमओआरडी के नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (एनईएफएमएस) के तहत, एनईएफएमएस जो मजदूरी का वास्तविक समय पर स्थानांतरण करता है, काम सप्ताह के पूरा होने पर ब्लॉक/पंचायत स्तर पर फंड ट्रांसफर ऑर्डर (एफटीओ) जारी किया जाता है।

इसके बाद केंद्र एफटीओ को डिजिटल रूप से स्वीकृति देता है और भुगतान की प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक रूप से की जाती है। अध्ययन के अनुसार "एक राष्ट्रीय राज्य सरकार बैंक खाते से गुज़रने के बाद, मजदूरी सीधे श्रमिक के बैंक या डाक खाते में हस्तांतरित कर दी जाती है।"

लेकिन जैसा कि शोधकर्ताओं ने पाया कि उक्त सरकार ब्लॉक/पंचायत में एफटीओ प्रक्रिया होने के बाद होने वाली देरी की गणना नहीं करती है।

आगे कहा कि"यदि यह प्रवृत्ति पूरे देश के लिए सही है तो असली देय लंबित मुआवजा 76 करोड़ रुपए हो जाएगा।”

इसका मतलब है कि न केवल समय पर मजदूरों का भुगतान किया जा रहा है, बल्कि देरी के कारण उन्हें मुआवजे से भी वंचित किया जा रहा है।

संघर्ष मोर्चा ने कहा कि एफटीओ सार्वजनिक नीति प्रबंधन प्रणाली में केंद्र सरकार के स्तर पर लंबित थे। उन्होंने कहा, "केन्द्र सरकार स्तर पर निधियों की कमी के कारण सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली द्वारा तैयार और संसाधित नहीं किए गए फंड ट्रांस्फर ऑर्डर कुल मिलाकर 77% लंबित हैं"।

एमओएफ ने भी स्वीकार किया कि "मौजूदा नियम एफटीओ के जारी होने के बाद न ही भुगतान में देरी की गणना और न ही क्षतिपूर्ति करते हैं।"

एमओएफ की आंतरिक रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया था कि भुगतान में इस तरह की देरी का मुख्य कारण "ढांचागत बाधाएं, धन की (कमी)उपलब्धता और प्रशासनिक अनुपालन की कमी थी।"

नरेगा संघर्ष मोर्चा के अनुसार, "पिछले दो महीनों में, राज्य सरकारों द्वारा जारी सभी एफटीओ का लगभग 100% पेंडिंग ग्रामीण विकास मंत्रालय स्तर पर प्रक्रिया के लिए लंबित रहा है।”

मोर्चा के निष्कर्षों के मुताबिक़, 29 नवंबर तक केरल (एनईफ़एमएस प्रारंभ करने वाला पहला राज्य) में 71 दिनों से, हरियाणा में 59 दिनों से, उत्तराखंड में 40 दिनों से, पंजाब में 39 दिनों से, पश्चिम बंगाल में 36 दिनों से और कर्नाटक में 33 दिन से मज़दूरी का भुगतान नहीं हुआ था।

इन कार्यकर्ताओं ने कहा कि एनईएफएमएस के कार्यान्वयन के बाद पीएफएमएस सर्वर पर एफटीओ पेनेंडेंसी की स्थिति का विश्लेषण करने पर उन्होंने पाया कि एमओआरडी ने कम-से-कम 3,243 करोड़ रुपए की मज़दूरी का भुगतान नहीं किया है जो "संकट" की स्थिति उत्पन्न कर रहा है।

संघर्ष मोर्चा ने कहा कि "क़रीब 3243 करोड़ रूपए मज़दूरी आज तक लंबित हैं। फंड की कमी को देखते हुए आने वाले दिनों में ये आँकड़ा बढ़ने की संभावना है, जो इस संकट को और बढ़ा रहा है"।

मोर्चा ने आगे कहा कि 'यह स्पष्ट है कि अन्य कमियों में से एक पर्याप्त धन की कमी मनरेगा के अपने मुख्य उद्देश्य से पटरी से उतरने का एक प्रमुख कारण है।'

बयान में कहा गया है, "यह सर्वोच्च न्यायालय से आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है कि सभी लंबित वेतन और भुगतान में हुई देरी के चलते मुआवज़े को अदा करना है, यद्यपि गणना जारी है।

नरेगा संघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि सरकार तुरंत सभी लंबित एफटीओ को अदा करे, राज्य तथा केंद्रीय दोनों स्तरों पर देरी के लिए पूर्ण मुआवज़े का भुगतान करे, साथ ही इस योजना के लिए एक पर्याप्त बजट उपलब्ध कराए और मांग के अनुसार काम मुहैय्या कराए।

MGNREGA
MGNREGA Wages
Narendra modi
NDA Govt
NREGA Sangharsh Morcha
Fund Transfer Order

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"


बाकी खबरें

  • veto
    एपी/भाषा
    रूस ने हमले रोकने की मांग करने वाले संरा के प्रस्ताव पर वीटो किया
    26 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।
  • Gujarat
    राजेंद्र शर्मा
    बैठे-ठाले: गोबर-धन को आने दो!
    26 Feb 2022
    छुट्टा जानवरों की आपदा का शोर मचाने वाले यह नहीं भूलें कि इसी आपदा में से गोबर-धन का अवसर निकला है।
  • Leander Paes and Rhea Pillai
    सोनिया यादव
    लिएंडर पेस और रिया पिल्लई मामले में अदालत का फ़ैसला ज़रूरी क्यों है?
    26 Feb 2022
    लिव-इन रिलेशनशिप में घरेलू हिंसा को मान्यता देने वाला ये फ़ैसला अपने आप में उन तमाम पीड़ित महिलाओं के लिए एक उम्मीद है, जो समाज में अपने रिश्ते के अस्तित्व तो लेकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: किस तरफ होगा पूर्वांचल में जनादेश ?
    26 Feb 2022
    इस ख़ास बातचीत में परंजॉय गुहा ठाकुरता और शिव कुमार बात कर रहे हैं यूपी चुनाव में पूर्वांचाल की. आखिर किस तरफ है जनता का रुख? किसको मिलेगी बहुमत? क्या भाजपा अपना गढ़ बचा पायेगी? जवाब ढूंढ रहे हैं…
  • manipur
    शशि शेखर
    मणिपुर चुनाव: भाजपा के 5 साल और पानी को तरसती जनता
    26 Feb 2022
    ड्रग्स, अफस्पा, पहचान और पानी का संकट। नतीजतन, 5 साल की डबल इंजन सरकार को अब फिर से ‘फ्री स्कूटी’ का ही भरोसा रह गया है। अब जनता को तय करना है कि उसे ‘फ्री स्कूटी’ चाहिए या पीने का पानी?    
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License