NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मंगलेश डबराल: लेखक, कवि, पत्रकार
मंगलेश डबराल को कविता, गद्य और अनुवाद के अलावा संगीत, सिनेमा और यात्रा साहित्य में भी उनकी गहरी दिलचस्पी थी. वे हिंदी के अकेले कवि थे जिनकी दोस्ती तमाम भारतीय भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओँ के कवियों के साथ भी थी और इसी वजह से उन्होंने विश्व और भारतीय भाषाओं की तमाम कविताओं के अनुवाद के जरिये हिंदी के पाठकों को समृद्ध किया
संजय जोशी
10 Dec 2020
मंगलेश डबराल

उत्तराखंड के टिहरी जिले के काफलपानी गाँव में 16 मई 1948 को पैदा हुए और वहीं पले -बढ़े मंगलेश डबराल बहुत कम वय में ही दिल्ली आकर पत्रकारिता के पेशे से जुड़ गए. उन्होंने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत ‘प्रतिपक्ष’ साप्ताहिक से की और फिर मध्य प्रदेश साहित्य परिषद की पत्रिका ‘पूर्वग्रह’ से जुड़े और भोपाल में कुछ दिन रहे. उनकी असल साहित्यिक पत्रकारिता 1978 के आसपास इलाहाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘अमृत प्रभात’ से शुरू हुई जिसके रविवारीय साहित्यिक परिशिष्ट का सम्पादन करते हुए उन्होंने साहित्यिक पत्रकारिता की एक नई मिसाल निर्मित की वीरेन डंगवाल जैसे स्वतंत्र व्यक्तित्व से ‘घूमता आइना’ जैसा शानदार साप्ताहिक कॉलम भी लिखवा लिया. साहित्यिक पत्रकारिता का सबसे शानदार दौर जनसत्ता का रहा जब उन्हें एक नए हिंदी अखबार में प्रभाष जोशी जैसे सम्पादक के साथ काम करने का मौका मिला. जनसत्ता में हर सप्ताह अपने परिशिष्ट के मंच पर उन्होंने युवा लेखकों की एक नई पीढ़ी तैयार की जिनसे मंगलेश जी ने साहित्य के अलावा समाज, राजनीति, पर्यावरण, सिनेमा, यात्रा, थिएटर, जेंडर जैसे विषयों पर नई दृष्टि के साथ लिखवाया. इस मंच को उन्होंने विश्व कविता और भारतीय भाषाओं की कविता के अनूठे अनुवाद का मंच भी बनाया और सुरेश सलिल जैसे महत्वपूर्ण अनुवादक हिंदी को दिए.

अपने पहले कविता संग्रह ‘पहाड़ पर लालटेन’ से ही हिंदी कविता में अपनी ख़ास पहचान बनाने वाले मंगलेश डबराल ने निरंतर शानदार कविताओं की रचना करी और उनके कुल पांच संग्रह प्रकाशित हुए. उनको कविता के लिए ‘पहल’, ‘साहित्य अकादमी’, ‘ओम प्रकाश स्मृति’ जैसे महत्वपूर्ण सम्मान हासिल हुए. कविता के साथ –साथ उनकी गद्य और अनुवाद में भी गहरी पकड़ थी. बांग्ला के मशहूर कवि नवारुण भट्टाचार्य को हिंदी में परिचित करवाने का श्रेय भी उन्हें जाता है जिनके हिंदी में अनुवादित कविता संग्रह ‘यह मृत्यु उपत्यका नहीं है मेरा देश’ के सह अनुवादक भी थे.

कविता, गद्य और अनुवाद के अलावा संगीत, सिनेमा और यात्रा साहित्य में भी उनकी गहरी दिलचस्पी थी. वे हिंदी के अकेले कवि थे जिनकी दोस्ती तमाम भारतीय भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओँ के कवियों के साथ भी थी और इसी वजह से उन्होंने विश्व और भारतीय भाषाओं की तमाम कविताओं के अनुवाद के जरिये हिंदी के पाठकों को समृद्ध किया. उनकी कविताओं के कई भाषाओँ में अनुवाद हुए और पिछले दिनों इतालवी की अनुवादिका मरिओला ओफेदी ने उनके कविता संग्रह ‘आवाज़ भी एक जगह है’ का इतालवी अनुवाद ‘अंकेला वोचे ऐ उन लुओगे’ नाम से प्रकाशित किया.

आजीवन लोकतान्त्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबध्द फ़ेसबुक माध्यम के आने के बाद अक्सर अपनी पोस्टों के जरिये दक्षिणपंथियों से गहरी बहस में उलझे रहते. इसी प्रतिबद्धता के चलते उन्होंने 2017 में अवार्ड वापिसी अभियान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और अपना साहित्य अकादमी का अवार्ड वापिस किया.

वे जन संस्कृति मंच से जुड़े थे और इसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे.

साभार : आईसीएफ

manglesh dabral
Manglesh Dabral dies
writer
poet
journalist

Related Stories

मंगलेश को याद करते हुए

नागरिकों से बदले पर उतारू सरकार, बलिया-पत्रकार एकता दिखाती राह

बलिया पेपर लीक मामला: ज़मानत पर रिहा पत्रकारों का जगह-जगह स्वागत, लेकिन लड़ाई अभी बाक़ी है

जीत गया बलिया के पत्रकारों का 'संघर्ष', संगीन धाराएं हटाई गई, सभी ज़मानत पर छूटे

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

तिरछी नज़र: कुछ भी मत छापो, श..श..श… देश में सब गोपनीय है

सीधी प्रकरण: अस्वीकार्य है कला, संस्कृति और पत्रकारिता पर अमानवीयता

पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव

यूपी बोर्डः पेपर लीक प्रकरण में "अमर उजाला" ने जेल जाने वाले अपने ही पत्रकारों से क्यों झाड़ लिया पल्ला?


बाकी खबरें

  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर : कश्मीर हिंसा या सिंघु लिंचिंगः साज़िश ही साज़िश
    19 Oct 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने कश्मीर में बढ़ती हिंसा और सिंघु बॉडर में हुई लिंचिग के पीछे की साज़िश पर कश्मीर के नेता यूसुफ़ तारागामी और अर्थशास्त्री नवशरण कौर से बातचीत की। एक तरफ़ किसान…
  • priyanka
    असद रिज़वी
    यूपी चुनावों में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने का कांग्रेस का ऐलान
    19 Oct 2021
    महिला संगठनों और समाजसेवियों ने इस फ़ैसले की प्रशंसा तो की है लेकिन कांग्रेस पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर न होने का आरोप भी लगाया है।
  • Prashant
    विजय विनीत
    चंपारण से बनारस पहुंची सत्याग्रह यात्रा, पंचायत में बोले प्रशांत भूषण- किसानों की सुनामी में बह जाएगी भाजपा 
    19 Oct 2021
    "किसानों की हुंकार बता रही है कि मोदी-योगी सरकार को अपना अहंकार तोड़ना होगा। अगर तीनों कृषि कानून लागू हो गए तो देश की मंडियां अंबानी और अडानी के हाथ में चली जाएंगी। तब किसानों को अपनी जमीन पर…
  • prisons
    भरत डोगरा
    भारतीय जेलों के लिए  बजट में क्या गड़बड़ी है?
    19 Oct 2021
    जेलों में स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, सुधार सेवाओं और कल्याण को बहुत कम प्राथमिकता दी जाती है।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    कश्मीर में दहशत का माहौल, किसानों का रेल रोको आंदोलन और अन्य ख़बरें
    19 Oct 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी कश्मीर में दहशत का माहौल, किसानों ने किया रेल रोको आंदोलन और अन्य पर
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License