NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मोदी जी, जनता संतुष्ट नहीं है!
मोदी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था के बारे में सभी तरह की जुमलेबाज़ी के बावजूद, आरबीआई के उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण (सीसीएस) से पता चलता है कि अर्थव्यवस्था खराब हालत में है, कीमतें बढ़ रही हैं और नौकरियां कम हो रही हैं।
सुबोध वर्मा
10 Oct 2018
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

एक तरफ तो, प्रधानमंत्री मोदी का दावा है कि भारत एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, और यह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, दुनिया भर में लोग भारत की प्रशंसा कर रहे हैं, वगैरह वगरैह।

दूसरी तरफ, भारतीय खुद ही इस तरह के ढोल पीटने के बारे में सरकार पर बड़ी तेजी से संदेह कर रहे हैं। आरबीआई द्वारा हाल ही में जारी किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 44 प्रतिशत लोग सोचते हैं कि आर्थिक स्थिति खराब हो गई है जबकि 22 फीसदी सोचते हैं कि यह पहले से कुछ खास अलग नहीं है। इसमें केवल 34 प्रतिशत महसूस करते है कि कुछ सुधार हुआ है।

अर्थव्यवस्था के बारे में यह मंद विचार सिर्फ एक घबराहट का एहसास नहीं है। जैसा कि सर्वेक्षण से पता चलता है, रोजगार के बारे में लोगों की धारणा रिकॉर्ड 45.5 प्रतिशत के साथ बेहद नकारात्मक है और उन्होंने कहा है कि नौकरी की स्थिति बहुत खराब हो गई है, जबकि 19 प्रतिशत का कहना है कि स्थिति जस की तस है।

job situation.jpg

कीमतों के सवाल पर, 88 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कीमतें बढ़ी हैं, और इनकी तुलना में सिर्फ तीन प्रतिशत लोगों ने कहा कि कीमतें कम हो गई हैं। आय पर, 48 प्रतिशत ने कहा कि स्तर समान है जबकि 23 प्रतिशत से अधिक ने कहा कि आय में कमी आई है। 78 प्रतिशत से अधिक लोगों ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं पर उनका खर्च ज्यादा बढ़ गया है।

सर्वेक्षण शहरी गुस्से को दर्शाता है क्योंकि इस सर्वेक्षण को लगभग 5,360 परिवारों के साथ  13 शहरों में किया गया था। नमूना आकार बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन चूंकि कई वर्षों से इनके वही शहर और समान आकार है, इसलिए मोहभंग के रुझान तेज और स्पष्ट हैं। इसे 'उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण' के रूप में जाना जाता है, और यह हर तिमाही में किया जाता है।

सर्वेक्षण में लोगों से पूछा गया कि उन्होंने आने वाले वर्ष के बारे में क्या सोचा है- भविष्य में आगे चलकर चीजें कैसी होंगी। आम तौर पर, यह महसूस किया गया कि चीजें बेहतर होंगी, लेकिन एक बड़ी संख्या यह भी कह रही थी कि कुछ भी नहीं बदलेगा। जहां तक सामान्य आर्थिक स्थिति का सवाल था, सर्वेक्षण में 53 प्रतिशत ने कहा कि इसमें अगले वर्ष में सुधार होगा।

रोजगार की स्थिति भयानक

इस बीच, सीएमआईई द्वारा पेश किए गए नवीनतम सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारों की संख्या 6.7 प्रतिशत है जो हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है। यह कारण स्पष्ट रूप से बताता है कि आरबीआई  के सर्वेक्षण में नौकरियों के बारे में इतनी गहरी निराशा क्यों है।

सीएमआईई ने स्त्री श्रम भागीदारी दरों की चौंकाने वाले आंकड़े भी जारी किए हैं, जो कि मई-अगस्त 2018 के दौरान केवल 10.65 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गए हैं। जैसा कि सीएमआईई के महेश व्यास ने बताया है, महिला श्रम भागीदारी की इस अबाध दर ने भारत को सिर्फ यमन से ऊपर रखा है जहां यह दर 6 प्रतिशत पर जबकि दुनिया में सबसे कम दर है।

इसके विपरीत मोदी और जेटली की जोड़ी के मुताबिक ‘अच्छे दिन’ आ गए हैं और उनका जश्न मनाया जाना चाहिए। साथ ही, ये आंकड़े ईपीएफ या ईएसआई नामांकन के आधार पर चालाक सरकारी अर्थशास्त्री जो मोटी "तनख़्वाह" ले रहे हैं के अत्यधिक संदिग्ध आँकड़ों का खंडन करते हैं।

यह आश्चर्य की बात है कि चुनाव सर्वेक्षण इस साल नवंबर-दिसंबर में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए कठिन लड़ाई की भविष्यवाणी कर रहे हैं।

BJP
Narendra modi
unemployment
Jobs
Jobless growth
ccs
Achche Din

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License