NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोदी काल: पत्रकारिता के लिए बर्बादी के साल
बीते कुछ समय में समाचार समूहों द्वारा सत्ता विरोधी खबरों को दबाया गया या दबाव के कारण ऐसी खबरों को वापिस ले लिया गया।
हर्ष कुमार
26 Jun 2018
अमित शाह

लोकतंत्र के चौथे खम्भे यानी मीडिया की आवाज़ को दबाने की कोशिश समय-समय पर सत्ता द्वारा की जाती रही है। चाहे 1975 में इमरजेंसी के दौरान पत्रकारों की अभिव्यक्ति छीनना हो या मौजूदा समय में एक अप्रत्यक्ष इमरजेंसी का दौर पैदा करना हो। पेरिस स्थित एनजीओ “रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर” के 2018 के अध्ययन अनुसार पत्रकारों की स्वतंत्रता की श्रेणी में भारत 180 देशों में 138वें स्थान पर है। मौजूदा भाजपा के 4 साल के शासन काल में पत्रकारिता जगत में खौफ का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन सालों में कई बार समाचार समूहों  ने सत्ता विरोधी खबरों को दबाया  या राजनीतिक दबाव के कारण ऐसी छापी गयी खबरों को वापस ले लिया।

हाल ही में समाचार एजेंसी आई.ए.एन.एस ने मनोरंजन रॉय द्वारा दायर आर.टी.आई के आधार पर एक खबर छापी। आर.टी.आई से खुलासा हुआ कि 8 नवंबर 2016 को लागू की गई नोटबंदी के दौरान महज़ पाँच दिनों (13 नवबंर तक) में अहमदाबाद के ज़िला सहकारी बैंक में 745 करोड़ रुपए जमा किए गए,जो  देश  के किसी भी बैंक के मुकाबले सबसे अधिक है।

यह भी पढ़े अहमदाबाद के एक बैंक और अमित शाह का दिलचस्प मामला

 

शुरुआत में इस खबर को कई समाचार समूहों ने छापा मगर खबर छापने के कुछ ही घंटों के भीतर कई नामी समाचार पत्रों की वेबसाइट जैसे फर्स्टपोस्ट,न्यू इंडियन एक्सप्रेस,टाइम्स नाओ और न्यूज़ 18 ने इसे अपनी वेबसाइट से हटा लिया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी वेबसाइट ने खबर छापकर उसे हटा लिया होI बीते 4 सालों में कई मौकों पर ऐसा होता रहा है जब सत्ता पर आसीन नेताओं के विरोध में जाने वाली खबरों को दबाव में हटाया गया हो।

इससे पहले 9 अक्टूबर 2017 को एन.डी.टी.वी. के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीनिवासन जैन और मानस प्रताप सिंह ने अमित शाह के बेटे जय शाह पर एक खबर छापी जिसका प्रसारण टी.वी पर भी किया गया। खबर में बताया गया कि कैसे जय शाह की कम्पनी को आश्र्चर्यजनक तरह से लोन दिए गए। इस खबर के छपने के एक हफ्ते बाद एन.डी.टी.वी. की वेबसाइट से इसे हटा लिया गया। एन.डी.टी.वी. के अनुसार उन्हें कानूनी कारणों की वजह से ऐसा करना पड़ा। गौरतलब है कि  इससे पहले द वायर ने जय शाह की कम्पनी के मुनाफे में 2014 के बाद आईआश्चर्यजनक बढ़त पर एक खबर छापी थी । बड़े मीडिया संसथान इस खबर पर अधिक जानकारी इकठ्ठा करने और इस पर बात करने तकसे बचते नज़र आयेI

 

14 सितम्बर 2017 को टाइम्स ऑफ इंडिया के जयपुर संस्करण ने मोदी सरकार की “प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना“ की आलोचना करते हुए एक लेख छापा था। लेख में में बताया गया कि कैसे इस योजना का लाभ किसानों को मिलने की बजाए बीमा कम्पनीयों को मिल रहा हैI रिर्पोट के अनुसार अप्रेल 2017 तक इस योजना से बीमा कम्पनीयों को 10 हज़ार करोड़ का मुनाफा हुआ है। इस खबर को अख़बार की वेबसाइट से कुछ ही घंटों के बाद हटा लिया गया।

 

जुलाई 2017 में टाइम्स ऑफ इंडिया के अहमदाबाद संस्करण ने अमित शाह से जुड़ी खबर छापी थी।अख़बार ने यह खुलासा किया कि  2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2017 के राज्यसभा चुनाव में अमित शाह द्वारा दायर हलफनामें से मालूम चलता है की 5 साल में उनकी संपत्ती में 300 फीसदी का इज़ाफा हुआ है।लेकिन खबर प्रकाशित होने के कुछ ही घंटो के भीतर अख़बार की वेबसाइट से इस खबर को हटा लिया गया । अखबार की ओर से इस बाबत कोई स्पष्टीकरण नहीं आया की ख़बर क्यों  हटाई गई।

इसी कड़ी में मई 2014 में टाइम्स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्स और इकोनॉमिक टाइम्स ने स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर एक खबर छापी थी। खबर के अनुसार स्मृति ईरानी ने 2014 लोकसभा चुनाव में दायर हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता दिल्ली  विश्विद्यालय के स्कूल ऑफकॉर्रेस्पोंडेंस से बीकॉम पार्ट वन 1994 बतायी थी।यही जानकारी उन्होंने 2011 के राज्यसभा चुनाव में भी दी थी, लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में ईरानी द्वारा दायर हलफनामे में उन्होंनेबताया था कि 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने बी.ए  की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इस खबर को भी कुछ समय बाद ऊपर की तीनों वेबसाइट नहटा लिया।

smriti irani

 यह भी पढ़े  कोबरापोस्ट जाँच : पत्रकारिता की पवित्रता गहरे खतरे में

ग़ौरतलब है कि हाल ही में क पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद कशमीरी विधायक लाल सिंघ ने पत्रकारों  को धमकाते हुए कहा की अपनी सीमा में रहें नहीं तो उनका हाल भी  शुजात की तरह हो जाएगा।इस तरह के बयान दर्शातें हैं कि किस कदर मौजूदा आलाकमान विरोध में उठ रहीं किसी भी आवाज़ को कुचल देना चाहती है ।

 

Amit Shah
stories removed by media
BJP corruption
BJP
smriti irani

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • china
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    चीन ने अमेरिका से ही सीखा अमेरिकी पूंजीवाद को मात देना
    22 Nov 2021
    चीन में औसत वास्तविक मजदूरी भी हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है, जो देश की अपनी आर्थिक प्रणाली की एक और सफलता का संकेतक है। इसके विपरीत, अमेरिकी वास्तविक मजदूरी हाल ही में स्थिर हुई है। संयुक्त…
  • kisan andolan
    असद रिज़वी
    लखनऊ में किसान महापंचायत: किसानों को पीएम की बातों पर भरोसा नहीं, एमएसपी की गारंटी की मांग
    22 Nov 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुई “किसान महापंचयत” में जमा किसानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन विवादास्पद कृषि क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा पर विश्वास की कमी दिखी। किसानों का कहना…
  • farmers movement
    सुबोध वर्मा
    यूपी: कृषि कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंक देने से यह मामला शांत नहीं होगा 
    22 Nov 2021
    ऐसी एक नहीं, बल्कि ढेर सारी वजहें हैं जिसके चलते लोग, खासकर किसान, योगी-मोदी की ‘डबल इंजन’ वाली सरकार से ख़फ़ा हैं।
  • Abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    ज़ी न्यूज़ के संपादक को UAE ने अपने देश में आने से रोका
    22 Nov 2021
    बोल' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा, देश के मेनस्ट्रीम मीडिया और सरकार का अमूमन बचाव करने वाले जी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी' की चर्चा कर रहे हैंI ज़ी न्यूज़ के संपादक 'सुधीर चौधरी'…
  • modi
    अनिल जैन
    प्रधानमंत्री ने अपनी किस 'तपस्या’ में कमी रह जाने की बात कही?
    22 Nov 2021
    प्रधानमंत्री कहते हैं कि यह समय किसी को भी दोष देने का नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि यह समय नहीं है दोष देने का तो फिर सरकार के दोषों पर कब चर्चा होनी चाहिए और क्यों नहीं होनी चाहिए?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License