NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोदी की असफलता : बड़ा फण्ड मुहैया कराने के बावजूद नजाने क्यों रोज़गार सृजन योजनायें हो रही हैं असफल ?
मोदी की तीन बड़ी योजनाओं ने चार वर्षों में केवल 18 लाख रोज़गार पैदा किये हैं I

सुबोध वर्मा
19 May 2018
Translated by महेश कुमार
Pradhan mantri

बहुत प्रचारित कौशल विकास कार्यक्रम की तरह, जिसने उदासीन परिणाम पैदा किये हैं, मोदी सरकार की तीन अन्य रोजगार उत्पादन की योजनाएं भी कोई भी उल्लेखनीय तरक्की करने में विफल रही हैं। नौकरी सृजन की मोदी की पूरी रणनीति – स्वचालित स्व-रोज़गार को बढ़ावा देने के आधार पर थी – जो शुरुआत में ही गड्ढे में गिर गयी थी। यह एक गलत धारणा पर ही आधारित था कि आपको केवल कुछ कौशल और कुछ लाख रुपये की और प्रतिष्ठा की जरूरत है और बदले में समृद्धि सबसे गरीब को भी गले लगा लेगी।

आरएसएस धर्मशास्त्र से व्युत्पन्न यह आदर्श दृष्टिकोण कभी काम नहीं करेगा। और, मोदी के चार साल ने इसे दिखाया दिया है। आइये इन तीन योजनाओं के परिणामों को देखें। प्रधान मंत्री रोजगार रोजगार कार्यक्रम (पीएमईजीपी) वास्तव में पिछली यूपीए सरकार द्वारा 2008-09 में शुरू किया गया था। । मोदी सरकार इसे नए सांचे में ढाला और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के अपने बेताब प्रयास में इसे एक नया मोड़ दिया। इस योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ऋण और 25 प्रतिशत की मार्जिन मनी सब्सिडी और छोटे उद्यमों की स्थापना के लिए शहरी क्षेत्रों में 15 प्रतिशत प्रदान करता है। इसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा चलाया जाता है।

2014 से, मंत्रालय द्वारा 1.8 लाख इकाइयों की स्थापना में सब्सिडी के रूप में 4,632 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं, जिन्होंने कुल 13.2 लाख लोगों को रोजगार दिया है। जो प्रति वर्ष लगभग 3.3 लाख रोज़गार बनता हैं। औसतन, बैंक ऋण प्राप्त करने वाली प्रत्येक इकाई को लगभग 2 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिलती है। एक प्रश्न के जवाब में 4 अप्रैल 2018 को राज्यसभा में श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने ये आंकड़े बताए थे। फिर आरएसएस की विचारधारा के दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर दो योजनाएं हैं।

पहले को दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना कहा जाता है जिसके तहत ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया जाता है और नौकरियों में रखा जाता है। इसी योजना के तहत, पिछले चार वर्षों में 2.7 लाख लोगों को नौकरियां दी गईं, उसी संसदीय उत्तर के अनुसार। दूसरी योजना में, दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना को - राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन कहा जाता है, इसी तरह के प्रशिक्षण शहरी क्षेत्रों में बेरोजगार युवाओं को रोज़गार देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।

इस योजना ने 2014 से चार वर्षों में 2.5 लाख नौकरियां पैदा की हैं। इसलिए, कुल मिलाकर, इन तीन योजनाओं ने चार वर्षों में 18 लाख नौकरियां - या स्वयंरोजगार के अवसर पैदा किए हैं। यह इंगित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं है कि इन योजनाओं में स्थापित छोटे उद्यम चल रहे हैं या वे बंद हो गए हैं या नहीं। अबाध नौकरी निर्माण के कारणों में से एक उद्देश्य उद्देश्यों की प्रकृति में है।

सभी छोटे उद्यम सफल नहीं हो सकते हैं। और, वर्तमान आर्थिक तनाव में बढ़ती मांग और कम नौकरी निर्माण के साथ, इस तरह के उद्यमों को बंद करने या जीवित रहने की संभावना बहुत उज्ज्वल नहीं है। सरकार के अनुसार, 2015-16 के दौरान बीमार एमएसएमई की संख्या 2,22, 204 बीमार इकाइयों की तुलना में दोगुना होकर 4,86,291 हो गई है। नौकरी निर्माण की मोदी की पूरी रणनीति – स्वचालित स्व-रोज़गार को बढ़ावा देने के आधार पर – यह शुरुआत से ही बर्बाद हो गई थी। यह एक गलत धारणा पर आधारित था कि आपको केवल कुछ कौशल और कुछ लाख रुपये की जरूरत है और – प्रतिष्ठा की! – जो सबसे गरीब तबके तरक्की प्रदान करेगी। आरएसएस धर्मशास्त्र से व्युत्पन्न यह आदर्श दृष्टिकोण कभी काम नहीं करेगा। यह मोदी के चार साल के कार्यकाल ने दिखाया है।

Narendra modi
BJP
government policies

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • Utpal parrikar
    राज कुमार
    गोवा चुनावः मनोहर पर्रिकर के बेटे ने भाजपा छोड़ी, पणजी से होंगे निर्दलीय उम्मीदवार
    22 Jan 2022
    उत्पल पर्रिकर ने आरोप लगाया है कि भाजपा एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दे रही है जो दो साल पहले ही किसी अन्य पार्टी से भाजपा में आया है और जिस पर गंभीर आपराधिक मुकदमा दर्ज है। उत्पल ने कहा है कि भाजपा अपने…
  • Vineet Narayan
    न्यूज़क्लिक टीम
    "यूपी चुनाव में धर्म नहीं, विकास होगा चुनावी मुद्दा" : विनीत नारायण
    21 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी और योगी आदित्यनाथ सरकार धर्म के नाम पर वोटरों का ध्रुवीकरण कर रही है, यह सिर्फ़ विकास के मुद्दों पर असफलताओं को छुपाने की कोशिश है। न्यूज़क्लिक के साथ इस ख़ास…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: कर चले हम फ़िदा...अब तुम्हारे हवाले...
    21 Jan 2022
    राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति की लौ का राष्ट्रीय समर स्मारक पर जल रही लौ के साथ विलय किए जाने पर बहुत लोग आहत हुए हैं। वे पूछ रहे हैं कि अगर यह ज्योति जलती रहती तो क्या मुश्किल…
  • uttar pradesh
    एस एन साहू 
    उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के ‘विद्रोह’ की जड़ें योगी राज की जीवंत वास्तविकता में छिपी हैं
    21 Jan 2022
    पहले, धर्मनिरपेक्षता और बहुलवाद के प्रति किसान आंदोलन की प्रतिबद्धता ने भाजपा को झकझोर कर रख दिया। और अब, उत्तरप्रदेश के अन्य पिछड़े वर्गों के द्वारा सामाजिक न्याय के एजेंडे को पुनार्जिवित किया जा रहा…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    Clubhouse मामले में 3 गिरफ़्तार, इंडिया गेट से बुझ गई अमर जवान ज्योति और अन्य ख़बरें
    21 Jan 2022
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी Clubhouse chat मामले में 3 गिरफ़्तार, आज बुझ गई अमर जवान ज्योति और अन्य ख़बरों पर।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License