NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मोदी की विफलता: कौशल विकास योजना
पीएमकेवीवाई के तहत प्रमुख स्किलिंग कार्यक्रम मोदी की एक बड़ी विफलता रही है।
सुबोध वर्मा
08 May 2018
Translated by महेश कुमार
Narendra Modi

सरकार से 12,000 करोड़ रुपये के वित्त पोषण के साथ, प्रधान मंत्री मोदी की पसंदीदा कौशल विकास कार्यक्रम आपदा में बदल गयी हैं। जिसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) कहा जाता है, इसने पिछले तीन वर्षों में 41.3 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया है। इस साल 28 मार्च को राज्यसभा में कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा दिए गए एक जवाब के मुताबिक उनमें से केवल 6.15 लाख को नौकरियां प्राप्त हुयी हैं। यह एक 15 प्रतिशत  की प्लेसमेंट दर है।

skill india

इस बहुत प्रचारित कार्यक्रम का उद्देश्य "उद्योग-प्रासंगिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है जो उन्हें बेहतर आजीविका हासिल करने में मदद करेगा"। 1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य चार साल, 2016 से 2020 तक तय किया गया था।

कार्यक्रम वास्तव में 2015 में लॉन्च किया गया था लेकिन जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि यह सभी प्रकार की खामियों से भरा हुआ है। निजी संस्थाओं को कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की भूमिका दी गई थी, उनके काम का कोई ट्रैक नहीं रखा गया था और पूरी चीज एक मलबे की तरह दिख रही थी। फिर, प्रभारी मंत्री राजीव प्रताप रुडी को अनजाने में बर्खास्त कर दिया गया और कार्यक्रम को नवीनीकृत किया गया। इसने पीएमकेवीवाई 2.0 का रूप ले लिया।

यह योजना 485 जिलों में फैले 500 से अधिक कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से लागू की जा रही है। 2000 से अधिक "नौकरी की भूमिका" में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है जो रोज़गार इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर, परिधान, सौंदर्य और कल्याण, कृषि, खुदरा, रसद, चमड़ा, दूरसंचार, सुरक्षा, कपड़ा और हैंडलूम इत्यादि से जुड़े हैं है। उद्योग के साथ साझेदारी के तहत, इसका उपयोग समन्वय के लिए डिजिटल पोर्टलों की पृष्ठभूमि डेटा है जिस पर राज्य या उद्योग को कितने कुशल लोग ('कौशल अंतर') की आवश्यकता होती है, उसे वह कौशल इस योजना के जरिए उपलब्ध कराना था।

संक्षेप में, आधुनिक प्रबंधन तकनीकों के सभी हॉलमार्क डेटा आधारित, आईटी संचालित कार्यक्रम को प्रभावित करते हैं, पीएमकेवीवाई पीएम मोदी का एक मोहक कार्यक्रम हैं। फिर भी यह विफल हुआ और ध्वस्त हो गया है। क्यूं कर?

क्योंकि मोदी सरकार की सोच में एक घातक दोष है - और यह दोष स्पष्ट रूप से बना हुआ है, जो कि अविश्वसनीय है यदि आप वास्तव में इसके बारे में सोचते हैं। कौशल केवल तभी उपयोगी होंगे जब नौकरियां होंगी। आखिर में उन्हें नौकरी नहीं मिलती है तो लोगों को कौशल  कोई मदद नहीं करता है। और, हम सभी जानते हैं कि आज भारत में नौकरियां दुर्लभ हैं। वास्तव में, कौशल कार्यक्रम की विफलता इसका सबूत है।

मोदी और उनके सलाहकारों को शायद 'मेक इन इंडिया' और स्टार्ट अप इंडिया और मुद्रा ऋण के अपने द्वारा सजाये गए सपनों से लिया गया है। उन्होंने विश्वास करना शुरू कर दिया कि जो कुछ भी जरूरी है वह कुशल श्रम है क्योंकि भारत में उत्पादक व्यवसाय में पूँजी स्थिर हो रही है।

शायद उन्होंने सोचा कि लोगों के पास कौशल होने के बाद स्व-रोजगार का विस्फोट हो जाएगा। ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि बार-बार मोदी और उनके सहयोगियों ने स्वयंरोजगार की बात की  हैं। असल में उन्होंने स्वयंरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू भी की हैं (जिसके बारे में न्यूजक्लिक बाद में रिपोर्ट करेगा)।

लेकिन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के मुताबिक, पीएमकेवीवाई में प्रशिक्षण में  से 76 प्रतिशत लोगों ने वेतन रोजगार प्राप्त किया और केवल 24 प्रतिशत  ही अपने कारोबार स्थापित कर पाए। कौशल विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, पीएमकेवीवाई के तहत प्रशिक्षित सभी लोगों में से केवल 10,000 ने स्वयं को रोजगार के लिए मुद्रा ऋण के लिए आवेदन किया था।

मोदी और उनके सलाहकारों को बेहतर रूप से जानकारी होनी चाहिए थी। शायद उन्हें भारतीय उद्योगपतियों की समझ से लिया कि उन्हें 'नियोक्ता' (कुशल बेरोजगार) लोग नहीं मिल रहे हैं, जिसका वास्तव में मतलब था कि वे सही लोगों को पाने के लिए पर्याप्त भुगतान करने को तैयार नहीं थे। शायद वे पश्चिम के प्रचलित विचार से प्रभावित थे कि आपकी आय और आपका भविष्य आपके कौशल पर निर्भर करता है।

जो कुछ भी हो, मोदी और उनके सलाहकारों ने गंभीर गलती की है और देश इसे भुगत रहा है।

Narendra modi
Skill India
PMKVY

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • Budget 2022
    भरत डोगरा
    जलवायु बजट में उतार-चढ़ाव बना रहता है, फिर भी हमेशा कम पड़ता है 
    18 Feb 2022
    2022-23 के केंद्रीय बजट में जलवायु परिवर्तन, उर्जा नवीनीकरण एवं पर्यावरणीय संरक्षण के लिए जिस मात्रा में समर्थन किये जाने की आवश्यकता है, वैसा कर पाने में यह विफल है।
  • vyapam
    भाषा
    व्यापमं घोटाला : सीबीआई ने 160 और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया
    18 Feb 2022
    केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2013 के प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में धांधली करने के आरोप में 160 और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया है। आरोपियों में प्रदेश के तीन निजी मेडिकल…
  • Modi
    बी सिवरमन
    मोदी के नेतृत्व में संघीय अधिकारों पर बढ़ते हमले
    18 Feb 2022
    मोदी सरकार द्वारा महामारी प्रबंधन के दौरान अनुच्छेद 370 का निर्मम हनन हो, चाहे राज्यों के अधिकारों का घोर उल्लंघन हो या एकतरफा पूर्ण तालाबंदी की घोषणा हो या फिर महामारी के शुरुआती चरणों में अत्यधिक…
  • kannauj
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: कन्नौज के पारंपरिक 'इत्र' निर्माता जीवनयापन के लिए कर रहे हैं संघर्ष
    18 Feb 2022
    कच्चे माल की ऊंची क़ीमतें और सस्ते, सिंथेटिक परफ्यूम के साथ प्रतिस्पर्धा पारंपरिक 'इत्र' निर्माताओं को पहले से कहीं अधिक प्रभावित कर रही है।
  • conteniment water
    सौरभ शर्मा
    यूपी चुनाव: कथित तौर पर चीनी मिल के दूषित पानी की वजह से लखीमपुर खीरी के एक गांव में पैदा हो रही स्वास्थ्य से जुड़ी समस्यायें
    18 Feb 2022
    लखीमपुर खीरी ज़िले के धरोरा गांव में कथित तौर पर एक चीनी मिल के कारण दूषित होते पानी के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गांव के लोग न सिर्फ़ स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, बल्कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License