NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मोदी सरकार के झूठे और टूटे वादों के खिलाफ किसानों का संघर्ष दृढ़ता से जारी रहेगा
2018 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, किसानों की आय पिछले तीन वर्षों से ठहर गयी है।
अरिजीत सेनगुप्ता
02 Jun 2018
Translated by महेश कुमार
Mandsaur

पिछले साल जून में, मंदसौर में किसानों का आंदोलन पुलिस और किसानों के बीच एक हिंसक संघर्ष का केंद्र बन गया था। छह किसानों को पुलिस ने गोली मार दी थी, गोली चलाने को पुलिस ने आत्मरक्षा का नाम दिया था। गोलीबारी के बाद, क्रोधित किसानों ने प्रतिशोध में एक पुलिस चौकी को ताबह कर दिया था। हालांकि, मुख्यमंत्री ने किसानों की दो प्रमुख मांगों को नहीं माना, जो कि क़र्ज़ माफ़ी और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य से सम्बंधित थी। आरएसएस से संबद्ध भारतीय किसान संघ ने बीजेपी की अगुवाई वाली राज्य सरकार के पक्ष में बात की और उसे एक किसान समर्थक सरकार बताया। मुख्यमंत्री शिव राज चौहान ने पिछले साल कहा था कि जिन्हें गोली लगी वे असामाजिक तत्व थे।

पिछले साल मंदसौर में हुयी हत्याओं की बरसी को मनाने के लिए, राष्ट्रीय किसान महासंघ के नेतृत्व में विभिन्न किसान संगठन, जो लगभग 110 किसान संगठनों का व्यापक संगठन है, ने इस महीने की पहली तारीख से 10 जून तक 'गाँव बंद' का आह्वान किया है। राष्ट्रीय किसान महासंघ के मार्गदर्शक पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा है, जिन्होंने हाल ही में भाजपा छोड़ दी है। किसान शांतिपूर्ण गतिविधियों के जरिए शांतिपूर्वक विरोध करने संकल्प लिए हुए हैं। प्रस्तावित विरोध के दौरान, जिला प्रशासन ने ग्रामीणों पर एक मानदंड लगाया है कि वे 25,000 रुपये के बांड पर हस्ताक्षर करेंगे कि वे इस क्षेत्र में शांति बनाए रखेंगे। मौजूदा दौर मरीं  चल रहे कृषि संकटों ने मध्य प्रदेश को गहराई से प्रभावित किया गया है, सूखे की वजह से किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

आंदोलन करने वाले किसानों की प्रमुख मांगों में 12 साल पहले बने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना, कृषि क़र्ज़ एक बार पूरी छूट, एक अच्छा न्यूनतम सहायता मूल्य (एमएसपी) और क्षतिग्रस्त फसलों के लिए मुआवजे मुहैया कारण शामिल हैं। 10 दिनों के लंबे विरोध के दौरान, किसान दूध, भोजन, सब्जियों आदि की आपूर्ति में कटौती करने के लिए तैयार हैं। किसानों ने पिछले साल पुलिस फायरिंग में घायल लोगों के लिए  नौकरी की मांग भी की है।

वास्तव में, पूरे देश को एक गहरे कृषि संकट से गुजरना पड़ रहा है। भारत के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, 2018, में किसानों की आय पिछले तीन वर्षों से ठहरी हुयी है। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि औसतन किसानों की आमदनी में 15-18 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है और यह अनियमित क्षेत्रों में 25 प्रतिशत  तक बढ़ सकता है। मोदी सरकार 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान अपने वादे को पूरा करने में स्पष्ट रूप से विफल रही है, न्यूनतम समर्थन मूल्य को अतिरिक्त 50 प्रतिशत मुनाफे के साथ उत्पादन लागत के रूप में निर्धारित करने के लिए स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट की मुख्या सिफारिश थी। दरअसल, 2017-18 की रबी की फसल में, किसानों ने छह प्रमुख फसलों पर कुल 60,861 करोड़ रुपये का नुकशान उठाया था और खरीफ सीजन में यह करीब 2 लाख करोड़ का नुकसान था। सरकार स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट के साथ एमएसपी की गणना के अंतर में लोगों को गुमराह करने में भी सफलतापूर्वक कामयाब रही, जिससे एमएसपी अनुमानित  राशि से नीचे हो गयी। इसके अलावा, कृषि लागत और मूल्य (सीएसीपी) के लिए कमीशन पर विचार करते हुए, एमएसपी को केवल 25 फसलों के लिए निर्धारित किया गया था, जिससे शेष फसलों को बाजार की शोषणकारी ताकतों के हवाले कर दिया गया।

वर्ष 2017 ने, देश भर में किसानों के संघर्षों की एक लहर को देखा। उंचा क़र्ज़, अक्सर आत्महत्या की ओर अग्रसर होती है, अप्रत्याशित कीमतों, भूमि अधिग्रहण, कम कृषि मजदूरी के कारण उत्पादन की लागत को पूरा करने में असमर्थता, सभी ने कृषि संकट को गहरा बनाने में योगदान दिया और किसान तंग होकर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में गुस्से में विमुख होकर विरोध में निकल पड़े। ज्यादातर राज्यों में इन आंदोलनों को सरकारों द्वारा मजबूती से कुचलने की कोशिश की गयी थी, लेकिन आन्दोला का ऐसा दबाव था कि लगभग सभी राज्य सरकारों को क़र्ज़ माफ़ी में छूट देने की घोषणा पर मजबूर होना पड़ा।

राजस्थान में सबसे महत्वपूर्ण जीत हुयी थी जहां एआईकेएस के नेतृत्व में विशाल आंदोलन हुआ और उसके चलते सरकार को विभिन्न मांगों को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। किसान के दबाव के कारण, सरकार को पशु बाजार में वध के लिए मवेशियों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। 2018 में एआईकेएस की अगुआई में किसान लॉन्ग मार्च से किसानों का भारी जुड़ाव था। यहां तक ​​कि ट्रेड यूनियनों ने भी 16 जून को देश भर में विरोध प्रदर्शन किया, मंदसौर में किसानों के विरोध में क्रूर पुलिस हमले में पांच किसान मारे गए थे। श्रमिक और अन्य संगठनों के संयुक्त मंच, भूमि अधिकारी आंदोलन द्वारा 9 अगस्त को 150 जिलों में विरोध प्रदर्शनों में श्रमिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। श्रमिक भी विशाल किसान मुक्ति यात्रा में शामिल हो गए, जिसमें 10,000 किलोमीटर से अधिक किसानों को संगठित किया गया। पिछले साल नवंबर में, संसद मार्ग में दिल्ली में एक विशाल 'किसान संसद' आयोजित की गयी थी, जहां दो प्रमुख मांगों में कर्जा माफ़ी और न्यूनतम समर्थन मूल्य को तय करना था। इस संघर्ष में कुल 184 किसान संगठनों ने भाग लिया।

किसान मोदी सरकार के झूठ और टूटे वादे के खिलाफ दृढ़ता से संघर्ष जारी रख रहे हैं। जून और जुलाई के महीने में, किसानों का महागठबंधन विभिन्न वादों के विश्वासघात के खिलाफ 10 करोड़ हस्ताक्षर एकत्र करने का अभियान चलाएगा, जिसमें सभी फसलों के लिए एमएसपी उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत ऊपर, व्यापक ऋण छूट योजना, मासिक पेंशन, मवेशी व्यापार पर प्रतिबंध हटाना, साथ ही प्रधानमंत्री फासल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) की विफलता को दर्शाना है। एकत्रित हस्ताक्षर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 9 अगस्त को प्रस्तुत किए जाएंगे और उसी दिन जेल भरो संघर्ष सभी राज्यों और जिला मुख्यालयों में आयोजित किए जाएंगे, जिसमें लगभग दो लाख स्वयंसेवकों के भाग लेने की उम्मीद है।

Mandsaur
RSS
BJP
Narendra modi
Shiv Raj Chouhan

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव दूसरा चरण:  वोट अपील के बहाने सियासी बयानबाज़ी के बीच मतदान
    14 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव कितने अहम हैं, ये दिग्गज राजनेताओं की सक्रियता से ही भांपा जा सकता है, मतदान के पहले तक राजनीतिक दलों और राजनेताओं की ओर से वोट के लिए अपील की जा रही है, वो भी बेहद तीखे…
  • unemployment
    तारिक़ अनवर
    उत्तर प्रदेश: क्या बेरोज़गारी ने बीजेपी का युवा वोट छीन लिया है?
    14 Feb 2022
    21 साल की एक अंग्रेज़ी ग्रेजुएट शिकायत करते हुए कहती हैं कि उनकी शिक्षा के बावजूद, उन्हें राज्य में बेरोज़गारी के चलते उपले बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
  • delhi high court
    भाषा
    अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
    14 Feb 2022
    पीठ ने कहा, ‘‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम और पिछले वर्ष सीटों की संख्या, प्राप्त आवेदनों और दाखिलों की संख्या को लेकर एक संक्षिप्त और स्पष्ट जवाब दाखिल करें।’’ अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।
  • ashok gehlot
    भाषा
    रीट पर गतिरोध कायम, सरकार ने कहा ‘एसओजी पर विश्वास रखे विपक्ष’
    14 Feb 2022
    इस मुद्दे पर विधानसभा में हुई विशेष चर्चा पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट मुख्य विपक्षी दल के विधायकों ने सदन में नारेबाजी व प्रदर्शन जारी रखा। ये विधायक तीन कार्यदिवसों से इसको लेकर सदन में प्रदर्शन कर…
  • ISRO
    भाषा
    इसरो का 2022 का पहला प्रक्षेपण: धरती पर नज़र रखने वाला उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित
    14 Feb 2022
    पीएसएलवी-सी 52 के जरिए धरती पर नजर रखने वाले उपग्रह ईओएस-04 और दो छोटे उपग्रहों को सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। इसरो ने इसे ‘‘अद्भुत उपलब्धि’’ बताया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License