NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मोदी सरकार की जनजाति सम्बंधित नीति: एक अंतहीन खोह
जनजातीय कार्य मंत्रालय की नज़रअंदाज़ी, रूपए ख़र्च न करना, स्कीमों को ख़त्म करना और व्यापक रूप से कम ख़र्च मोदी सरकार की जनजाति सम्बन्धी नीति की सच्ची तस्वीर हैI
सुबोध वर्मा
09 Feb 2018
Budget 2018
Image Courtesy: The Wire

हाल ही में आये केंद्र सरकार के बजट में जनजातीय कार्य मंत्रालय के लिए जो आबंटन मिला है उससे साफ़ पता चलता है कि बीजेपी नेतृत्त्व वाली मौजूदा सरकार देश के विभिन्न आदिवासी समुदायों की ज़िंदगियों और परेशानियों के प्रति कितनी उदासीन रवैया रखती हैI और यह बजट ऐसे समय पर आया है जब बीजेपी त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड के विधानसभा चुनावों में ऊँचे दाव लगा रही है, इन सभी राज्यों में काफ़ी ज़्यादा आदिवासी जनसँख्या हैI चुनाव प्रचारों में तो बीजेपी इन राज्यों के लोगों को आसमान के ख़्वाब बेच रही है लेकिन बजट आबंटन से बीजेपी की कलई खुल गयी हैI  

यह मंत्रालय काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जनजातियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के लिए फण्ड आबंटित करने के एक केंद्र के रूप में काम करता हैI हालांकि सरसरी नज़र डालने पर लगता है कि इस बार के बजट में साल 2017-18 के 5,329 करोड़ रूपए के मुक़ाबले 5,935 करोड़ रूपए की मामूली बढ़ोत्तरी दिखती हैI लेकिन कुल सरकारी ख़र्च में हिस्सेदारी के आधार पर देखें तो पता चलेगा कि पिछले साल इस मंत्रालय को सरकारी कुल ख़र्च का 0.25% मिला था जबकि इस साल यह गिरकर 0.24% रह गया हैI पहले से ही इतने महत्वपूर्ण मंत्रालय को पूरे सरकारी ख़र्च में से थोडा सा ही हिस्सा मिल रहा था जो सरकार ने इस साल और भी कम कर दियाI

बजटीय दस्तावेज़ पर नज़र डालते ही आप जान जायेंगें कि बीजेपी समाज के इस हिस्से के प्रति कितनी उदासीन है और इसे कितना नज़रअंदाज़ करती हैI इस लिहाज़ से तीन ज़रूरी योजनायें -आश्रम स्कूल, लड़के-लड़कियों के लिए हॉस्टल और वोकेशनल ट्रेनिंग- को पूरी तरह से बंद कर दिया गया हैI इन योजनाओं के लिए पहले भी बजटीय आबंटन कम ही हुआ करता था लेकिन अचानक से इन्हें बंद कर देने से हज़ारों छात्रों का जीवन अधर में डाल दिया गया हैI

टेबल 1

इसी अघात को जारी रखते हुए उच्च शिक्षा और देश के बाहर जाकर पढ़ने के लिए दी जाने वाली छात्रवृतियों में 16% की कटौती कर दी गयी हैI गौर देने वाली बात है कि पिछले साल भी मोदी सरकार ने बजटीय आबंटन पूरा ख़र्च नहीं किया थाI इन दोनों ही छात्रवृतियों के लिए बजट में 241 करोड़ रूपए दिए गये थे लेकिन रिवाइज्ड एस्टीमेट से पता चलता है कि वास्तव में सिर्फ 201 करोड़ रुपए ही ख़र्च किये गयेI

जंगलों से कन्दमूल इकट्ठा कर बेचकर जीवन-यापन करने वाले आदिवासियों के लिए भी एक ख़ास आबंटन किया जाता है जो बहुत ज़रूरी हैI दिनभर के थकावट भरे काम के बाद व्यापारी इन्हें बहुत कम दाम देते हैं और खुद इनके सामान को बेचकर काफी मुनाफ़ा कम लेते हैंI इसलिए अगर इनके सामान के लिए भी एक न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिया जाये तो कम-से-कम इन्हें गुज़ारे भर के लिए तो कुछ ठीक-ठाक आय मिल सकेI हालांकि, इसके लिए आबंटन इस साल बढ़ा दिया गया है, लेकिन पिछले साल के आँकड़ों से पता चलता है कि 100 करोड़ रूपए की आबंटित राशी में से सिर्फ 25 करोड़ रुपए ही ख़र्च कियेI सरकारी कर्मचारियों का यह रवैया साफ़ तौर पर आपराधिक नज़रअंदाज़ी हैI कानों को लुभावनी लगने वाली वनबन्धु कल्याण योजना के अंतर्गत यह स्कीम और अन्य कई कल्याणकारी स्कीम आती हैं, इस साल इस योजना का बजट 17% कम हो गया है क्योंकि पिछले साल के आबंटित 505 करोड़ रुपए में से सरकार लगभग 21% ख़र्च करने में नाकाम रहीI

टेबल 2

प्री-मेट्रिक और पोस्ट-मेट्रिक जैसी दो आवश्यक छात्रवृतियों के लिए भी आबंटन में मामूली से वृद्धि हुई हैI लेकिन एक अनुमान के अनुसार साल 2015-16 में केंद्र सरकार के पास 773 करोड़ रुपए की छात्रवृतियाँ लंबित पड़ी थीं जिसकी वजह से कितने ही छात्रों को अपनी पढई छोड़ने पर मजबूर होना पड़ाI अगर अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों की छात्रवृतियों की तरफ यही रवैया रहा तो इस थोड़ी सी वृद्धि से कोई फ़र्क नहीं पड़ने वालाI  

टेबल 3

जनजातीय कार्य मंत्रालय के लिए निराशापूर्ण आबंटन के आलावा इस साल बजटीय हिस्सेदारी के आधार पर ट्राइबल सब-प्लान के लिए आबंटन ज़रूरत से 8.6% कम हैI NCDHR के विश्लेषण अनुसार TSP (या ST कॉम्पोनेन्ट) के लिए सिर्फ 39,135 करोड़ रुपए ही दिए गये हैं, जबकि कुल जनसँख्या में आदिवासियों की संख्या (8.6%) के हिसाब से यह 74,299 करोड़ रुपए होना चाहिए थाI

तो, त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड- संभलिए! ‘सबका साथ, सबका विकास’ सिर्फ खोखली बातें हैंI आदिवासियों के विकास से मोदी सरकार को कुछ लेना-देना नहींI इन्हें सिर्फ चुनाव जीतने से मतलब हैI

बजट 2018
मोदी सरकार
ST सब-प्लान
ministry of tribal affairs
अरुण जेटली

Related Stories

किसान आंदोलन के नौ महीने: भाजपा के दुष्प्रचार पर भारी पड़े नौजवान लड़के-लड़कियां

वन भूमि पर दावों की समीक्षा पर मोदी सरकार के रवैये से लाखों लोगों के विस्थापित होने का ख़तरा

सत्ता का मन्त्र: बाँटो और नफ़रत फैलाओ!

जी.डी.पी. बढ़ोतरी दर: एक काँटों का ताज

5 सितम्बर मज़दूर-किसान रैली: सबको काम दो!

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

लातेहार लिंचिंगः राजनीतिक संबंध, पुलिसिया लापरवाही और तथ्य छिपाने की एक दुखद दास्तां

माब लिंचिंगः पूरे समाज को अमानवीय और बर्बर बनाती है

वन नीति पर जनजातीय मंत्रालय के उठाए मुद्दे पर पर्यावरण मंत्रालय ध्यान देगा?

अविश्वास प्रस्ताव: दो बड़े सवालों पर फँसी सरकार!


बाकी खबरें

  • omicron
    भाषा
    दिल्ली में कोविड-19 की तीसरी लहर आ गई है : स्वास्थ्य मंत्री
    05 Jan 2022
    ‘‘ दिल्ली में 10 हजार के करीब नए मामले आ सकते हैं और संक्रमण दर 10 प्रतिशत पर पहुंच सकती है.... शहर में तीसरी लहर शुरू हो चुकी है।’’
  • mob lynching
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: बेसराजारा कांड के बहाने मीडिया ने साधा आदिवासी समुदाय के ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर निशाना
    05 Jan 2022
    निस्संदेह यह घटना हर लिहाज से अमानवीय और निंदनीय है, जिसके दोषियों को सज़ा दी जानी चाहिए। लेकिन इस प्रकरण में आदिवासियों के अपने परम्परागत ‘स्वशासन व्यवस्था’ को खलनायक बनाकर घसीटा जाना कहीं से भी…
  • TMC
    राज कुमार
    गोवा चुनावः क्या तृणमूल के लिये धर्मनिरपेक्षता मात्र एक दिखावा है?
    05 Jan 2022
    ममता बनर्जी धार्मिक उन्माद के खिलाफ भाजपा और नरेंद्र मोदी को घेरती रही हैं। लेकिन गोवा में महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के साथ गठबंधन करती हैं। जिससे उनकी धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर सवाल खड़े हो…
  • सोनिया यादव
    यूपी: चुनावी समर में प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री का महिला सुरक्षा का दावा कितना सही?
    05 Jan 2022
    सीएम योगी के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी भी आए दिन अपनी रैलियों में महिला सुरक्षा के कसीदे पढ़ते नज़र आ रहे हैं। हालांकि ज़मीनी हक़ीक़त की बात करें तो आज भी महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर…
  • मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    05 Jan 2022
    “बीएमसी के अधिकारियों ने उन्हें परेशान किया, उनके साथ बुरा व्यवहार किया। वेतन मांगने पर भी वे उस पर चिल्लाते थे।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License