NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
मोदी सरकार में महंगाई बढ़ना शुरू, अब दिखा है नोटबंदी और जीएसटी का असली असर
अब सरकार की गलत नीतियों को वजह से महंगाई फिर सिर उठाने लगी है।
सबरंग इंडिया
13 Sep 2017
महंगाई
महंगाई

यूपीए सरकार के ध्वस्त होने में महंगाई की मार का बड़ा हाथ था। बीजेपी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। संयोग से नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे के तेल के दामों में कमी आनी शुरू हो गई थी। इसके साथ मांग न रहने की वजह से अनाज और अन्य कमोडिटी के दाम भी घटने लगे थे। मोदी सरकार को इसका फायदा मिला और पिछले तीन साल के दौरान महंगाई काबू में रही। लेकिन अब सरकार की गलत नीतियों को वजह से महंगाई फिर सिर उठाने लगी है। जबकि बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में सबसे ज्यादा जोर महंगाई नियंत्रण पर दिया था।

आम लोगों को थोक से ज्यादा खुदरा महंगाई से ज्यादा वास्ता पड़ता है। अगस्त में यह महंगाई दर सीधे एक फीसदी बढ़ गई। जबकि कोर महंगाई दर (खाद्य और ईंधन) को छोड़ कर आधा फीसदी बढ़ कर 4.5 फीसदी बढ़ गई।दरअसल खुदरा महंगाई दर में यह बढ़ोतरी यूं ही नहीं है। इसके पीछे जीएसटी का लागू होना और केंद्रीय कर्मचारियों के एचआरए में बढ़ोतरी है। साथ ही खाद्य महंगाई दर में बढ़ोतरी भी इसकी बड़ी वजह है। खाद्य महंगाई दर में बढ़ोतरी भी मोदी सरकार की गलत नीतियों की वजह से हुई है। देश में कई इलाकों में किसान आंदोलन की वजह से उत्पादन और सप्लाई दोनों को चोट पहुंची और इस वजह से प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी हुई। खाद्य महंगाई दर को बढ़ाने यह अहम वजह रही। इसी तरह जीएसटी लागू होने से पान, तंबाकू (6.85 फीसदी), कपड़े फुटवियर (4.85 फीसदी), हाउसिंग ( 5.58 फीसदी) और विभिन्न श्रेणियों की वस्तुएं (3.85 फीसदी ) के दामों में बढ़ोतरी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि खाद्य महंगाई दर में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है।

 क्योंकि किसानों ने फसल की अच्छी कीमत न मिलने की वजह से कई जगह अपनी फसलों का रकबा (उत्पादन क्षेत्र) घटाया है। अब यह अच्छी तरह साफ हो चुका है जीएसटी, नोटबंदी और किसानों के लिए अच्छी कीमत न देने से महंगाई में इजाफा होता जा रहा है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि मोदी सरकार इस मोर्चे पर बिल्कुल चिंतित नहीं दिखती। हालांकि यह रवैया उसे भारी पड़ सकता है। क्योंकि नोटबंदी की वजह से असंगठित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हुए हैं और यह सच है कि महंगाई सबसे ज्यादा गरीबों परेशान करती है।

Courtesy: सबरंग इंडिया ,
Original published date:
13 Sep 2017
महंगाई
नोटबंदी
GST

Related Stories

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

कश्मीर: कम मांग और युवा पीढ़ी में कम रूचि के चलते लकड़ी पर नक्काशी के काम में गिरावट

‘जनता की भलाई’ के लिए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत क्यों नहीं लाते मोदीजी!

यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!

जीएसटी दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी के विरोध में दिल्ली के कपड़ा व्यापारियों ने की हड़ताल

कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि से एमएसएमई क्षेत्र प्रभावित, विरोध में उद्यमियों ने बंद किये शटर

अक्टूबर में आये जीएसटी में उछाल को अर्थव्यवस्था में सुधार के तौर पर देखना अभी जल्दबाज़ी होगी

भारतीय अर्थव्यवस्था : हर सर्वे, हर आकंड़ा सुना रहा है बदहाली की कहानी

सरकारी आंकड़ों में महंगाई हो गई कम, ग़रीब जनता को एहसास भी नहीं हुआ! 

2021-22 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किये गए: आर्थिक झटके कार्यपद्धति पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं 


बाकी खबरें

  • पश्चिम बंगाल : लॉकडाउन में कमाई नहीं, हौज़री कर्मचारी कर रहे ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल : लॉकडाउन में कमाई नहीं, हौज़री कर्मचारी कर रहे ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष
    22 Jun 2021
    केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों के बावजूद उत्पादक लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रहे हैं, इसकी वजह से कई कर्मचारी अब जीवनयापन कर लिए फल और सब्ज़ियां बेचने को मजबूर हो गए हैं।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को बोलते हुए सुनते अमेरिकी सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन। बाइडेन रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ 16 जून 2021 को स्विटजरलैंड के जिनेवा में शिखर सम्मेलन के बाद मीडिया से मुखातिब हुए।
    एम. के. भद्रकुमार
    बाइडेन-पुतिन शिखर सम्मेलन का होहल्ला  ख़त्म
    22 Jun 2021
    अमेरिकी-रूस के बीच जब भी संबंध की बात आती है तो एक ठहराव का लौट आना अवश्यम्भावी हो जाता है। इसके कुछ आरंभिक संकेत पहले से मौजूद हैं। अफगानिस्तान और म्यांमार को लेकर बाइडेन को रूस से कुछ मदद मिलने की…
  • तस्वीर में जयप्रकाश नारायण (बाएं), महात्मा गांधी (मध्य में), विनोबा भावे (दाएं)। इन तीनों नेताओं ने हमेशा कश्मीर में प्यार और सद्भाव के साथ हस्तक्षेप की वकालत की।
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    “मज़हब और सियासत से हल नहीं होगा कश्मीर का मसला”
    22 Jun 2021
    पिछले सात सालों और विशेषकर दो सालों में कश्मीर के मसले पर शेष भारत में कश्मीर विजय का जो आख्यान चलाया गया वह गहरी सियासत के साथ बदले की भावना से प्रेरित था।  
  • इज़रायली सेटलर्स व सुरक्षा बलों ने फिर शेख़ जर्राह पर हमला किया
    पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायली सेटलर्स व सुरक्षा बलों ने फिर शेख़ जर्राह पर हमला किया
    22 Jun 2021
    इज़रायल की हिंसा के परिणामस्वरूप कम से कम 20 फिलिस्तीनियों को चोटें आईं, जिसमें इज़रायली सुरक्षा बलों ने उन पर बदबुदार पानी, काली मिर्च स्प्रे, आंसू गैस के साथ-साथ रबर कोटेड मेटल की गोलियों से हमला…
  • कोविड-19 : शीर्ष वैज्ञानिकों ने बताया कैसे भारत तीसरी लहर से निपट सकता है
    संदीपन तालुकदार
    कोविड-19 : शीर्ष वैज्ञानिकों ने बताया कैसे भारत तीसरी लहर से निपट सकता है
    22 Jun 2021
    विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में बड़े स्तर पर महामारी के फैलाव को रोकने के लिए भारत को कोरोना जांच, आइसोलेशन और जीनोम सीक्वेंसिंग में तेज़ी लानी होगी। इसके अलावा टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License