NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट को दिया 1.45 लाख करोड़ का "तोहफ़ा"
कॉर्पोरेट घरानों को ये इनाम ऐसे समय में दिया गया है जब आम लोग मंदी की चपेट में आ रहे हैं और बेरोज़गारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है साथ ही आमदनी भी स्थिर है।
सुबोध वर्मा
21 Sep 2019
corporate tax cut's by modi govt

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक के बाद एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करना कॉर्पोरेट के लिए ख़ज़ाना तलाशने जैसा बनता जा रहा है। सीतारमण ने शुक्रवार को कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का ऐलान किया है। वर्तमान में ये टैक्स लगभग 30% है जो सेस/सरचार्ज सहित घटकर 25.17% हो जाएगा। वास्तव में अगर कोई दूसरी छूट नहीं मिलती है तो प्रभावी कर की दर 22% तक कम हो जाएगी। इस भारी छूट के अलावा वित्त मंत्री ने नई कंपनियों, शेयर बायबैक, पूंजीगत लाभ आदि के करों के उपायों में ढील की भी घोषणा की।

कुल मिलाकर ये छूट 1 करोड़ 45 लाख रुपये तक हो जाती है जिसे सीतारमण ने अर्थव्यवस्था के लिए "प्रोत्साहन" के तौर पर बताया है लेकिन वास्तव में इसका मतलब है करों का भारी नुक़सान।

इस नई घोषणा के साथ मोदी सरकार ने कॉर्पोरेटों को मुफ़्त उपहार देने का एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने महज़ 120 दिनों में पिछले वर्ष की तुलना में 33% अधिक छूट देने की घोषणा की है। वर्ष 2014 के बाद से नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साढ़े पांच साल के कार्यकाल में मुफ़्त कॉर्पोरेट उपहारों के रूप में 5.76 लाख करोड़ रुपये की घोषणा की गई है।

Capture_16.PNG

सीतारमण ने पहले ही उपहारों की एक श्रृंखला की घोषणा कर दी है, जिसमें निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 50,000 करोड़ रुपये की योजना, अधूरे घरों को पूरा करने में रियल एस्टेट डेवलपर्स की मदद करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना, स्टार्ट-अप के लिए एंजेल टैक्स की कटौती, विदेशी पोर्टफ़ोलियो निवेशकों पर सुपर-सेस में कटौती, बैंकों का विलय, विदेशी पूंजी को कोयला खनन में 100% तक निवेश करने का निमंत्रण, निवेश के लिए और अधिक धन प्रदान करने के लिए बैंक क्रेडिट नियमों में ढील आदि शामिल हैं।

इन क़दमों के पीछे मनगढ़ंत तर्क यह है कि कॉर्पोरेट भारत को इस कठिन समय में मदद की आवश्यकता है। ऐसा तर्क दिया जाता है कि कर रियायतों के रूप में इस तरह की मदद से उनकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा जिससे उन्हें विस्तार का एक बेहतर अवसर मिलेगा और इस तरह रोज़गार में मदद मिलेगी।

इस दृष्टिकोण के साथ एक मूलभूत समस्या है। मांग में गिरावट के चलते आ रही मंदी की सच्चाईयों को यह दृष्टिकोण नज़रअंदाज़ करता है। इस मांग की कमी में वृद्धि होने की वजह लोगों के पास ख़रीदने की शक्ति का नहीं होना है। 8% से अधिक कामकाजी उम्र की आबादी बेरोज़गार है, औद्योगिक मज़दूरी, न्यूनतम मज़दूरी के लिए स्वीकृत मानदंड से आधे से भी कम है, कृषि मज़दूरी मुद्रास्फ़ीति समायोजित शर्तों में घट रही है (वे दो वर्षों में लगभग 4% तक बढ़े हैं!)। ऐसी स्थिति में अधिक उत्पादन करना बेकार होगा क्योंकि ख़रीदार नहीं हैं।

इसका सबसे अंतिम उदाहरण यह है कि भारत में वर्तमान में खाद्यान्न का रिकॉर्ड स्टॉक (अगस्त में 713 लाख टन) है फिर भी देश में लगभग 20 करोड़ भूखे लोग हैं! ये डरावनी विसंगति मौजूद है क्योंकि खुले बाज़ार में अनाज के लिए कोई ख़रीदार नहीं हैं और सरकार "सामान्य" ख़रीदारी होने के अलावा रियायती क़ीमतों पर अनाज बेचने से इनकार करती है।

ऐसी विकट परिस्थिति में ये प्रोत्साहन आम लोगों को ही देने की ज़रूरत है। उन्हें मज़दूरी में वृद्धि, किसानों की उपज के लिए क़ीमतों को बेहतर करने, एक मज़बूत सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकार के ख़र्च बढ़ाने के माध्यम से दिया जा सकता है।

हालांकि, मोदी सरकार पूरी चीजों के अपने सिर पर लिए खड़ी है। यह करों को कम (वर्तमान में कॉर्पोरेट कर में कटौती और पहले हुई अन्य कटौती) करके प्रत्यक्ष (जैसे कि कॉर्पोरेट के आधे अधूरे मकानों को पूरा करने के लिए रियल एस्टेट टायकून की मदद करने में 10,000 करोड़ रुपये ख़र्च करके या कॉर्पोरेट्स की एनपीए में छूट देकर) या अप्रत्यक्ष रूप से कॉर्पोरेट्स को अधिक से अधिक धन दे रही है।

लोगों के लिए बहुत इसके हानिकारक परिणाम होंगे। मंदी के कारण कर राजस्व पहले से ही कम हो रहा है। ऐसे में कर दरों में कटौती का मतलब कर राजस्व में और भी अधिक गिरावट होगी। इसका मतलब साफ़ है कि सरकार के पास लोगों के लिए विभिन्न कल्याणकारी कार्यों पर ख़र्च करने के लिए काफ़ी कम पैसा होगा।

संक्षेप में, कॉर्पोरेट्स को जितनी ज़्यादा रियायतें दी जाती हैं उतने ही कम लोगों को सरकार से मिलती है। इसके विपरीत, कॉर्पोरेट्स को जितना अधिक मुफ़्त उपहार दिया जाता है उतना ही अधिक उनका निजी लाभ होगा क्योंकि अधिक से अधिक वस्तु निर्माण करने और बेचने के लिए उनके लिए कोई रास्ता बंद नहीं है। ऊपर दिए गए चार्ट से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में कॉर्पोरेट्स को भारी रियायतें दी गई थीं फिर भी देश आज मंदी के दौर में धीरे-धीरे समा गया है। उनको चाहिए कि लोगों पर पैसा ख़र्च करें न कि कॉर्पोरेट घरानों पर। ऐसा करने से यह स्वतः पूरी अर्थव्यवस्था को एक प्रोत्साहन देगा। अन्यथा वह ग़लत तरीक़े से सिर्फ़ बड़े अमीरों की जेब भर रहे हैं।

Economic slowdown
Economic Slump
Tax Bonanza for Corporates
corporate tax
Nirmala Sitharaman
Jobs Crisis
Demand Crisis
Purchasing Power
agrarian crisis
Stagnating Incomes

Related Stories

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

कन्क्लूसिव लैंड टाईटलिंग की भारत सरकार की बड़ी छलांग

महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  

5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल

केंद्रीय बजट 2022-23 में पूंजीगत खर्च बढ़ाने के पीछे का सच

विशेषज्ञों के हिसाब से मनरेगा के लिए बजट का आवंटन पर्याप्त नहीं

स्वास्थ्य बजट: कोरोना के भयानक दौर को क्या भूल गई सरकार?

बजट 2022: गांव और किसान के प्रति सरकार की खटकने वाली अनदेखी

प्रोग्रेसिव टैक्स से दूर जाती केंद्र सरकार के कारण बढ़ी अमीर-ग़रीब के बीच असमानता


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License