NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
समाज
अमेरिका
#metoo: मैक्डॉनाल्ड्स में यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ खड़ी हुईं महिलाएँ
अमेरिका में मंगलवार को 20 शहरों की तमाम महिला कर्मचारियों ने मैक्डॉनाल्ड्स में ख़ुद पर हुए यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कीं जिसके बाद अमेरिका के तमाम शहरों में इसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किए गए।
सत्यम् तिवारी
22 May 2019
#metoo:
Image Courtesy: MSNBC.com

ब्रिटनी होयोस ने कहा है कि जब वो 16 साल की थीं और अमेरिका के शहर टक्सन में स्थित मैक्डॉनाल्ड्स में कार्यरत थीं,तब उन्हें इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया था क्योंकि उनके परिवार ने मैक्डॉनाल्ड्स के मैनेजर के ख़िलाफ़ उनके यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। 

जमेलिया फ़ैरली ने कहा है, "जब मैंने ख़ुद पर हो रहे यौन उत्पीड़न की शिकायत की थी, तो मैक्डॉनाल्ड्स के मैनेजर ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की, और बाद में मेरे काम के घंटों को कम कर दिया गया (यहां काम के घंटे के हिसाब से पेमेंट किया जाता है), जिससे मुझे अपनी बेटी को पालने में काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ा था।" 

ब्रिटनी और जमेलिया की तरह क़रीब दो दर्जन कर्मचारियों ने मंगलवार को अमेरिका के 20 शहरों में स्थित मैक्डॉनाल्ड्स की शाखाओं के ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज की हैं, कि वहाँ काम करने के दौरान उन कर्मचारियों को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। शिकायत करने वाली महिलाओं में मैक्डॉनाल्ड्स में काम करने वाली महिलाएँ, काम छोड़ चुकी महिलाएँ और कुछ बच्चियाँ भी शामिल हैं। 

अमेरिका में मज़दूर अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन "fight for $15" ने बताया है कि 25 शिकायतें इक्वल इम्प्लॉइमेंट ऑपर्चुनिटी कमीशन (ईईओसी) में दर्ज की गई हैं और बाक़ी शिकायतें जो पिछले साल दर्ज की गई थीं, उन पर अब सिविल कोर्ट में कार्यवाही की जाएगी। 

मंगलवार को 20 शहरों की तमाम महिला कर्मचारियों ने ख़ुद पर हुए यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कीं जिसके बाद अमेरिका के तमाम शहरों में इसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किए गए। 

कर्मचारियों ने मैक्डॉनाल्ड्स के शिकागो स्थित कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और मैक्डॉनाल्ड्स पर आरोप लगाया की कंपनी की नीति हमेशा से यौन उत्पीड़न के मामलों पर चुप्पी साधने की रही है। बता दें कि मैक्डॉनाल्ड्स की पूरे अमेरिका में14000 शाखाएँ हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत फ्रैंचाइज़ पर दी गई हैं। जिसकी वजह से मैक्डॉनाल्ड्स यौन उत्पीड़न के मामलों में ख़ुद को ज़िम्मेदार नहीं मानता। 

download_0.jpg
महिलाओं के इस संघर्ष को अमेरिका के सिविल लिबर्टीज़ यूनियन, fight for $15 और "टाइम्स अप लीगल डिफ़ेंस फ़ंड" का समर्थन मिला है। टाइम्स अप ने कर्मचारियों के क़ानूनी ख़र्चों को उठाने की भी ज़िम्मेदारी ली है। टाइम्स अप नामक संगठन काम की जगहों, विशेष तौर पर कम आय पाने वाले कर्मचारियों पर होने वाले यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर काम करता रहा है। जब से इस फ़ंड की शुरुआत हुई थी, तब से #metoo के तहत हॉलीवुड से लेकर काम की जगहों पर होने वाले कई यौन उत्पीड़न के मामले सामने आए थे। 

मैक्डॉनाल्ड्स में होने वाले यौन उत्पीड़न की ये ख़बरें नई नहीं हैं। टाइम्स अप के डाटा के अनुसार पिछले 3 सालों में पूरे अमेरिका के 14000 मैक्डॉनाल्ड्स की शाखाओं में 50 यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज की गई हैं। अमेरिका स्थित नेशनल विमेन्स लॉ सेंटर के अनुसार एक पीड़िता ने बताया है कि जब वो 15 साल की थी और मैक्डॉनाल्ड्स में काम करती थी, उसी जगह के एक बुज़ुर्ग कर्मचारी ने उससे कहा था, "क्या तुमने कभी सफ़ेद चॉकलेट को अपने अंदर महसूस किया है? तुम्हारा शरीर अच्छा है।" जब उसने ये बात उस शाखा के मैनेजर को बताई तो उससे सिर्फ़ कहा गया, "तुम ये लड़ाई जीत जाओगी।" और उसके आगे कुछ नहीं किया गया। 

शिकागो की एक कर्मचारी ने बताया है कि उसे इसलिए काम से निकाल दिया गया था क्योंकि उसने अपने मैनेजर की शिकायत कर दी थी, जब उससे पूछा गया था, "तुम कितने लिंग ले सकती हो?" 

इसके अलावा कई महिलाओं ने ये भी कहा है कि वो डर गई थीं और ख़ुद पर हुए यौन उत्पीड़न के बारे में चुप रह गई थीं। क्योंकि वो काम छोड़ना नहीं चाहती थीं। 

महिलाओं द्वारा की गईं शिकायतों को अमेरिका की सेलेब्रिटी पद्मा लक्ष्मी का समर्थन मिला है जिन्होंने कहा है कि मैक्डॉनाल्ड्स को इन घटनाओं की ज़िम्मेदारी लेनी पड़ेगी। मैक्डॉनाल्ड्स के शिकागो स्थित कार्यालय, जहाँ महिलाओं ने मंगलवार को प्रदर्शन किया, ने कहा है कि इन घटनाओं में कंपनी कि ज़िम्मेदारी नहीं है क्योंकि वो शाखाएँ फ्रैंचाइज़ को दी हुई हैं। ये रवैया काफ़ी लापरवाही भरा लगता है। हालांकि मैक्डॉनाल्ड्स के सीईओ ने एक बयान जारी करते हुए कहा है, "हमारी कंपनियों और फ्रैंचाइज़ को दी कंपनियों में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कमेटियाँ बनी हुई हैं और हम ये सुनिश्चित करने में विश्वास करते हैं कि काम करने की जगह पर एक सुरक्षित माहौल बना के रखा जा सके।" एक हक़ीक़त ये भी है कि कंपनियों को लगता है कि सिर्फ़ कमेटियाँ बना देने से उनकी ज़िम्मेदारी पूरी हो जाती है, जो कि ज़ाहिर तौर पर सच नहीं है। कमेटियाँ बने रहने के बावजूद मैक्डॉनाल्ड्स जैसी कंपनी में लगातार यौन उत्पीड़न के इतने मामले सामने आए हैं, जो कि बेहद ख़तरनाक और डरावने हैं। 

जो महिलाएँ मंगलवार को विरोध प्रदर्शन में शामिल थीं उनका कहना था कि मैक्डॉनाल्ड्स को यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ और महिला सुरक्षा के लिए कड़े क़दम उठाने की ज़रूरत है। #metoo संघर्ष जो कि विश्वव्यापी साबित हुआ था और जिसके तहत लाखों-करोड़ों महिलाओं ने ख़ुद पर जगह-जगह पर हुए यौन उत्पीड़न और यौन हिंसा के बारे में मुखर हो कर बोला था और आवाज़ उठाई थी। #metoo संघर्ष से भी पहले मैक्डॉनाल्ड्स की महिलाओं ने अपने ऊपर हो रहे यौन उत्पीड़न के बारे में कंपनी में शिकायत दर्ज की थी, लेकिन उसका कुछ किया नहीं गया उल्टा महिलाओं पर विभिन्न तरह की कार्रवाई की गई थी। महिलाओं का कहना है कि अब वो कंपनी के रवैये से थक चुकी हैं और वो चाहती हैं कि मैक्डॉनाल्ड्स इन घटनाओं को गंभीरता से ले। मैक्डॉनाल्ड्स की एक कर्मचारी तान्या होरेल ने कहा है, "हम पिछले 3 साल से इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं, हड़ताल कर रहे हैं कि मैक्डॉनाल्ड्स अपनी कंपनी की यौन उत्पीड़न की घटनाओं को संबोधित करे लेकिन कंपनी ने कोई क़दम नहीं उठाया है। हम कहना चाहते हैं कि अब  वक़्त है कि कंपनी कोई कड़ा क़दम उठाए।" 

अमेरिका जैसा देश, जिसे हम विकसित मानते हैं, वहाँ ऐसी घटनाएँ देखने पर हमें समझ में आता है कि आज भी महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसाओं में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि ये हिंसा अपना रूप बदलते हुए बढ़ती ही जा रही है। एक संस्था जहाँ 15-16 साल की बच्चियाँ भी यौन हिंसा का शिकार हो रही हैं, और वो संस्था इसकी कोई ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है, हमें सोचने की ज़रूरत है कि ऐसी संस्थाओं को कैसे इन घटनाओं को संबोधित करने के लिए प्रभावित किया जा सकता है! 
#metoo जो कि एक एलीट वर्ग की बात करते हुए शुरू हुआ था, आज देखा जा रहा है कि कामकाजी मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग की महिलाएँ भी इसके ज़रिये ख़ुद पर हो रहे यौन उत्पीड़न की घटनाओं के बारे में मुखरता से बात कर रही हैं। 

अगर हम इन घटनाओं को भारत से जोड़ कर देखें, तो भारत में आज मैक्डॉनाल्ड्स या इन जैसी तमाम संस्थाएँ बड़े पैमाने पर स्थापित हो चुकी हैं जहाँ बड़ी संख्या में महिलाएँ काम करती हैं, जो कि हर उम्र की होती हैं। यदि अमेरिका जैसे देश में ये घटनाएँ इतनी आम बन चुकी हैं, तो ये भी सोचना होगा कि भारत जो पहले ही ऐसे मामलों में असुरक्षित है, उसमें ऐसी जगहों पर काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी कौन लेगा!

#metoo
Mcdonalds
sexual harassment
violence against women
America
chicago
times up legal defence fund
Donald Trump
mcd america
sexual violence at workplace

Related Stories

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें

‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा

बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!

ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं ने यौन हिंसा के ख़िलाफ़ रैली निकाली

मानहानि मामले में प्रिया रमानी बरी, उत्तराखंड त्रासदी में मरने वालों की संख्या बढ़ी और अन्य

कट, कॉपी, पेस्ट: राष्ट्रवादी एजेंडे के लिए भारतीय खिलाड़ियों के सोशल मीडिया का इस्तेमाल

ट्रंप की विदाई के अंतिम मुहर के दिन ट्रंप समर्थकों ने किया अमेरिका को शर्मसार!

अमेरिकी नागरिक समाज समूह ने "प्रोटेक्ट द रिज़ल्ट" के लिए देशव्यापी प्रदर्शन की योजना बनाई

हाथरस बनाम बलरामपुर, यूपी बनाम राजस्थान की बहस कौन खड़ी कर रहा है!


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License