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महाराष्ट्र: पालघर मॉब लिंचिंग पर राजनीति तेज़, हमले के आरोप में 110 गिरफ़्तार
राज्य के गृहमंत्री देशमुख ने कहा कि पुलिस ऐसे लोगों पर करीबी नजर रख रही है, जो इस घटना के जरिए समाज में वैमनस्य पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पालघर की घटना में जो लोग मारे गए और जिन्होंने हमला किया, वे अलग-अलग धर्मों के नहीं थे।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Apr 2020
पालघर मॉब लिंचिंग
Image courtesy: Best Hindi News

मुंबई: महाराष्ट्र के पालघर जिले में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की निर्मम हत्या के मामले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार सभी लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए 110 लोगों में 9 नाबालिग हैं। सभी आरोपियों को 30 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में रखा गया है, वहीं नाबालिगों को शेल्टर होम भेजा गया है। महाराष्ट्र पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका के स्थानीय आदिवासी हैं। राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि इस मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी

महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से किए गए ट्वीट में कहा गया, 'पालघर की घटना पर कार्रवाई की गई है। जिन्होंने 2 साधुओं, एक ड्राइवर और पुलिसकर्मियों पर हमला किया था, पुलिस ने घटना के दिन ही उन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस अपराध और शर्मनाक कृत्य के अपराधियों को कठोर दण्ड दिया जाएगा।'

राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने जांच का आदेश दिए जाने की जानकारी देते हुए इस घटना को कोई सांप्रदायिक रंग नहीं देने की भी चेतावनी दी, क्योंकि 3 मृतकों में दो लोग साधु बताए जा रहे हैं।

गृह मंत्री देशमुख ने ट्वीट किया- सूरत जा रहे तीन लोगों की पालघर में हुई हत्या में संलिप्त 110 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। हत्या के मामले में मैंने उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। देशमुख ने कहा कि पुलिस ऐसे लोगों पर करीबी नजर रख रही है, जो इस घटना के जरिए समाज में वैमनस्य पैदा करना चाहते हैं। देशमुख ने कहा कि पालघर की घटना में जो लोग मारे गए और जिन्होंने हमला किया, वे अलग-अलग धर्मों के नहीं थे।

क्या है घटना?

महाराष्ट्र के पालघर जिले में चोर के शक में ग्रामीणों की एक भीड़ ने तीन लोगों को कार से बाहर खींचा और पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर शुरुआत में पहुंचे पुलिसकर्मी पीड़ितों को बचा नहीं सके क्योंकि हमलावरों की संख्या बहुत अधिक थी और भीड़ ने पुलिस वाहन में भी पीड़ितों की पिटाई की।

कासा पुलिस स्टेशन के निरीक्षक आनंदराव काले ने कहा कि यह वीभत्स घटना गुरुवार को रात में 9.30 से 10 बजे के बीच हुई। यह घटना ऐसे समय में हुई, जब कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू है।

आनंदराव काले ने बताया कि तीनों कार से मुंबई से आए थे और उनके वाहन को स्थानीय लोगों ने गढचिंचाले के पास ढाबाड़ी-खानवेल मार्ग पर रोक दिया। काले ने बताया कि उन्हें कार से बाहर खींच लिया गया और ग्रामीणों ने इस संदेह पर उन पर पत्थर और अन्य चीजों से हमला कर दिया कि वे चोर हैं।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय सागर ने बताया कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई टीम (जिसमें सामान्यत: तीन या चार पुलिस कर्मी होते हैं) घटनास्थल पर पहुंची और पीड़ितों को पुलिस वाहन में बैठाकर बचाने की कोशिश की। हमलावरों ने पुलिस वाहन में भी उनकी पिटाई की और कम संख्या होने की वजह से पुलिसकर्मी कुछ नहीं कर पाए।

काले ने बताया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-302 (हत्या) सहित अन्य धाराओं जैसे सशस्त्र दंगा करना, धारा-188 (लोकसेवक के आदेश की आवज्ञा) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि आईपीसी की धारा-188 इसलिए लगाई गई है क्योंकि कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन में लोगों की आवाजाही और एकत्र होने पर रोक है।

पालघर के डीएम के शिंदे ने बताया कि इस घटना के एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इस वीडियो में दिख रहा है कि गांववाले कार पर लाठियों और पत्थरों से हमला कर रहे हैं। वीडियो को आधार पर और जांच के बाद 110 लोगों को चिह्नित करके उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मृतकों की पहचान 70 वर्षीय महाराज कल्पवृक्षगिरी उनके साथी सुशील गिरी महाराज और कार चालक निलेश तेलग्ने के रूप में हुई है।

गर्मा गई राजनीति!

इधर, इस मामले में महाराष्ट्र की राजनीति भी गरमा गई है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पालघर में मॉब लिंचिंग घटना का वीडियो हैरान करने वाला और अमानवीय है।

फडणवीस ने ट्वीट किया, 'पालघर में मॉब लिंचिंग घटना का वीडियो हैरान करने वाला और अमानवीय है। ऐसी विपदा के समय इस तरह की घटना और भी ज्यादा परेशान करने वाली है। मैं राज्य सरकार से गुजारिश करता हूं कि वह इस मामले की हाई लेवल जांच करवाए और जो दोषी हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।'

पालघर में साधुओं की हत्या के बाद संत समाज काफी गुस्से में हैं। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने महाराष्ट्र के पालघर जिले में जूना अखाड़ा के दो संतों की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या किये जाने की घटना की रविवार को कड़ी निंदा की। साथ ही, सभी 13 अखाड़ों के साधु-संतों से अनुरोध किया है कि लॉकडाउन के दौरान यदि कोई संत- महात्मा ब्रह्मलीन होता है तो उसकी समाधि में न जाएं।

महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि ये संत महात्मा, एक संत की समाधि में शामिल होने जा रहे थे और उन्हें जाना भी चाहिए, लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि लॉकडाउन में इसके लिए उन्हें प्रशासन से पूर्व अनुमति लेनी चाहिए थी।

गिरि ने कहा कि पुलिस के सामने इस तरह से संतों को घेर कर लाठी डंडे से मारा जाना एक गंभीर मामला है और इस बात की जांच होनी चाहिए कि कहीं कोरोना वायरस महामारी के बहाने साधु संतों को निशाना तो नहीं बनाया जा रहा।

वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने भी ट्वीट करके आरोपियों पर रासुका लगाने की मांग की है। ऐसा न होने पर उन्होंने भी महाराष्ट्र सरकार को साधुओं के क्रोध का सामना करने की चेतावनी दी।

थम नहीं रहा अफवाहों का दौर

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन होने के बावजूद सोशल मीडिया पर अफवाहों का दौर थम नहीं रहा है। इसके चलते पूरे देश से भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लिए जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

इससे पहले सोशल मीडिया पर फैली अफवाह के चलते ही बड़ी संख्या में मजदूर दिल्ली के आनंद विहार और मुबंई के बांद्रा स्टेशन पर इकट्ठे हो गए थे। साथ ही सांप्रदायिकता फैलाने वाली अफवाहों के चलते देश के तमाम हिस्सों से अल्पसंख्यक सब्जी बेचने वालों पर जुल्म की घटनाएं भी सामने आई है। ऐसी ही बच्चा चोरी की अफवाह के चलते यह नृशंस घटना भी सामने आई है।

इस घटना पर पत्रकार रवीश कुमार अपने फेसबुक वाल पर लिखते हैं, ' भीड़ बनने की प्रक्रिया एक ही है। हमेशा एक झूठ से भीड़ बनती है और उसमें आग लगती है। यह प्रक्रिया हमारे समाज का हिस्सा होती जा रही है। महाराष्ट्र में पहले भी व्हाट्स एप के ज़रिए बच्चा चोरी गिरोह का अफवाह फैल चुकी है। भीड़ ने कई लोगों की हत्या कर दी। अफसोस कि समाज के भीतर की अमानवीयता के कारण कल्पवृक्षगिरी जी महाराज जैसे बेकसूर लोगों की ऐसी नृशंस हत्या हुई है। मॉब लिंचिंग वाले समाज में निरीह साधु प्राणी भी सुरक्षित नहीं है। भरोसा इतना कमज़ोर हो चुका है कि भीड़ सनक जाती है। वह नहीं देखती कि सामने कौन है। कई बार वह सामने कौन है को भी देखती है। जानती है कि वह हत्या के कर्म में शामिल है लेकिन समाज को आस पास शामिल देख कर वह हत्या कर रही होती है।'

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

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