NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोरोना काल में भी बिक्री कर रहे PM मोदी, अब IDBI बैंक बेचने का रास्ता साफ़ कर दिया
सरकार ने IDBI बैंक लिमिटेड में रणनीतिक विनिवेश और मैनेजमेंट के ट्रान्सफर को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को इस मामले में सैद्धांतिक मंजूरी दी।
सबरंग इंडिया
07 May 2021
कोरोना काल में भी बिक्री कर रहे PM मोदी, अब IDBI बैंक बेचने का रास्ता साफ कर दिया

नई दिल्ली। बुधवार सुबह 11 बजे से कैबिनेट की बैठक हुई। नरेंद्र मोदी ने अध्यक्षता की। लगा कि कोरोना नियंत्रण पर कोई फ़ैसला होगा। फ़ैसला हुआ कि IDBI बैंक को बेच दिया जाएगा। 

सरकार ने IDBI बैंक लिमिटेड में रणनीतिक विनिवेश और मैनेजमेंट के ट्रान्सफर को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को इस मामले में सैद्धांतिक मंजूरी दी। आईडीबीआई बैंक पर एलआईसी का नियंत्रण है। सरकार द्वारा आईडीबीआई बैंक में कितनी हिस्सेदारी बेची जाएगी इसका फैसला एलआईसी, भारतीय रिजर्व बैंक के साथ विचार विमर्श करके ट्रांजेक्शन की स्ट्रक्चरिंग के वक्त करेगी।

आईडीबीआई बैंक में भारत सरकार और एलआईसी दोनों की मिलाकर 94 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसमें से भारत सरकार की हिस्सेदारी 45.48% और LIC की 49.24% है। LIC अभी IDBI Bank की प्रमोटर है और उसी के पास बैंक के प्रबंधन का नियंत्रण है। वहीं सरकार को-प्रमोटर है। LIC के बोर्ड ने एक रिजॉल्यूशन पास किया है कि LIC, आईडीबीआई बैंक लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी विनिवेश के जरिए घटा सकती है। साथ ही सरकार भी अपनी हिस्सेदारी रणनीतिक विनिवेश के जरिए बेच सकती है।

इस मामले पर आर्थिक मामलों पर टिप्पणी करने वाले गिरीश मालवीय ने लिखा है....
कल शाम IDBI बैंक को बेचने पर मुहर लगा दी गयी आईडीबीआई एक सरकारी बैंक था, जो 1964 में देश में बना था. शेयर बाजार के मित्र बता रहे हैं कि जमकर इनसाइडर ट्रेडिंग हुई है. कुछ लोगो को पहले से मालूम था कि आज IDBI के डिसइन्वेस्टमेंट की घोषणा होने वाली है. कल प्रधानमंत्री ने कैबिनेट की बैठक की तो लगा कोरोना काल में जनता को राहत देने वाला कोई फैसला होगा तब ऐसा फैसला लिया है. 

एक बात बताइये ये फैसला आपने दो साल पहले क्यों नही लिया ? जब आपने LIC के सर पे बंदूक रख कर उससे 21000 करोड़ रुपये का निवेश करवाया था ओर उसे जबर्दस्ती 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने को मजबूर किया था ? तब ही बेच देते ! लेकिन तब कैसे बेचते ? क्योंकि तब तो IDBI बैंक एनपीए के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बैंक बन गया था। उस वक्त आईडीबीआई बैंक का सकल एनपीए 27.95% तक पहुंच गया था जिसका मतलब है कि बैंक द्वारा लोन किए गए प्रत्येक 100 रुपये में से 28 रुपये एनपीए में बदल गया. तब आपने LIC को आगे कर दिया कि इसे बचाओ नही तो बैंक डूबने का सिलसिला शुरू हो जाएगा. उसे लगातार चार सालों से घाटा हो रहा था और इस साल उसे सालों बाद फायदा होना शुरू हुआ तो झट से उसे बीच चौराहे पर बोली लगाने की वस्तु बना दिया गया. 

LIC से IDBI में हिस्सेदारी खरीदवाने के लिए भी खूब खेल खेले गए. दरअसल एलआईसी उस वक्त आईडीबीआई के शेयर नहीं खरीद सकती। उस पर किसी एक कंपनी में अधिकतम 15 फीसदी शेयर खरीदने की शर्त लागू थी और एलआईसी के पास आईडीबीआई के 10.82 प्रतिशत हिस्सेदारी पहले से ही थी. लेकिन सारे नियम बदल दिए गए. उसकी भागीदारी 51 प्रतिशत करवा दी गयी और उस से 21 हजार करोड़ डालने का दबाव बनाया गया.

ये पैसा आप और हम ही मिलकर के भरते हैं जब हम पॉलिसी का प्रीमियम चुकाते हैं. एलआईसी पॉलिसीधारकों के पैसे से ही खड़ा हुआ है और उस पैसे की सुरक्षा उसका प्राथमिक दायित्व है, तो एक डूबते हुए बैंक में नियंत्रण की हिस्सेदारी खरीदना एक समझदारी भरा निर्णय नहीं हो सकता था. लेकिन उस वक़्त भी घाटे के सौदे में हमारे खून पसीने की बचत को होम किया गया. 

एलआईसी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पहले से ही एक बड़ा निवेशक रहा है और भारत के 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से 16 में 9% से अधिक हिस्सेदारी रखता है तो उसके बावजूद उसे सर्वाधिक NPA वाले बैंक में इतनी बड़ी हिस्सेदारी के लिए मजबूर किया गया. 
जब एलआईसी के बड़ी हिस्सेदारी खरीदने पर सेबी के पूर्व चेयरमैन एम दामोदरन से पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि, इससे ना तो एलआईसी को फायदा होगा ना आईडीबीआई बैंक को. आज उनकी बात सच निकली. पता नहीं लोग अब भी क्यों नही समझ पा रहे हैं.

IDBI
Modi Govt
Narendra modi
LIC
privatization

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License