NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
चीनी मिशन में इकट्ठा किये गये चंद्रमा के चट्टानों से शोध और नये निष्कर्षों को मिल रही रफ़्तार
इस परिष्कृत चीनी चंद्र मिशन ने चीन और उसके बाहर दोनों ही जगहों पर पृथ्वी या उसके वायुमंडल से बाहर के चट्टानों पर शोध किया है। जानकार उम्मीद जता रहे हैं कि इससे हमें सौर मंडल के बारे में नयी-नयी जानकारियां मिल सकती हैं।

संदीपन तालुकदार
23 Mar 2022
moon

चीन का चंद्रमा मिशन, यानी चांग'ई 5, 23 नवंबर, 2020 को लॉन्च किया गया था। इस मिशन को चंद्रमा की सतह से चट्टान और धूल के नमूने इकट्ठे करने थे, और दिसंबर में इस मिशन का हिस्सा रहा एक छोटा अंतरिक्ष यान 2 किलो चट्टान के नमूने को कामायाबी के साथ इकट्ठा करने के बाद धरती पर अपनी वापसी कर ली। ये नमूने ओशनस प्रोसेलरम नाम से जाने जाते चंद्र-स्थल से इकट्ठे किये गये थे। चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रबंधन व्यवस्था सीएनएसए (CNSA-Chinese National Space Administration) की ओर से चलाया जा रहा यह चांग'ई 5 मिशन एक मील का पत्थर इसलिए साबित हो रहा है, क्योंकि इसने रोबोटिक रूप से चंद्र सतह में छेद की थी और इस नमूने को इकट्ठा कर लिया था। इससे पिछले के मिशनों में इस तरह के रोबोटिक ऑपरेशन दिखायी नहीं दे रहे थे। चंद्र सतह से नमूने इकट्ठा करने वाला आख़िरी कामयाब मिशन 1976 में यूएसएसआर का लूना 24 था।

परिष्कृत चीनी चंद्र मिशन ने चीन और उसके बाहर दोनों ही जगहों पर पृथ्वी या उसके वायुमंडल से बाहर के चट्टानों पर शोध किया है। जानकार उम्मीद जता रहे हैं कि इससे हमें सौर मंडल के बारे में नयी-नयी जानकारियां मिल सकती हैं। जैसा कि कहा जा रहा है कि तक़रीबन ऐसे आधे दर्जन अध्ययन प्रकाशित किये गये हैं, जिनमें चांग'ई 5 की ओर से इकट्ठे किये गये और लाये गये नमूनों पर शोध हुए हैं।

इंडियाना स्थित नॉर्ट डेम यूनिवर्सिटी के एक भू-वैज्ञानिक क्लाइव नील ने इसे लेकर आयोजित सम्मेलन के बारे में कहा, "बहुत सारे नौजवान चीनी शोधकर्ता इसमें शामिल हो रहे हैं। ह्यूस्टन में आयोजित इस सम्मेलन में कई स्नातकोत्तर शोधकर्ताओं और छात्रों ने इन चंद्र नमूनों पर अपने-अपने शोध प्रस्तुत किये हैं।”

उन्होंने आगे बताया, "ये चट्टानें उत्साह और जिज्ञासा पैदा करने वाले हैं, क्योंकि ये चट्टानें पहले इकट्ठे किये गये चट्टानों के मुक़ाबले चंद्रमा के चुम्बकत्व के एक बहुत ही अलग ही युग में ले जाने वाली संभावना की एक खिड़की खोल दे रही हैं।" क्लाइव नील ने भी चीन के सहयोग से इस चांग'ई-5 चंद्र नमूनों पर काम किया है।

पिछले साल चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रबंधन व्यवस्था ने चीन में कई शोध परियोजनाओं को मंज़ूरी दी थी। 85 आवेदनों में से चुनी गयी 31 वैज्ञानिक परियोजनाओं को चूर्ण और ठोस रूपों में लगभग 17.5 ग्राम नमूने वितरित किये गये थे। बाद में इस तरह के और भी आवेदन मंगाये गये थे।

पहली शोध टीम ने चंद्रमा की चट्टानों की आयु को समझने पर ध्यान केंद्रित किया और पिछले साल के 7 अक्टूबर को बेसाल्ट (चंद्रमा के नमूने) की आयु 1.96 अरब वर्ष बतायी गयी थी। ठीक दो हफ़्ते बाद ही शोधकर्ताओं की एक और टीम ने इन नमूनों की थोड़ी अलग आयु बतायी, और इसकी आयु दो अरब साल पुराना बतायी गयी। इन नतीजों से यह बात सामने आयी है कि अपोलो मिशन (नासा, यूएसए) से इकट्ठा किये गये चट्टानों की तुलना में इस नमूने से यह पता चलता है कि चंद्रमा एक अरब साल बाद भी ज्वालामुखी रूप से सक्रिय रहा।

ऐसा सोचा गया था कि चंद्रमा के आवरण में पाये जाने वाले थोरियम जैसे रेडियोधर्मी तत्व इस ज्वालामुखी का कारण बन सकते हैं। लेकिन,आईजीजी (इंस्टीट्यूट ऑफ़ जियोलॉजी एंड जियोफिजिक्स), बीजिंग स्थित चाइनीज़ एकेडमी ऑफ़ साइंसेज के एक अध्ययन में यह दावा किया गया था कि उच्च स्तर के रेडियोधर्मी तत्व इस ज्वालामुखी का स्रोत नहीं थे।

चंद्र ज्वालामुखी के हेने की पीछे की दूसरी संभावना के बारे में यह माना जाता है कि चंद्रमा के आवरण पर प्रचुर मात्रा में उस पानी की मौजूदगी रही होगी, जो तापमान को इस स्तर तक कम कर दिया हो कि उपलब्ध सामग्री पिघल जाती रही हो और हो सकता है कि मैग्मा (पिघला हुआ या आधे पिघला हुआ वह पदार्थ, जिसमें से आग्नेय चट्टानों का निर्माण हुआ था) ज्वालामुखी की तरह फट गया हो। हालांकि, इस विचार को आईजीजी में ही किये गये एक दूसरे अध्ययन के निष्कर्षों से खारिज कर दिया गया। इस अध्ययन में पाया गया कि चंद्रमा की ये चट्टानें शायद सूखे स्रोत से बनी थीं।

अब तक इस चंद्र ज्वालामुखी की कोई ठोस व्याख्या नहीं है, जिसकी पुष्टि चंद्र नमूनों पर हुए अध्ययन से हुई थी।

इस पर बीजिंग स्थित पेकिंग विश्वविद्यालय के एक भू-रसायनविद् मिंग टैंग का कहना है, "हम सभी संभावनाओं की खोज कर रहे हैं। यह मेरे और कई अन्य चीनी वैज्ञानिकों के लिए एक ऐसा अच्छा अवसर है, जो अपने इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी रखते हैं।"  टैंग को ख़ास तौर पर बेसाल्टिक चट्टान के दो छोटे-छोटे दाने मिले थे, और उन परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने को लेकर अध्ययन जारी हैं, जिनके तहत वे चंद्रमा में बने थे।

जानकारों को उम्मीद है कि इस रहस्य को सुलझाने के लिहाज़ से कई वैज्ञानिकों की चल रही इन कोशिशों से चंद्रमा के बारे में कई दूसरी जानकारियां भी मिल सकती हैं।

साभार:पीपल्स डिस्पैच

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://peoplesdispatch.org/2022/03/22/moon-rocks-collected-by-chinese-mission-have-ignited-research-new-findings/

moon
Lunar Surface
China
Space exploration

Related Stories

जलवायु शमन : रिसर्च ने बताया कि वृक्षारोपण मोनोकल्चर प्लांटेशन की तुलना में ज़्यादा फ़ायदेमंद

चीन का अंतरिक्ष मिशन : चंद्रमा से नमूना लेकर पृथ्वी पर वापस, गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाएगा उपग्रह

क्या भारत कोरोना से जंग जीत सकता है ?

लक्षण नज़र आने से पहले ही फैल चुका होता है कोरोना वायरस : अध्ययन

क्या सच में कोरोना वायरस से लड़ने में भारत गंभीर है?  

कोरोना वायरस से जूझता चीन और सतर्क होती दुनिया

कोरोनावायरस : चीन में 41 लोगों की मौत,भारत में 11 लोगों को निगरानी में रखा गया

चांद की सतह पर टकराने से झुका लैंडर ‘विक्रम’, लेकिन साबुत अवस्था में : इसरो

चंद्रयान-2 के अंतिम पड़ाव की पूरी कहानी : कैसा था 'विक्रम', क्या करता 'प्रज्ञान’?

चंद्रयान-2 का अब तक का सफ़र


बाकी खबरें

  •  Prayagraj murder and rape case
    सोनिया यादव
    यूपी: प्रयागराज हत्या और बलात्कार कांड ने प्रदेश में दलितों-महिलाओं की सुरक्षा पर फिर उठाए सवाल!
    27 Nov 2021
    इस घटना के बाद एक बार विपक्ष खस्ता कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर है, तो वहीं सरकार इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हुए है। हालांकि राज्य में एक के बाद एक घटित हो रही ऐसी घटनाएं सरकार के '…
  • ncrt
    गौरी आनंद
    ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए NCERT वेबसाइट पर डाली गई शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली को हटाया गया, LGBTQ+ समूहों ने किया विरोध
    27 Nov 2021
    700 से ज़्यादा लोगों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को भेजा गया।
  • farming
    डॉ. ज्ञान सिंह
    किसानों की बदहाली दूर करने के लिए ढेर सारे जायज कदम उठाने होंगे! 
    27 Nov 2021
    केवल 3 कृषि कानूनों को वापस ले लेने से ही छोटे किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण कारीगरों की दुर्दशा में सुधार नहीं होने जा रहा है। भारी कर्ज और बेहद गरीबी में जी रहे किसानों की भलाई के लिए ढेर सारे…
  • poverty
    भरत डोगरा
    डेटा: ग़रीबी कम करने में नाकाम उच्च विकास दर
    27 Nov 2021
    सरकार को असमानता को कम करना चाहिए और जीडीपी विकास दर को बढ़ा-चढ़ा कर पेश नहीं करना चाहिए। ग़रीबों को कोने में धकेलते हुए उनकी क़ीमत पर, आय और पूंजी को चंद मुट्ठियों में जमा किया जा रहा है।
  • turkish
    एम. के. भद्रकुमार
    तुर्की-यूएई रिश्तों में सुपर ब्लूम के मायने क्या हैं?
    27 Nov 2021
    तुर्की के लिए पूर्वी भूमध्य सागर में उसके अलग-थलग पड़ जाने और रूस के साथ उसके रिश्तों में बढ़ती टकराहट ने क्षेत्रीय देशों के साथ उसके सम्बन्धों में सुधार की ज़रूरत को अनिवार्य बना दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License