NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कानून
भारत
राजनीति
देश में पुलिसकर्मियों की भारी कमी, पांच लाख से ज़्यादा पद रिक्त
संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिकर्मी होने चाहिए जबकि भारत में ये आंकड़ा 156 है। वहीं भारत में स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 195 है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Feb 2022
देश में पुलिसकर्मियों की भारी कमी, पांच लाख से ज़्यादा पद रिक्त
तस्वीर सौजन्य : ClearIAS

देश भर में पुलिस बल में करीब पांच लाख से ज्यादा पद खाली हैं। ये जानकारी संसद की एक समिति की रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस बल में रिक्त पदों के अलावा जम्मू और कश्मीर समेत देश के 600 से अधिक पुलिस थानों में मौजूदा समय में फोन नहीं है वहीं ढाई सौ से अधिक थानों में कोई वाहन भी नहीं है।

जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक संसद में गृह मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थाई समिति की पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि एक जनवरी 2020 की स्थिति के अनुसार राज्य पुलिस बलों में 26,23,225 पदों की स्वीकृत संख्या की तुलना में 5,31,737 पद खाली हैं। इस तरह पुलिस बल में करीब 21% पद खाली हैं। रिपोर्ट के अनुसार खाली पड़े पदों में अधिकतर कांस्टेबल स्तर के हैं।

इस रिपोर्ट में आगे बताया गया, ‘‘देश में अपराध और सुरक्षा के मद्देनजर ये अपेक्षित आंकड़े नहीं हैं। कमेटी की राय है कि कर्मियों की संख्या में कमी से पुलिस की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है।’’ इसमें आगे कहा गया है कि देश भर में 16,833 थानों में से 257 थानों में वाहन नहीं है वहीं 638 थानों में टेलीफोन नहीं है और 143 थानों में वायरलेस या मोबाइल फोन नहीं हैं। कमेटी की राय है कि एडवांस पुलिस सिस्टम में बढ़िया और मजबूत कम्युनिकेशन सपोर्ट, नए उपकरण और तेज ऐक्शन के लिए अधिक गतिशीलता जरूरी है।

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट आगे कहती है कि 21वीं सदी में भी भारत में खासकर अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और पंजाब जैसे अनेक संवेदनशील सूबों में थाने बिना टेलीफोन या उचित वायरलैस कनेक्टिविटी के हैं, जबकि इनमें से कुछ राज्यों को 2018-19 में बेहतर प्रदर्शन प्रोत्साहन के लिए सम्मानित किया गया। समिति यह भी बोली, ‘‘जम्मू कश्मीर जैसे बहुत संवेदनशील सीमावर्ती केंद्र शासित प्रदेश में भी ऐसे थाने बड़ी संख्या में हैं, जिनमें टेलीफोन और वायरलेस सेट नहीं हैं।’’ कमेटी ने कहा कि इससे मौजूदा कर्मियों पर काम का अतिरिक्त बोझ भी पड़ता है। साथ ही उन्हें अतिरिक्त समय तक काम करना पड़ता है।

वर्ष 2019 में सामने आए गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश भर में पुलिस के करीब 5.28 लाख पद खाली थें। इनमें सबसे अधिक पद करीब 1.28 लाख पद उत्तर प्रदेश में थें। इसके बाद बिहार में 50,000 पद और पश्चिम बंगाल में 49,000 पद खाली थें।

उक्त वर्ष सभी राज्यों के पुलिस बलों में 23,79,728 स्वीकृत पद थें जिनमें से 18,51,332 पदों को एक जनवरी, 2018 तक भर लिया गया था। इस तारीख तक कुल 5,28,396 पद खाली पड़े थे। उत्तर प्रदेश में पुलिस बल में स्वीकृत पदों की संख्या 4,14,492 थी। इनमें से 2,85,540 पद भरे गए थे जबकि 1,28,952 पद खाली थें।

पुलिस बल में कमी के चलते मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का अतिरिक्त बोझ रहता है। कई बार रिपोर्ट सामने आई है कि पुलिसकर्मियों को अपने जरूरी कार्य के लिए भी छुट्टी नहीं मिल पाती है और उन्हें अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ती है। संयुक्त राष्ट्र के मानक के अनुसार एक लाख व्यक्तियों पर 222 पुलिकर्मी होने चाहिए जबकि भारत में ये आंकड़ा 156 है। वहीं भारत में स्वीकृत पुलिसकर्मियों की संख्या प्रति एक लाख व्यक्तियों पर 195 है।

बीते वर्ष आए एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 के दौरान अपराध के मामलों में वर्ष 2019 की तुलना में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। देश भर में वर्ष 2020 में प्रतिदिन औसतन 80 हत्याएं दर्ज की गईं और कुल 29,193 लोगों की हत्या की गई थी। इस मामले में राज्यों की सूची में यूपी सबसे उपर रहा। अपहरण की सबसे ज्यादा घटनाएं भी उत्तर प्रदेश में सामने आईं। एनसीआरबी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में कुल 66,01,285 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए। प्रति लाख जनसंख्या पर दर्ज अपराध दर वर्ष 2019 में 385.5 से बढ़कर वर्ष 2020 में 487.8 हो गई है।

वर्ष 2020 में पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 3,71,503 मामले दर्ज किए गए जो कि वर्ष 2019 में 4,05,326 थे और 2018 में 3,78,236 थे। महिलाओं के खिलाफ अपराध में उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर था।

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में देश भर में अपहरण के 84,805 मामलों में 88,590 पीड़ित थे। इनमें अधिकतर अर्थात 56,591 पीड़ित बच्चे थे। अपहरण के सबसे ज्यादा 12,913 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए थे।

 

Indian Police
indian police posts
lack of police officers in india
police posts in india

Related Stories


बाकी खबरें

  • अभिलाषा, संघर्ष आप्टे
    महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता
    04 Apr 2022
    “हम इस बात की सराहना करते हैं कि सरकार जांच में देरी को लेकर चिंतित है, लेकिन केवल जांच के ढांचे में निचले रैंक के अधिकारियों को शामिल करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता”।
  • रवि शंकर दुबे
    भगवा ओढ़ने को तैयार हैं शिवपाल यादव? मोदी, योगी को ट्विटर पर फॉलो करने के क्या हैं मायने?
    04 Apr 2022
    ऐसा मालूम होता है कि शिवपाल यादव को अपनी राजनीतिक विरासत ख़तरे में दिख रही है। यही कारण है कि वो धीरे-धीरे ही सही लेकिन भाजपा की ओर नरम पड़ते नज़र आ रहे हैं। आने वाले वक़्त में वो सत्ता खेमे में जाते…
  • विजय विनीत
    पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव
    04 Apr 2022
    पत्रकारों की रिहाई के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। जुलूस-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आंचलिक पत्रकार भी शामिल हुए। ख़ासतौर पर वे पत्रकार जिनसे अख़बार…
  • सोनिया यादव
    बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
    04 Apr 2022
    बीएचयू में प्रशासन और छात्र एक बार फिर आमने-सामने हैं। सीएचएस में प्रवेश परीक्षा के बजाए लॉटरी सिस्टम के विरोध में अभिभावकों के बाद अब छात्रों और छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
  • टिकेंदर सिंह पंवार
    बेहतर नगरीय प्रशासन के लिए नई स्थानीय निकाय सूची का बनना ज़रूरी
    04 Apr 2022
    74वां संविधान संशोधन पूरे भारत में स्थानीय नगरीय निकायों को मज़बूत करने में नाकाम रहा है। आज जब शहरों की प्रवृत्तियां बदल रही हैं, तब हमें इस संशोधन से परे देखने की ज़रूरत है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License