NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
मॉस्को कर रहा है 'गुड कॉप, बैड कॉप' का सामना
रूस इस बात से कतई प्रभावित नहीं है कि यूरोपीयन नेता मॉस्को के लिए कोई रास्ता तैयार कर रहे हैं बल्कि वह इसे अप्रासंगिक कूटनीतिक उतार-चढ़ाव की रणनीति के रूप में देखता है।
एम.के. भद्रकुमार
11 Feb 2022
मॉस्को कर रहा है 'गुड कॉप, बैड कॉप' का सामना

अमेरिकियों ने 19 वीं शताब्दी की अपनी जेलों की एक विशिष्ट विशेषता को याद करते हुए उस "लॉकस्टेप" कठबोली का इस्तेमाल किया जब कैदियों को अपने पैरों से बंधी बेड़ियों के कारण पैरों को बदलने में कठिनाई उठानी पड़ती थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन ने सोमवार को यह बताने के लिए उक्त कठबोली को शक्तिशाली उत्तेजक रूपक में इस्तेमाल किया कि उनका देश और जर्मनी यूक्रेन में किसी भी रूसी आक्रमण से लड़ने के लिए गठबंधन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "जर्मनी अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक है," उन्होंने कहा, कथित रूसी आक्रामकता को दबाने के लिए दोनों देश "लॉकस्टेप रणनीति पर काम कर रहे हैं"। बाइडेन व्हाइट हाउस में नए जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक से पहले उक्त बातें बोल रहे थे।

रूस के लिए, "लॉकस्टेप" 20 वीं शताब्दी का एक भयानक रूपक है जो नाजी जर्मनी की याद दिलाता है। अपमानजनक स्वर की अवहेलना करते हुए, बाइडेन ने जर्मन-अमेरिकी एकजुटता और अनुशासन को अपने देश के लिए लापरवाही से इस्तेमाल किया है। स्कोल्ज़ ने बस जवाब दिया कि, "मैं आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।" स्कोल्ज़ ने कहा कि अमेरिका जर्मनी के "निकटतम सहयोगियों" में से एक है।

बाइडेन के साथ इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नॉर्ड स्टीम 2 परियोजना का उल्लेख करने के मामले में स्कोल्ज़ की अनिच्छा से बहुत कुछ पढ़ा जा रहा है। लेकिन क्या यह वाकई मायने रखता है? बाइडेन ने इस पर बात की, और दृढ़ता से सुझाव दिया कि नॉर्ड स्ट्रीम 2 का मुद्दा जर्मनी के साथ संबंधों के रास्ते में नहीं आना चाहिए।

दरअसल, बाइडेन, जो लगभग आधी सदी तक अमेरिकी विदेश नीति के प्रमुख व्यक्ति रहे हैं, इस परियोजना से जुड़ी स्कोल्ज़ की नाजुक राजनीति को पहचानते हैं। वह यह भी जानते हैं कि स्कोल्ज़ अपने काम में नया है और रूस के जवाब में ट्रान्साटलांटिक गठबंधन को एकजुट करने में असमर्थ है, जैसा कि उनकी पूर्ववर्ती एंजेला मर्केल कर सकती थी। 

कुल मिलाकर, बाइडेन के खुश होने का कारण यह है कि रूस की प्रतिक्रिया के मामले में कुछ पहलुओं पर स्पष्ट असहमति के बावजूद अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच संबंध मजबूत हैं। मूल रूप से, गठबंधन इस बात से सहमत है कि यूक्रेन में रूसी सैन्य हस्तक्षेप अनियंत्रित नहीं हो सकता।

वाशिंगटन भी रूस के साथ फ्रांसीसी नेतृत्व की हुई वार्ता से परेशान है और क्रेमलिन के साथ जुड़ने के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के प्रयासों को फ्रांस के आगे बढ़ाने के तरीके के रूप में देखता है - और इसलिए मैक्रोन खुद को – बाइडेन या बोरिस जॉनसन की तुलना में अधिक प्रभावशाली खिलाड़ी के रूप में देखता है। मैक्रॉन राष्ट्रपति चुनाव से केवल दो महीने की दूरी पर हैं जहां वह दूसरा कार्यकाल चाहते हैं।

मॉस्को की यात्रा के बाद मैक्रोंन ने मंगलवार को कीव की भी यात्रा की है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि "अगले कुछ दिन निर्णायक होंगे और इसके लिए गहन चर्चा की जरूरत होगी जिसे हम साथ मिलकर आगे बढ़ाएंगे।" लेकिन मॉस्को दो दिमागों में नहीं चल सकता है कि जब रास्ते बंद हो जाएंगे, तो अमेरिका के सहयोगी अनिवार्य रूप से बाइडेन के पीछे खड़े होंगे, जैसा कि इतिहास गवाही देता है।

यह बात अज्ञात है कि अमरीकी सहयोगी तब कैसी प्रतिक्रिया देंगे यदि रूसी हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर सैन्य हस्तक्षेप न होकर और यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र तक सीमित एक ऑपरेशन तक सीमित रहता है। यह शायद इस बात की तसदीक करता है कि क्यों स्कोल्ज़ नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन के भविष्य पर सार्वजनिक रूप से प्रतिबद्ध नहीं हैं या कुछ क्यों नहीं कह रहे हैं। 

सीएनएन ने अनुमान लगाया है कि स्कोल्ज़ बाइडेन के साथ किसी तरह की समझ के आधार पर आए होंगे। मुद्दा यह है कि, जर्मन अर्थव्यवस्था रूस के साथ निकटता से जुड़ी हुई है, और नॉर्ड स्टीम 2 को खत्म करने से उनकी मुश्किल बढ़ सकती है और साथ ही स्कोल्ज़ की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है।

ऐसे संवेदनशील मोड़ पर, बेड कॉप, गुड कॉप की भूमिका निभाकर मॉस्को को भ्रमित करना वाशिंगटन के टूल बॉक्स का भी हिस्सा है। जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड के बीच वीमर त्रिकोणीय  की तथाकथित बर्लिन घोषणा ने मंगलवार को रूस से "यूक्रेनी सीमा पर स्थिति को कम करने और यूरोपीय महाद्वीप पर सुरक्षा पर एक सार्थक बातचीत में संलग्न होने" का आह्वान किया है।

बयान में कहा गया है कि, "फ्रांस, पोलैंड और जर्मनी पारस्परिक चिंता के सुरक्षा मुद्दों पर सार्थक और परिणाम-उन्मुख चर्चा में रचनात्मक रूप से शामिल होने की इच्छा व्यक्त करते हैं।" फिर  यह भी जोड़ा गया कि, "गठबंधन द्वारा दोहरे ट्रैक दृष्टिकोण के अनुरूप सभी नेताओं ने सहमति व्यक्त की है कि गठबंधन को लगातार स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए और अपने प्रतिरोध और रक्षा मुद्रा को बनाए रखने की जरूरत है और यदि सुरक्षा वातावरण में गिरावट आती है तो उसका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, जिसमें नाटो के आगे बढ़ने की कार्यवाही भी शामिल है।”

मरणासन्न वीमर त्रिभुज की अचानक उपस्थिति केवल मॉस्को के संदेह की पुष्टि कर सकती है कि वाशिंगटन खेल खेल रहा है। जबकि जर्मनी और फ्रांस ने अब तक रूस के प्रति अधिक राजनयिक दृष्टिकोण का विकल्प चुना है और मॉस्को के साथ बातचीत को फिर से शुरू करने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है, पोलैंड ने सख्त रुख अपनाया है। त्रिपक्षीय प्रारूप क्रेमलिन के प्रति यूरोप के दृष्टिकोण को फिर से जांचने का एक अनाड़ी प्रयास है।

स्पष्ट रूप से, रूस को पश्चिम में ऐसे विविध कार्यकलापों, विभिन्न क्रमपरिवर्तनों और संयोजनों में लुभाया जा रहा है। ब्रिटिश विदेश सचिव एलिजाबेथ ट्रस गुरुवार को मॉस्को और अगले मंगलवार को स्कॉल्ज़ खुद बात करने जा रहे हैं। लेकिन नाटो के रोलबैक और रूस की सुरक्षा मांगों जैसे मूल मुद्दों पर, कोई चर्चा नहीं है।

वास्तव में, इनमें से कोई भी देश - यूके, फ्रांस, जर्मनी या पोलैंड - रूस के साथ मुख्य मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है। सबसे अच्छा, वे बिना किसी नुकसान के, यूक्रेन की सीमा से बहुत दूर सैनिकों को वापस लेकर रूस को "युद्ध की स्थिति को कम करने" के लिए "बाहर निकालने का मार्ग" प्रदान कर सकते हैं।

मॉस्को में निराशा बढ़ रही है। विदेश मंत्रालय ने आज जर्मनी को "कब्जे वाले राष्ट्र" के रूप में वर्णित किया है, जहां अमेरिकी राजदूत "जर्मन अधिकारियों को आदेश दे रहे हैं" और "उनकी जमीन पर 30,000 अमेरिकी सैनिक बैठे हुए हैं।"

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा है कि स्कोल्ज़ अमेरिकी दबाव के सामने  झुक गए हैं। उसने आगे कहा कि, "जर्मनी को इस गैस की जरूरत इसलिए नहीं है कि वे रूस को पसंद करते हैं या हमें खुश करना चाहते हैं - उन्हें बस इसकी जरूरत है, यह उनकी अर्थव्यवस्था का पोषण करती है, यह एक ऐसा संसाधन है जिस पर उनका औद्योगिक विकास टिका हुआ है, यह उनके जीने की जरूरत है, मूल रूप से ... यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।"

ज़खारोवा ने अफसोस जताया कि न केवल जर्मनी के साथ बल्कि बाकी यूरोप के साथ भी ऐसा ही मामला है। "लंबे समय से किसी भी संप्रभु हितों की कोई बात नहीं हुई है।"

इस विस्फोट का समय आकस्मिक नहीं हो सकता है। निश्चित रूप से, इसने जानबूझकर मैक्रोंन की यात्रा को नीचा दिखाने के लिए "फील-गुड" को बिखेर दिया है। रूस इस बात से प्रभावित नहीं है कि यूरोपीय नेता मॉस्को के लिए आगे बढ़ रहे हैं। वह इसे अप्रासंगिक कूटनीतिक उतार-चढ़ाव की रणनीति के रूप में देखता है।

और, यह सब तब हो रहा है जब नाटो रूस की सीमाओं पर अपनी सेना को बड़ी संख्या में तैनात कर रहा है और आस-पास के क्षेत्रों में सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास जारी रखे हुए है। साथ ही, रूस-यूक्रेन संबंध बिगड़ रहे हैं क्योंकि दोनों पक्ष अपनी सीमाओं पर बड़ी संख्या में सैन्य कर्मियों और उपकरणों को बढ़ा रहे हैं।

एम.के. भद्रकुमार एक पूर्व राजनयिक हैं। वे उज्बेकिस्तान और तुर्की में भारत के राजदूत रह चुके हैं। व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।

Russia
US
France
germany
Weimar Triangle
Joe Biden

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत


बाकी खबरें

  • सौरभ शर्मा
    'नथिंग विल बी फॉरगॉटन' : जामिया छात्रों के संघर्ष की बात करती किताब
    09 May 2022
    वह जिनमें निराशा भर गई है, उनके लिए इस नई किताब ने उम्मीद जगाने का काम किया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ज्ञानवापी विवाद में नया मोड़, वादी राखी सिंह वापस लेने जा रही हैं केस, जानिए क्यों?  
    09 May 2022
    राखी सिंह विश्व वैदिक सनातन संघ से जुड़ी हैं। वह अपनी याचिका वापस लेने की तैयारी में है। इसको लेकर उन्होंने अर्जी डाल दी है, जिसे लेकर हड़कंप है। इसके अलावा कमिश्नर बदलने की याचिका पर सिविल जज (…
  • itihas ke panne
    न्यूज़क्लिक ब्यूरो
    क्या हिंदी को लेकर हठ देश की विविधता के विपरीत है ?
    08 May 2022
    पिछले महीने देश के गृह मंत्री अमित शाह ने बयान दिया कि अलग प्रदेशों के लोगों को भी एक दूसरे से हिंदी में बात करनी चाहिए। इसके बाद देश में हिंदी को लेकर विवाद फिर एक बार सामने आ गया है। कई विपक्ष के…
  • farmers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग
    08 May 2022
    किसान संगठनों ने 9 मई को प्रदेशभर में सिवनी हत्याकांड और इसके साथ ही एमएसपी को लेकर अभियान शुरू करने का आह्वान किया।
  • kavita
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : माँओं के नाम कविताएं
    08 May 2022
    मदर्स डे के मौक़े पर हम पेश कर रहे हैं माँओं के नाम और माँओं की जानिब से लिखी कविताएं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License