NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
"आम लोगों और पार्टियों पर नहीं प्रदेश सरकार पर हो हत्या का मुकदमा"
राजधानी लखनऊ में सीपीएम राज्य मुख्यालय पर भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि CAA के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए पार्टी के नेता और कार्यकर्ता ज़िम्मेदार हैं।
असद रिज़वी
28 Dec 2019
lucknow protest

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी (सीपीएम) को प्रशासन द्वारा एक नोटिस देकर 19 दिसंबर को लखनऊ में हुई हिंसा का दोषी बताया गया है। वामपंथी नेताओं का कहना है कि सरकार इस तरह की नोटिस देकर लोकतांत्रिक ढंग से उठने वाली असहमति की आवाज़ों को दबाना चाहती है।

राजधानी लखनऊ में 10 विधानसभा मार्ग पर स्थित सीपीएम राज्य मुख्यालय पर भेजे गए नोटिस में प्रशासन द्वारा आरोप लगाया गया है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के लिए पार्टी के नेता और कार्यकर्ता ज़िम्मेदार हैं। नगर मजिस्ट्रेट के कार्यालय द्वारा भेजे गए नोटिस में पार्टी नेताओ से प्रश्न किया गया है कि जब उन्हें मालूम था कि लखनऊ में 19 दिसंबर को धारा 144 लगी हुई थी, तो उन के पार्टी कार्यकर्ता नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में प्रदर्शन करने क्यों निकले थे?

e30f01a4-6281-4d22-b64d-c179cdc26192.jpg

पार्टी के राज्य सचिव छोटेलाल पाल को संबोधित प्रशासन द्वारा भेजे नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पार्टी के नेताओं के उकसाने से ही राजधानी में हिंसा भड़की।राजधानी लखनऊ में 19 दिसंबर हुई आगज़नी और सरकारी व ग़ैर सरकारी संपत्ति के नुक़सान के लिए भी सरकारी नोटिस में पार्टी को ही ज़िम्मेदार ठहराया गया है। बता दें कि सीपीएम को यह नोटिस सीआरपीसी की धारा 149 के तहत दिया गया है।

वामपंथी दलों ने सीपीएम को प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस की निंदा की है।सीपीएम ने प्रशासन द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। पार्टी के सचिव छोटेलाल पाल का कहना है कि 19 दिसंबर को सभी वामपंथी दलों द्वारा संयुक्त रूप से नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में सारे भारत में प्रदर्शन का आह्वान किया गया था।

इसी के तहत सीपीएम कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में हुए प्रदर्शन में लोकतांत्रिक ढंग से हिस्सा लिया था। लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा किसी भी हिंसक कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया गया।छोटेलाल के अनुसार पुलिस-प्रशासन बिना द्वारा बिना किसी आधार और सुबूत के आरोप लगा रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि प्रशासन सरकार के इशारे पर उस के राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रहा है।

सीपीएम की वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने भी पार्टी को नोटिस दिए जाने की निंदा की है। सुभाषिनी अली कहती हैं कि उत्तर प्रदेश में ‘अंधेर नगरी चौपट राज’ चल रहा है। उनके अनुसार यह इतिहास में पहली बार हो रहा है कि किसी पार्टी को लोकतांत्रिक ढंग से किए गए विरोध प्रदर्शन के लिए नोटिस भेजा गया है। सुभाषिनी ने बताया कि पार्टी द्वारा नोटिस का जवाब प्रशासन को दे दिया गया है।

वामपंथी दल सीपीआई ने कहा है कि सीपीएम नोटिस देना, योगी आदित्यनाथ सरकार के तानाशाही रवैये को दर्शाता है। सीपीआई नेता अतुल कुमार अंजान ने न्यूज़क्लिक के लिए बताया कि न सिर्फ़ लखनऊ में बल्कि प्रदेश के दूसरे भागों में भी वामपंथियों को भाजपा सरकार द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। अतुल कुमार अंजान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में क़रीब 67 वामपंथी जेल में बंद हैं।

सीपीआई नेता ने कहा जिनको जेलों में बंद किया गया है उनके ख़िलाफ़ हिंसा का कोई भी सुबुत पुलिस-प्रशासन के पास नहीं है। उन्होंने ने आरोप लगया प्रदेश सरकार बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है।

अतुल कुमार अंजान ने कहा कि आम लोगों और दूसरी पार्टियों पर मुक़दमा चलाए जाने और उनको नोटिस देने के बदले स्वयं प्रदेश सरकार पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे 18 लोगों की हत्या किए जाने का मुक़दमा चलाया जाना चाहिए है। क्योंकि मीडिया द्वारा जो तस्वीरें सामने आयी है उसमें साफ़ दिख रहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग कर रही है और गोलियां चला रही है।

सीपीआई (एमएल) का कहना है कि कोई क़ानून लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को संवैधानिक ढंग से प्रदर्शन करने से नहीं रोक सकता है। इस तरह की कार्रवाइयों से भविष्य में उठने वाली असहमति की आवाज़ों को दबाया भी नहीं जा सकता है। पार्टी के नेता रमेश सिंह सेंगर ने बताया कि 19 दिसंबर से पहले ही उन के ऊपर प्रशासन का दबाव था कि वह स्वयं और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में परिवर्तन चौक,लखनऊ पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल न हो। उन्होंने बताया कि इसके लिए 19 दिसंबर से पहले क़रीब तीन बार पार्टी के मुख्यालय पर पुलिस भी आयी थी।

रमेश सिंह सेंगर ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दिन पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के दो छात्रों को हिरासत में ले लिया था। लेकिन सुबूत न होने के आधार पर दोनों को उसी रात छोड़ दिया गया। परंतु देर रात लिखी गई एफ़आइआर में आइसा को नाम फिर से शामिल कर लिया गया है।

उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार मनमाने ढंग से दमन का चक्र चला रही है। बेगुनाह प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलायी जा रही हैं और उनको जेल भेजा जा रहा है। रमेश सिंह सेंगर कहते हैं कि भाजपा सरकार पुलिस द्वारा दमन करके विपक्ष की असहमति की आवाज़ को नहीं दबा सकती है। इस दमन से किसी को कोई भय नहीं है और भविष्य में होने वाले आंदोलनों पर इस का कोई प्रभाव भी नहीं पड़ेगा

UttarPradesh
Lucknow
CAA
Protest against CAA
CPIM
CPI
Political Party
Political Party Volunteers
CPIML
UP police
Yogi Adityanath
BJP

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • kisan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर हत्याकांड: देशभर में मनाया गया शहीद किसान दिवस, तिकोनिया में हुई ‘अंतिम अरदास’
    12 Oct 2021
    तिकोनिया में शहीद किसानों को याद में ‘अंतिम अरदास’ कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें किसान नेताओं के साथ विभिन्न राज्यों के किसान और भारी संख्या में अन्य आम लोग यहां पहुंचे।
  • covid
    भाषा
    विशेषज्ञ पैनल ने दो साल तक के बच्चों के लिए कोवैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी देने की सिफारिश की
    12 Oct 2021
    हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने दो से 18 साल तक के बच्चों एवं किशोरों में इस्तेमाल के लिए कोविड-19 रोधी टीके कोवैक्सीन के 2/3 चरण का परीक्षण पूरा कर लिया है।
  • Will Damodar River Again be Bengal’s ‘Sorrow
    रबींद्र नाथ सिन्हा
    क्या दामोदर नदी फिर से बंगाल का 'शोक' बनेगी?
    12 Oct 2021
    5 अक्टूबर को ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को ख़त लिखते हुए बाढ़ की स्थितियों में आपात हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने दामोदर घाटी निगम के अनियोजित और अनियंत्रित पानी छोड़ने की गतिविधि को दक्षिण बंगाल…
  • taliban
    न्यूज़क्लिक टीम
    तालिबान पर अमेरिकी दांव, EU-नेटो-चीन के बीच कूटनीति
    12 Oct 2021
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने तालिबान से अमेरिकी अधिकारियों की बातचीत के कूटनीतिक मायनों पर न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की। साथ ही जर्मनी में सत्ता…
  • Nobel in Economics
    अजय कुमार
    न्यूनतम मज़दूरी बढ़ने से रोजगार कम नहीं होता : जानिए इस साल के अर्थशास्त्र के नोबेल की कहानी
    12 Oct 2021
    न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने पर रोजगार बढ़ेगा या घटेगा? ऐसे सवालों का जवाब देना बहुत कठिन काम है। इस कठिन काम को जिन अर्थशास्त्रियों ने सुलझाया है। उन्हें ही इस बार का नोबेल पुरस्कार दिया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License