NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या भारत में मुसलमान हिंदुओं की मेहरबानी से खुश हैं?
देश में मुसलमानों की हालत, खासतौर पर भाजपा के शासनकाल में दूसरी श्रेणी के नागरिक जैसी हो गई है।
राम पुनियानी
15 Oct 2019
Translated by महेश कुमार
muslim in india

आज की तारीख में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति होंगे। क्योंकि वे नियमित रूप से, गाहे-बगाहे विभिन्न अवसरों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके 'विश्व दृष्टिकोण' की नीतियों का वर्णन करते रहते है। उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचारों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गठजोड़ जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी शामिल है, काफी तहे दिल से विश्वास करते हें और उन्हे लागू कराते हें।

वे कहते है कि पूरी दुनिया में हिंदुओं के कारण भारतीय मुसलमान सबसे ज्यादा खुश हैं। भागवत इन निष्कर्षों पर पहुँचने के लिए जिन पैरामीटरस का उपयोग कर रहे हें वे स्पष्ट नहीं हैं। क्या वे भारतीय मुसलमानों की स्थिति की तुलना इंडोनेशिया, मलेशिया, तुर्की, सूडान या पश्चिमी दुनिया के मुसलमानों से कर रहे है? इतनी खबर तो उन्हे होनी ही चाहिए कि पूरी दुनिया में मुसलमानों की स्थिति एक समान नहीं है, और अगर कोई तुलना करनी भी है तो उसे आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से किया जाना चाहिए।

यहां यह जोड़ने की जरूरत है कि भारत में सभी मुसलमानों या भारतीयों की हालत एक समान नहीं है। हमारा समाज एक गहरी असमानता वाला समाज हैं। और इसलिए यह आम तौर पर कहा जा सकता है कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं की स्थिति काफी बदतर है। भागवत भारतीय मुसलमानों की तुलना पाकिस्तान या पश्चिम एशिया से करने की कोशिश कर रहे होंगे।

किसी को यह भी नोट करना चाहिए कि हमारे मुस्लिम बहुल पड़ोसी देश बांग्लादेश की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है; उनके समग्र सामाजिक सूचकांक भारत की तुलना में थोड़ा बेहतर हैं। हालाँकि, यह भी सच है कि भारत में, एक समुदाय के रूप में मुसलमानों को उनकी अपनी धार्मिक पहचान के कारण कुछ सामान्य तकलीफ़ें उठानी पड़ती हैं। उनकी ये दिक्कतें मुख्यत उन्हे व्यापक रूप से आर्थिक रूप से हाशिए पर डालने, सामाजिक रूप से भिन्न और अविकसित बस्तियों में रहने पर मजबूर करने और देश की राजनीतिक प्रक्रियाओं में उन्हें दरकिनार किए जाने के कारण है।

देश के विभाजन के बाद, जिन मुसलमानों ने भारत में रहने का विकल्प चुना था या जिन्हें रहने के लिए मजबूर किया गया था, अपनी स्थिति को देखते हुए वे विभाजन की इस त्रासदी के लिए दोषी ठहराते है। उनके हाशिए को इस डर से संबोधित नहीं किया जाता कि कहीं इस मुद्दे को संबोधित करने वालों पर अल्पसंख्यकों को खुश करने का लांछन न लग जाए। जबकि मुद्दा तो उनके आर्थिक पतन का था जिसने मुस्लिम समाज के एक बड़े हिस्से को लील कर रख दिया है।

इसके साथ ही विभाजन के बाद की सांप्रदायिक हिंसा, जो1960 के दशक में शुरू हुई थी, बाद में उसने भयावह रूप ले लिया, खासकर राम मंदिर आंदोलन के बाद स्थिति काफी बिगड़ गई। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा बेरोकटोक जारी रही। इसके परिणाम स्वरूप समुदाय को सामाजिक रूप से ऐसी अविकसित बस्तियों में रहना पड़ा जहां ज्यादा सुविधाएं नहीं हें, इस सब ने समुदाय के सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित किया है।

रंगनाथ मिश्रा आयोग और फिर सच्चर समिति को भारत में मुसलमानों की स्थिति का जायज़ा लेने के लिए गठित किया गया था। परिणाम चौंकाने वाले थे और इससे सामान्य धारणा यह बनी कि मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में गिरावट आ रही है। जो स्थिति उनकी 1940 के दशक के मध्य तक थी उसके बाद  उनकी स्थिति खराब होती चली गई। बेशक, भागवत और उनके गठजोड़ के लोग इन रिपोर्टों की अनदेखी कर रहे हें।

इन रिपोर्टों के आने के बाद, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि समाज के वंचित तबकों का देश के संसाधनों पर पहला अधिकार होना चाहिए, तब भागवत के अनुयायियों ने उनके इस बयान को विकृत करते हुए कहा कि कांग्रेस चाहती है कि मुसलमानों का राष्ट्रीय संसाधनों पर पहला अधिकार हो। आरएसएस-भाजपा के बड़े और व्यापक प्रचार तंत्र के सामने, कांग्रेस का स्पष्टीकरण धूल चाट गया क्योंकि उसके बाद वे कहते रहे कि सभी वंचित तबकों का संसाधनों पर पहला अधिकार होना चाहिए, वह बात दब गई।

आज जो सांप्रदायिक हिंसा चल रही है, जिसमें गाय के नाम पर हिंसक भीड़ द्वारा कत्ल कर देना (काऊ लिंचिंग), घर वापसी और लव जिहाद सरीके मुद्दों को बड़ी चतुराई से उकसाना और इन मुद्दों के असर का इस्तेमाल कर मुस्लिम समुदाय को और अधिक हाशिए पर डालना जारी है। तो हम इन दावों के मद्देनज़र कैसे मान ले कि दुनिया के मुक़ाबले मुस्लिम समुदाय हमारे देश में सबसे अच्छी स्थिति हैं? दावा यह भी किया जा रहा है कि जब से हम हिंदू राष्ट्र बने हैं, दूसरे देशों के सताए लोग हमारे देश में शरण लेने लगे हें। ये दावा छोटे पारसी और यहूदी समुदायों के मामले में किया जा रहा है। यह दावा पूरी तरह से झूठ पर आधारित है कि हमारा देश पहले के समय में एक हिंदू राष्ट्र था।

हम जानते हैं कि पहले बिखरी हुई राजशाही थी, विभिन्न राजाओं की अपनी खुद की नीतियां थीं जहां लोग आ रहे थे और जा रहे थे। यह भारत की एक अनूठी भौगोलिक स्थिति है जिसकी वजह से कई समुदाय यहाँ आकर बस गए। नवीनतम जनसंख्या आनुवांशिकी अध्ययन से पता चलता है कि आर्य लगभग 3,500 साल पहले फारस से यहां आए थे, जबकि सबसे पहले इंसान यहां 70,000 साल पहले दक्षिण अफ्रीका से आए थे।

आज, हम दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों और कई पश्चिमी देशों में भारतीय मूल के हिंदुओं को बड़ी संख्या में पाते हैं। आबादी विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पलायन कर रही है और अपने लिए नए ठोर-ठिकाने ढूंढ रही है।भारत के हिंदू राष्ट्र होने का भागवत का दावा पूरी तरह से स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं की राय के विपरीत का मामला है।

गांधी, मौलाना आजाद, भगत सिंह, अम्बेडकर, सरदार पटेल और नेहरू ने भारत को अपनी धार्मिक और अन्य विविधता के कारण एक राष्ट्र के रूप में देखा और पहचाना। उनके विचारों को भारतीय संविधान में सँजोया गया है। यह "वी द पीपल ऑफ इंडिया" यानि “हम भारत के लोग” से शुरू होता है। यह कितना भयावह विचार है कि आरएसएस गठजोड़ चाहता है कि हम सब यह मानें कि हम कभी हिंदू राष्ट्र थे और आज भी हें।

हिंदू राष्ट्र में विश्वास को जताते हुए भागवत एक तरफ से सभी भारतीयों को हिंदू कह रहे हैं, जो भारतीय संविधान और लोगों की स्वयं  की आत्म-धारणा या उनके अपने विशवास के खिलाफ है। अब आरएसएस ने भी 'विविधता' शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यह एक दिखावा है। उनकी विचारधारा की असली परीक्षा तो उनके द्वारा चलाए जा रहे अभियानों से होती है जैसे राम मंदिर, गाय-बीफ लिंचिंग, घर वापसी और लव जिहाद। ये मुद्दे धार्मिक आधार पर समाज को विभाजित करते रहे हैं। दलित समुदाय भी गाय-बीफ की तरह हिंदुत्व के एजेंडे द्वारा उठाए गए मुद्दों के बराबर के शिकार हो रहे हैं।

मुसलमानों की हालत व्यावहारिक रूप से दूसरी श्रेणी के नागरिकों जैसी है। इसलिए इसमें भी कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने से पहले मुस्लिम बहुल राज्य की राय को नहीं लिया गया, जिसे भाजपा द्वारा साहसिक कदम के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। लोकतंत्र के स्वास्थ्य के सूचकांक का मूल्यांकन अल्पसंख्यकों और समाज के कमज़ोर वर्गों की भलाई के आकलन से किया जाता है। इस स्थिति में, यह दावा करना कि भारत में मुसलमान दुनिया की तुलना में सबसे ज्यादा खुश है, समुदाय के साथ  एक क्रूर मज़ाक है।

Muslims in India
Mohan Bhagwat
BJP
RSS
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License