NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
विज्ञान
भारत में कोरोना के म्यूटेंट वेरिएंट: अब तक हम क्या जानते हैं?
दुनियाभर की आबादी में कोरोना वायरस के कई वेरिएंट तबाही मचा रहे हैं। भारत में संकट पैदा करने वाला नया स्ट्रेन इस क्रम में नया प्रवेश है।
संदीपन तालुकदार
13 May 2021
covid

भारत अब कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चपेट में है और लगातार मामले बढ़ रहे हैं। शुरुआत में इस लहर का केंद्र महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और गुजरात जैसे राज्य थे। लेकिन अब यह नए-नए इलाकों में पहुंच रही है। एक अभूतपूर्व स्वास्थ्य संकट में वैज्ञानिक और शोधार्थी उन चीजों को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जिनके चलते कोरोना के मरीज़ों की स्थिति गंभीर हो जाती है।

ऐसी ही एक वज़ह कोरोना वायरस के बदले हुए "म्यूटेंट वेरिएंट्स" का सामने आना है। भारत में कई वेरिएंट अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद हैं। जीनोम के आंकड़ों से पता चलता है कि B.1.1.7 वेरिएंट दिल्ली और पंजाब में प्रभावशाली रहा है। यह वेरिएंट पहली बार ब्रिटेन में सामने आया था। अब पश्चिम बंगाल में B.1.618 नाम का नया वेरिएंट आया है, जबकि दोहरे बदलाव वाला वायरस B.1.617 महाराष्ट्र में ज़्यादा फैला था।

लेकिन कुछ ही वक़्त में B.1.617 वेरिएंट पूरे भारत में प्रभावशाली हो गया। बताया जा रहा है कि यह 40 से ज़्यादा देशों में फैल चुका है। इनमें ब्रिटेन, फिजी और सिंगापुर शामिल हैं। दो दिन पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे कोरोना वायरस का "चिंताजनक प्रकार" घोषित कर दिया है। वेरिएंट का इस तरीके से वर्गीकरण तब किया जाता है, जब उनके तेजी से फैलने, ज़्यादा गंभीर बीमारियां फैलाने और दूसरे वेरिएंट की तुलना में ज़्यादा आसानी से प्रतिरोधक तंत्र के पार जाने की क्षमता के सबूत मिलते हैं।

कुछ दूसरे वेरिएंट भी मौजूद हैं, जिनके ऐसे ही प्रभाव हैं। अध्ययन बताते हैं कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन B.1.351 वेरिएंट के खिलाफ़ बहुत प्रभावशाली नहीं है। इस वेरिएंट की पहचान पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में हुई थी। इसी तरह P.1 वेरिएंट भी हमारे प्रतिरोधक तंत्र को पार कर सकता है। यह वेरिएंट ब्राजील में कोरोना की दूसरी लहर की वज़ह रहा था। फिर B.1.1.7 ने भी ब्रिटेन और दूसरे देशों में कोरोना की ज़्यादा प्रबल दूसरी लहर को पैदा किया है। 

अब हम भारत की स्थिति पर वापस लौटते हैं। क्या B.1.617 दूसरे प्रकारों से ज़्यादा संक्रमण फैलाता है? अशोका यूनिवर्सिटी में वॉयरोलॉजिस्ट शाहिद ज़मील कहते हैं, "इस वायरस की उपस्थिति भारत में दूसरे प्रकारों से ज़्यादा हो चुकी है। मतलब यह प्रकार, दूसरे प्रकारों की तुलना में ज़्यादा ताकतवर है।"

B.1.617 वेरिएंट और इसके उभार के सबूत

भारतीय वैज्ञानिकों ने पिछले साल अक्टूबर में पहली बार B.1.617 को खोजा था। भारत में बढ़ते कोरोना के मामलों के बीच "इंडियन SARS-CoV-2 जीनोम सीक्वेंसिंग कांसोर्टिका (INSACOG) ने जीनोम सर्विलांस में इज़ाफा कर दिया है। फरवरी के मध्य तक यह पता चल चुका है था कि महाराष्ट्र में आने वाले कुल मामलों में से 60 फ़ीसदी इसी प्रकार की वज़ह से थे। 

जब NIV (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी) के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के 8 म्यूटेशन की पहचान की, तो 3 मई को bioRxiv में इसका विस्तृत संजीन और ढांचागत विश्लेषण छपा। इनमें से दोहरे म्यूटेशन उन दूसरे म्यूटेशन की तरह थे, जिनकी वज़ह से दूसरे वेरिएंट की संक्रमण फैलाने की क्षमता में बेतहाशा वृद्धि हुई थी। एक तीसरा म्यूटेशन, P.1 वेरिएंट में मौजूद म्यूटेशन की तरह था, जो हमारी प्रतिरोधक क्षमता को आंशिक तरीके से पार कर सकता है। 

कुछ दिन बाद जर्मनी की एक टीम ने पाया कि पहले मौजूद वेरिएंट की तुलना में B.1.617 ज़्यादा बेहतर ढंग से इंसान की आतों और फेंफड़ों में प्रवेश कर सकता है। टीम ने इंसानी फेफड़ों और लैब में उत्पादित की गईं आंत की कोशिकाओं पर प्रयोग किए थे। इन्होंने अपनी खोजों को 5 मई को bioRxiv में प्रकाशित किया था। 

5 मई को ही NIV की एक टीम ने bioRxiv में एक पेपर प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने बताया कि दूसरे वेरिएंट की तुलना में, B.1.617 से संक्रमित होने वाले हैमस्टर (चूहे की तरह का एक जानवर) के फेफड़ों में ज़्यादा सूजन है।  

एक दूसरी टीम ने पाया कि B.1.617 वेरिएंट के खिलाफ़ काम करने वाली एंटीबॉडीज़ कम प्रभावी हैं। शोधार्थियों ने अपने आंकड़े 9 मई को bioRxiv में प्रकाशित किए थे। इसके लिए टीम ने फाइजर वैक्सीन लगवा चुके 9 लोगों का ब्लड सीरम इकट्ठा किया और इसकी एक गैर-नुकसानदेह वायरस के साथ क्रिया करवाकर परीक्षण किया। इस वायरस में B.1.617 वेरिएंट वाले म्यूटेशन मौजूद थे। वैक्सीन लगवा चुके लोगों का ब्लड सीरम इकट्ठा करने की वज़ह यह थी, उनके खून में वायरस के खिलाफ़ एंटीबॉडीज़ मौजूद रहते हैं।

टीम ने पाया कि वैक्सीन लगवा चुके लोगों की एंटीबॉडीज़ B.1.617 वेरिएंट में मौजूद कुछ म्यूटेशन के खिलाफ़ 80 फ़ीसदी तक कम प्रभावशील हैं। लेकिन यह कहना गलत होगा कि यह वैक्सीन इस वेरिएंट के खिलाफ़ कारगर नहीं है। शोधार्थियों ने पाया कि दिल्ली में कुछ स्वास्थकर्मी, जिन्हें कोविशील्ड लगाई गई थी, उनमें ज़्यादातर दूसरी बार फैला संक्रमण B.1.617 की वज़ह से था।

जर्मन टीम ने पहले कोरोना वायरस से संक्रमित रह चुके 15 लोगों के सीरम नमूनों का भी परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि पुराने वेरिएंट की तुलना में, B.1.617 के खिलाफ़, इन लोगों में मौजूद एंटीबॉडीज़ 50 फ़ीसदी तक कम प्रभावशाली थे।

लेकिन इन अध्ययनों में कुछ आपत्तियां हैं, यह साधारण तौर पर प्राथमिक सूचकांक उपलब्ध कराते हैं, जिन्हें अंतिम नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि सीरम अध्ययन हमेशा अंतिम तौर पर नहीं बता सकते कि क्या कोई वेरिएंट असल जिंदगी में प्रतिरोधक क्षमता को पार कर सकते हैं या नहीं। किसी वेरिएंट के खिलाफ़ किसी वैक्सीन की कार्यकुशलता के मामले में भी यही चीज लागू होती है। वैक्सीन के ज़रिए बड़ी मात्रा में एंटीबॉडीज़ का निर्माण होता है और यह प्रतिरोधक तंत्र के दूसरे हिस्सों, जैसे टी-सेल्स, को भी क्रियाशील करती हैं। एंटीबॉडीज़ के कार्यक्षमता में गिरावट, इस बात का अंतिम प्रमाण नहीं होता कि इनकी निर्माण करने वाली वैक्सीन किसी वेरिएंट के खिलाफ़ कारगर नहीं है।

NIV की एक टीम ने B.1.617 का कोवैक्सिन के खिलाफ परीक्षण किया। शोधार्थियों ने पाया कि वैक्सीन इस वेरिएंट के खिलाफ़ कारगर है। लेकिन टीम ने यह भी पाया कि इस वेरिएंट के खिलाफ़ कोवैक्सिन द्वारा उत्पादित एंटीबॉडीज़ की कार्यक्षमता में थोड़ी गिरावट भी आई है।

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

 

Mutant Variants of Coronavirus in India: What we Know So Far

 

 

Coronavirus
COVID-19
mutant coronavirus
varient of corona

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर एक हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 71 मरीज़ों की मौत
    06 Apr 2022
    देश में कोरोना के आज 1,086 नए मामले सामने आए हैं। वही देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 871 रह गयी है।
  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं, देश के ख़िलाफ़ है ये षडयंत्र
    05 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने दिल्ली की (अ)धर्म संसद से लेकर कर्नाटक-मध्य प्रदेश तक में नफ़रत के कारोबारियों-उनकी राजनीति को देश के ख़िलाफ़ किये जा रहे षडयंत्र की संज्ञा दी। साथ ही उनसे…
  • मुकुंद झा
    बुराड़ी हिन्दू महापंचायत: चार FIR दर्ज लेकिन कोई ग़िरफ़्तारी नहीं, पुलिस पर उठे सवाल
    05 Apr 2022
    सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि बिना अनुमति के इतना भव्य मंच लगाकर कई घंटो तक यह कार्यक्रम कैसे चला? दूसरा हेट स्पीच के कई पुराने आरोपी यहाँ आए और एकबार फिर यहां धार्मिक उन्माद की बात करके कैसे आसानी से…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमपी : डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे 490 सरकारी अस्पताल
    05 Apr 2022
    फ़िलहाल भारत में प्रति 1404 लोगों पर 1 डॉक्टर है। जबकि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मानक के मुताबिक प्रति 1100 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए।
  • एम. के. भद्रकुमार
    कीव में झूठी खबरों का अंबार
    05 Apr 2022
    प्रथमदृष्टया, रूस के द्वारा अपने सैनिकों के द्वारा कथित अत्याचारों पर यूएनएससी की बैठक की मांग करने की खबर फर्जी है, लेकिन जब तक इसका दुष्प्रचार के तौर पर खुलासा होता है, तब तक यह भ्रामक धारणाओं अपना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License