NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
 नागा विवाद में मणिपुर की कहानी
मणिपुर के नेता क्यों कह रहे हैं कि नागा समझौता की वजह से टेरिटोरियल इंटिग्रिटी यानी सीमाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए? मणिपुर की तरफ से यह क्यों कहा जा रहा है कि नागा समझौता के बाद नागाओं की तरफ से किये जाने वाले जबरिया वसूली और गैर क़ानूनी करों की उगाही बंद कर दी जाए?
अजय कुमार
06 Nov 2019
manipur

नागा शांति समझौता की खबरों के साथ मणिपुर का भी जिक्र आता है। आप पूछेंगे कि  नागा और नागालैंड से जुड़े मुद्दे पर मणिपुर कहाँ से आ गया? मणिपुर के नेता क्यों कह रहे हैं कि नागा समझौता की वजह से टेरिटोरियल इंटिग्रिटी यानी सीमाओं पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए? मणिपुर की तरफ से यह क्यों कहा जा रहा है कि नागा समझौता के बाद नागाओं की तरफ से किये जाने वाले जबरिया वसूली और गैर क़ानूनी करों की उगाही बंद कर दी जाए ? अभी कांग्रेस का यह बयान क्यों आया है कि नागा समझौता के दौरान मणिपुर की सीमाओं में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए? और नागा समझौता के लिए निर्धारित दिन से पहले  प्रशासन से आम जनता को डराने वाले आदेश क्यों आये ? जिसकी वजह से मणिपुर और नागा लोग रोजमर्रा की जरूरी सामानों की जमाखोरी करने लगे। साधारण शब्दों में कहा जाए तो इन सारे सवालों से यह जिज्ञासा उठती  है कि नागा आंदोलन से मणिपुर कैसे जुड़ता है ?

नागा आंदोलन की आजादी से पहले से ग्रेटर नागालिम की मांग रही है।  ग्रेटर नागालिम यानी वह पूरी ज़मीन, जिसपर पूरी तरह से नागाओं का हक हो।  इसमें आज के नागालैंड सहित अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, असम और म्यांमार के इलाके आते हैं। नागा गुटों ने अब म्यांमार में रहने वाले नागाओं के साथ वाले ग्रेटर नगालिम  का सपना छोड़ दिया है। साथ में नागालैंड के अलावा दूसरे राज्यों में रहने वाले नागाओं को भी एक साथ रखने की अपील कमजोर हुई है। फिर भी एक ऐसे जमीन की मांग तो हमेशा से रही है जो नागाओं के लिए हो।

यहीं से नागा आंदोलन से मणिपुर का जुड़ाव समझ में आता है। भारत के मानचित्र में अगर  हम नागालैंड की जियोग्राफी देखें तो मणिपुर का किस्सा खुलकर सामने आता है। मणिपुर का उत्तरी सिरा नागालैंड से जुड़ता है। मणिपुर का उत्तरी सिरा पहाड़ीनुमा इलाका है ,जहां नागा जनजाति रहती है। यहाँ रहने वाले लोग भी नागा आंदोलन से खुद को जुड़ा हुआ मानते हैं। यानी नागा गुटों से मणिपुर के नागाओं के अच्छे खासे सम्बन्ध है।  नेशनल सोसलिस्ट कौंसिल ऑफ़ नागालैंड ( इसाक मुईवा)  के एक अगुआ मुईवा मणिपुर के पहाड़ी वाले इलाके से आते हैं।  अब, जब नागाओं में आपस में  लगाव वाला सम्बन्ध है तो किसी दूसरे के सहारे इनके लगाव को खाद पानी दिलवाने का काम किया जाता है।  और यह दूसरे हैं, मणिपुर में रहने वाले मैतेयी जनजाति के लोग।

मणिपुर में घाटी में रहने वाली आबादी पहाड़ी आबादी की तुलना में ज़्यादा है। नागा जनजातियाँ ईसाई धर्म को मानती हैं तो घाटी में रहने वाले अधिकतर लोग हिंदू हैं जो मैतेयी समुदाय के हैं। माना जाता है कि तनाव व टकराव की जड़ दोनों समुदायों के बीच लंबे समय से उपजे अविश्वास में छिपी है। सरकार, पुलिस और नौकरशाही में घाटी के हिंदुओं का बहुमत है। पहाड़ों पर रहने वाली नागा और दूसरी जनजातियों को लगता है कि सरकार उनकी ज़मीन पर कब्ज़ा न कर ले या कोई ऐसा कानून न ले आए, जिससे उनकी स्वायत्तता और जीवन-शैली पर संकट आ जाए। इसी आशंका से उपजा अविश्वास कई बार हिंसा का रूप ले चुका है।

इसे भी पढ़ें : नागा विवाद और शांति समझौता : ग़ुलाम भारत से लेकर आज़ाद भारत तक

अब सवाल यही है कि मणिपुर को ग्रेटर नागालिम से परेशानी क्या है? क्यों मणिपुर की सरकार सहित पंद्रह प्रमुख दलों ने सीमाओं की फेरबदली करने से केंद्र सरकार को आगाह किया है और इस पर केंद्र को ज्ञापन पत्र भी सौंपा है तो इसका जवाब यह है कि मणिपुर का तकरीबन 92 फीसदी इलाका पहाड़ी है और 8 फीसदी में घाटी है।  अगर ग्रेटर नगालिम के तहत सीमाओं को बदला जाता है तो आशंका है कि मणिपुर को बहुत अधिक नुकसान सहना पड़ सकता है।  

इसके अलावा दूसरा कारण है मणिपुर का शेष भारत से जुड़ने का रास्ता। शेष भारत से मणिपुर को जोड़ने वाले दो ही रास्ते हैं और दोनों मणिपुर के नागा बहुल पहाड़ी इलाकों से गुजरते हैं। पहला है नागालैंड के दीमापुर से मणिपुर के उत्तरी सिरा की तरफ आने वाला रास्ता (N H 37) और दूसरा है असम के सिल्चर के सहारे मणिपुर के दक्षिण सिरे की तरफ आने वाला रास्ता ( N H 2 ) । आरोप रहा है कि नागा गुटों ने मणिपुर के लिए मौजूद इस भौगोलिक परेशानी का खूब फायदा उठाया है। रास्ते पर नाकेबंदी कर जरूरी सामानों को रोक दिया है। जबरिया वसूली का धंधा चलाया है। गैरक़ानूनी कर वसूले हैं।  इसलिए मणिपुर ने नागा समझौता की आवाज उठते ही यह बात कहनी शुरू कर दी है कि इस समझौते के साथ गलत तरह के धंधे भी बंद कर दिया जाए।  

यह है नागा आंदोलन में जुड़ा मणिपुर का पक्ष। इस पूरी कहानी को जानने के बाद फिर से वही सवाल उठता है कि क्या ग्रेटर नगालिम के लिए सीमाएं बदली जानी  चाहिए ? अभी हाल-फिलहाल ग्रेटर नागालिम के तौर पर एक नया राज्य बनाने की कमजोर हुई है। जिस एग्रीमेंट ऑफ़ फ्रेमवर्क के तहत भारत सरकार नागा गुटों के बीच बातचीत हो रही है, उसके तहत ग्रेटर नागालिम की बात नहीं मानी गयी है।  फिर भी नागा आंदोलन के मूल में ग्रेटर नागालिम की बात है।  तो इसके बहुत सारे जवाब है। अगर समय के लम्बे इतिहास में सोचा जाए तो एक तथ्य यह है कि आजाद भारत के समय 500 से अधिक रियासतें थी, उन सबको एक कर तकरीबन 15 राज्य बनाये गए। तब से लेकर अब तक भारत के कुल राज्यों की संख्या 28 हो गयी है।

लेकिन जानकरों का यह भी कहना है कि पहचान के नाम पर एक राज्य बनाना अब कहीं से भी जायज़ नहीं लगता।  खासतौर से पूर्वी भारत में जहां पर जनजातीय विविधता की बाढ़ है। इसे बचाये रखने के लिए बकायदे संविधान में व्यवस्था भी की जा चुकी है कि बिना जनजातियों से सलाह मशविरा किये ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाया जाएगा, जो उनकी परम्पराओं और संस्कृतियों से जुड़ा हो। साथ में और भी बहुत सारे प्रावधान हैं जिससे पूर्वी भारत में प्रशासनिक इकाई के तौर पर क्षेत्रीय समितियां बनती हैं। ऐसे में अलग राज्य बनाये जाने की मांग न ही  प्रभावी लगती है और न ही व्यवहारिक।

इस मुद्दे के जानकर कहते हैं कि अगर  असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के भौगोलिक एकीकरण को मंज़ूरी दी गई तो यहाँ सांप्रदायिक संघर्ष आरंभ हो सकता है। नागा विरोध को खत्म करने के लिये कोई भी समाधान नागालैंड राज्य तक ही सीमित नहीं होना चाहिये, बल्कि अन्य राज्यों की चिंताओं को भी ध्यान में रखना चाहिये। केंद्र को किसी विशेष समुदाय को "व्यवस्थित" करने की कोशिश नहीं करनी चाहिये, क्योंकि नागालैंड की सीमा से लगे राज्य मणिपुर में 30 से अधिक विभिन्न जातीय समूह निवास करते हैं। किसी एक समुदाय को महत्व देना भी हिंसा बढ़ाने का काम करेगा। 

 

Image removed.

ReplyForward

 

story of manipur in naga peace accord
naga and meiyati conflict
nscin
manipur in naga conflict

Related Stories


बाकी खबरें

  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!
    22 Jan 2022
    कोविड-19 की तीन लहरें और उसके बाद के लॉकडाउन, डेंगू का प्रकोप, कच्चे माल और गैस की क़ीमतों में इज़ाफ़ा, कच्चे माल पर  GST के चलते फ़िरोज़ाबाद के पारंपरिक कांच उद्योग को भारी मंदी का सामना करना पड़ा…
  • Mumbai
    भाषा
    मुंबई में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 7 लोगों की मौत, 16 अन्य घायल
    22 Jan 2022
    ''18वीं मंजिल पर आग लगने के तुरंत बाद, निवासी अपने परिवार के सदस्यों के साथ बाहर की ओर भागने लगे। प्रत्येक मंजिल पर कम से कम छह फ्लैट हैं। आग ने 18वीं और 19वीं मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ…
  • LIC
    थॉमस फ्रंकों
    एलआइसी को बेचना क्यों परिवार की चांदी बेचने से भी बदतर है?
    22 Jan 2022
    एलआइसी की सीमित बिकवाली के वादे पहले भी किए और तोड़े जा चुके हैं। भारत को अपनी एकमात्र सामाजिक सुरक्षा के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए; ऐसा करना असंवैधानिक और लोगों के साथ अन्याय होगा।
  • Hum Bharat Ke Log
    मुकुल सरल
    हम भारत के लोग:  एक नई विचार श्रृंखला
    22 Jan 2022
    “हम भारत के लोग” हमारे संविधान की प्रस्तावना (preamble) का पहला ध्येय वाक्य है। जिसके आधार पर हमारे संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य की स्थापना हुई है। इसी को…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज लगातार तीसरे दिन भी कोरोना के 3 लाख से ज़्यादा नए मामले
    22 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,37,704 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 89 लाख 3 हज़ार 731 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License