NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नागाड़ी लिंचिंगः एक परिवार के 3 सदस्य मार दिए गए, मुख्य संदिग्ध फरार
इस हमले में ज़िंदा बचे एक पीड़ित द्वारा आरोपियों की पहचान कर ली गई लेकिन एक साल गुज़रने के बाद भी मुख्य संदिग्ध को गिरफ़्तार नहीं किया गया है।
तारिक़ अनवर
28 Jul 2018
nagadih lynching

नागाड़ी लिंचिंग को क़रीब एक साल से ज़्यादा वक़्त गुज़र चुका है। जमशेदपुर के दो भाइयों गौतम वर्मा (27) और विकास वर्मा (25) और उनके दोस्त गंगेश गुप्ता (26) को 18 मई, 2017 को झारखंड के पूर्वी सिंहभूम ज़िले में हजारों लोगों की भीड़ ने मार दिया। ये तीनों ग्रामीण इलाक़ों में शौचालयों के लिए गड्ढे खुदाई के अपने नए काम को प्रमोट करने के लिए लगाए गए होर्डिंग को देखने के लिए नज़दीक के एक गांव नागाडीह गए थे। सोशल मीडिया पर फैले ख़बरों के कारण भीड़ ने उन्हें बच्चा चोर होने का शक किया। उन्होंने उनकी 80वर्षीय दादी को भी नहीं छोड़ा जो एक युवक से ख़बर मिलने के बाद दूसरे लोगों के साथ मौके पर पहुंची थीं।

आरोपी ज़मानत पर बाहर है जबकि मुख्य संदिग्ध अभी भी फ़रार है

बड़े भाई उत्तम वर्मा के मुताबिक़ जो इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे उसने बताया कि इस घटना से जुड़े 28 लोगों को गिरफ़्तार किया गया लेकिन इनमें से 27 ज़मानत पर हैं। इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त ज़िला न्यायाधीश अजित कुमार सिंह की अदालत में की जा रही है।

वर्मा ने पुलिस पर प्रोपर्टी विवाद का एंगल देकर मामले को कमज़ोर करने का आरोप लगाते हुए कहा, "हमने तीन हमलावरों की पहचान कर ली थी और उन्हें एफआईआर में नामज़द किया था। लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ने में अब तक नाकाम रही है।"

उसने कहा, "नागाड़ी में हमारी कोई संपत्ति नहीं है। हमारे पास केवल यही घर है जिसमें हम रह रहे हैं। हम बहुत अच्छ स्थिति में नहीं हैं। हमने अभी एक व्यवसाय शुरू किया था और सफलता पाने के लिए दिन-रात काम कर रहे थे। संपत्ति के एक बेतुका सिद्धांत को उछालते हुए जांचकर्ता अपनी अक्षमता को छिपाने और अपराधियों की रक्षा करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उसने आगे कहा कि उन्हें स्थानीय पुलिस पर विश्वास नहीं है, पीड़ितों के परिवारों ने इस मामले में सीबीआई जांच के लिए पिछले साल 23 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया था। अपनी याचिका में वर्मा ने कहा था कि सरकारी मशीनरी के चूक के चलते उनके परिवार के तीन सदस्यों सहित चार लोगों की हत्या हुई। इन चार मौतों के लिए मुआवजे के रूप में प्रत्येक पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपए का भुगतान करनी चाहिए और प्रत्येक परिवार के रिश्तेदारों को स्थायी सरकारी नौकरी देनी चाहिए।

गृह मंत्रालय ने झारखंड के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को इस साल 28 मार्च को निर्देश दिया कि वह जांच करें कि इस मामले के लिए सीबीआई जांच की आवश्यकता है या नहीं। एमएचए का पत्र जो न्यूज़़क्लिक को हासिल हुआ उसमें मुख्य सचिव को "उचित कार्रवाई" करने और याचिकाकर्ता उत्तम वर्मा को इसकी जानकारी देने के लिए कहा गया। गृह मंत्रालय के पत्र ने मुख्य सचिव को भी मुआवज़े को लेकर ग़ौर करने का निर्देश दिया। लेकिन उत्तम वर्मा के अनुसार अब तक उन्हें सामान्य मुआवज़े को छोड़कर कुछ भी नहीं मिला है।

वह चाहता था कि सीबीआई हस्तक्षेप करे और इस मामले को किस तरह जांच किया गया ऐसे घातक चूक को सामने लाए। उसने कहा, "अगर एक बड़ी पुलिस टीम मौके पर आती तो इन चारों को मरने से रोका जा सकता था। मैं सीबीआई जांच चाहता हूं ताकि दोषी पुलिसकर्मियों को दंडित किया जा सके।"

एक साल गुज़रने के बाद भी ज़ख़्म ताज़ा है

माँ कुंती देवी जिन्होंने अपने दो जवान बेटे को इस घटना में खो दिया और अभी भी रो रही हैं मानो जैसे ये घटना कुछ दिन पहले ही हुई हो।

रोते हुए उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, "मैंने यह सोंचते हुए रात भर जागते हुए गुज़ार दी कि मेरे बच्चे वापस आ जाएंगे। लेकिन अगले दिन लोग यहां जमा होने लगे। मैंने पूछा कि क्या हुआ; इतने सारे लोग अचानक यहां क्यों आ रहे हैं? मुझे बताया गया कि नागाडीह में विकास और गौतम की हत्या हो गई।"

चेहरे पर गिरती आंसुओं के साथ उन्होंने भरे गले से कहा,"मुझे इस बात पर यक़ीन नहीं हुआ कि मेरे बच्चे अब ज़िंदा नहीं हैं। उनकी यादें हर वक़्त मुझे परेशान करती रहती हैं और मैं अपनी भावनाओं को रोक पाने में नाकाम रहती हूं।"

उन्होंने कहा "मेरा दूसरा बेटा पहली मंज़िल पर अपने कमरे में सोता था। हर सुबह मैं उसे जगाने के लिए ऊपर की मंज़िल पर जाती थी। मैं जागने के बाद अभी भी ऐसा ही करती हूं लेकिन उसे वहां नहीं ढूंढ पाती।" उन्होंने आगे कहा "केवल वही मां इस दर्द को समझ सकती है जिसने अपने दो जवान बेटों को खो दिया है जिसकी मैं शिकार हूं।"

यह पूछे जाने पर कि वह अदालत से क्या चाहती हैं तो उन्होंने आंसू पोंछते हुए जवाब दिया, "मुझे नहीं पता कि माननीय न्यायाधीश अपराधियों को कौन सी सजा देंगे लेकिन मुझे अपने बेटों के हत्यारों के लिए मौत की सजा चाहिए।"

उनके ससुर गुरु प्रसाद (90) ने भी यही कहा। उन्होंने कहा, "हमें कुछ भी नहीं चाहिए, यहां तक कि मुआवज़ा भी नहीं। हम खून के बदले खून चाहते हैं।

उन्होंने नाराज़गी के साथ कहा, "उन्होंने मेरे जवान बच्चों और उनकी दादी को लाठी और कुल्हाड़ियों से मार डाला। मेरे पास इस बर्बरता के बारे में कहने के लिए कुछ भी नहीं जैसा उन लोगों ने किया। इसके अलावा उन्हें ज़मानत भी मिल गई।"

घटना

इस भयावह घटना को याद करते हुए उत्तम वर्मा ने न्यूज़क्लिक को बताया, "हमने कुछ दिन पहले ही इस स्टार्ट-अप को लॉन्च किया था और इस व्यापार को प्रोमोट करने के लिए बैनर और होर्डिंग लगा रहे थे। 18 मई को अगले दिन की गतिविधियों की योजना बनाने के दौरान विकास ने मुझे उन इलाक़ों का दौरा करने के लिए कहा जहां हमने बैनर लगाए थे। मैंने उससे कहा कि हमें अगले दिन वहां जाना चाहिए क्योंकि शाम हो चुकी था। लेकिन विकास (तीनों भाइयों में सबसे छोटा) ने ज़ोर देकर कहा कि हमें उसी दिन इस काम को पूरा करना चाहिए जिस पर हम सहमत थे। मैं और विकास नागाडीह के लिए रवाना हो गए। लौटते हुए हम एक ऐसे जगह पर रुक गए जहां विकास मुझे समझा रहा था कि नए निर्माण किए जा रहे हैं और हमें वहां आकर्षक विज्ञापन लगाना चाहिए। इस बीच कुछ लोग वहां आए और हम पर बच्चा चोर होने का आरोप लगाया। हमने बार-बार उनसे कहा कि हम पास के कॉलोनी से आए हैं और बच्चा चोर नहीं हैं। लेकिन वे हमें सुनने के लिए तैयार नहीं थे। धीरे-धीरे भीड़ बढ़ने लगी और लगभग 1000 लोग वहां मिनट-भर में इकट्ठा हो गए। बढ़ती परेशानी को भांपते हुए हम वहां से निकलने में कामयाब रहे और मैंने अपने दूसरे भाई गौतम को फोन किया कि वह हमारा पहचान पत्र लेकर मौक़े पर पहुंचे जिससे कि वे लोग मुझे जाने दे सकें। साथ ही मैंने पुलिस को भी फोन किया। गौतम, उसका दोस्त गंगेश और हमारी दादी वहां पहुंचे और आक्रामक भीड़ को मनाने के लिए पूरी कोशिश की। लेकिन यह प्रयास भी व्यर्थ हो गया। भीड़ ने गौतम, गंगेश और हमारी दादी जो 80 साल की थी उन्हें मारना शुरू कर दिया।"

उत्तम के अनुसार, इस बीच पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन विडंबना यह है कि भीड़ ने बड़ी संख्या में पुलिस की मौजूदगी में उन्हें मारते रहे। उत्तम ने कहा, "कुछ मिनट के बाद पुलिस का और वाहन वहां पहुंचा और हम अपनी ज़िंदगी बचाने के लिए एक जीप में बैठ गए। लेकिन इससे कुछ भी नहीं हुआ। अमिश हुसैन (तत्कालीन बागबेरा पुलिस स्टेशन ओसी) नाम के एक पुलिस अधिकारी ने जो शुरुआत में हमलावरों से कह रहे थे कि वे अपने हाथों में क़ानून न लें और क़ानून को अपना काम करने दें, लोगों के दबाव में छोड़ दिया। उन्होंने भीड़ से कहा, 'अगर वे बच्चा चोर हैं तो उन्हें मारो'। कथित तौर पर उत्तम ने कहा कि उक्त पुलिस अधिकारी के इस छोटे बयान ने हत्यारी भीड़ को प्रोत्साहित किया जिसने हमें पुलिस वाहन से बाहर खींच लिया और हमें पीटा।

हालांकि तीन लोगों की मौत मौके पर ही हो गई जबकि उनकी दादी की मौत इलाज के दौरान अस्पताल में हुई। वहीं इस हमले में घायल उत्तम जीवित है।

लिंचिंग मामले का पैटर्न

ज़्यादातर मामलों में पाया गया कि भीड़ इकट्ठा करने के लिए व्हाट्सएप संदेशों द्वारा अफवाह फैलाई गई है। मौक़ा ए वारदात से पुलिस के नज़दीक होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है। झारखंड में दर्ज ज़्यादातर मामलों में नज़दीकी थाना स्पॉट से 10 किमी के भीतर था। फिर भी पुलिस समय पर पहुंचने में असमर्थ थी।

लातेहार लिंचिंग मामले में पुलिस मौक़ा ए वारदात पर सूचना दिए जाने के बावजूद एक घंटे देर पहुंची जबकि बालूमाथ पुलिस थाना सिर्फ 5 किमी दूर है। वह स्थान जहां अलीमुद्दीन अंसारी को क्रूरता से पीटा गया था और रामगढ़ पुलिस थाना के बीच की दूरी महज़ 2 किमी है। लेकिन जब पुलिस पहुंची तब तक पीड़ित लगभग मर चुका था। और एक तस्वीर और खबर थी कि उसे मारने के लिए पुलिस डंडे का इस्तेमाल किया गया था।

इस मामले में भी बागबेरा पुलिस थाना स्पॉट से महज़ 5 किमी दूर है। पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन वे काफी संख्या में थे।

Nagadih lynching
झारखण्ड
झारखण्ड लिंचिंग
mob lynching
mob voilence

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

बिहार: बीफ खाने के नाम पर खलील की हत्या, परिवार का आरोप; उच्च-स्तरीय जांच की मांग

भारत में हर दिन क्यों बढ़ रही हैं ‘मॉब लिंचिंग’ की घटनाएं, इसके पीछे क्या है कारण?

झारखंड : मॉब लिंचिंग क़ानून के बारे में क्या सोचते हैं पीड़ितों के परिवार?

झारखंड : नागरिक समाज ने उठाई  ‘मॉबलिंचिंग विरोधी क़ानून’ की नियमावली जल्द बनाने की मांग

पलवल : मुस्लिम लड़के की पीट-पीट कर हत्या, परिवार ने लगाया हेट क्राइम का आरोप

शामली: मॉब लिंचिंग का शिकार बना 17 साल का समीर!, 8 युवकों पर मुकदमा, एक गिरफ़्तार

मध्य प्रदेश में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा की क्या है वजह?


बाकी खबरें

  • CISCE announces result
    भाषा
    सीआईएससीई ने 10वीं, 12वीं कक्षा के पहले टर्म की बोर्ड परीक्षा के परिणाम की घोषणा की
    07 Feb 2022
    परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित की गईं और कोविड-19 महामारी के मद्देनजर पिछले साल बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने के बाद शैक्षणिक सत्र को दो टर्म में विभाजित किया गया था और एक वैकल्पिक मूल्यांकन योजना का…
  • Shantisree Pandit
    भाषा
    शांतिश्री पंडित जेएनयू की पहली महिला कुलपति नियुक्त की गईं
    07 Feb 2022
    शांतिश्री अभी महाराष्ट्र के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय के राजनीति व लोक प्रशासन विभाग में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर हैं।
  • amit shah
    भाषा
    शाह ने ओवैसी से बुलेट प्रूफ गाड़ी और जेड श्रेणी की सुरक्षा स्वीकार करने का किया आग्रह
    07 Feb 2022
    राज्यसभा में एक बयान में शाह ने उत्तर प्रदेश में ओवैसी के काफिले पर हुए हमले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मामले में विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और इसकी विवेचना की जा रही…
  • up elections
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: धन-बल और सत्ता की ताक़त के शीर्ष पर बैठी भाजपा और विपक्ष का मुक़ाबला कितना? 
    07 Feb 2022
    संसाधनों के मामले में और विशेष रूप से बेनामी संसाधनों के मामले में भारतीय जनता पार्टी का मुक़ाबला करने की हैसियत अभी दूर दूर तक किसी भी दल में नहीं है, लेकिन इस बार तस्वीर 2017 में हुए विधानसभा…
  • dharm sansad
    पुण्य उपाध्याय
    विचार: राजनीतिक हिंदुत्व के दौर में सच्चे साधुओं की चुप्पी हिंदू धर्म को पहुंचा रही है नुक़सान
    07 Feb 2022
    हम सभी ने नक़ली "साधुओं" की कहानियाँ सुनी हैं। लेकिन वर्तमान दौर में इनके ख़िलाफ़ असली महात्माओं की चुप्पी पूरी दुनिया में हिंदू धर्म की छवि को नुक़सान पहुँचा रही है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License