NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
अफ्रीका
नाइजीरियाः चूहे से होने वाले जानलेवा बुखार के मरीज़ों में तेज़ी से वृद्धि
इस साल 'लस्सा बुखार' से होने वाली अधिक संख्या में मौत की वजह आखिर क्या है?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
16 Mar 2018
लास्सा बुखार

पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में चूहे से होने वाला बुखार तेज़ी से फैल रहा है। इसका नाम लस्सा बुखार है और इस बुखार से मरने वालों की संख्या पहले की तुलना में इस बार काफी ज़्यादा है। इस साल 4 मार्च तक नाइजीरिया के 18 राज्यों में 353 मामले पहले ही सामने आ चुके हैं, साथ ही 700 से अधिक संदिग्ध मामले और 110 मौत के मामले सामने आए हैं। मरीज़ों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है क्योंकि बहुत से मामले अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं। चूंकि ये बीमारी कई दशक पुरानी है ऐसे में इस साल मरीज़ों की संख्या में हुई वृद्धि से चिंता बढ़ गई है और इसके पीछे के कारणों पर काफी भ्रम हो रहा है।

ये बीमारी अरेनावायरस से होती है जो मल्टीमैमेट रैट से संचारित होती है। ये चूहे खुद इस वायरस से प्रभावित नहीं होते हैं लेकिन इसके कारण उन व्यक्तियों में कई लक्षण दिखाई देते हैं जो इससे संक्रमित होते हैं। ये वायरस चूहे के मल-मूत्र से बाहर आते है। जो व्यक्ति इस संक्रमित स्थान के संपर्क में आते हैं वे प्रभावित हो सकते हैं। चूहे को मनुष्य खाते हैं क्योंकि ये प्रोटीन का समृद्ध स्रोत हैं। इस तरह इसके ज़रिए भी संक्रमण हो सकता है। ये बीमारी संक्रमित मनुष्य के संपर्क में आने से भी दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करता है।

आम तौर पर इस रोग के कुछ मामले हर साल सामने आते हैं। इस साल मरीज़ों की संख्या में हुई वृद्धि वैज्ञानिकों को भी आश्चर्यचकित कर रही है कि क्या वायरस में कोई बदलाव आया हो या किसी कारण से बड़ी संख्या में चूहे प्रभावित हो रहे हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के वायरल हेमोरेजिक टीम के सदस्य पियरे फॉर्मेंटी ने कहा कि मरीज़ों की संख्या में वृद्धि होने के पीछे के कारण के एक हिस्से को बेहतर निगरानी और जांच द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं हो सकता है।

कुछ रिपोर्ट बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन इसके कारणों में से एक हो सकता है क्योंकि हाल के वर्षों में इस मामले की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015 में 430 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं साल 2016 में 900 और पिछले साल 700 से ज्यादा मामले सामने आए। गर्म जलवायु के परिणामस्वरूप चूहे के प्रजनन में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में वायरस संक्रमित चूहों की संख्या में इज़ाफा हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप मरीज़ों की संख्या में वृद्धि हो सकती है।

प्रारंभिक चरणों में लस्सा बुखार से मृत्यु दर कम होती है लेकिन अस्पताल में भर्ती कराए जाने के मामले में 15-20% तक वृद्धि हो सकती है। अंग विफलता, आंतरिक रक्तश्राव और सदमे जैसे लक्षण स्पष्ट होते हैं। यदि कोई महामारी होती है तो अस्पताल में भर्ती मरीज़ों में मृत्यु दर 50% तक बढ़ सकती है।

अब तक इस बीमारी पर रिसर्च बहुत ही कम हुआ है। इसके लिए कोई भी टीका नहीं है। इस बीमारी के लिए कोई बेहतर इलाज मौजूद नहीं है। लस्सा बुखार के प्रारंभिक चरणों के लक्षणों में शरीर में दर्द, बुखार, जी मिचलाना और गले में परेशानी आदि सामान्य होते हैं। ये अन्य रोगों जैसे मलेरिया या टाइफाइड में ग़लतफहमी पैदा कर सकते हैं। जांच एक अन्य समस्या है क्योंकि शरीर में अरेनावायरस है या नहीं इसकी जांच के लिए जल्दी में कोई परीक्षण नहीं किया जा सकता है। इसकी जांच में कई दिन लग सकते हैं और इसके लिए एक ही दवा है जो इस बीमारी में काम करती है वह है रिबाविरिन। ये दवा भी बीमारी होने के पहले छह दिनों तक ही प्रभावी होता है। पेरिस स्थित ग़ैरसरकारी संगठन एएलआईएमए के सेक्रेटरी जनरल ऑगस्टीन ऑगियर का कहना है कि शायद ही कभी 7 दिन से पहले किसी मरीज़ के बारे पता चल पाता है। इस संगठन ने हाल ही में लस्सा बुखार के लिए शोध कार्य शुरू किया है।

लेकिन अब चीजें बदल रही है क्योंकि इस बीमारी को लेकर शोध अब उच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2016 में प्राथमिकता रोगजनकों की सूची में लस्सा बुखार को शामिल किया था। पिछले सप्ताह वियना में एक बायोटेक्नोलॉजी कंपनी थेमिस बायोसाइंस को लस्सा बुखार टीका के विकास के लिए अनुदान की मंज़ूरी दी गई।

फिलहाल नाइजीरिया में मौजूद आधारभूत संरचना की कमी पर भी विचार करने की ज़रूरत है। वर्तमान में इस देश में लस्सा बुखार वाला वार्ड केवल एक ही जिसमें 24 बेड हैं। इस बीमारी के शोध और जांच के लिए देश में पर्याप्त प्रयोगशाला भी नहीं हैं। नाइजीरिया सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल के प्रमुख चिक्वे इहेकविजू ने स्वीकार किया है कि बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता है लेकिन उन्होंने कहा कि नई प्रयोगशालाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि "यह एक लंबी यात्रा है क्योंकि यह कोई समस्या नहीं है कि पैसे ही अकेले इसका समाधान उपकरण ख़रीद कर कर सकता है, लेकिन आपको लोगों को प्रशिक्षित करने, आत्मविश्वास बनाने, नमूनों को प्रयोगशाला में भेजने और परिणाम निकालने की ज़रूरत है। यह एक सिस्टम बनाने को लेकर है जो एक ऐसा काम है जिसे हम हर रोज़ कर रहे हैं।"

लास्सा बुखार
नाइजीरिया
चूहे
विश्व स्वास्थ संगठन
अफ्रीका

Related Stories

इबोला: 10 लाख गवां सकते हैं अपनी जान

इबोला,सार्वजनिक स्वास्थ सुविधा और खोखली पूंजीवादी व्यवस्था


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    सरकार का दो तरफ़ा खेल... ‘’कोयले की कमी भी नहीं विदेशों से आयात भी करना है’’
    19 Apr 2022
    उत्तर प्रदेश में बिजली संकट को लेकर विदेशों से कोयला खरीदने का का मामला नियामक आयोग पहुंच गया है। आरोप है कि कुछ निजी घरानों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
  • रूबी सरकार
    आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार
    19 Apr 2022
    किसान नेता महेश दत्त पाराशर कहते हैं कि 50 वर्षों के लम्बे अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि यह शक्कर कारखाना सौ फ़ीसदी सफलतापूर्वक चलेगा। किसान इसे जीत की पहली कड़ी मान रहे हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः गर्मी बढ़ने के साथ गहराने लगा जल संकट, ग्राउंड वाटर लेवल में तेज़ी से गिरावट
    19 Apr 2022
    राज्य के कई ज़िलों से शिकायत सामने आई है कि ट्यूबवेल का पानी छोड़ने लगा है। आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के साथ पानी के स्तर को लेकर समस्या और बढ़ सकती है।
  • अनीस ज़रगर
    कश्मीर यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर को 2011 में लिखे लेख के लिए ग़िरफ़्तार किया गया
    19 Apr 2022
    केंद्र शासित प्रदेश की नवगठित जांच एजेंसी ने बताया कि ‘द कश्मीर वाला’ में प्रकाशित अब्दुल आला फाजिली का लेख "उत्तेजक, देशद्रोही और जम्मू-कश्मीर में खलल पैदा करने के इरादे" से लिखा गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जहांगीरपुरी हिंसा : अब 'आप' ने मुख्य आरोपी अंसार को 'बीजेपी' का बताया
    19 Apr 2022
    दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा के मामले में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने एक ट्वीट कर कुछ बड़ी बातें सामने रखी हैं। ग्रेटर कैलाश विधायक और आप की नेता आतिशी ने मंगलवार शाम 5 बजे 1 ट्वीट करके जहांग
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License