NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
संस्कृति
भारत
राजनीति
नए साल का धर्म
दलित पिछडो में ऐसे सकारात्मक प्रयासों की आवश्कता है जो लोगो को साहुकारो के चंगुलो से मुक्त कर सके लेकिन उसके लिए बहुत मेहनत करने की आवश्यकता है और ऐसे काम प्रोफाइल बिल्डिंग से नहीं हो सकतेI ये बड़ी लड़ाई हैI
विद्या भूषण रावत
09 Jan 2018
hindu flag
Image Courtesy : Sabrang

नया साल मुबारक हो गुप्ता जी, मैंने कहाI आप बिलकुल गलत है हमें मुबारक नहीं चाहिए मंगलमय कहिये, उन्होंने मुझे सुधारते हुए कहाI मैंने उनसे पुछा क्यों : कहते है मुबारक मुसलमानों को होता है तो मैंने बताया तो साल भी उन्ही का होता है आपका तो वर्ष होना चाहिए और वो भी अप्रेल मेंI वैसे तो जनवरी से तो अंग्रेजी कैलंडर वर्ष शुरू होता हैI गुप्ता को हैप्पी न्यू इयर बोलने में भी कोई अफ़सोस नहींI परेशानी थी तो केवल मुबारक सेI

ये वाकिया अभी दो दिन पहले का है जब पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक इलाके में मैं था और गुप्ता उस क्षेत्र के बहुत बड़े साहूकार है जिनके कर्जे के तले वहा के मुशाहर और अन्य दलित पिछड़ी जातीया हमेशा दबे रहते हैI भारत में बैंकों ने कभी भी अपने नियम कानून ऐसे नहीं बनाये के गरीब व्यक्ति उस तक पहुँच सकेI गुप्ता वैसे तो अपने को पिछड़ा कहते है लेकिन वैसे ही जैसे नरेन्द्र मोदी भी पिछड़े हैI वैसे उनका अधिकांश ‘ग्राहक’ दलित और पिछड़े ही हैI शायद ही कोई बनिया या ब्राह्मण उनसे उधार लेI बैंकों के हरासमेंट से बचने के लिए गरीब मजदूर, किसान लोग साहुकारो के पास जाते हैं जहाँ बहुत बड़ी कागजी कार्यवाही नहीं करनी पड़ती है और लोन आसानी से मिल जाता हैI आखिर गाँव के गरीबो को लोन भी कितना चाहिए लेकिन इसकी कीमत बहुत बड़ी है क्योंकि गरीब को 36% वार्षिक व्याज के तौर पर देने पड़ते हैI साहूकार 3% मासिक की दर पे ब्याज देते हैI देखिये, है न हैरानगी की बात, के जहाँ दलाल स्ट्रीट के बड़े बड़े दलालों को सरकारी बैंक न्यूनतम दर पर ब्याज देते है और नहीं लौटाने पर कुछ नहीं करते वही साहूकार लोग गरीब की साइकिल से लेकर उसकी बची खुची जमीन तक गिरवी रखवा देते है वैसे गुप्ता साहेब व्याह शादियों में भी मदद कर देते है और इस कारण समाज में उनकी बहुत ‘पकड़’ हैI लेकिन ये ही वो ‘ताकत’ है जो कम संख्या में होने के बावजूद भी सवर्ण जातियों का समाज में दबदबा बनाये रखती हैI दुर्भाग्यवश इस तरफ कोई भी सकारात्मक प्रयास नहीं हुएI दलित पिछडो में ऐसे सकारात्मक प्रयासों की आवश्कता है जो लोगो को साहुकारो के चंगुलो से मुक्त कर सके लेकिन उसके लिए बहुत मेहनत करने की आवश्यकता है और ऐसे काम प्रोफाइल बिल्डिंग से नहीं हो सकतेI ये बड़ी लड़ाई हैI बहुत बार स्थानीय ‘नेता’ गुप्ताजी की जगह खुद को रख देते है और शोषण वैसे हो चलता रहता हैI इससे कोई फरक नहीं पड़ता के शोषक कौन हैI शोषक कोई भी हो उसका प्रतिकार होना चाहिएI गलती गुप्ता जी की नहीं अपितु इस व्यवस्था की है जिसने अध्संख्या लोगो को मानसिक गुलामी का शिकार बनाया है और लोग जब गुस्सा होकर विद्रोह भी करना चाहते है तो जो जाति के नाम पर विकल्प उपलब्ध होता है वो शायद गुप्ता से भी अधिक खतरनाक होता है और इसलिए लोग थक हारकर वापस उन्ही के पास चले जाते हैI

बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था कि राज्य की जिम्मेवारी बनती है अपनी जनता के हितो को संरक्षित करने के लिए लेकिन लगता है के राज्य बड़े लोगो को देश का पैसा देकर गरीबो की जमीन हडपना चाहता है या उसमे मदद करता हैI

खैर, गुप्ता साहेब बहुत मिलन सार हैI खाते पीते है और खुद भी दिन भर भैंस चराते हैI वो अपने सारे काम खुद करते हैI सुबह और शाम कलेक्शन करना और दिन भर भैंस चरानाI उनकी पैसा कमाने की इच्छा अनंत है और इसके लिए वो स्वयं ही सभी काम करते हैI यानी के पुरानी परम्पराओ के अनुसार गुप्ता जी बेहद ही कम खर्च में अधिक बिज़नस कर रहे है और मस्त भी रहते हैI मोदी और योगी के परम भक्तI पिछले साल उत्तर प्रदेश में भाजपा के जीतने पर उन्होंने जोश में कहा था के मोदी जिन्दगी भर शासन करेंगे I उन्हें इस बात की बेहद ख़ुशी थी के एक बनिया देश का प्रधान मंत्री बन गया है और अब हम हिन्दू राष्ट्र बनने की और अग्रसर हैI वो बोले, मोदी जी विदेश भ्रमण इसीलिये कर रहे ताकि यू एन ओ में भारत को हिन्दू राष्ट्र मान लिया जाएI मैंने उनसे पुछा के किसान मर रहे है, छोटे व्यापारी तबाह है, रोजगार बढ़ा नहीं तो उन्होंने हामी भरीI कहते है, अगली बार योगी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे और यू पी में भाजपा में लोग अब टिकेट लेने के लिए भी तैयार नहीं है क्योंकि उन्हें पता है के उनकी भयंकर हार होने वाली है लेकिन देश में मोदी को कोई नहीं हटा सकता क्योंकि उन्होंने पाकिस्तान को सबक सिखाया, देश के सुरक्षा मज़बूत की है और चाइना से भी अच्छे से निपट रहे हैI

गुप्ता जी की भावनाए कोई व्यक्तिगत नहीं है वो एक जाति के खयालो को दरसा रहा है हालाँकि अपवाद हर जगह हो सकते हैI अगर गुजरात के अभी के चुनावो को देखे तो जी एस टी की मार व्यापारी वर्ग पर बहुत पड़ी और सूरत के व्यापारियों के वीडियोस व्हात्सप्प पर जबरदस्त सैर कर रहे थे लेकिन जब चुनाव परिणाम आये तो सूरत के व्यापारियों ने अपने सभी ‘गम’ भुलाकर वापस हिंदुत्व की नाव की सवारी करना उचित समझाI अपने गुप्ता जी के गणित को भी आप समझ सकते है और उससे अंदाजा लगा सकते है के जाति से बड़ा कोई नहींI अगर आप जाति छोड़ देंगे तो समाज से टूट जाते हैI इसलिए जातितोद्को को समाज में मानता नहीं हैI गुप्ता जी कह रहे है के योगी का उत्तर प्रदेश में सफाया हो जायेगा लेकिन मोदी शासन करते रहेंगेI दरअसल, जाति बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए गुप्ताजी मोदी जी में तो अपनापन देख रहे है लेकिन योगी के लिए रिस्क लेने को तैयार नहींI

यह भी हकीकत है के योगी की ठकुराई में दूसरी जातीया परेशान है और राजपूतो को लेकर उग्र हिन्दुवाद को जिस तरीके से संघ आगे बढ़ाना चाहता है वो तो जातियों के अंतर्द्वंदो के वजह से कभी चल नहीं पायेगाI क्योंकि इस उग्रता के इनाम स्वरुप ब्राह्मणवादी भाजपा को उत्तर भारत के अधिकांश राज्य ठाकुरों या राजपूतो को सौंपने पड़े हैI अब ये ऐसे गले की हड्डी है जो न निगलते बनती न रोकते क्योंकि नागपुर के संघ के मुख्यालय के सभी दिग्गज जानते है के राजपूतो या ठाकुरों का गुस्सा मोल लेकर अभी तो राजनीती नहीं हो सकती हालाँकि राजनाथ तो हासिये पर ही है I

गुप्ता जी से बात कर पता चलता है के संघ के व्हात्सप्प यूनिवर्सिटी में कैसे कैसे कहानिया तैयार की जा रही है जिसमे भारत की महानता से लेकर, मुसलमानों को खलनायक के तौर पर दिखाना, भारतीय संस्कृति की ब्राह्मणवादी व्याख्या करना और विकास के नाम पर मोदी जी की तरह जोर जोर से फेकनाI चाहे मोदी और उनकी सरकार के विरुद्ध जैसे भी माहौल हो लेकिन भक्तो का विश्वास थोडा डोला तो है लेकिन फिर भी कायम हैI यानी जो विकास के नाम पर मोदी आये थे वो बिलकुल झूठा था और मूलतः भक्त लोग उन्हें हिंदुत्व के अजेंडे पर देखना चाहते है लेकिन उन्हें खतरा केवल जाति से है जैसे गुप्ता जी मोदी में अपनी जाति देख रहे है और योगी में नहीं वैसे है अधिकांश राजपूत तभी तक भाजपा में है जब तक उनके नेताओं की स्थिति अच्छी हैI गुजरात में पटेलो ने बीस साल में अपनी राजनैतिक ताकत खो दी इसलिए उसे प्राप्त करने के लिए ही इतना संघर्ष चल रहा हैI हिंदुत्व इसलिए कुछ नहीं केवल पुरोहितवाद की मोनोपोली को बनाये रखने का एक तंत्र है जिसको ताकत देने के लिए उन्ही जातियों की सेवाए ली जाएँगी जो मनुवादी व्यवस्था का शिकार हैI अंतर्द्वंदो से अपने काम बनाने में ब्रह्म्वान्वादी व्यवस्था का कोई मुकाबला नहींI भारत के इतने बड़े इतिहास में इन अंतर्द्वंदो को समझ कर उनसे निपटना पड़ेगाI उनको छुपाकर सामाजिक या राजनितिक एकता नहीं बन सकती हैI

हिंदुत्व ने आर्य बनाम अनार्य या ब्राह्मण बनाम गैर ब्राह्मण वाली बहस को बहुत चालाकी से मुस्लिम बनाम गैर मुस्लिम में बदल दिया है इसलिए ही ये सारे प्रपंच हो रहे हैI अब साल के स्वागत में धर्म है, रंगों में धर्म है, खाने में धर्म और देशभक्ति है, कपडे पहनने और भाषा में भी धर्म हैI लेकिन किसी को मारने में कोई शर्म नहीं हैI धर्म में धंधेबाज आज इज्जत से टी वी पर आ रहे है, हम लुट रहे हैI गाँव गाँव निरंकारी बाबा, शिव चर्चा, और अन्य महान आत्माए पहुँच चुकी हैI प्रवचन जारी हैI लोग कर्ज लेकर बाबाओं के पास जाते है और कर्ज में डूबने पर गुप्ता जी के पास आते हैI कर्ज का एक साइकिल है वो ख़त्म नहीं होताI शादी, मुंडन, अंतिम संस्कार, ब्रह्मभोज अभी भी सबसे जायदा कहाँ होता है इसके लिए समाज शास्त्रियों को गाँव की और रुख करना पड़ेगाI असल में गुप्ता जैसे लोग ज्यादा बड़े समाजशास्त्री है क्योंकि वो उसकी मानसिकता को ज्यादा अच्छे से समझकर ही अपना व्यापार करते हैI

भारत चाहे हिन्दू राष्ट्र बने या नहीं, भारत में एक हिंदूवादी सरकार है जो पुरोहितवादी पूंजीवादी अजेंडे पर काम कर रही हैI इस हिन्दू राष्ट्र का मॉडल क्या होगा ? क्या पेशवाई वाला या ट्रावन्कोर का जहा पर शुद्रो अति शुद्रो को मनुवादी व्यवस्था के अनुसार काम करना पड़ता थाI क्या आज के इस दौर में, जब बाबा साहेब अम्बेडकर, ज्योति बा फुले, और पेरियार का साहित्य पढ़कर अनार्य समाज खुल कर चनौती दे रहा हो, हिन्दू राष्ट्र के अनुयायी मनुवादी व्यवस्था को लागु करवा पाएंगे ? 21वी सदी का अम्बेडकरवादी भारत तो कम से कम इस चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देगा लेकिन इसके लिए उसे उनलोगों के पास भी जाना पड़ेगा जो उनके तरह नहीं पढ़ लिख पाए या जिन्हें शहरों में आने का मौका नहीं मिला और जो जातियों के खेल में भी अल्पसंख्यक ही रह गए और आन्दोलन भी उन तक नहीं पहुंचाI उनकी भावनाओं, परम्पराओं या भोलेपन का मजाक न उड़ाकर, उन्हें गले लगाकर, उनके दुःख दर्दो को समझकर ही हम उन्हें अपने आन्दोलन का हिस्सा बना सकते हैI

Courtesy: Samaj Weekly,
Original published date:
09 Jan 2018
हिन्दू राष्ट्र
आरएसएस
बीजेपी
हिंदी-उर्दू

Related Stories

भागवत के हिंदू धर्म की पहेलियों

कट्टरवादी राजनीति के दौर में प्रेम

क्या सरकारी पैसे से चल रहा है बीजेपी का प्रचार ?


बाकी खबरें

  • Sitaram Yechury
    संदीप चक्रवर्ती
    स्वतंत्रता दिवस को कमज़ोर करने एवं हिंदू राष्ट्र को नए सिरे से आगे बढ़ाने की संघ परिवार की योजना को विफल करें: येचुरी 
    25 Feb 2022
    माकपा महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का “फोकस 5 अगस्त को देश की वास्तविक स्वतंत्रता की तारीख के रूप में बढ़ावा देने पर है।"  
  • russia ukrain
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम
    25 Feb 2022
    यूरोपीय संघ रूस पर और आर्थिक एवं वित्तीय प्रतिबंध लगाने को सहमत। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र ने यूक्रेन में मानवीय सहायता के लिए दो करोड़ डॉलर देने की घोषणा की।
  • ASHA Workers
    अनिल अंशुमन
    बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन
    25 Feb 2022
    आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने में भी टाल मटोल कर रही है। कार्यकर्ताओं ने ‘भूखे रहकर अब और नहीं करेंगी बेगारी’ का ऐलान किया है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 13 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    25 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 94 हज़ार 345 हो गयी है।
  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : अयोध्या के प्रस्तावित  सौंदर्यीकरण में छोटे व्यापारियों की नहीं है कोई जगह
    25 Feb 2022
    अयोध्या के व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित लेआउट के परिणामस्वरूप दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर ध्वस्त या उन दुकानों का ज़्यादातर हिस्सा तोड़ दिया जाएगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License