NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
नेहरू ने कितना परेशान किया मोदीजी को!
अपने सार्वजनिक भाषणों में भाजपा के शीर्ष नेता, उनकी सरकार की असफलताओं के लिए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दोषी ठहरा रहे हैं। यह तब, जबकि मोदी, जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के 50 साल बाद देश के प्रधानमंत्री बने थे।
राम पुनियानी
11 Apr 2019
Translated by अमरीश हरदेनिया
RAM PUNIYANI

भाजपा (BJP) ने हाल में लोकसभा चुनाव 2019 व   के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया। सरसरी निगाह से देखने पर ही इस दस्तावेज के बारे में दो बातें बहुत स्पष्ट तौर पर उभर कर आतीं हैं। पहली, इसमें इस बात का कोई विवरण नहीं दिया गया है कि पिछले घोषणापत्र में किए गए कितने वायदों को वर्तमान सरकार पूरा कर सकी है। दूसरी, इसमें अति-राष्ट्रवाद की काफी शक्तिशाली डोज लोगों को पिलाने का प्रयास किया गया है।

अपने सार्वजनिक भाषणों में भाजपा के शीर्ष नेता, उनकी सरकार की असफलताओं के लिए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (India’s first Prime Minister Jawaharlal Nehru) को दोषी ठहरा रहे हैं। यह तब, जबकि मोदी, जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के 50 साल बाद देश के प्रधानमंत्री बने थे।

एक आमसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा,

‘‘उन्हें (नरेन्द्र मोदी को) हमारे परिवार के सिवाय कुछ दिखाई ही नहीं देता। वे कहते हैं, नेहरू ने यह किया, इंदिरा गांधी ने वह किया, परंतु आप यह तो बताएं कि आपने पांच सालों में क्या किया।‘‘

यहां तक कि कूटनीतिक और विदेशी मामलों में भी सरकार की असफलताओं के लिए नेहरू को दोषी ठहराया जा रहा है!

पुलवामा और बालाकोट (Pulwama and Balacot) हमलों के बाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) के मुखिया मौलाना मसूद अजहर पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ। चीन ने इस प्रस्ताव को पारित नहीं होने दिया। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की इस बात के लिए निंदा की कि वे चीन को मसूद अजहर के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए राजी नहीं कर सके। यह एक बहुत ही सामान्य और औचित्यपूर्ण आलोचना थी। परंतु भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद और अरूण जेटली ने तुरंत लगभग 70 साल पुरानी घटना की चर्चा शुरू कर दी। प्रसाद ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘‘आज चीन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं होता यदि आपके परनाना ने भारत की कीमत पर परिषद की सदस्यता चीन को ‘भेंट‘ न की होती‘‘। उन्होंने यह भी कहा कि पंडित नेहरू ने चीन को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दिलवाई। इस सिलसिले में उन्होंने शशि थरूर की पुस्तक ‘नेहरूः द इन्वेंशन ऑफ़ इंडिया‘ को उद्धत किया। यह थरूर की पुस्तक में दिए गए तर्कों का तोड़ा-मरोड़ा गया संस्करण था।

अपने राजनैतिक हितों को साधने के लिए ऐतिहासिक तथ्यों को झुठलाने और इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने में भाजपा माहिर है। उसने प्राचीन भारत के इतिहास का तोड़-मरोड़कर यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि आर्य इस देश के मूल निवासी थे। उसने मध्यकालीन इतिहास को तोड़-मरोड़कर यह साबित करने की कोशिश की कि मुस्लिम शासक मनुष्य के भेष में दानव थे। अब तो हद ही हो गई है। भाजपा अब पिछले कुछ दशकों के इतिहास को भी तोड़-मरोड़ रही है। और यह अज्ञानतावश नहीं किया जा रहा है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुआ था। इसकी सुरक्षा परिषद में दुनिया के पांच शक्तिशाली देशों – अमरीका, ब्रिटेन, सोवियत संघ, फ्रांस और चीन – को स्थायी सदस्य का दर्जा देते हुए उन्हें किसी भी प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार दिया गया था। उस समय, चीन पर च्यांग काई शेक का शासन था और वह देश रिपब्लिक ऑफ़ चाइना कहा जाता था। फिर, माओ के नेतृत्व में चीन में क्रांति हुई और च्यांग काई शेक ने भागकर ताईवान में शरण ली। वे अपने क्षेत्राधिकार की भूमि को रिपब्लिक ऑफ़ चाइना कहते रहे। इस बीच, कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन की मुख्य भूमि पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की स्थापना की, जिसमें च्यांग काई शेक के कब्जे वाले ताईवान को छोड़कर, चीन का संपूर्ण भूभाग शामिल था।

शशि थरूर ने कई ट्वीट कर सही स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि चीन में सत्ता परिवर्तन के बाद, नेहरू ने सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों से अनुरोध किया कि कम्युनिस्ट चीन को संयुक्त राष्ट्र संघ में शामिल किया जाना चाहिए और उसे ताईवान की जगह सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता दी जानी चाहिए। इस सिलसिले में यह सुझाव दिया गया कि चीन की स्थाई सदस्यता भारत को दे दी जाए। नेहरू को लगा कि यह गलत और चीन के साथ पहले ही हो रहे अन्याय के घाव पर नमक छिड़कने जैसा होगा। उन्होंने कहा कि रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की जगह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना को सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनाया जाना चाहिए और यह भी कि भारत को भविष्य में अपने दम पर सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता मिलनी चाहिए। थरूर ने यह भी लिखा कि भारत, सुरक्षा परिषद में चीन का स्थान नहीं ले सकता था क्योंकि उसके लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर को संशोधित करना पड़ता और अमरीका ऐसा नहीं होने देता।

नेहरू के सुझाव के काफी समय बाद, कम्युनिस्ट चीन को रिपब्लिक ऑफ़ चाइना की जगह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता दी गई। नेहरू चाहते थे कि कम्युनिस्ट चीन, संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य बने। वे यह जानते थे कि अमरीका और सोवियत संघ के परस्पर विरोधाभासी हित हैं। नेहरू की चीन को स्थाई सदस्यता देने में कोई भूमिका नहीं थी।

इसी तरह, मोदी अब कह रहे हैं कि भारत का विभाजन, कांग्रेस के कारण हुआ। यह आरोप पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा झूठ है। इससे न केवल यह पता चलता है कि मोदी एंड कंपनी, विभाजन संबंधी तथ्यों से कितनी अनभिज्ञ है बल्कि यह भी कि वह अपनी विश्वदृष्टि के अनुरूप, तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने में कोई गुरेज नहीं करती। भारत का विभाजन एक त्रासदी थी, जिसके पीछे थी अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति और सावरकर का द्विराष्ट्र सिद्धांत, जो कहता था कि भारत में दो राष्ट्र हैं – मुस्लिम राष्ट्र और हिन्दू राष्ट्र। सावरकर के इस सिद्धांत को मुस्लिम लीग का पूरा समर्थन मिला जो यह मानती थी कि मुसलमान, सदियों से अलग राष्ट्र रहे हैं।

नेहरू और कांग्रेस के खिलाफ यह कुत्सित प्रचार कुछ अज्ञानियों को भ्रमित कर सकता है परंतु हम सभी को ज्ञात है कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने आशातीत प्रगति की है। शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी, स्वास्थ्य, औद्योगिकरण, कृषि इत्यादि में भारत तेजी से आगे बढ़ा है। नेहरू के नेतृत्व में ही भारत की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था औद्योगिक अर्थव्यवस्था में बदली।

जवाहरलाल नेहरू, आधुनिक भारत के निर्माता थे और आईआईटी, एम्स, सीएसआईआर, भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र व सार्वजनिक क्षेत्र के दर्जनों बड़े संस्थान इसका प्रमाण हैं। नेहरू ने न केवल वैश्विक स्तर पर भारत को स्वीकार्यता और सम्मान दिलवाया वरन् उन्होंने देश को उस दीन-हीन स्थिति से उबारा जिसमें अंग्रेज उसे छोड़ गए थे। भाजपा यह अच्छी तरह से जानती है कि नेहरू ने ही आधुनिक, औद्योगिक भारत की नींव रखी थी और वह यह भी जानती है कि उसे नेहरू की निंदा करने के लिए झूठ का सहारा लेना ही पड़ेगा। और यही वह कर रही है।

 

 (अंग्रेजी से हिन्दी रूपांतरण अमरीश हरदेनिया)

 

Balacot
BJP
BJP's election manifesto
India's first Prime Minister Jawaharlal Nehru
Jaish-e-Mohammad
Lok Sabha Elections 2019
General elections2019

Related Stories

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल


बाकी खबरें

  • J&K
    अनीस ज़रगर
    परिसीमन आयोग के जम्मू क्षेत्र पर ताजा मसौदे पर बढ़ता विवाद
    11 Feb 2022
    जम्मू के सुचेतगढ़ और आरएस पुरा इलाकों में पहले ही विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जा चुके हैं, जहाँ दो विधानसभा क्षेत्रों का विलय प्रस्तावित किया गया है।
  • hijab vivad
    भाषा
    हिजाब विवाद: कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के ख़िलाफ़ शीर्ष अदालत में याचिका दायर
    11 Feb 2022
    एक छात्र द्वारा दायर याचिका में हिजाब मामले की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के निर्देश के साथ ही तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष चल रही कार्यवाही पर भी रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। अपील में दावा…
  • गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब
    मोहम्मद ताहिर
    गोवा ग्राउंड रिपोर्ट: कोरोना लॉकडाउन से संकट में आए टैक्सी चालकों का मुद्दा चुनाव से ग़ायब
    11 Feb 2022
    "सरकार से कुछ सब्सिडी की मांग की थी। सरकार की तरफ से पांच हज़ार रूपये देने का वादा भी किया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला।"
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 58,077 नए मामले, 657 मरीज़ों की मौत
    11 Feb 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1.64 फ़ीसदी यानी 6 लाख 97 हज़ार 802 हो गयी है।
  • MNREGA
    दित्सा भट्टाचार्य
    विशेषज्ञों के हिसाब से मनरेगा के लिए बजट का आवंटन पर्याप्त नहीं
    11 Feb 2022
    पीपल्स एक्शन फ़ॉर एम्प्लॉयमेंट गारंटी (PAEG) के मुताबिक़ वित्तीय साल 2022-23 के बजट में नरेगा के लिए जो राशि आवंटित की गयी है, उससे प्रति परिवार महज़ 21 श्रमदिवस का काम ही सृजित किया जा सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License