NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
निजीकरण के ख़िलाफ़ विरोधः भूखे रह कर 'रक्षा कर्मचारियों' ने की ड्यूटी
रक्षा कर्मचारी यूनियनों के तीन प्रमुख महासंघों का कहना है कि रक्षा उत्पादन को आउटसोर्स करने का सरकार का फ़ैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Jan 2018
AIDF

रक्षा संस्थानों के चार लाख असैन्य कर्मचारियों ने भूखे रहते हुए अपनी ड्यूटी की। यहाँ तक कि इस दौरान उन्होंने चाय भी नहीं लिया। इन कर्मचारियों ने निजीकरण और रक्षा प्रतिष्ठानों को बंद करने के रोकने की माँग को लेकर सरकार का ध्यान अपनी तरफ़ आकर्षित करने के लिए गुरुवार 11 जनवरी को विरोध प्रदर्शन किया।

बता दें कि पूरे भारत में क़रीब 430 से अधिक रक्षा इकाइयाँ हैं जहाँ असैनिक कर्मचारी काम करते हैं। सरकार द्वारा बार-बार उनके विरोध पत्र पर विचार करने से इन्कार करने पर कर्मचारियों ने इस रास्ते को अपनाया।

रक्षा कर्मचारियों के तीन मान्यता प्राप्त संघों द्वारा संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। ये संघ अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (एआईडीईएफ), भारतीय राष्ट्रीय रक्षा श्रमिक संघ (आईएनडीडब्ल्यूएफ) और भारतीय प्रतिरक्षा मज़दूर संघ (बीपीएमएस) थे।


नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा हाल में लिए गए रक्षा संबंधी नीतियों के फ़ैसले ने राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ नौकरियों की चिंताओं को बढ़ाया है और इसी को लेकर रक्षा कर्मचारियों के यूनियन इन फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे हैं।

इन फ़ैसलों में रक्षा उत्पादन के निजीकरण करने की प्रतिक्रियाएँ शामिल हैं। साथ ही 41 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री द्वारा निर्मित 250 से अधिक वस्तुओं को "नॉन-कोर" के रूप में घोषित कर निजी क्षेत्र से आउटसोर्स करना इसमें शामिल हैं।

यूनियनों ने इस बात को उठाया कि पहले जब सेना ने "निम्न प्रौद्योगिकी" के नाम पर बाहर से ऐसी वस्तुओं की आपूर्ति की थी तब इसके परिणाम स्वरूप अपर्याप्त आपूर्ति और ख़राब गुणवत्ता वाली वस्तुओं की आपूर्ति की गई।

सरकार ने सैनिकों को सिलाई वाली यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की व्यवस्था को समाप्त करने का भी फैसला किया है साथ ही इसके लिए सैनिकों को 10,000 रूपए प्रति सैनिक भत्ता के रूप में देने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से यूनिफॉर्म की गुणवत्ता पर असर पडे़गा और 5 ऑर्डिनेंस कारखानों में रक्षा संबंधी यूनिफॉर्म तैयार करने में शामिल क़रीब12,000 से अधिक कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।

ये संघ स्टेशन वर्कशॉप को बंद करने, प्राइवेट ठेकेदारों को आर्मी बेस वर्कशॉप सौंपने, डिपो और 39 सैन्य फार्मों को बंद करने, और मिलिट्री इंजीनियर सर्विस (एमईएस) में मानव शक्ति को कम करने के फैसले का भी विरोध कर रहे हैं।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और डायरेक्टर जनरल क्वालिटी अश्योरेंस (डीजीक्यूए) की भूमिका को कमज़ोर करने को लेकर भी संघों द्वारा विरोध किया जा रहा है।

इन संघों ने 31,000 कर्मचारियों को "ज़रूरत से ज्यादा" बताने और नेवी द्वारा किए जा रहे कार्यों के निजीकरण के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है।

एआईडीईएफ, आईएनडब्ल्यूएफ और बीपीएमएस ने अब तक रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को चार संयुक्त विरोध पत्र सौंपा है। सीतारमण से इस नीतिगत निर्णयों पर पुनर्विचार करने और रक्षा तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बातचीत करने का अनुरोध किया है।

सरकार द्वारा इन विरोध पत्रों पर विचार करने या मान्यता प्राप्त महासंघों को बातचीत से समझौते के लिए आमंत्रित करने से इनकार करने के बाद तीन महासंघों द्वारा संयुक्त रूप से विरोध करने का निर्णय लिया गया।

गुरुवार को हुए विरोध प्रदर्शन के बाद एक संयुक्त ज्ञापन 12 जनवरी को संघों के प्रमुख के माध्यम से रक्षा मंत्री को सौंपना तय किया गया ।

इन संघों ने 15 फरवरी को संसद के पास दिल्ली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और 15 मार्च को ध्यानाकर्षण हड़ताल करने का सरकार को सूचना दिया है।

एआईडीईएफ के महासचिव सी श्रीकुमार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि "संघ और रक्षा असैन्य कर्मचारियों का दृढ़ विश्वास है कि सरकार का नीतिगत निर्णय रक्षा उत्पाद को व्यापार के रूप में देखना है और इस आधार पर रक्षा उद्योग के राष्ट्रीय संपत्ति को बर्बाद करना जिसके तैयार होने में आज़ादी के बाद 6 दशक से भी ज्यादा समय लगे, उचित निर्णय नहीं है।

एआईडीईएफ ने कहा कि "चूंकि राज्य स्वामित्व वाली रक्षा उद्योग हमारे देश के रक्षा की चौथी शक्ति है, इन संघों ने माँग की है कि इन उद्योगों को सशस्त्र बलों के समकक्ष 'वार रिज़र्व'के रूप में मानकर उन्हें अनुरक्षित और मज़बूत किया जाना चाहिए।"

All India defense employees federation
defense employees
defense privatization
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • अब्दुल रहमान
    यूक्रेन में विपक्षी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध और 'एकीकृत सूचना नीति' लागू की गई
    22 Mar 2022
    ज़ेलेंस्की ने देश भर में ज़्यादातर वामपंथी और नाटो विरोधी पार्टियों पर प्रतिबंध लगा दिया है और अपने कदम को उचित ठहराते हुआ कहा कि रूस के साथ इन पार्टियों के कथित तौर पर गहरे संबंध हैं, इस तथ्य के…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    ठाकरे का ऐलान, ओवैसी भाजपा की B TEAM! बंद करो सियासी खेल!
    21 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में आज अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख Uddhav Thackeray की जिन्होंने ये एलान किया है कि वह असादुद्दीन ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन…
  • अजय कुमार
    कश्मीरी माहौल की वे प्रवृत्तियां जिनकी वजह से साल 1990 में कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ
    21 Mar 2022
    राजनीतिक किरदारों के अलावा साल 1990 से पहले के समाज की हवाओं का रुख कैसा था? कश्मीरी समाज की दशा और दिशा कैसी बन रही थी?
  • विजय विनीत
    मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान
    21 Mar 2022
    संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर लामबंद किसानों ने तपती दुपरिया में केंद्र सरकार को अल्टीमेटम देते हुए दोबारा लंबी लड़ाई की मुहिम शुरू कर दी। वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, बलिया, मऊ, देवरिया,…
  • भाषा
    असम विधानसभा में विधायकों की खरीद-फरोख्त के मुद्दे पर हंगामा
    21 Mar 2022
    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और सत्तारूढ़ भाजपा असम की दोनों राज्यसभा सीटें जीतने के लिए कथित तौर पर विधायकों को ‘खरीदने’ की कोशिश करके ‘…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License