NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
घटना-दुर्घटना
समाज
भारत
निफ़्ट हैदराबाद : यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली 56 महिला कर्मचारियों को निकाला
निफ़्ट हैदराबाद के प्रोफ़ेसर डी श्रीनिवास रेड्डी को यौन उत्पीड़न के मामले में क्लीन चिट दे दी गई है और शिकायत करने वाली हाउसकीपिंग स्टाफ़ की 56 महिलाओं को काम से निकाल दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Jun 2019
Nift
फोटो साभार: The News Minute

दुनिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, ‘एडवांस्ड’ हो रही है, उसी के साथ-साथ एक समाज के तौर पर हम कई क़दम पीछे की ओर भी ले रहे हैं। हमारे समाज में जगह-जगह हर तरह के मंच पर महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा नई नहीं है; लेकिन पिछले कुछ सालों को देखा जाए तो इस मसले पर एक सकारात्मक चीज़ देखने को मिलती है, वह यह कि पिछले कुछ सालों में यौन उत्पीड़न के विरोध में महिलाएं खुलकर सामने आई हैं। 

लेकिन इस सकारात्मक क़दम के बा-वजूद हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न करने वाले कई आरोपियों को कोई सज़ा नहीं मिली है, और वे अब भी अपने पद पर आराम से काम कर रहे हैं और न जाने और ऐसी कितनी महिलाएँ उसकी प्रताड़ना को लगातार झेल रही हैं। 

कई ऐसे मामले हैं जहाँ प्रशासन की तरफ़ से आरोपी के खिलाफ कोई क़दम तो नहीं ही उठाए गए, बल्कि उल्टा गाज गिरी उन महिलाओं पर जिन्होंने शिकायतें की हैं। इसी कड़ी में एक और मामला सामने आया है, और वो है नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नोलॉजी (निफ़्ट) के हैदराबाद कैम्पस से। 
 
18 जून को निफ़्ट हैदराबाद के प्रशासन ने 56 महिला हाउसकीपिंग कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, और उनकी जगह पर एजेंसी से नए कर्मचारियों को भेजने को कहा है। ये सब तब हुआ जब निफ़्ट के एक प्रोफ़ेसर डी श्रीनिवास रेड्डी के ख़िलाफ़ 8महीने पहले लगे यौन उत्पीड़न के केस को इंस्टीट्यूट ने बंद कर दिया, और कहा कि उनके द्वारा कोई उत्पीड़न नहीं किया गया था। इसके बाद हाउसकीपिंग स्टाफ़ की महिला कर्मचारियों ने रेड्डी को बर्खास्त करने की मांग को को लेकर विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। 

बता दें कि एक तरफ़ शिकायत करने वाली महिलाओं को नौकरी से निकाल दिया है, वहीं दूसरी तरफ़ आरोपी प्रोफ़ेसर डी श्रीनिवास रेड्डी लगातार इंस्टीट्यूट में बने हुए है। 
ये सब अक्टूबर 2018 से शुरू हुआ था जब हाउसकीपिंग स्टाफ़ की सुपरवाइज़र ने निफ़्ट में स्टेनोग्राफ़र डी श्रीनिवास रेड्डी पर कर्मचारियों पर यौन उत्पीड़न करने का इल्ज़ाम लगाते हुए मुक़दमा दर्ज किया था।

The NEWS Minute में छपी एक ख़बर के अनुसार सुपरवाइज़र रत्ना कुमारी ने कहा, “श्रीनिवास अपने कैबिन में आने वाली कर्मचारियों पर यौन उत्पीड़न करता था। वो उनको कूल्हों से पकड़ लेता था, बग़ैर इजाज़त उनकी तस्वीरें खींचता था और उनसे उसके साथ सोने के लिए कहता था।" वो आगे कहती हैं, “वो ये हरकतें खुले तौर पर करने लगा था, वो अक्सर मेरे पास आता और उसके कैबिन में युवा और सुंदर महिलाओं को भेजने के लिए कहता। जब मैंने उसे बताया कि कोई भी महिला उसके साथ काम नहीं करना चाहती है, तो एक दिन उसने मुझसे कहा की मेरी फ़िगर अच्छी है, और मुझसे उसके साथ सोने के लिए कहा।"

स्टाफ़ के मुताबिक़ श्रीनिवास महिलाओं को लैंगिक गालियाँ देता था और ये कहते हुए कि उसकी पत्नी घर पे नहीं है, उन्हें अपने घर बुलाता था। 

रत्ना कुमारी ने The NEWS Minute को बताया है कि श्रीनिवास के इस यौन उत्पीड़न की वजह एक साल में 2-3 महिला कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी थी। आख़िरकार जब उसके ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का मुक़दमा कर दिया तो वो हाउसकीपिंग स्टाफ़ के कॉन्ट्रेक्टर को शिकायत वापस लेने के लिए धमकियाँ देने लगा। 

बता दें कि निफ़्ट के ये हाउसकीपिंग स्टाफ़ के कर्मचारी एक एजेंसी के द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। निफ़्ट हैदराबाद में ये कर्मचारी एक एजेंसी मुरली मैनपावर एजेंसी के द्वारा भेजे जाते हैं। इस एजेंसी के मालिक मुरली ने बताया है कि सात महीने पहले श्रीनिवास ने उन्हें फ़ोन कर के कहा था कि सुपरवाइज़र रत्ना कुमारी को काम से निकाल दिया जाए। 
मुरली ने बताया, “जब मुझे श्रीनिवास का फ़ोन आया, उसके अगले दिन मैं कैम्पस गया और कर्मचारियों से इस बारे में बात की। कर्मचारियों ने बताया कि श्रीनिवास ने उन पर यौन उत्पीड़न किया है। मैंने कुमारी को दूसरी नौकरी देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने कहा कि वो नौकरी नहीं छोड़ेंगी क्योंकि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया है।" 

The NEWS Minute में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ महिलाओं ने इस मामले पर पहले कैम्पस के अंदर के प्रशासन से शिकायत की। जब उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करने का फ़ैसला लिया। अधिकारियों से कोई मदद लिए बिना महिलाओं ने माधापुर पुलिस स्टेशन में अक्टूबर 2018 में एफ़आईआर दर्ज कारवाई थी। जब केस दर्ज कर दिया, उसके बाद निफ़्ट की इंटरनल कम्प्लेंट्स कमेटी(आईसीसी) ने महिलाओं से संपर्क किया। 

रत्ना कुमारी ने कहा है, “दिल्ली से एक टीम इस मामले की जांच करने आई थी। उन्होंने पूरे स्टाफ़ से बात की और अंत में हमसे बात की। एक अधिकारी ने मुझसे अकेले में कहा कि वो समझती हैं कि ये यौन उत्पीड़न का मामला है। उन्होंने बताया कि हैदराबाद कैम्पस के अधिकारियों के पास इस मामले की रिपोर्ट भेज दी गई है। लेकिन आज सात महीने बाद हैदराबाद के अधिकारी कह रहे हैं, कोई उत्पीड़न हुआ ही नहीं है, और श्रीनिवास आज भी कैम्पस में आज़ाद घूम रहा है।" 

वहीं, हैदराबाद के अधिकारियों का कहना है कि ये मामला दिल्ली के अधिकारियों ने देखा था और उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। 

सात महीने बाद श्रीनिवास के ख़िलाफ़ लगा मुक़दमा ही बंद नहीं किया गया है, बल्कि 56 महिला कर्मचारियों को भी काम से निकाल दिया है। श्रीनिवास आज भी कैम्पस में आज़ाद घूम रहा है। जब इस केस को बंद किया गया तो महिलाओं ने इसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए श्रीनिवास को कैम्पस से हटाने की मांग की, जिसके अगले ही दिन उन्हें नए नियमों का हवाला देते हुए का से निकाल दिया गया।

मुरली ने बताया कि 9 जून को हाउसकीपिंग स्टाफ़ को एक नोटिस भेजा गया था जिसमें एक नया नियम शामिल था जिसमें लिखा था, “एजेंसी हालिया कर्मचारियों को काम से निकाल दे, नए कर्मचारियों को नियुक्त करे।" 

बता दें कि कई महिला कर्मचारी यहाँ एक दशक से ज़्यादा समय से काम कर रही थीं। 

मुरली ने कहा, “मुझे तो वो मानना पड़ेगा जो प्रशासन कहेगा। अब मुझे सभी कर्मचारियों को काम से निकालना पड़ेगा और नए कर्मचारियों को रखना पड़ेगा।" 
इस पूरे मामले पर केस बंद करने के बाद पुलिस का कहना है, “ये सच है कि अक्टूबर में एक मुक़दमा दायर किया गया था, लेकिन वो बे-बुनियाद था और अब वो केस बंद हो चुका है।" 

निफ़्ट हैदराबाद का ये मामला एक और उदाहरण है कि कैसे इस पुरुषवादी समाज में ताक़त और ओहदे का इस्तेमाल कर के,महिलाओं पर लगातार अत्याचार किए जा रहे हैं, और कई आरोपी इससे बच कर भी निकलने में कामयाब हो रहे हैं। 

रत्ना कुमारी का कहना है कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है लेकिन वो तब तक प्रदर्शन करती रहेंगी जब तक श्रीनिवास को कैम्पस से निकाला नहीं जाता है। 
कुमारी ने कहा, “जिसने हमारा उत्पीड़न किया वो आज़ाद घूम रहा है और अधिकारी उसे बचा रहे हैं, और हमें वो (डायरेक्टर और फ़ैकल्टी) लगातार धमकियाँ देते रहते हैं। वो कहते हैं कि अगर हम समझौता कर लेंगे तो हमें अपनी नौकरियाँ वापस मिल जाएंगी,लेकिन हमें समझौता नहीं करना है। निफ़्ट की डायरेक्टर एक महिला हैं, क्या वो भी हमें इंसाफ़ नहीं दिलवाएंगी?”

nift
Hyderabad
Women
exploitation of women
fired from job
job threats
jobloss

Related Stories

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!

गुजरात : महिला स्वास्थ्यकर्मियों के यौन शोषण का आरोप कार्यस्थल पर महिलाओं की स्थिति दर्शाता है!

महाराष्ट्र: जलगांव के हॉस्टल में लड़कियों से अभद्रता हमारे सिस्टम पर कई सवाल खड़े करती है!

मध्यप्रदेश: महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध का लगातार बढ़ता ग्राफ़, बीस दिन में बलात्कार की पांच घटनाएं!

मध्यप्रदेश: आश्रम में महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की आशंका, जांच में जुटा पुलिस-प्रशासन

मध्यप्रदेश: महिलाओं के ख़िलाफ़ नहीं थम रहे अपराध, विकलांग पीड़िता दोबारा हुई दुष्कर्म की शिकार

हाथरस, कठुआ, खैरलांजी, कुनन पोशपोरा और...

हाथरस बनाम बलरामपुर, यूपी बनाम राजस्थान की बहस कौन खड़ी कर रहा है!

बिहार: महिला पुलिसकर्मी ने लगाया उत्पीड़न का आरोप, महिला आयोग ने एसएसपी से तलब की रिपोर्ट


बाकी खबरें

  • Nisha Yadav
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    चंदौली: निशा यादव हत्या मामले में सड़क पर उतरे किसान-मज़दूर, आरोपियों की गिरफ़्तारी की माँग उठी
    14 May 2022
    प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा- निशा यादव का कत्ल करने के आरोपियों के खिलाफ दफ़ा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
  • Delimitation
    रश्मि सहगल
    कैसे जम्मू-कश्मीर का परिसीमन जम्मू क्षेत्र के लिए फ़ायदे का सौदा है
    14 May 2022
    दोबारा तैयार किये गये राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्रों ने विवाद के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि विधानसभा चुनाव इस पूर्ववर्ती राज्य में अपेक्षित समय से देर में हो सकते हैं।
  • mnrega workers
    सरोजिनी बिष्ट
    मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?
    14 May 2022
    "किसी मज़दूर ने 40 दिन, तो किसी ने 35, तो किसी ने 45 दिन काम किया। इसमें से बस सब के खाते में 6 दिन का पैसा आया और बाकी भुगतान का फ़र्ज़ीवाड़ा कर दिया गया। स्थानीय प्रशासन द्वारा जो सूची उन्हें दी गई है…
  • 5 वर्ष से कम उम्र के एनीमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, 67 फीसदी बच्चे प्रभावित: एनएफएचएस-5
    एम.ओबैद
    5 वर्ष से कम उम्र के एनीमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, 67 फीसदी बच्चे प्रभावित: एनएफएचएस-5
    14 May 2022
    सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में किए गए सर्वेक्षण में 5 वर्ष से कम उम्र (6-59 महीने) के 58.6 प्रतिशत बच्चे इससे ग्रसित थे जबकि एनएफएचएस-5 के 2019-21 के सर्वे में इस बीमारी से ग्रसित बच्चों की…
  • masjid
    विजय विनीत
    ज्ञानवापी मस्जिद: कड़ी सुरक्षा के बीच चार तहखानों की वीडियोग्राफी, 50 फीसदी सर्वे पूरा
    14 May 2022
    शनिवार को सर्वे का काम दोपहर 12 बजे तक चला। इस दौरान ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के करीब आधे हिस्से का सर्वे हुआ। सबसे पहले उन तहखानों की वीडियोग्राफी कराई गई, जहां हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License