NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
निश्चित अवधि के रोज़गार के खिलाफ केरल में श्रमिकों की हड़ताल
सोलह ट्रेड यूनियनों ने मोदी सरकार के उन नए नियमों के खिलाफ आम हड़ताल का आह्वान किया, जिससे सभी क्षेत्रों में निश्चित अवधि के लिए ठेके पर श्रमिकों को रखने और बिना नोटिस हटाने की इजाज़त दे दी गयी है |
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Apr 2018
Workers Strike

केरल के श्रमिकों ने 2 अप्रैल को सभी औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों को रोक दिया। भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार द्वारा शुरू की गई "निश्चित अवधि के रोजगार" नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं | सभी व्यवसायों में कर्मचारियों को "रखने और हटाने" की पूरी तरह से छूट दे दी है |

16 मार्च को जारी किए गए मोदी सरकार के आदेश से औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) केंद्रीय नियम, 1946 में हुए संशोधन के खिलाफ़ केरल में सोलह ट्रेड यूनियनों - दोनों राज्य और केंद्रीय स्तर - ने संयुक्त रूप से 24 घंटे राज्यव्यापी आम हड़ताल के लिए आह्वान किया था |

केंद्र सरकार ने सभी औद्योगिक क्षेत्रों को एक निश्चित अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर श्रमिकों को रखने की अनुमति दी है - जो कुछ हफ्तों से महीनों तक हो सकता है - और बिना नोटिस या छंटनी के भुगतान के बिना ही उन्हें जब चाहें तब उन्हें हटा सकते हैं।

हड़ताल के समर्थन में भारतीय केन्द्रीय ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू) ने 2 अप्रैल को राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों के लिए आह्वान किया था।

केरल में, निजी और साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र, असंगठित श्रमिकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठान श्रमिकों और यहाँ तक ​​कि टेक्नोक्रेट(technocrats) के औद्योगिक श्रमिकों ने भी हड़ताल में भाग लिया |

राज्य में कारखानों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानें बंद रहे, जबकि राज्य परिवहन बसों और अधिकांश अन्य वाहन भी सड़क से गायब रहें |  सभी जिलों में प्रदर्शनकारियों के प्रदर्शन और रैलियों को श्रमिकों द्वारा आयोजित किया गया।

त्रिवेन्द्रम में, जुलूस के बाद, एक विरोध बैठक हुई थी, जिसमे लगभग 15,000 श्रमिकों ने राज्यपाल के निवास पर इस विरोध रैली में भाग लिया।

सीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष अनतालवतट्टम आनंद ने बैठक का उद्घाटन किया। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (आईएनटीयूसी) के राज्य अध्यक्ष आर चंद्रशेखर ने विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता की, जबकि ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) के केपी राजेंद्रन, यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) के नेता शिबू बेबी जॉन, और कई अन्य ट्रेड यूनियन नेताओं ने श्रमिकों को संबोधित किया।

भले ही आरएसएस-संबद्धित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) नेतृत्व हड़ताल से दूर रहा, परन्तु इनके यूनियन से जुड़े श्रमिक भी आम हड़ताल में भाग गए।

केरल के सीआईटीयू के महासचिव और पूर्व मंत्री एलामाराम करीम ने न्यूज़क्लिक से कहा।  "हड़ताल को अप्रत्याशित सफलता मिला, क्योंकि लोगों ने बहुत अधिक अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की हैं। श्रमिकों की पूरी तरह से  भागीदारी थी, क्योंकि कोई भी इस हड़ताल का विरोध नहीं कर रहा था" |

 उन्होंने कहा कि, "केरल के मुख्य औद्योगिक क्षेत्र में, एर्नाकुलम, कोचीन शिपयार्ड वल्लरपदाम कंटेनर ट्रांज़िशन टर्मिनल सहित सभी उद्योग, एक अन्य प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में,पलक्कड़ में कांजीकोड, दो बहुराष्ट्रीय कंपनी इकाइयों में श्रमिक, पेप्सी कोला और सेंट गोबेन में पूरी तरह से हड़ताल था। इसी तरह, त्रिशूर में, अपोलो टायर्स की एक अन्य औद्योगिक इकाई में सत प्रतिशत भागीदारी थी। "

वास्तव में, आईटी क्षेत्र के कर्मचारियों ने भी आम हड़ताल का समर्थन किया।

करीम ने कहा ,"केरल के दो प्रमुख आईटी केन्द्रों - इन्फोपार्क और टेक्नो पार्क - भी हड़ताल से बुरी तरह प्रभावित हुए | आम तौर पर, सामान्य हड़ताल का आईटी क्षेत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन इस बार ज्यादातर टेक्नोक्रेट्स ने हड़ताल में हिस्सा लिया क्योंकि वे निश्चित अवधि के रोजगार के खिलाफ हैं। "

उन्होंने कहा,सभी राज्य और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम भी बंद रहे ।

इस बीच, सीआईटीयू द्वारा किये गये आह्वान पर, देश के अन्य भागों में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

असम में, जोरहट, डिब्रूगढ़ और राज्य की राजधानी गुवाहाटी सहित कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए।  
राजस्थान की राजधानी जयपुर में, एक विरोध में एक रैली निकाली गईं ।

पश्चिम बंगाल में, सभी ट्रेड यूनियनों ने सभी जिलों में आयोजित विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया। राज्य की राजधानी कलकत्ता में, विरोध प्रदर्शनकारियों ने भी श्रम आयुक्त से मुलाकात की तेलंगाना और तमिलनाडु में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गयें |

देश भर में, सीआईटीयू के बैनर तले श्रमिकों ने 2 अप्रैल को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में संशोधन के खिलाफ 'भारत बंद' विरोध का समर्थन किया, दलितों और आदिवासियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कानून को गंभीर रूप से कमज़ोर कर दिया हैं ।

Kerala
Workers' Strike
Narendra modi
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश के 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में फैला ओमिक्रॉन, कुल मामले बढ़कर 653 हुए
    28 Dec 2021
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 6,358 नए मामले दर्ज किये गए है, वही ओमीक्रॉन देश के 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश में फैल चुका है और कुल मामले बढ़कर 653 हो गए हैं।
  • Putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पुतिन ने दिए यूक्रेन में सैन्य विकल्पों पर संकेत
    28 Dec 2021
    रूस की अधिकतम मांगें और उसका न्यूनतावादी रुख एक ही है। जो बाइडेन जैसे राजनेता के लिए कोई रास्ता भी नहीं छोड़ती हैं। 
  • women farmers
    ईशिता मुखोपाध्याय
    ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल
    28 Dec 2021
    देश की हजारों हजार महिला किसान उत्तरी राज्यों की सीमाओं पर इक्कट्ठी हुईं और हर दिन उनकी संख्या में वृद्धि होती गई। किसान आंदोलन में उनकी भागीदारी के निहितार्थ को इसके सभी आयामों में पहचानने की…
  • SUPREME COURT
    इंदिरा जयसिंह
    2021 में सुप्रीम कोर्ट का मिला-जुला रिकॉर्ड इसकी बहुसंख्यकवादी भूमिका को जांच के दायरे में ले आता है!
    28 Dec 2021
    इंदिरा जयसिंह लिखती हैं कि सीजेआई एन.वी. रमना का अब तक का कार्यकाल भरोसा जगाने वाला रहा है, लेकिन राजनीति और सिविल सोसाइटी में बहुसंख्यकवाद की चुनौतियों का सामना करने के लिहाज़ से सुप्रीम कोर्ट की…
  • Omicron
    प्रबीर पुरकायस्थ
    कोविड-19: ओमिक्रॉन की तेज़ लहर ने डेल्टा को पीछे छोड़ा
    28 Dec 2021
    इस नयी लहर की चपेट में आए ज़्यादातर देशों में ओमिक्रॉन न सिर्फ़ प्रधान वेरिएंट बन गया है बल्कि इसके संक्रमितों के आंकड़े पहले ही, पिछली लहरों की अधिकतम संख्या को पीछे छोड़ चुके हैं और इन संख्याओं के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License