NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नोएडा : जनता के विरोध के कारण सेक्टर 123 में नहीं बनेगा डंपिंग ग्राउंड !
नोएडा में कूड़े की समस्या को लेकर लंबा आन्दोलन चला जिसमें कई लोग घायल भी हुए| जिसके बाद सरकार ने फैसला किया है कि सेक्टर 123 में बनने वाला अपशिष्ट ऊर्जा (डब्ल्यूटीई) संयंत्र अब यहहाँ नहीं बनेगा। इसे यहाँ से हटा दिया जाएगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Jun 2018
लैंडफिल साईट
Image Courtesy: Haryana - Punjab Kesari

नोएड सेक्टर 123 में बनने वाले अपशिष्ट ऊर्जा (डब्ल्यूटीई))संयंत्र को लेकर काफी समय से जनता का विरोध प्रदर्शन जारी था जो अब खत्म होता दिख रहा हैI अंततः आंदोलन करने वालों की  जीत हुई और प्रशासन को उनके सामने झुकना पड़ा.I

शुक्रवार को सरकार ने यह फैसला लिया  कि सेक्टर 123 में बनने वाला अपशिष्ट ऊर्जा (डब्ल्यूटीई))संयंत्र अब यहाँ से हटाकर  कहीं और ले जाया  जाएगा। हालांकि अभी तक नयी जगह के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।

हालांकि, यहाँ की कूड़े की समस्या  जस की तस बनी हुई हैI मुख्यमंत्री योगी एक जनसभा के दौरान लोगों को खुश करने के लिए बोल तो दिया और अधिकारियों को आदेश दिया कि रिहाशी इलाकों में इस तरह कूड़े के डंपिंग ग्राउंड  नहीं बनाये जाए | परन्तु उन्होंने इसका कोई भी  विकल्प नहीं दिया है| नगरपालिकाके अनुसार  नोएडा के इन क्षेत्रों में लगभग 650 टन कूड़ा रोजना उत्पन्न होता है। लेकिन अब तक संबंधित विभाग इस महत्वपूर्ण समस्या का हल ढूंढने असफल रहा है। 

नोएडा में  कूड़े की समस्या को लेकर लंबा आन्दोलन चला है इसमें कई लोग घायल भी हुए थे| इस आन्दोलन ने सरकार का ध्यानाकर्षण के लिए अलगअलग तरीको से विरोध प्रदर्शन किये| वहाँ के स्थानीय युवाओं ने अर्ध नग्न होकर प्रदर्शन किया | इसके बाद वहाँ महापंचायत  बुलाई गयी, जिसमें आगे की रणनीति बनाने पर चर्चा हुई और फिर एक डंपिंग ग्राउंड संघर्ष समिति बनायी गयी|

अर्धनग्न प्रदर्शन

 इन नये तरीको में से सबसे चौकने वाले कदमों में एक था 21 जून को जब  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर  नोएडा सेक्टर 121-122 निवासियों ने सेक्टर 123 के पास बन रही लैंडफिल साईट के विरोध में अनोखा योग प्रदर्शन किया । योगा दिवस सभी निवासी मुँह  पर मास्क लगा कर बैठेI  एक छोटी बच्ची ने तो ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ भी अपना विरोध जताया।

योग के जरिए विरोध

योग दिवस में जहाँ पूरे विश्व में बड़े–बड़े लोग अपने  योग के वीडियो सोशल मीडिया पर डाल रहे थे वहीं नोएडा  सेक्टर 123 में आंदोलन कर रहे लोगों ने सुबह 6 बजे योग शुरू किया| लैंडफिल साईट विरोधी नारेबाज़ी के बीच लोगों ने कचरा योग, कचरा आसन, बदबू आसन, सड़न आसन के अलावा रोगी आसन कर विरोध जताया|  यही नहीं इसकी एक वीडियो बनाकर पीएमओ व प्रशासन को भेजी गयी| ताकि जन प्रतिनिधियों को यह मालूम हो सके कि यहाँ भविष्य में हाल क्या होगा! गौरतलब है कि इस आन्दोलन में  सामाजिक समरसता का एक अलग तरीके से चित्रण हुआI जहाँ समाज में आमतौर पर  किन्नरों के प्रति गलत धारणा और रवैया देखने को मिलता है, उन पर फब्तियाँ कसी जाती हैंI  वहीं इस आन्दोलन में  उन्हें साथ  लेकर  इसे और तेज़  किया गया| यहाँ पर महिलाओं ने किन्नरों के साथ मिलकर आंदोलन किया| इसके बाद और भी   तादाद में प्रदर्शनकारियों की भीड़ डंपिंग ग्राउंड की सर्विस रोड की तरफ उमड़ी| यहाँ पर योग दिवस पर  योग करके प्रधानमंत्री मोदी को एक अलग तरह  का फिटनेस चैलेंज भी दिया|

सरकारों को यह समझना होगा कि इस तरह के प्रस्तावों को निरस्त कर वो कुछ समय के लिए   जनता का दिल तो जीत सकते है परन्तु इससे किसी भी समस्या का  पूर्णकालिक समाधान नहीं निकलता|

 हमें  कूड़ा प्रबन्धन के अन्य उपायों की ओर जाना होगा नहीं तो स्थिति और भी भयावह हो जाएगी, क्योंकि एनसीआर क्षेत्र में कूड़े का ढेर बढ़ता ही जा रहा है | कई पर्यावरणविदों का कहना है कि दिल्ली एनसीआर कूड़े के ज्वालामुखी पर बैठे हैं और ये कभी भी फट सकता है|

सरकार भी यह मानती है और इसीलिए उसने स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) में प्रमुख रूप दिशानिर्देश दिये हैं कि कूड़े के निपटारेके लिए लैंडफिल साइट्स और अपशिष्ट उपचार संयंत्र से बचना चाहिए | परन्तु उन्हें  इस पर अम्ल भी करना पड़ेगा,  वरना  स्थिति और भी गंभीर होगी I

 

लैंडफिल
Swachchh Bharat Abhiyan
नोएडा
कूड़ा

Related Stories

संकट: गंगा का पानी न पीने लायक़ बचा न नहाने लायक़!

खोरी पुनर्वास संकट: कोर्ट ने कहा एक सप्ताह में निगम खोरीवासियों को अस्थायी रूप से घर आवंटित करे

सेप्टिक टैंक-सीवर में मौतें जारी : ये दुर्घटनाएं नहीं हत्याएं हैं!

स्वच्छ होता भारत बनाम मैला ढोता भारत

क्या हो पायेगा मैला प्रथा का खात्मा ?

ट्रैकर बैंड और CAA-NRC : दलितों को गुलाम बनाए रखने की नई साज़िशें

कौन हैं स्वच्छ भारत के सच्चे नायक ?

स्वच्छता अभियान: प्रधानमंत्री की घोषणा और भारत की हक़ीक़त

तिरछी नज़र : ऐसे भोले भाले हैं हमारे मोदी जी...

मप्र के भावखेड़ी गई सीपीआई की जांच टीम की रिपोर्ट : शौचालय ; एक हत्यारी कथा !


बाकी खबरें

  • अनिल अंशुमन
    झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!
    29 Mar 2022
    जगह-जगह हड़ताल के समर्थन में प्रतिवाद सभाएं कर आम जनता से हड़ताल के मुद्दों के पक्ष में खड़े होने की अपील की गयी। हर दिन हो रही मूल्यवृद्धि, बेलगाम महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ भी काफी आक्रोश प्रदर्शित…
  • मुकुंद झा
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने इस दो दिवसीय हड़ताल को सफल बताया है। आज हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और रेहड़ी-…
  • इंदिरा जयसिंह
    मैरिटल रेप को आपराधिक बनाना : एक अपवाद कब अपवाद नहीं रह जाता?
    29 Mar 2022
    न्यायिक राज-काज के एक अधिनियम में, कर्नाटक उच्च न्यायालय की व्याख्या है कि सेक्स में क्रूरता की स्थिति में छूट नहीं लागू होती है।
  • समीना खान
    सवाल: आख़िर लड़कियां ख़ुद को क्यों मानती हैं कमतर
    29 Mar 2022
    शोध पत्रिका 'साइंस एडवांस' के नवीनतम अंक में फ्रांसीसी विशेषज्ञों ने 72 देशों में औसतन 15 वर्ष की 500,000 से ज़्यादा लड़कियों के विस्तृत सर्वे के बाद ये नतीजे निकाले हैं। इस अध्ययन में पाया गया है कि…
  • प्रभात पटनायक
    पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में फिर होती बढ़ोतरी से परेशान मेहनतकश वर्ग
    29 Mar 2022
    नवंबर से स्थिर रहे पेट्रोल-डीज़ल के दाम महज़ 5 दिनों में 4 बार बढ़ाये जा चुके हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License